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        <title></title>
        <description></description>
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        <lastBuildDate>April 23, 2026, 7:31 am</lastBuildDate>
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            <title>rajasthan Inkhabar</title>
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                    <title><![CDATA[Dancers: कुभलगढ़ के नृतकों ने पर्यटकों को किया आर्कषित, कई मशहूर गानों पर किया डांस]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/dancers-the-dancers-of-kumbhalgarh-attracted-tourists-danced-on-many-famous-songs/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। संगीत कला के प्रेमियों के लिए प्रसिद्ध महाराणा कुंभा का कुंभलगढ़। इस बार 18वें कुंभलगढ़ महोत्सव में सांस्कृतिक विविधता को भी शामिल किया जाएगा। महोत्सव के दूसरे दिन जोधपुर से आए जीवननाथ और लंगा पार्टी ने राजस्थानी लोकगीतों ने पर्यटकों को काफी आर्कषित किया है। गैर नृत्य प्रस्तुति खास रही वहीं बाड़मेर के पारसमल [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> संगीत कला के प्रेमियों के लिए प्रसिद्ध महाराणा कुंभा का कुंभलगढ़। इस बार 18वें कुंभलगढ़ महोत्सव में सांस्कृतिक विविधता को भी शामिल किया जाएगा। महोत्सव के दूसरे दिन जोधपुर से आए जीवननाथ और लंगा पार्टी ने राजस्थानी लोकगीतों ने पर्यटकों को काफी आर्कषित किया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गैर नृत्य प्रस्तुति खास रही</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं बाड़मेर के पारसमल एंड पार्टी की लाल आंगी गैर नृत्य प्रस्तुति ने कार्यक्रम को बेहद खास बना दिया है। जीवननाथ एंड लंगा पार्टी ने “छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिलाके,” “निंबुडानिंबुडा निंबुडा,” और “केसरिया बालम आवोनी पधारो म्हारे देश” जैसे लोकप्रिय राजस्थानी लोकगीतों के साथ कार्यक्रम में चार चांद लगाए। इसके अतिरिक्त बाड़मेर से आई लाल आंगी गैर के देसी ढ़ोल की थाप पर हुए नृतकी गैर नृत्य ने दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं गैर नृत्य कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बना रहा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बहरूपियों के कपड़ों ने ध्यान खींचा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>चित्तौड़ से आए दुर्गाशंकर एंड पार्टी के बहरूपियों ने अपनी अलग तरह की वेशभूषाओं से दर्शकों का खूब ध्यान खींचा है। कुंभलगढ़ दुर्ग परिसर में आने वाले कलाकारों ने राजस्थान के विभिन्न प्रांतों की संस्कृति और कला की छटा बिखेरी है। इस दौरान उदयपुर पर्यटन निगम अधिकारी शिखा सक्सेना, हेरीटेज सोसाइटी के सचिव कुबेर सिंह सोलंकी, होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष भारतपाल सिंह शेखावत समेत कई अतिथि मौजूद रहे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कला के विविध रूप प्रदर्शित</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सक्सेना ने बताया कि यह महोत्सव तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें राजस्थान की संस्कृति और कला के विविध रूप प्रदर्शित होंगे। यहां देश-विदेश से पर्यटक आते हैं, जो इस महोत्सव का हिस्सा बनते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[बच्चों के सामने भूल कर भी न करें ये गलतियां, वरना पड़ेगा बुरा असर]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/do-not-make-these-mistakes-in-front-of-children-otherwise-it-will-have-a-bad-effect/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर : हर माता-पिता का यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को अच्छी परवरिश दें, लेकिन उन्हें अच्छी परवरिश देने के साथ-साथ उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। अक्सर माता-पिता कई गलतियां कर देते हैं, जिसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है। जब बच्चा बड़ा हो जाए तो माता-पिता को उसके सामने भूलकर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर </strong>: हर माता-पिता का यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को अच्छी परवरिश दें, लेकिन उन्हें अच्छी परवरिश देने के साथ-साथ उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। अक्सर माता-पिता कई गलतियां कर देते हैं, जिसका सीधा असर बच्चों पर पड़ता है। जब बच्चा बड़ा हो जाए तो माता-पिता को उसके सामने भूलकर भी कई ऐसी चीजें है, जिसे नहीं करनी चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>माता-पिता अक्सर करते ये गलती</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर वे ऐसा करते हैं तो बच्चे मानसिक रूप से परेशान होने लगते हैं। आइए जानते हैं वो कौन सी गलतियां हैं जो माता-पिता को अपने बच्चों के सामने नहीं करनी चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अपने बच्चे की तुलना करना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सबसे पहले तो अगर आपका बच्चा कोई काम नहीं कर पाता है या वह कोई काम ठीक से नहीं कर पाता है तो अपने बच्चे की तुलना किसी दूसरे बच्चे से न करें और न ही उसे ये कहें कि वह बेकार है। इससे बच्चा आगे बढ़ने का कोई प्रयास भी नहीं करता। इसलिए अपने बच्चों की तुलना भूल से भी किसी दूसरे बच्चे से नहीं करनी चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पति-पत्नी के बीच झगड़े</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्यादातर पति-पत्नी के बीच झगड़े होते रहते हैं, लेकिन कई बार झगड़े इतने बढ़ जाते हैं कि पति अपनी पत्नी पर हाथ उठा देता है और उसे पीटने लगता है लेकिन आपको बच्चों के सामने भूलकर भी नहीं लड़ना चाहिए। इससे वे ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाते और उनका मानसिक स्वास्थ्य खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बच्चों पर दबाव न डालें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हर माता-पिता को अपने बच्चों पर कुछ भी नहीं थोपना चाहिए। अगर आपका बच्चा कोई काम नहीं करना चाहता है, तो उसे उस काम को करने के लिए मजबूर न करें। इससे बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से अस्वस्थ रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>घर पर ऑफिस का तनाव</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कई पति-पत्नी ऐसे होते हैं जो जॉब करते हैं। ऐसे में वे ऑफिस का तनाव एक-दूसरे पर निकालते हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोग तो अपने बच्चों पर गुस्सा भी करने लगते हैं। इसका बच्चे पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए कोशिश करें कि अपने तनाव को खुद पर हावी न होने दें। आपको अपने बच्चों के सामने ये सारी गलतियां नहीं करनी चाहिए, इससे उन पर बुरा असर पड़ सकता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/do-not-make-these-mistakes-in-front-of-children-otherwise-it-will-have-a-bad-effect/</guid>
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                    <language>hi</language>
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                    <title><![CDATA[Cultural News : राजस्थान के ये है प्रमुख मेले, जानें सबसे प्राचीन मेला कौन?]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/cultural-news-these-are-the-major-fairs-of-rajasthan-know-which-is-the-oldest-fair/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर : राजस्थान में अक्सर कोई न कोई मेले का आयोजन होते ही रहता है। ऐसे में मरुस्थल की धारा पर एक से बढ़ कर एक मेले और त्योहार का आयोजन होता है। देश के किसी भी सरकारी एग्जाम में इससे संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं। तो चलिए जानते है इस खबर के माध्यम [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर </strong>: राजस्थान में अक्सर कोई न कोई मेले का आयोजन होते ही रहता है। ऐसे में मरुस्थल की धारा पर एक से बढ़ कर एक मेले और त्योहार का आयोजन होता है। देश के किसी भी सरकारी एग्जाम में इससे संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं। तो चलिए जानते है इस खबर के माध्यम से प्रदेश में कहा और कब कौन सी मेले का आयोजन होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>देखें मेले का लिस्ट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>बाड़मेर का मेला</strong> - यहां (1) कजली मेला – गोपीनाथ गढ़ (बाड़मेर) में लगता हैं। यह मेला अश्विन माह के सर्द नवरात्र के पहले दिन से शुरू होता है। यहां लोगों की भीड़ मेला के शुरू वाले दिन से ही जुटने शुरू हो जाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>(2) मल्लीनाथ पशु मेला </strong>– तिलवाड़ा (बाड़मेर)- यह मेला चैत्र कृष्ण एकादशी से शुरू होता है। यह मेले विशेष कर पशुवों के लिए आयोजन होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>(3) सुईया मेला</strong> – चौहटन ( बाड़मेर )</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह मेला पौष अमावस्या को लगता है। इस मेले का आयोजन चार साल में एक बार होता है। जिस वजह से इसे अर्द्धकुंभ भी कहा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>(4) बसंत मेला </strong>– सीणधारी ( बाड़मेर )</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह मेला मार्गशीर्ष कृष्ण तृतीय को लगता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>(5) कनाणा मेला – कनाणा (बाड़मेर )</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह मेला हर वर्ष शीतलाष्टमी के दिन लगता है।<br>इस मेले में गैर नृत्य का आयोजन किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>(6) नाकोड़ा मेला –</strong> नाकोड़ा (बाड़मेर)</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह मेला पौष कृष्ण दशमी को लगता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अजमेर का मेला</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>(1) पुष्कर का मेला – पुष्कर ( अजमेर )</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह मेला कार्तिक शुक्ल एकादशी से लगता है, जो पूर्णिमा तक चलता है। इस मेले को राजस्थान का सबसे बड़ा और सर्वाधिक विदेशी पर्यटकों का आगमन वाला मेला बताया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>(2 ) बादशाह मेला – ब्यावर ( अजमेर )</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस मेले का आयोजन फाल्गुन माह के पूर्णिमा तिथि को लगता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जयपुर के मेले –</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>(1) बाणगंगा का मेला – विराटनगर ( जयपुर )</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस मेले का आयोजन वैशाख पूर्णिमा को किया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>(2) शीतला माता का मेला – चाकसू ( जयपुर )</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह मेला चैत्र कृष्ण अष्टमी को लगता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>(3) संत दादू का मेला – नारायणा ( जयपुर)</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह मेला आश्विन शुक्ल नवमी को लगता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>(4) तीज का मेला – जयपुर</strong></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह मेला श्रावण शुक्ल तृतीय को लगता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Khatu Shyam: खाटू श्याम पहुंचने वाले भक्तों के लिए Good News, अब मिलेगी इस परेशानी से छुटकारा]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/khatu-shyam-good-news-for-the-devotees-who-reach-khatu-shyam-now-they-will-get-relief-from-this-problem/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर : राजस्थान के सीकर जिले में स्थित बाबा श्याम के मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों के लिए गुड न्यूज़ आई है। भक्तों की परेशानी को देखते हुए परिवहन विभाग की रींगस से खाटू और रींगस से अजीतगढ़ सड़कों पर चलने वाली निजी वाहनों और टैक्सी यूनियनों की बैठक हुई। बैठक में भक्तों तथा आम [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर </strong>: राजस्थान के सीकर जिले में स्थित बाबा श्याम के मंदिर में पहुंचने वाले भक्तों के लिए गुड न्यूज़ आई है। भक्तों की परेशानी को देखते हुए परिवहन विभाग की रींगस से खाटू और रींगस से अजीतगढ़ सड़कों पर चलने वाली निजी वाहनों और टैक्सी यूनियनों की बैठक हुई। बैठक में भक्तों तथा आम यात्रियों से तय किराए से अधिक राशि वसूलने पर कड़ी कार्रवाई करने का फैसला लिया गया। बैठक में रींगस तथा खाटूश्यामजी थानाधिकारी भी उपस्थित थे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>संस्कृति को भंग करने पर एक्शन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि यहां पहुंचने वाले बाहरी भक्तों से निजी वाहनों के चालक अधिक पैसा ऐंठने का काम किया करते थे. वहीं इस मामले को लेकर यात्री लगातार शिकायत करते रहते थे। इस पर अतिरिक्त प्रादेशिक परिवहन अधिकारी सीकर डॉ वीरेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि लगातार शिकायतें मिल रही थी कि भक्तों से तय किराए से अधिक वसूला जा रहा है। इस पर विभाग 500 से ज्यादा वाहनों के चालान बनाए गए, लेकिन इसके बावजूद शिकायतें लगातार जारी रही। इस पर बैठक में बस मालिकों, टैक्सी यूनियनों तथा बस यूनियनों से बात की गई। मीटिंग में यूनियनों को बस व टैक्सी संचालन में यदि कोई बाधा आ रही है तो उसके समाधान पर भी चर्चा की गई।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>10 हजार का जुर्माना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मीटिंग के दौरान बस व टैक्सी मालिकों व यूनियनों को सख्त आदेश दी गई है कि आमलोगों तथा दर्शनार्थियों से तय किराये से अधिक पैसे नहीं लिए जाए। अगर फिर से इस मामले में गड़बड़ी मिलती है तो 10000 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। सरकार ने किराये तय कर रखा है। इसके बावजूद यूनियनें अधिक किराया वसूल रहे हैं। ऐसे में अधिक वसूल करने वाले लोग सतर्क रहें, गड़बड़ी मिलने पर सख्त कार्यवाई जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[PM Oath Ceremony: इंडिया में PM को कितनी बार लेनी पड़ती है शपथ, जानें- ओथ पर क्या कहता संविधान]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/pm-oath-ceremony-how-many-times-does-the-pm-have-to-take-oath-in-india-know-what-the-constitution-says-on-oath/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर : भारतीय जनता पार्टी (BJP ) के दिग्गज नेता और पार्टी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के संसदीय दल के नेता नरेंद्र मोदी आज यानी रविवार (नौ जून, 2024) की शाम 6:30 बजे प्रधानमंत्री पद के लिए शपथ लेंगे. बता दें कि रिकॉर्ड ओथ सेरेमनी के जरिए वह लगातार तीसरी बार बहुमत [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर : </strong>भारतीय जनता पार्टी (BJP ) के दिग्गज नेता और पार्टी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के संसदीय दल के नेता नरेंद्र मोदी आज यानी रविवार (नौ जून, 2024) की शाम 6:30 बजे प्रधानमंत्री पद के लिए शपथ लेंगे. बता दें कि रिकॉर्ड ओथ सेरेमनी के जरिए वह लगातार तीसरी बार बहुमत की सरकार वाले दूसरे प्रधानमंत्री (पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद) बन जाएंगे। आज दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पीएम पद की सपथ नरेंद्र मोदी को दिलाएंगी। तो आइए ऐसे में जानते हैं, क्या होता है शपथ के मायने और क्यों दिलाई जाती हैं सपथ। साथ ही दूसरे देशों में इसको लेकर क्या है परंपरा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तीसरी अनुसूची में शपथ को लेकर मनेशन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भारतीय संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होता है। जबकि पीएम सरकार का सर्वेसर्वा होता है। बता दें कि संविधान की तीसरी अनुसूची में लिखे ड्यूटी के जरिए प्रधानमंत्री को शपथ दिलाई जाती है. ऐसे तो इसे दिलाने का कोई खास कारण नहीं बताया गया है। लेकिन इसे एक तरह से महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताई जाती है. जानकारों के अनुसार, शपथ प्रधानमंत्री को नैतिक और कानूनी रूप से वचनबद्ध कर के रखती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

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<figure class="wp-block-image size-full"><img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/06/image.png" alt="" class="wp-image-11973" /></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पीएम को दो बार दिलाई जाती है शपथ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सबसे अहम बात है कि यह शपथ संसद के मेंबर्स, सुप्रीम कोर्ट के जजों, हाईकोर्ट के जजों और सीएजी को भी दिलाई जाती है. हालांकि, उन्हें मात्र एक बार ही सपथ लेनी होती है लेकिन प्रधानमंत्री को इस सपथ को दो बार लेना होता हैं। बता दें कि भारतीय प्रधानमंत्री को पहले पद ग्रहण करने के लिए भी शपथ लेना होता है, जो सार्वजनकि तौर पर होता है, जबकि उनकी दूसरी शपथ गोपनीयता तरीके से होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मोदी इतने अवसर पर ले चुके हैं ओथ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पहली शपथ : नरेंद्र मोदी पहली शपथ 7 अक्तूबर 2001 को गुजरात के सीएम के तौर पर लिए, वह तब 51 वर्ष के थे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दूसरीः 22 दिसंबर 2002 को. वह तब गुजरात के सीएम बने थे. वह तब 52 साल थे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>तीसरीः 25 दिसंबर 2007 को 57 वर्ष के नरेंद्र मोदी ने नतीजे के 10 दिन बाद गुजरात मुख्यमंत्री की शपथ ली थी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>चौथीः 26 दिसंबर 2012 को. वह तब 62 वर्ष के थे और गुजरात मुख्यमंत्री बने थे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पांचवींः 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी. वह तब 64 साल के थे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>छठीः 30 मई 2019 को दूसरी बार नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की सपथ ली थी. वह तब 69 वर्ष के थे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें शपथ का क्या है इतिहास</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जानकारी के लिए बता दें कि अगर आप इतिहास के पन्नों को एक बार पलटकर देखें तो शपथ का रेफरेंस आपको रामायण और महाभारत जैसे महाग्रंथों में भी मिल जाएगा, ग्रंथों में आप देख सकते हैं कि सपथ के लिए किसी आदर्श या फिर प्रकृति को साक्षी बनाया जाता था। बता दें कि 1873 में ब्रिटिश सरकार ने 'इंडियन कोर्ट एक्ट' लागू किया था, जिस एक्ट में धार्मिक किताबों पर शपथ लेने की बात लिखी थी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भारत में शपथ के उल्लंघन पर क्या होता है?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर संवैधानिक पद पर आसीन कोई व्यक्ति शपथ की गोपनीयता से जुड़ी सीमा का उल्लंघन करता है तब उसे महाभियोग का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, आमतौर पर कोई आपराधिक केस नहीं दर्ज किया जाता पर अगर गबन शामिल है तब क्रिमिनल केस हो सकता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विदेशों में शपथ को लेकर क्या हैं मान्यता</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इंडिया में पीएम पद की शपथ देश की महामहिम राष्ट्रपति दिलातें हैं। हालांकि विदेशों में पीएम पद की शपथ को लेकर अलग-अलग परंपराएं हैं। ब्रिटेन की बात करें तो यहां पीएम सबसे पहले बकिंघम पैलेस जाते हैं. वहां वो महारानी से भेंट करते है, जिसके बाद उन्हें सरकार बनाने का न्योता मिलता है. अगर बात जापान की हो तो वहां प्रधानमंत्री सम्राट के सामने पीएम औपचारिक तौर पर शपथ लेते हैं. वहां इसे धार्मिक और सांस्कृतिक रस्म के तौर पर देखा जाता है. जर्मनी में चांसलर को संसद के भीतर अध्यक्ष के सामने शपथ दिलाई जाती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/pm-oath-ceremony-how-many-times-does-the-pm-have-to-take-oath-in-india-know-what-the-constitution-says-on-oath/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ajmer News: विश्व पर्यावरण दिवस पर अजमेर में वृक्षारोपण समारोह, सर्वधर्म मैत्री संघ ने ली संरक्षण की शपथ]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/ajmer-news-tree-plantation-ceremony-in-ajmer-on-world-environment-day-sarva-dharma-maitri-sangh-took-oath-of-conservation/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर अजमेर शहर के धोलाभाटा रोड चर्च में फादर के घर के नजदीक वृक्षारोपण कार्यक्रम हुआ. इस कार्यक्रम में पर्यावरण बचाने की शपथ ली गई है। इस अवसर पर मौजूद सभी सदस्यों को गमले सहित पौधों का वितरण किया गया है। मौजूद रहें ये अतिथि आज विश्व पर्यावरण दिवस [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर अजमेर शहर के धोलाभाटा रोड चर्च में फादर के घर के नजदीक वृक्षारोपण कार्यक्रम हुआ. इस कार्यक्रम में पर्यावरण बचाने की शपथ ली गई है। इस अवसर पर मौजूद सभी सदस्यों को गमले सहित पौधों का वितरण किया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मौजूद रहें ये अतिथि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आज विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में सर्वधर्म मैत्री संघ द्वारा धोलाभाटा रोड चर्च स्थित फादर कॉस्मो के निवास के पास वृक्षारोपण किया गया और पर्यावरण को बचाने को शपथ ली गई। कार्यक्रम में बिशप ओसवल्ड और महंत श्याम सुंदर शरण देवाचार्य नरसिंह मंदिर, अजमेर मुख्य अतिथि रहे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>एक पेड़ 4 ऑक्सीजन सिलेंडर के बराबर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि मैत्री संघ के अध्यक्ष प्रकाश जैन ने पेड़ों के बचाव एवं संवर्धन की जरूरत पर बल दिया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. लाल थदानी ने इस अवसर पर कहा कि एक पेड़ 4 ऑक्सीजन सिलेंडर की पूर्ति करता है। हरी-भरी वसुंधरा से ही वनस्पति, जीव, पशु-पक्षी सुरक्षित हैं। साथ ही कार्यक्रम में पहुंचे सभी अतिथियों को पौधे समेत गमले दिए गए हैं। डॉ. राकेश कटारा मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने सभी अतिथियों को घर-घर पेड़ लगाने और पर्यावरण को बचाने की शपथ दिलाई हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/ajmer-news-tree-plantation-ceremony-in-ajmer-on-world-environment-day-sarva-dharma-maitri-sangh-took-oath-of-conservation/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Maharana Pratap Jayanti 2024: राजस्थान में महाराणा प्रताप की जयंती को लेकर धूम, सीएम समेत ये दिग्गज होंगे शामिल]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/maharana-pratap-jayanti-2024-celebration-of-maharana-prataps-birth-anniversary-in-rajasthan-these-stalwarts-including-cm-will-attend/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: आपको सुनने के आश्चर्य होगा, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती तो देशभर में 9 मई को मनाया जा चुका हैं. देशवाशियों के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी ने भी 9 मई को महाराणा प्रताप की जयंती मनाई, लेकिन अब ख़बर आई है कि महाराणा प्रताप का मेवाड़ और यहां के लोग 9 जून को [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर: </strong>आपको सुनने के आश्चर्य होगा, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती तो देशभर में 9 मई को मनाया जा चुका हैं. देशवाशियों के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी ने भी 9 मई को महाराणा प्रताप की जयंती मनाई, लेकिन अब ख़बर आई है कि महाराणा प्रताप का मेवाड़ और यहां के लोग 9 जून को उनकी जयंती बड़े ही धूमधाम के साथ मनाएंगे. इसके लिए सभी प्रकार की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>9 जून को मेवाड़ में भव्य कार्यक्रम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि 9 जून को मेवाड़ में भव्य कार्यक्रम का आयोजन होना है। इस समारोह में भाग लेने के लिए प्रदेश के मुखिया भजनलाल शर्मा और उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी उदयपुर आएंगी. इसके साथ मेवाड़ में महाराणा प्रताप की जयंती का समारोह 6 जून से ही शुरू होने जा रहा है। इस बार वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती ऐतिहासिक स्वरूप में मनाई जाएगी. वहीं इस भव्य कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी समेत देश के कई दिग्गज शामिल होंगे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>6 जून से 9 जून तक होंगे कार्यक्रम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती पर चार दिनों तक अलग-अलग समारोह होंगे. इस बार 6 जून से आयोजनों की शुरूआत हो रही है, जो 9 जून तक चलेगी. वहीं चार दिन के इस भव्य आयोजनों में पांच अलग-अलग थीम पर कार्यशालाएं भी रखी गई हैं. साथ में महाराणा प्रताप जयंती की पूर्व संध्या पर संघ के सह सरकार्यवाह और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सभा होने वाली है .</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/states/maharana-pratap-jayanti-2024-celebration-of-maharana-prataps-birth-anniversary-in-rajasthan-these-stalwarts-including-cm-will-attend/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Heatwave: भीषण गर्मी से राहत के लिए जयपुर में हुआ पर्जन्य महायग, 72 घंटे में बदलेगा मौसम!]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/heatwave-parjanya-mahayag-held-in-jaipur-for-relief-from-scorching-heat-weather-will-change-in-72-hours/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर : इन दिनों राजस्थान सहित पूरे उत्तर भारत में भीषण गर्मी और लू की स्थिति बनी हुई है। इस दौरान सूरज की तपिश अधिक बढ़ी हुई है. हर कोई इस भीषण गर्मी से परेशान है. तंदूर की तरह सूरज की रोशनी लोगों को बीमार कर रहा है, वहीं खेत- खलिहान के लिए भी भीषण [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर : </strong>इन दिनों राजस्थान सहित पूरे उत्तर भारत में भीषण गर्मी और लू की स्थिति बनी हुई है। इस दौरान सूरज की तपिश अधिक बढ़ी हुई है. हर कोई इस भीषण गर्मी से परेशान है. तंदूर की तरह सूरज की रोशनी लोगों को बीमार कर रहा है, वहीं खेत- खलिहान के लिए भी भीषण गर्मी काफी नुकसानदायक है. इस प्रचंड गर्मी से राहत पाने के लिए राजस्थान की राजधानी जयपुर में पंडितों ने पर्जन्य यज्ञ का आयोजन किया. साथ ही यज्ञ आयोजक करने वाले पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि इस यज्ञ को करने के बाद 72 घंटे में प्रदेश का मौसम बदलेगा। इस यज्ञ को करने से बारिश होती है, ऐसी धार्मिक मान्यता भी है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>11 ब्राह्मणों के साथ किया गया यज्ञ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यज्ञ को लेकर पंडित पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि स्वेज फार्म नीलकंठ महादेव पर जल चढ़ाने के साथ-साथ 11 ब्राह्मणों के साथ यज्ञ किया गया. इस दौरान सभी ब्राह्मणों ने पानी की टंकी और पानी के बर्तन में बैठकर मंत्र उच्चारण किया और आहूतियां दीं. पिछले पांच दिनों से नौतपा चल रहा है, जिसमें सूर्य देव की तापमान अपने उच्च स्तर पर पहुंच चुका हैं. इस यज्ञ को करने से भीषण गर्मी से राहत मिलेगी और बारिश होने की चांसेस बढ़ जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भगवान शिव और इंद्र देव की पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं यज्ञ आयोजक करण शर्मा ने कहा कि पर्जन्य यज्ञ में भगवान शिव और इंद्र देव की पूजा-अर्चना की गई है. इस यज्ञ का मकसद है कि लोगों को इस भीषण भरी गर्मी से राहत जल्द मिले और मौसम बदले। ताकि राजस्थान सहित पूरे देश में लोगों को राहत मिलें. फसल अच्छी खासी हो. चारों ओर ​हरियाली ही हरियाली हो. भगवान शिव सबका कल्याण करें.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पर्जन्य यज्ञ का अर्थ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पर्जन्य यज्ञ का अर्थ है भगवान इंद्र से प्रार्थना. जल के अंदर मौजूद होकर इस यज्ञ को किया जाता हैं. इस यज्ञ में सूर्य देव से प्रार्थना ​की जाती है कि वे अपनी प्रचंडता में कमी लाएं और इंद्र देव वर्षा लेकर आएं, ताकि पशु-पक्षियों, जीव-जंतुओं सभी को भीषण गर्मी से राहत मिले.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/heatwave-parjanya-mahayag-held-in-jaipur-for-relief-from-scorching-heat-weather-will-change-in-72-hours/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Miss Rajasthan 2024: मिस राजस्थान 2024 का खिताब हर्षिका बत्रा के नाम, 28 लड़कियों को हराकर पाया क्राउन]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/miss-rajasthan-2024-the-title-of-miss-rajasthan-2024-is-in-the-name-of-harshika-batra-she-got-the-crown-by-defeating-28-girls/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: मिस राजस्थान के 26वें संस्करण का ग्रैंड फिनाले का आयोजन जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में हुआ। फाइनल में अजमेर की रहने वाली हर्षिका बत्रा मिस राजस्थान बनी। बता दें कि फाइनल में 28 लड़कियों के बीच मुकाबला हुआ, जिसमें हर्षिका बत्रा ने जीत अपने नाम कर मिस राजस्थान 2024 का क्राउन पहना। साथ ही [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> मिस राजस्थान के 26वें संस्करण का ग्रैंड फिनाले का आयोजन जयपुर के बिरला ऑडिटोरियम में हुआ। फाइनल में अजमेर की रहने वाली हर्षिका बत्रा मिस राजस्थान बनी। बता दें कि फाइनल में 28 लड़कियों के बीच मुकाबला हुआ, जिसमें हर्षिका बत्रा ने जीत अपने नाम कर मिस राजस्थान 2024 का क्राउन पहना। साथ ही इस प्रतियोगिता में हर्षिका बत्रा के साथ फर्स्ट रनर अप अर्निका जैन और सेकंड रनर अप खुशी बेलावाला बनी. बता दें कि इस ब्यूटी पेजेंट में कुल 5000 लड़कियों ने नामांकन करवाया था.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन्होंने उठाया इवेंट का जिम्मा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि इस प्रतियोगिता में मिस राजस्थान के डायरेक्टर योगेश मिश्रा और निमिशा मिश्रा ने शानदार आयोजन करवाया था. वहीं मॉडल का मेकअप और मेक-ओवर दीवा और डेबोनेयर की मीनाक्षी सोलंकी ने किया और इस इवेंट में शाहरुख ने फैशन कोरियोग्राफी की. इस प्रतियोगिता को होस्ट राके शर्मा ने किया. इस इवेंट में मिस राजस्थान के विनर क्राउन के साथ-साथ सभी 28 ग्रैंड फिनाले की लड़कियों को सब टाइटल मिलें। बता दें कि मिस राजस्थान में इन लड़कियों को दो सप्ताह तक फाइनलिस्ट की ग्रूमिंग और ट्रेनिंग भी मिली थी, इस ट्रेनिंग पीरियड में इन लड़कियों को फिटनेस, स्पीच, मेकअप, हेयर स्टाइल, कैटवॉक, ड्रेसिंग सेंस, फोटोशूट की बारीकियां बताई गई थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये लोग रहे मुख्य अतिथि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हर वर्ष की तरह इस साल भी 26वें संस्करण में ग्रैंड फिनाले राउंड के लिए इवेंट में ग्रैंड ज्यूरी के तौर पर डॉक्टर अरविंद अग्रवाल, प्रियन सेन, ऐश्वर्या पट्टापटी, मुकेश मिश्रा, राज बंसल, आंचल बोहरा, मिताली कौर, भावना वैष्णव शामिल रहे. बता दें कि इस इवेंट के ग्रैंड फिनाले में मुख्य अतिथि में सीनियर कांग्रेस लीडर, सुरेश मिश्रा, राहुल भाटिया, हुकुम सिंह कुंपावत, पवन गोयल, रूवी डिजिटल से आलोक शर्मा, जे डी माहेश्वरी, डॉक्टर पूजा अग्रवाल, निर्मला सेवानी, अतुल शर्मा, सुरेंद्र कालरा, पार्क ओसियन से संदीप जैन, अंशुल जैन, वासु जैन, कीर्ति जैन समेत अन्य मौजूद रहे.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/states/miss-rajasthan-2024-the-title-of-miss-rajasthan-2024-is-in-the-name-of-harshika-batra-she-got-the-crown-by-defeating-28-girls/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Buddha Purnima : भक्तों ने पवित्र गंगा में लगाई डुबकी, जानें वजह]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/buddha-purnima-devotees-take-a-dip-in-the-holy-ganga-know-the-reason/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। देश में आज बुद्ध पूर्णिमा का पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। श्रद्धालु सवेरे से ही गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। काशी और प्रयागराज में गंगा के घाटों पर सवेरे से ही भक्तों का जमावड़ा रहा। गंगा में डुबकी लगाने का सिलसिला अभी जारी है। क्यों मनाते है बुद्द पूर्णिमा बता [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>देश में आज बुद्ध पूर्णिमा का पर्व उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। श्रद्धालु सवेरे से ही गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। काशी और प्रयागराज में गंगा के घाटों पर सवेरे से ही भक्तों का जमावड़ा रहा। गंगा में डुबकी लगाने का सिलसिला अभी जारी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्यों मनाते है बुद्द पूर्णिमा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि बौद्द सामुदाय के लोगों के लिए यह बड़ा दिन माना जाता है। बुद्द पूर्णिमा यानी वैशाखी के तौर पर मानाए जाने वाले इस दिन को गौतम बुद्द का निर्वाण दिवस के तौर पर मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान बुद्द को ज्ञान प्राप्त हुआ था। कहते है इसी दिन बुद्द का जन्म हुआ था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बुद्ध पूर्णिमा की दान-स्नान विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बुद्ध पूर्णिमा के दिन सुबह-सुबह उठकर सबसे पहले उठकर स्नान करे। जल को सिर पर लगाकर पहले प्रणाम करें। स्नान करने के बाद सुर्य को अर्घ्य दे। साफ व सफेद कपड़े पहने। फिर मंत्रों का जाप करे। मंत्र जाप के पश्चात सफेद वस्तुओं व जल का दान करें। हो सके तो इस दिन उपवास कर ले। जिसमें केवल फल व जल को ग्रहण को ग्रहण करे। आज के दिन गरीबों और जरुरतमंदों को अपने अनुसार दान करे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बुद्ध पूर्णिमा का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वैशाखी पूर्णिमा के दिन ही श्री हरि ने कच्छप का रूप लिया था। आज के ही दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था।बुद्ध पूर्णिमा(Budh purnima) के दिन बुद्धत्व की प्राप्ति हुई थी। इसके साथ निर्वाण की भी प्राप्ति हुई थी। वैशाखी पूर्णिमा के दिन अराधना एवं दान-पून्य करने से भगवान विष्णु विशेष की कृपा बनी रहती है। चंद्रमा मजबूत होता है। जीवन की सभी परेशानी दूर होती है। आज के ही दिन भगवान विष्णु के अलावा शिव जी की पूजा करने से शरीर के सभी रोगों से छुटकारा मिलता है। इसी दिन शिवालयों में भगवान शिव को जल से मग्न किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/buddha-purnima-devotees-take-a-dip-in-the-holy-ganga-know-the-reason/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[हाथ में पहनने वाले कलावे को कितने दिन में बदले? जानें क्या है इतिहास]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/how-many-days-does-it-take-to-change-the-bracelet-worn-on-your-hand-know-what-is-history/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: हिंदू धर्म में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य के दौरान कलाई पर मौली या कलावा बांधने की विधि है. माना जाता है कि कलाई पर रक्षा सूत्र पहनना वैदिक परंपरा का हिस्सा है. बता दें कि यज्ञ के दौरान इसे बांधे जाने की परंपरा है, जो वर्षों से चली आ रही है. पौराणिक [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> हिंदू धर्म में कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य के दौरान कलाई पर मौली या कलावा बांधने की विधि है. माना जाता है कि कलाई पर रक्षा सूत्र पहनना वैदिक परंपरा का हिस्सा है. बता दें कि यज्ञ के दौरान इसे बांधे जाने की परंपरा है, जो वर्षों से चली आ रही है. पौराणिक ग्रंथों में कलावा को संकल्प सूत्र के साथ रक्षा-सूत्र के रूप में बांधे जाने का उल्लेख है. पौराणिक कथा के मुताबिक, असुरों के राजा बलि की अमरता के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा था. उसी समय से रक्षाबंधन का पर्व भी शुरू हुआ।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>21 दिन में बदले कलावा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष आचार्य कलावा बांधने को लेकर बताया कि अक्सर लोग कलावा बांधने के बाद निकालना भूल जाते हैं और वो वक्त तक अपने हाथों में कलावा बांधे रह जाते है. ज्योतिष आगे बताते है कि ऐसा करने से वो कलावा हमें अपनी ऊर्जा देना बंद कर देता है. इसलिए शास्त्रों में इसे कितने दिनों तक बांधना चाहिए, इसको लेकर बताया गया है. शास्त्रों के मुताबिक हाथ में कलावा मात्र 21 दिन के लिए बांधना चाहिए, क्योंकि इतने दिन में कलावे का रंग खराब होने लगता है और कलावा कभी भी रंग खराब होने के बाद नहीं पहनना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रंग उतरे हुए कलावा पहनना अशुभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शास्त्रों में रंग उतरे हुए कलावा पहनना अशुभ बताया गया है. इसलिए इसे 21 दिन के अंदर ही उतार देना चाहिए. 21 दिनों के बाद फिर किसी अच्छे मुहूर्त में कलावा पहनना चाहिए। साथ ही ऐसा कहा जाता है कि कलावा जब भी हाथ से उतारा जाता है, तो वह आपके अंदर की नकारात्मकता को लेकर उतरता है. इसलिए हमेशा अच्छा मुहूर्त देख कर कलावा बदलते रहना चाहिए. साथ ही जिस कलावा को हाथ से उतारते है उसे किसी बहती नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/how-many-days-does-it-take-to-change-the-bracelet-worn-on-your-hand-know-what-is-history/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Mantra For Children: बच्चे को जरूर सिखाएं ये मूल मंत्र, बढ़ेगी ज्ञान-बुद्धि के साथ एकाग्रता]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/society/mantra-for-children-must-teach-these-basic-mantras-to-the-child-concentration-will-increase-along-with-knowledge-and-intelligence/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर : सनातन धर्म में जीवन जीने के लिए एक अलग रिवाज बनाया गया हुआ है, इस रिवाज के तहत कुछ नियम-कानून बनाएं गए हैं, इसका पालन महिलाएं, पुरुष के साथ-साथ बच्चे भी करते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर आप सनातन धर्म को मानते है तो आप ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, इसके [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर : </strong>सनातन धर्म में जीवन जीने के लिए एक अलग रिवाज बनाया गया हुआ है, इस रिवाज के तहत कुछ नियम-कानून बनाएं गए हैं, इसका पालन महिलाएं, पुरुष के साथ-साथ बच्चे भी करते हैं. उदाहरण के तौर पर अगर आप सनातन धर्म को मानते है तो आप ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, इसके पश्चात सूर्य देव को जल चढ़ाएं. भगवान का पूजा-पाठ करने के बाद कुछ अन्न ग्रहण करें। हालांकि बदलते समय के साथ अब लोगों के जीने का तरीका भी बदल रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>परिवार के लिए बच्चे भविष्य</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बढ़ते समय में सनातन धर्म के नियम का पालन करना अब संभव नहीं लगता है, हालांकि अभी भी कुछ लोग है जिन्हें पाता है, वे इस नियम का पालन जरूर करते हैं. बता दें कि किसी भी परिवार के लिए बच्चे भविष्य होते हैं. उनकी सही परवरिश देना बेहद ही जरूरी है. अक्सर आप कुछ पैरेंट्स से सुनते होंगे कि उनका बच्चा कुछ भी याद नहीं रख पाता है, बच्चे की स्मरण शक्ति ​कमजोर है. बच्चों में आत्मविश्वास की कमी है. उसे हमेशा भय सताता है. ऐसे में इन सभी परेशानियों को दूर करने के लिए आप अपने बच्चे को कुछ मंत्र सीखा सकते हैं, जिनका वे जाप करेंगे तो उनकी स्मरण शक्ति और एकाग्रता बढ़ेगी. तो चलिए जानते है कुछ खास मंत्रों के बारे में, जिनके जाप से बच्चों को अंदर सकारात्कम ऊर्जा आएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बच्चों के लिए 5 खास मूल मंत्र</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol><!-- wp:list-item -->
<li><strong>बजरंबली का मंत्र</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं, अनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।<br>सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं, रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।<br>मनोजवं मारुततुल्यवेगमं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।<br>वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस मंत्र का जाप करने से बच्चों के अंदर से भय दूर होगा, ज्ञान, बुद्धि और विद्या में वृद्धि होगी. इस मंत्र में बजरंगबली जी के गुणों का बखान हुआ है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":2} -->
<ol start="2"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>गायत्री मंत्र</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बच्चों को स्मरण शक्ति और एकाग्रता को बढ़ाने के लिए गायत्री मंत्र का जाप करवाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":3} -->
<ol start="3"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>धन, विद्या और विष्णु कृपा का मंत्र</strong></li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li><br>कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।<br>करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम॥</li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आप अपने बच्चों को इस मंत्र का जाप सुबह उठने के दौरान करवाएं। इस मंत्र को पढ़ने के समय अपने दोनों हाथों को सामने रखें, ताकि दोनों हथेली आपको अच्छे से दिखे. इस मंत्र में बताया गया है कि आपके हथेली में माता लक्ष्मी, देवी सरस्वती और भगवान विष्णु का वास है. प्रात: उनका दर्शन करें.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p></p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/society/mantra-for-children-must-teach-these-basic-mantras-to-the-child-concentration-will-increase-along-with-knowledge-and-intelligence/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Mangalwar ke Upay: आज मंगलवार को करें ये आसान उपाय, दूर होंगे सारे कष्ट]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/mangalwar-ke-upay-do-these-easy-remedies-today-on-tuesday-all-troubles-will-go-away/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित होता है। इस दिन भगवान श्रीराम परिवार के साथ हनुमान जी की विशेष पूजा होती है। साथ ही मंगलवार का उपवास भी रखा जाता है। ज्योतिष कुंडली में मंगल मजबूत करने के लिए मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने की सलाह देते हैं। मंगलवार के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर: </strong>मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित होता है। इस दिन भगवान श्रीराम परिवार के साथ हनुमान जी की विशेष पूजा होती है। साथ ही मंगलवार का उपवास भी रखा जाता है। ज्योतिष कुंडली में मंगल मजबूत करने के लिए मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने की सलाह देते हैं। मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने से मंगल दोष दूर होता है। धार्मिक मान्यता है कि संकट मोचन की भक्ति करने से साधक के सभी बिगड़े काम बनने लगते हैं। साथ ही भक्तों को बल की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र में मंगलवार के दिन विशेष उपाय करने का विधान है। अगर आप भी जीवन में सभी संकटों से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो मंगलवार के दिन ये आसान उपाय अवश्य करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>करें ये उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आप आर्थिक संकट से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो लगातार 7 मंगलवार को स्नान-ध्यान कर के बजरंगबली को गुलाब के फूलों की माला चढ़ाएं। साथ ही 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से आर्थिक तंगी की समस्या दूर होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आपको गुस्सा आता हैं और इस वजह से आपके बने काम बिगड़ने लगते हैं, तो मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करें। साथ ही मंगलवार का उपवास रखें। मंदिर जाकर हनुमान जी को लड्डू चढ़ाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आप हमेशा बीमार रहते हैं, तो मंगलवार के दिन हनुमान जी की प्रतिमा के सामने एक पात्र में जल रखकर हनुमान बाहुक का पाठ करें। इस उपाय को लगातार 21 दिनों तक करें। हनुमान बाहुक का पाठ करने के बाद जल ग्रहण करें। अगले दिन पुन: जल रख हनुमान बाहुक का पाठ करें। इस उपाय को करने से शारीरिक और मानसिक कष्ट दूर होते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/mangalwar-ke-upay-do-these-easy-remedies-today-on-tuesday-all-troubles-will-go-away/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Jaipur Art Fair : ‘जयपुर आर्ट फेयर’ में दिखेगी राजस्थान की संस्कृति, कल से शुरू होगा उत्सव]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/jaipur-art-fair-culture-of-rajasthan-will-be-seen-in-jaipur-art-fair-festival-will-start-from-tomorrow/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: कला, संस्कृति और रचनात्मकता का उत्सव मनाने के लिए राजस्थान में जयपुर आर्ट फेयर का आयोजन होने जा रहा है। 4 से 5 मई को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में इसकी शुरुआत होने जा रही है। इसको फिक्की लेडीज ऑर्गेनाइजेशन (फ्लो) जयपुर चैप्टर द्वारा संचालन किया जा रहा है। इस बार इस कल्चरल फेस्टिवल [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> कला, संस्कृति और रचनात्मकता का उत्सव मनाने के लिए राजस्थान में जयपुर आर्ट फेयर का आयोजन होने जा रहा है। 4 से 5 मई को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में इसकी शुरुआत होने जा रही है। इसको फिक्की लेडीज ऑर्गेनाइजेशन (फ्लो) जयपुर चैप्टर द्वारा संचालन किया जा रहा है। इस बार इस कल्चरल फेस्टिवल को ‘रंग दे जयपुर’ थीम पर आयोजित किया जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चार मई सुबह 11 बजे से शुरू</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राजस्थान की विरासत और संस्कृति की सुंदर प्रस्तुति जयपुर आर्ट फेयर में प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ-साथ इस आर्ट फेयर में प्रतिभावान कलाकार अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने पहुंचेंगे। 4 मई यानी कल शनिवार सुबह 11 बजे महाराज कुमार डॉ. लक्ष्यराज सिंह ऑफ मेवाड़ इस कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। वहीं उद्घाटन समारोह के बाद ‘प्रिजर्वेशन ऑफ हेरिटेज आर्ट एंड कल्चर इन उदयपुर’ विषय के साथ ‘द लिगेसी एंड डायनेस्टी ऑफ द ग्रेट किंग – महाराणा प्रताप’ पर एक इंटरैक्टिव टॉक भी आयोजित किया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मेन उद्देश्य आर्टीजंस को सशक्त करना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल हो रहे आर्ट फेयर को लेकर फिक्की फ्लो जयपुर की चेयरपर्सन और चीर सागर एक्सपोर्ट्स की निदेशक ने बताया कि इस साल हो रहे जयपुर आर्ट फेयर का मेन उद्देश्य आर्टीजंस को सशक्त करना है। बता दें कि इस साल जयपुर आर्ट फेयर में 88 हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम आर्टीजंस हिस्सा ले रहे हैं, इनमें करीब 15 पुरस्कार विजेता आर्टीजंस भी शामिल हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कार्यक्रम में एंट्री निशुल्क</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>फेयर के दूसरे दिन यानी 5 मई को कई टॉक शोज भी होंगे। पहला टॉक शो सुबह 11.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक चलेगा। जो ‘द पावर ऑफ आर्ट फॉर होलिस्टिक डवलपमेंट’ विषय पर आयोजित होगा। दो दिवसीय आर्ट फेयर में महिला उद्यमियों द्वारा स्कूल आर्ट इन्सटॉलेशन, लाइव वर्कशॉप्स और ऑर्गेनिक एवं आर्टिस्टिक फूड का भी शोकेस होगा। जयपुर आर्ट फेयर का समापन पुरस्कार समारोह के साथ होने वाला है। चयनित विजेता प्रतिभागियों को अवार्ड दिया जाएगा। फेयर में हिस्सा ले रहे 15 पुरस्कार विजेता आर्टीजंस को भी अवार्ड दिया जाएगा। खास बात है कि इस कार्यक्रम में 4 और 5 मई दोनों दिन सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक एंट्री निशुल्क है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/jaipur-art-fair-culture-of-rajasthan-will-be-seen-in-jaipur-art-fair-festival-will-start-from-tomorrow/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Jaisalmer Desert Festival 2024: डेजर्ट फेस्टिवल का आज अंतिम दिन, जानें आज क्या होगा खास]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/jaisalmer-desert-festival-2024-today-is-the-last-day-of-the-desert-festival-know-what-will-be-special-today/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान के जैसलमेर में पिछले दिनों से डेजर्ट फेस्टिवल का समारोह चल रहा है। यह फेस्टिवल देश-विदेश में भी प्रशिद्ध है। ऐसे में इस फेस्टिवल का आज यानी शनिवार को अंतिम दिन है। अंतरराष्ट्रीय डेजर्ट फेस्टिवल में कल शाम यानी 23 फरवरी को सजी सुरों की महफिल में लोक कलाकारों सहित देश के जाने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>राजस्थान के जैसलमेर में पिछले दिनों से डेजर्ट फेस्टिवल का समारोह चल रहा है। यह फेस्टिवल देश-विदेश में भी प्रशिद्ध है। ऐसे में इस फेस्टिवल का आज यानी शनिवार को अंतिम दिन है। अंतरराष्ट्रीय डेजर्ट फेस्टिवल में कल शाम यानी 23 फरवरी को सजी सुरों की महफिल में लोक कलाकारों सहित देश के जाने माने गायकों ने अपनी गायकी से फेस्टिवल में जान भर दी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये गायकों के सुरों पर झूमते दिखें लोग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अंतरराष्ट्रीय डेजर्ट फेस्टिवल में शुक्रवार शाम को स्टेडियम में सुरों की महफिल में पूनम सिंह ने चार चांद लगा दिए। कल यानी 23 फरवरी को इस सांस्कृतिक संध्या में गाजी खान बरना, घेवर खान, सरवर खान-जस्सी गिल, बबल राय, सरताज खान सहित कई जाने माने कलाकारों ने अपनी कला का कहर बरसाया। ऐसे में वहां मौजूद दर्शक भी देर रात तक इनके सुरों पर गाते झूमते हुए दिखें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कार्यक्रम की शुरुआत में ये हुए सम्मानित</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि जिला कलेक्टर प्रताप सिंह ने गाजी खान बरना और चंद्रप्रकाश व्यास को कार्यक्रम की शुरुआत में सम्मानित किया। प्रस्तुतियों की शुरुआत कमायचा वादक घेवर खान की ईडोनी और अन्नू की घुटना चक्री नृत्य से हुई। वहीं उदाराम ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दंगल फिल्म में गाए गीत की हुई प्रस्तुति</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस अंतरराष्ट्रीय डेजर्ट फेस्टिवल में दंगल फिल्म में गाए अपने गीत 'सेहत के लिए बापू हानिकारक' की प्रस्तुति भी हुई। वहीं पंजाबी संगीत की दुनिया के स्टार जस्सी गिल और बबल राय ने अपने गानों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। हालांकि सेलिब्रिटी नाइट का जमकर आनंद देशी-विदेशी सैलानियों ने लिया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>डेजर्ट फेस्टिवल का आज अंतिम दिन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शनिवार यानी आज डेजर्ट फेस्टिवल के अंतिम दिन सुबह 7.30 बजे खांभा फोर्ट में पीकॉक साइटिंग और लाइव इंसट्रूमेंटल म्यूजिक का आयोजन किया गया। कुलधरा में आज सुबह 10 बजे रंगोली, मांडना और वॉल पेन्टिंग का आयोजन हुआ । वहीं लाणेला के रण में 12 बजे से 4 बजे तक घुड़दौड़ होगी। दोपहर 12 बजे से खुहड़ी गांव के समीप केमल सफारी और लाइव लोक संगीत कार्यक्रम का आयोजन चल रहा है। खुहड़ी गांव के समीप केमल डांस, केमल रेस और केमल टेटू शो का आयोजन 2.30 बजे से होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज का शेष कार्यक्रम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सम के पास केमल रेस तथा आइकंस ऑफ जैसलमेर का आयोजन आज शाम 5.30 से 6.30 तक होगा, इस दौरान नन्दकिशोर शर्मा, लक्ष्मीनारायण खत्री, चतरसिंह रामगढ़ और पार्थ जगाणी को सम्मानित भी किया जाएगा। वहीं शाम को 6.30 बजे से सम के समीप लखमना ड्यून्स पर सॉन्ग्स ऑफ द सैंड के तहत तगाराम भील और विश्व प्रसिद्ध कालबेलिया कलाकार गुलाबो देवी की प्रस्तुति होने वाली है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/jaisalmer-desert-festival-2024-today-is-the-last-day-of-the-desert-festival-know-what-will-be-special-today/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Basant Panchami 2024: बसंत पंचमी कल, जानें मां सरस्वती को प्रिय हैं कौन सी वस्तुएं]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/basant-panchami-2024-basant-panchami-tomorrow-know-which-things-are-dear-to-mother-saraswati/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। भारत को त्योहार का देश बोला गया है। यहां हर दिन व्रत त्योहार मनाया जाता है। ऐसे में इस साल 14 फरवरी यानी बुधवार को बसंत पंचमी का त्योहार है। हिंदू धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान और कला की देवी माना जाता है। हर वर्ष बसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> भारत को त्योहार का देश बोला गया है। यहां हर दिन व्रत त्योहार मनाया जाता है। ऐसे में इस साल 14 फरवरी यानी बुधवार को बसंत पंचमी का त्योहार है। हिंदू धर्म में मां सरस्वती को ज्ञान और कला की देवी माना जाता है। हर वर्ष बसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। यह दिन मां सरस्वती की पूजा को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन मां सरस्वती भगवान ब्रह्मा के मुख से प्रकट हुई थीं। इसलिए बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>माघ माह की शुक्ल पंचमी 13 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 41 मिनट पर प्रारंभ होगी। यह तिथि भी 14 फरवरी को 12:09 बजे समाप्त हो रही है. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, बसंत पंचमी 14 फरवरी, बुधवार को मनाई जाएगी. इस दिन सरस्वती पूजा का शुभ समय सुबह 7:01 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जरूर अर्पित करें ये वस्तु</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पंचमी के दिन पूजा के दौरान बच्चों को मां सरस्वती को पीले फूल, केसर लॉलीपॉप, चंदन, हल्दी और अक्षत चढ़ाना चाहिए। मां सरस्वती को बुद्धि और ज्ञान की देवी माना जाता है। ऐसे में पूजा के पास पेन और फोटोकॉपियर जैसी शैक्षणिक वस्तुएं भी होनी चाहिए। इससे साधक की बुद्धि बढ़ती है और उसकी याददाश्त भी बेहतर होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मूर्ति पर पीले वस्त्र भी चढ़ाए</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बसंत पंचमी पूजा के दौरान मां सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति पर पीले वस्त्र भी चढ़ाने चाहिए। इस दिन पीले वस्त्र पहनने से भी साधक पर मां सरस्वती की कृपा बनी रहती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>लगाए बूंदी का भोग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वसंती पंचमी के दिन मां सरस्वती को बूंदी का प्रसाद चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन मां सरस्वती को बूंदी का भोग लगाने से ज्ञान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही देवी को मीठे पीले चावल और पीली मिठाई का भोग लगाया जाता है. इससे मां सरस्वती प्रसन्न होती हैं और विद्या और बुद्धि का आशीर्वाद भी देती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/basant-panchami-2024-basant-panchami-tomorrow-know-which-things-are-dear-to-mother-saraswati/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Basant Panchami 2024 : 14 फरवरी को मनाया जाएगा बसंत पंचमी, जानें विवाह से लेकर पूजन तक का शुभ मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/basant-panchami-2024-basant-panchami-will-be-celebrated-on-14-february-know-the-auspicious-time-from-marriage-to-worship/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। भारत को त्योहार का देश बोला जाता है। यहां हर दिन कोई न कोई व्रत त्योहार मनाया जाता है। ऐसे में इस बार 14 फरवरी यानी बुधवार को बसंत पंचमी का पर्व है। इस दिन मां सरस्वती की आराधना की जाती है। इस साल बसंत पंचमी का दिन काफी खास होने वाला है। हिन्दू [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> भारत को त्योहार का देश बोला जाता है। यहां हर दिन कोई न कोई व्रत त्योहार मनाया जाता है। ऐसे में इस बार 14 फरवरी यानी बुधवार को बसंत पंचमी का पर्व है। इस दिन मां सरस्वती की आराधना की जाती है। इस साल बसंत पंचमी का दिन काफी खास होने वाला है। हिन्दू धर्म के अनुसार बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती का अवतरण हुआ था। इसलिए हर वर्ष माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर देवी लक्ष्मी जी की जन्म दिन भी मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शुभ कार्यों के लिए बेहद है खास दिन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस पंचमी को बसंत पंचमी भी कहा जाता है. क्योंकि इस दिन से देश में बसंत ऋतु का आगमन होता है। ऐसे में यह दिन शुभ कार्यों के लिए बेहद ही उत्तम दिन माना जाता है, इस दिन माना जाता है कि आप बिना पंचांग देखे शादी, विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण आदि शुभ कार्य भी कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>13 -14 का दिन है शुभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिषाचार्य के मुताबिक माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 13 फरवरी की दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से होने वाली है। 14 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट तक बसंत पंचमी की तिथि रहेगी। बसंत पंचमी की पूजा इस कारण से 14 फरवरी को मनाई जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कामदेव को भी किया जाता हैै स्मरण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>देश भर में मां सरस्वती का पूजन करने की परंपरा बसंत पंचमी पर होती है। इस दिन सभी शिक्षार्थी, विद्यार्थी व शोधार्थी सुबह सवेरे ही ज्ञान व विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा आराधना करते हैं। बसंत पंचमी के दिन बता दें कि कामदेव को भी स्मरण किया जाता हैै। यह दिन शुभ कार्यों के लिए अति उत्तम माना गया है। ऐसे 14 फरवरी को पश्चिमी देशों में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/basant-panchami-2024-basant-panchami-will-be-celebrated-on-14-february-know-the-auspicious-time-from-marriage-to-worship/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Big News : मई-जून में नहीं बसंत पंचमी पर होंगी राजस्थान में हजारों शादियां, जानें शुभ मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/big-news-thousands-of-marriages-will-take-place-in-rajasthan-on-basant-panchami-not-in-may-june-know-the-auspicious-time/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। इस साल मई और जून महीने में गुरु व शुक्र तारा अस्त होने के कारण विवाह नहीं होंगे। ऐसे में बसंत पंचमी (14 फरवरी) के शुभ अवसर पर बुधवार को विशेष योग-संयोगों में 30 फीसदी अधिक शादियां होने जा रही है। ऐसे में शादी को लेकर राजधानी जयपुर के 75 प्रतिशत गार्डन, सामुदायिक केंद्र [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>इस साल मई और जून महीने में गुरु व शुक्र तारा अस्त होने के कारण विवाह नहीं होंगे। ऐसे में बसंत पंचमी (14 फरवरी) के शुभ अवसर पर बुधवार को विशेष योग-संयोगों में 30 फीसदी अधिक शादियां होने जा रही है। ऐसे में शादी को लेकर राजधानी जयपुर के 75 प्रतिशत गार्डन, सामुदायिक केंद्र और रिसोर्ट को पहले ही बुक कर लिया गया है। साथ ही इस अवसर पर 500 से अधिक डेस्टिनेशन वेडिंग होगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>35 प्रतिशत से अधिक व्यापार बढ़ने का चांस</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऑल इंडिया टेंट डेकोरेटर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि जिंदल ने बताया कि 14 फरवरी को जयपुर में करीब पांच हजार से अधिक शादी होगी। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर प्रदेश भर में 30 हजार से अधिक शादी होंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस साल 35 प्रतिशत से अधिक व्यापार बढ़ने का चांस हैं। फ्लॉवर व रेड थीम के साथ रजवाड़ा थीम पर भी शादियों में सजावट की जाएगी। पंजाबी सिंगर्स कई होटल्स और रिसोर्ट में परफॉर्म भी करेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रजवाड़ा थीम पर होंगी शादियां</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऑल वेडिंग फेडरेशन के राजस्थान अध्यक्ष मोहनलाल अग्रवाल ने बताया कि बसंत पंचमी यानी 14 फरवरी को करीब 15 फीसदी शादियां रजवाड़ा थीम पर होने जा रही है। कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई और सूरत समेत अन्य शहरों के लोगों ने भी यहां के होटल और रिसोर्ट को बुक किए है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>14 फरवरी को बसंत पंचमी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>उदिया तिथि के कारण इस साल वसंत पंचमी 14 फरवरी को मनाई जाएगी। लगभग 75 साल बाद पंचमी तिथि और बुधवार के दिन रेवती नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इस दिन शुक्ल, अमृत सिद्धि, शुभ, रवि व शिववास समेत कई अन्य योग भी बन रहे है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/big-news-thousands-of-marriages-will-take-place-in-rajasthan-on-basant-panchami-not-in-may-june-know-the-auspicious-time/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Jaipur Literature Festival: खेल मंत्री राठौड़ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में बोले महिला खिलाड़ियों…]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/jaipur-literature-festival-sports-minister-rathore-said-in-jaipur-literature-festival-that-women-players/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। रविवार को राजधानी जयपुर में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन हुआ था। ऐसे में खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने खेल विशेषज्ञों से ओलंपिक पदक विजेता और भारत में खेलों के भविष्य पर अहम चर्चा की। 2036 में भारत में ओलंपिक गेम्स जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन होटल क्लार्क्स आमेर में हुआ, जिसमें मुख्य [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> रविवार को राजधानी जयपुर में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन हुआ था। ऐसे में खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने खेल विशेषज्ञों से ओलंपिक पदक विजेता और भारत में खेलों के भविष्य पर अहम चर्चा की।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>2036 में भारत में ओलंपिक गेम्स</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आयोजन होटल क्लार्क्स आमेर में हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में कर्नल राठौड़ आमंत्रित थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि हम सब भारत में 2036 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व और अथत प्रयासों से ओलंपिक गेम्स आयोजित करने वाले हैं। यह 140 करोड़ देशवाशियों का सदियों पुराना सपना है, जो निश्चित तौर पर साकार होगा। इस दौरान उन्होंने कहा कि खेलों से इच्छाशक्ति अधिक मजबूत होती है, एकाग्रता भी बढ़ती है और फोकस क्लियर रहता है। इस कड़ी में उन्होंने कहा कि खेल व्यक्तित्व के विकास और राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। एथलीट शब्द का जिक्र करते हुए कहा कि आज सैकड़ों की संख्या में एथलीट टॉप स्कीम के तहत देश-विदेश में ट्रेनिंग भी ले रहे हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महिला खिलाड़ियों की भागीदारी ओलंपिक खेलों में अधिक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया के जरिए मोदी सरकार देश की युवा प्रतिभाओं को खेलों की तरफ अधिक प्रेरित कर रही है। इसके साथ ही उन्हें शीर्ष स्तर का बुनियादी ढांचा और उच्चतम स्तर का प्रशिक्षण भी प्रदान कर रही है। इतना ही नहीं मोदी सरकार नारी शक्ति को खेलों के प्रति प्रोत्साहित कर रही है, जिससे महिला खिलाड़ियों की भागीदारी ओलंपिक खेलों में अधिक बढ़ रही है। इसके साथ-साथ उनके बेहतर परिणाम भी सामने दिख रहे हैं। खेल जगत में भारतीय महिलाएं भारत का परचम सबसे आगे लहरा रही हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राजस्थान के गुलाबी शहर यानी जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2024 का 17वां संस्करण आयोजित किया गया है. यह फेस्टिवल पूरी तरह से संस्कृति, पुरानी यादों और पुरानी कलाओं से सुसज्जित है. दुनिया के सामने छोटे व्यवसायी अपने क्षेत्रों के शिल्प-हस्त कलाओं और उनसे जुड़ी कहानियों को प्रदर्शित करने इस फेस्टिवल में आते हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/jaipur-literature-festival-sports-minister-rathore-said-in-jaipur-literature-festival-that-women-players/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan News: जोधपुर में 4 फरवरी से मारवाड़ हॉर्स शो, विश्व बाजार में जबरदस्त मांग]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/rajasthan-news-marwar-horse-show-in-jodhpur-from-4th-february-huge-demand-in-world-market/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान के जोधपुर में 9वां दो दिवसीय मारवाड़ हॉर्स शो 4 फरवरी से होने जा रहा है. दो दिवसीय हॉर्स शो की तैयारी पूरी हो गई है. ऐसे में इस शो का आयोजन मारवाड़ नस्ल के उन्नयन और संरक्षण के लिए किया गया है. यह हॉर्स शो ऑल इंडिया मारवाड़ हॉर्स सोसाइटी जोधपुर और [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान के जोधपुर में 9वां दो दिवसीय मारवाड़ हॉर्स शो 4 फरवरी से होने जा रहा है. दो दिवसीय हॉर्स शो की तैयारी पूरी हो गई है. ऐसे में इस शो का आयोजन मारवाड़ नस्ल के उन्नयन और संरक्षण के लिए किया गया है. यह हॉर्स शो ऑल इंडिया मारवाड़ हॉर्स सोसाइटी जोधपुर और मारवाड़ी हॉर्स बुक स्टड रजिस्ट्रेशन सोसायटी ऑफ इंडिया के संयुक्त निरीक्षण में आयोजित किया जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हॉर्स शो में भाग लेंगे रजिस्टर्ड घोड़े</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गुरुवार यानी 1 फरवरी को ऑल इंडिया मारवाड़ हॉर्स सोसायटी और मारवाड़ हॉर्स स्टड बुक रजिस्ट्रेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया जोधपुर के सचिव इंद्रजीत सिंह नाथावत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि देश के अलग-अलग प्रदेशों के स्टड बुक की तरफ से इस हॉर्स शो में रजिस्टर्ड घोड़े भाग लेंगे. हॉर्स शो और अलग-अलग प्रतियोगिता इस दो दिन के आयोजन के दौरान आयोजित की जाएगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विश्व बाजार में मारवाड़</strong> <strong>घोड़ों की जबरदस्त मांग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इंद्रजीत सिंह नाथावत ने बताया कि मारवाड़ नस्ल के घोड़े की पहचान और गुणवत्ता को बनाए रखने का प्रयास इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मारवाड़ नस्ल की पहचान को बनाए रखने के लिए निरंतर महाराजा गजसिंह के तरफ से प्रयास किया जा रहा है. यह आयोजन उनके संरक्षण में हो रहा है. उन्होंने बताया कि अपनी सुंदरता, चंचलता, स्वामीभक्ति के कारण मारवाड़ घोड़े विश्व में प्रसिद्ध है. विश्व के बाजार में मारवाड़ी घोडों की जबरदस्त मांग है. उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया मारवाड़ अश्व समिति जोधपुर फॉर्म का गठन वर्ष 1998 में किया गया था. इसका कार्यालय उम्मेद भवन पैलेस में स्थापित हुआ था. मारवाड़ हॉर्स स्टड बुक रजिस्ट्रेशन सोसायटी आफ इंडिया का गठन वर्ष 2013 में किया गया था. मारवाड़ की हॉर्स स्टड बुक रजिस्ट्रेशन सोसायटी ऑफ इंडिया के तत्वाधान में अब तक 3210 मारवाड़ी अश्वो का रजिस्ट्रेशन हो चुका है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कब होगी प्रतियोगिता?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यह प्रतियोगिता 4 फरवरी से शुरु है। प्रथम प्रतियोगिता 10:30 बजे से दोपहर 1:00 तक जजिंग रिंग-अंदत बछेरी, अंदत बछेरी दो दांत बछेरी जजिंग रिंग होगी. इस प्रतियोगिता में दोपहर 2:00 से 4:00 तक कोल्ड मिल्क टीथ कोल्ड मिल्क टीथ फस ठंड टू टीथ जजिंग रिंग होगी. दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक प्रदर्शनी और प्रतियोगिता मारवाड़ अश्व की प्रदर्शन होगी और शाम 5:00 बजे से 5:30 तक टेंट पेंगिंग प्रतियोगिता प्रथम राउंड का आयोजन होगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पुरस्कार वितरण समारोह होगा आयोजन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रविवार 4 फरवरी को प्रातः 9:30 बजे से 11:00 तक प्रजनन घोड़ियों की जजिंग रिंग 11:00 से 12:30 तक शो जंजिग मारवाड़ अश्वो की ड्रेसाज प्रस्तुति, दोपहर एक 1:30 बजे से 3:30 तक नर घोड़े जजिंग रिंग उसके बाद बेस्ट अश्व प्रतियोगिता, हेक्स लेडीज हेक्स ओपन प्रतियोगिता 3:30 से 4:00 तक टेंट पैगिंग पुरस्कार वितरण समारोह आयोजन होगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/states/rajasthan-news-marwar-horse-show-in-jodhpur-from-4th-february-huge-demand-in-world-market/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan News: स्कूल शिक्षा परिवार के वार्षिक कार्यक्रम में डॉ किरोड़ी मीणा का भ्रष्टाचारियों पर तंज, बोले…]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/rajasthan-news-in-the-annual-program-of-school-education-family-dr-kirori-meena-took-a-jibe-at-the-corrupt-said/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान के दौसा जिले के महुआ में स्कूल शिक्षा परिवार के वार्षिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जहां मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को निमंत्रण किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने महुआ के पूर्व विधायक का नाम लिए बगैर कहा कि क्षेत्र में पिछले [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>राजस्थान के दौसा जिले के महुआ में स्कूल शिक्षा परिवार के वार्षिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जहां मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को निमंत्रण किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने महुआ के पूर्व विधायक का नाम लिए बगैर कहा कि क्षेत्र में पिछले 10 सालों से भ्रष्टाचार कर रहे लोगों की चोटी पकड़ी जाएगी, वे बचने वाले नहीं हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>डबल इंजन की सरकार बनाई है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>स्कूल शिक्षा परिवार के वार्षिक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप शिरकत करते हुए कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि आप सब लोगों ने प्रदेश में डबल इंजन की सरकार बनाई है। 13 जिलों में ERCP देकर सरकार ने अपना काम कर दिया है। इस कड़ी में उन्होंने कहा कि इस योजना के आने से राज्य की 40 प्रतिशत आबादी को पानी पीने के लिए मिलेगा। उन्होंने महुआ के पूर्व विधायक ओमप्रकाश हुडला पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछले 10 सालों से जो लूट मची है, जिसने भ्रष्टाचार किया है, अब उन भ्रष्टाचारियों की चोटी पकड़नी पड़ेगी। चाहे कोई कितना ही बड़ा व्यक्ति हो उसे हम नहीं छोड़ेंगे। आगे उन्होंने कहा कि भजन सरकार जीरो टॉलरेंस पर काम कर रही है। भ्रष्टाचारियों को जेल की सलाखों में भेजने का काम हम करेंगे और प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ERCP क्या है ?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) को एक महत्वाकांक्षी पेयजल और सिंचाई जल परियोजना के नाम से जानते है. बीजेपी सरकार ने राज्य के 2017-18 बजट में इसकी घोषणा की थी. पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में पीने और सिंचाई के पानी की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए इसकी घोषणा की गई थी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कौन हैं किरोड़ी लाल मीणा ?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>किरोड़ी लाल मीणा भारत के एक राजनेता एवं पेशे से चिकित्सक हैं। पूर्वी राजस्थान का दमदार नेता उन्हें माना जाता हैं। उनकी छवि एक किसान नेता की है। किरोड़ी लाल को सब "बाबा" के नाम से भी जानते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/states/rajasthan-news-in-the-annual-program-of-school-education-family-dr-kirori-meena-took-a-jibe-at-the-corrupt-said/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Railway Gift : खाटूश्याम मेले के लिए रेलवे का बड़ा ऐलान, चलेंगी दो स्पेशल ट्रेन]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/railway-gift-railways-big-announcement-for-khatushyam-fair-two-special-trains-will-run/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। खाटूश्यामजी लक्खी मेला का शुरुआत जल्द ही होने जा रहा है। बता दें कि बाबा खाटू श्याम के मेले की तारीख पास आते ही भक्तों की संख्या अधिक बढ़ने लगी है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने बड़ा ऐलान किया है। खाटूश्याम मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर से [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> खाटूश्यामजी लक्खी मेला का शुरुआत जल्द ही होने जा रहा है। बता दें कि बाबा खाटू श्याम के मेले की तारीख पास आते ही भक्तों की संख्या अधिक बढ़ने लगी है। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने बड़ा ऐलान किया है। खाटूश्याम मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के मद्देनजर से रेलवे ने जयपुर-नारनौल व रेवाड़ी-रींगस के बीच स्पेशल ट्रेन का संचालन करने का फैसला किया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ऐसे होगा संचालन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जयपुर-नारनौल-जयपुर स्पेशल ट्रेन 3,6,10,14,17,20 व 24 फरवरी को जयपुर से सुबह 10.40 बजे रवाना होकर दोपहर 02.05 बजे नारनौल पहुंचेगी, इसकी जानकारी रेलवे विभाग ने खुद दी है। नारनौल से दोपहर 2.30 बजे रवाना होकर शाम 6.30 बजे वापसी में यह ट्रेन जयपुर पहुंचेगी। इसके अलावा रेवाड़ी-रींगस-रेवाड़ी स्पेशल ट्रेन 3, 4,6,10,11,14, 17, 18, 20, 24 व 25 फरवरी को सुबह 11.40 बजे रेवाड़ी से रवाना होकर रींगस पहुंचेगी। दोपहर 3 बजे रींगस से रवाना होकर शाम 6.20 बजे रेवाड़ी पहुंचेगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>लक्खी मेला चलता है 10 दिन तक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हर साल लक्खी मेला बाबा खाटूश्याम की नगरी में लगता है। इस साल 12 मार्च से मेले का शुभारंभ होगा और 21 मार्च को मेले का समापन होगा। इस मेले में देश- विदेश से बाबा के दर्शन करने लोग पहुंचते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बाबा श्याम का मनाया जाता है जन्मदिन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हर साल फाल्गुन मास की एकादशी तिथि को बाबा श्याम का जन्मदिन मनाया जाता है. हर वर्ष खाटू श्याम जी में बाबा श्याम के जन्मोत्सव को बड़े ही धूमधाम से मेले के रुप में मनाया जाता है. खाटू श्याम जी का लक्खी मेला 10 दिनों तक चलेगा. मंदिर कमेटी और प्रशासन भक्तों की सहूलियत और श्याम के सुगम दर्शनों को लेकर लगातार व्यवस्थाएं कर रहे हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/railway-gift-railways-big-announcement-for-khatushyam-fair-two-special-trains-will-run/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Republic Day 2024: कर्तव्य पथ पर दिखी राजस्थान की संस्कृति, जानें क्या रहा खास ?]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/republic-day-2024-rajasthans-culture-seen-on-the-path-of-duty-know-what-was-special/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। आज पूरे देश भर में गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. इस साल अपना 76 वां गणतंत्र दिवस देश मना रहा है. मुख्य अतिथि के तौर पर इस बार के गणतंत्र दिवस के समारोह में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों मौजूद रहे. राष्ट्रपति भवन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झंडारोहण किया. वहीं परेड के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> आज पूरे देश भर में गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. इस साल अपना 76 वां गणतंत्र दिवस देश मना रहा है. मुख्य अतिथि के तौर पर इस बार के गणतंत्र दिवस के समारोह में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों मौजूद रहे. राष्ट्रपति भवन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झंडारोहण किया. वहीं परेड के बाद कर्तव्यपथ पर देश के सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली झांकियां निकली. बता दें कि ये झांकियां देश की विविधता, सांस्कृतिक पहचान और विरासत की किस्सा बंया कर रही थी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सबका मन मोहा राजस्थान की झांकी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>देश के अन्य अन्य राज्यों के झांकियों के बीच राजस्थान की झांकी ने सबका मन मोह लिया. राज्य की भक्ति, शक्ति और संस्कृति के रंगों को बेहद शानदार ढंग से राजस्थान की झांकी दिखा रही थी. साथ ही राज्य के महिला हस्तशिल्प उद्योगों को प्रदेश की झांकी प्रदर्शित कर रही थी. हर किसी ने झांकी में नृत्य करती नृतिकाओं की जमकर तारीफ की. बता दें कि मीरा बाई की वीणा पकड़े खूबसूरत मूर्ति ने भी सबका मन मोह लिया। इसके साथ ही हर किसी के लिए झांकी में घूमर नृत्य की मूर्ति भी आकर्षण का केंद्र बना।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>राजस्थान का घूमर है सुप्रसिद्ध नृत्य</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको बता दें कि, महिलाओं द्वारा किया जाने वाला राजस्थान का सुप्रसिद्ध नृत्य घूमर है. वहीं राजस्थानी महिला प्रदेश की पारंपरिक लिबास में ऊंट पर बैठी दर्शायी गई. राजस्थान को खूबसूरत हस्तशिल्प का हब भी कहा गया है. हस्तशिल्प कला में राजस्थान की महिलाओं की भागीदारी अहम मानी गई है. महिलाओं द्वारा बनाये गए झांकी में उत्पादों की सुंदर तस्वीर दिखाई गई. विकसित भारत में राजस्थान की झांकी ने "पधारो म्हारे देश" का संदेश दिया.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/republic-day-2024-rajasthans-culture-seen-on-the-path-of-duty-know-what-was-special/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Paush Purnima 2024: बेणेश्वर धाम में पौष पूर्णिमा पर उमड़े श्रद्धालु, लगाई आस्था की डुबकी]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/paush-purnima-2024-devotees-gathered-at-beneshwar-dham-on-paush-purnima-took-a-dip-of-faith/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। त्रिवेणी संगम प्रयागराज में पौष पूर्णिमा पर हजारों की संख्या में भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई. अगर बात राजस्थान की करें तो यहां भी त्रिवेणी संगम है, जहां हमेशा हजारों की संख्या में भक्त आते हैं. पौष पूर्णिमा पर त्रिवेणी संगम में उदयपुर संभाग के वागड़ में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> त्रिवेणी संगम प्रयागराज में पौष पूर्णिमा पर हजारों की संख्या में भक्तों ने आस्था की डुबकी लगाई. अगर बात राजस्थान की करें तो यहां भी त्रिवेणी संगम है, जहां हमेशा हजारों की संख्या में भक्त आते हैं. पौष पूर्णिमा पर त्रिवेणी संगम में उदयपुर संभाग के वागड़ में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे और इस पवित्र नदी में आस्था की डुबकी लगाई. इसके बाद लोग वहां पूजा-अर्चना कर देव दर्शन भी किए. बड़ी बात बता दें कि इस धार्मिक कार्यक्रम के कुछ दिन बाद ही अब यहां महाकुंभ का आयोजन होने वाला है। बताया जा रहा है कि इस वर्ष के महाकुंभ में भक्तों की भाड़ी भीड़ पहुंचने वाला है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बड़ी संख्या में आते हैं, भक्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हम जिस त्रिवेणी संगम की बात कर रहे हैं वह उदयपुर के डूंगरपुर जिले में स्थित है. यहां संगम सोम, माही और जाखम नदी का होता है. संगम स्थल को बेणेश्वर धाम कहते हैं. वैसे तो इस बेणेश्वर धाम में देशभर के अलग-अलग हिस्सों से भक्त पहुंचते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के भक्त यहां बड़ी संख्या में आते हैं. यहां भक्त माव महाराज का दर्शन करते हैं. महा पदयात्रा यहां पौष पूर्णिमा पर निकलती है, लेकिन इस बार यह पदयात्रा नहीं हो पाई, क्योंकि यहां के महंत अच्युतानंद की तबियत ठीक नहीं है. इसलिए भक्त बेणेश्वर धाम गाड़ियों से पहुंचे. पांच किमी की यह यात्रा होती है, जिसमें भक्तों की संख्या अधिक होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>यहां लगेगा 24 फरवरी से महाकुंभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>महंत अच्युतानंद की तबियत खराब होने की जानकारी के बाद भक्त सीधे बेणेश्वर धाम पहुंचे. यहां राधा कृष्ण मंदिर में महंत अच्युतानंद ने महाआरती की. जिसके बाद सभी भक्त त्रिवेणी संगम में पहुंचे और यहां की पवित्र नदी में आस्था की डुबकी लगाई. इसके साथ ही भक्त भगवान शिव, ब्रम्हा जी, राधा-कृष्ण, वाल्मिकी समेत अन्य मंदिर के दर्शन भी किए. बता दें कि यहां अगले महीने 24 फरवरी से महाकुंभ लगने जा रहा है. अनुमान है कि इस महाकुंभ के मेले में पहले से भी अधिक भक्त आएंगे. 14 फरवरी से इसके लिए कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/paush-purnima-2024-devotees-gathered-at-beneshwar-dham-on-paush-purnima-took-a-dip-of-faith/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Padma Awards 2024: कौन हैं राजस्थान के हस्ती, जिन्हें पद्मश्री सम्मान देने की गई घोषणा?]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/padma-awards-2024-who-are-the-celebrities-of-rajasthan-for-whom-the-padma-shri-award-has-been-announced/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या के समय पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया गया. 76वां गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर भारत सरकार यह फैसला की है। देश के विभिन्न क्षेत्रों विज्ञान, उद्योग, कला, सामाजिक कार्य, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, इंजीनियरिंग, व्यापार, खेल से जुड़ी जानी-मानी हस्तियों को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्मश्री सम्मान [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या के समय पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया गया. 76वां गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर भारत सरकार यह फैसला की है। देश के विभिन्न क्षेत्रों विज्ञान, उद्योग, कला, सामाजिक कार्य, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, इंजीनियरिंग, व्यापार, खेल से जुड़ी जानी-मानी हस्तियों को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्मश्री सम्मान से सम्मानित करने का ऐलान किया गया, देश भर की कुल 34 हस्तियों का नाम इस लिस्ट में शामिल हैं. बता दें कि राजस्थान के 4 कलाकारों को भी पद्मश्री सम्मान से नवाजने की घोषणा की गई है, जिसमें अली-गनी बंधु जो मांड गायकी के बादशाह है व मांड गायकी के बादशाह भीलवाड़ा के जानकी लाल जो 'बहरुपिया कलाकार' भी है और लक्ष्मण भट्ट तैलंग जो जयपुर के ध्रुवपद गायक हैं, इन हस्तियों का नाम शामिल है। अपनी कला को सजाने सहेजने में इन सभी कलाकारों का जीवन बीता. इनका योगदान केबल अपनी कला को समृद्ध करना ही नहीं बल्कि उसे एक नए मुकाम तक ले जाने एवं इसकी अलग पहचान देश-विदेश में दिलाने का श्रेय भी इन्हीं को जाता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इनमें हैं दो सगे भाई</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अली मोहम्मद और गनी मोहम्मद बीकानेर के तेजरासर जैसे छोटे से गांव से निकलने वाले दो सगे भाइयों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा जा रहा है। ग़ज़ल गायकी को नए मुकाम पर दोनों भाइयों की जोड़ी ने पहुंचाया है. ग़ज़ल को सुगम और सहज संगीत के साथ अली- गनी बंधुओं ने जोड़ा. इतना नहीं इनका बड़ा नाम राजस्थान की पारम्पारिक मांड गायकी में भी दर्ज है. कई हिंदी फिल्मों के साथ-साथ ग़ज़ल गायकों पंकज उदास, मनोहर उदास और अनूप जलोटा के लिए भी दोनों भाइयों की जोड़ी ने संगीत दिया है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ध्रुवपद गायकी के गुरु हैं तैलंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जयपुर निवासी 93 वर्ष के ध्रुवपदाचार्य पंडित लक्ष्मण भट्ट तैलंग को भी पद्मश्री अवार्ड से नवाजा जाएगा. ध्रुवपद गायकी के लक्ष्मण भट्ट महान कलाकार हैं. बता दें कि काफी कठिन गायन के रूप में ध्रुवपद गायकी को माना जाता है. इस गायन में साहित्य और संगीत की बेहद ही खूबसूरत जुगलबंदी दिखती है. इस संगीत में साहित्यिक और गायन के निश्चित नियम बनाए गए हैं और इस गायन इस नियम के अनुसार ही गाया जाता है. खास बात यह है कि इतनी उम्र होने के बाद भी वो आज भी ध्रुवपद गायकी की शिक्षा नई पीढ़ी को देते हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>'बाबा बहरूपिया' होंगे सम्मानित</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भीलवाड़ा निवासी जानकी लाल 'बाबा बहरूपिया' को भी गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा. बता दें कि भीलवाड़ा के बहरूपिया को लोग बाबा के नाम से जानते हैं. मौजूदा दौर में बहरूपिया कला एक विलुप्त होती कला शैली के लिस्ट में शामिल है. लेकिन बहरूपिया कला की महारत जानकी लाल के पास हासिल है. करीब 6 दशक यानी 60 वर्ष से भी अधिक समय से वह वैश्विक दर्शकों को इस लुप्त होती हुई कला शैली से अपना कला दिखा रहे हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/padma-awards-2024-who-are-the-celebrities-of-rajasthan-for-whom-the-padma-shri-award-has-been-announced/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan News : PM मोदी चाय पीकर कितना किए पेमेंट, मैक्रों को क्या मिला उपहार ?]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/rajasthan-news-how-much-did-pm-modi-pay-after-drinking-tea-what-gift-did-macron-get/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। गुरुवार को PM नरेंद्र मोदी व फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों जयपुर की चारदीवारी का दीदार करते हुए दिखे। दोनों नेता एक खुले वाहन में जब परकोटा की मार्गो पर निकले तो स्वागत के लिए पहुंचे जनसमूह ने मोदी जिंदाबाद एवं जय श्रीराम के जमकर जयकारे लगाए। बता दें कि दोनों राजनेताओं ने हाथ [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> गुरुवार को PM नरेंद्र मोदी व फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों जयपुर की चारदीवारी का दीदार करते हुए दिखे। दोनों नेता एक खुले वाहन में जब परकोटा की मार्गो पर निकले तो स्वागत के लिए पहुंचे जनसमूह ने मोदी जिंदाबाद एवं जय श्रीराम के जमकर जयकारे लगाए। बता दें कि दोनों राजनेताओं ने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन करते हुए दिखे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>खुले वाहन में निकले दोनों नेता</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दोनों नेता जंतर-मंतर से खुले वाहन में निकले तो उस वक्त का नजारा देखने लायक था। अपने नेता का हजारों भीड़ सड़क के दोनों ओर खड़े होकर दीदार कर रही थी। ऐसे में पीएम मोदी वाहन में खड़े होकर उनका अभिवादन करते हुए दिखे। बड़ी चौपड़ दोनों नेताओं का वाहन पहुंचा एवं हवामहल की तरफ मुड़ा। पीएम मोदी और मैक्रों ने यहां के फेमस चायवाले की स्टाॅल पर चाय की चुस्कियां भी ली। पीएम मोदी ने चाय वाले को चाय के पैसे पूछे, लेकिन क्या उन्होंने पैसे लेने से साफ़ तौर पर मना कर दिया। हालांकि PM मोदी नहीं माने तो चायवाले ने चाय के महज 2 रुपए बतलाया। इसके बाद PM मोदी डिजिटल UPI के माध्यम से चाय की पेमेंट की। यहां एक दुकान से मोदी ने श्रीराम मंदिर का माॅडल भी खरीदा जिसे राष्ट्रपति मैक्रों को उपहार के तौर पर दिया गया। यहां से मोदी का रोड शो आगे की तरफ बढ़ा और सांगानेरी गेट पर संपन्न हुआ। जयपुर में दोनों नेताओं ने करीब 1.7 किलोमीटर का रोड शो किया। जयपुर में हुए खास स्वागत से फ्रांस के राष्ट्रपति अभिभूत नजर आए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>PM ने किया मैक्रों का वेलकम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जयपुर के जंतर-मंतर पहुंचकर PM मोदी ने मैक्रों का स्वागत किया। करीब एक घंटा तक दोनों नेता यहां रहे। दोनों नेताओं को इस दौरान जंतर-मंतर में बने यंत्रों की पूर्ण जानकारी दी गई। इसके पश्चात् दोनों नेता रोड शो किए। इससे पहले जब मैक्रों जयपुर एयरपोर्ट पर लैंड किए तो राज्यपाल कलराज मिश्र, राजस्थान CM भजन लाल शर्मा, मुख्य सचिव सुधांश पंत समेत कई अधिकारियों ने उनका स्वागत सत्कार किया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आमेर महल का दीदार, साथ रहीं दिया कुमारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मैक्रों जयपुर एयरपोर्ट से सीधे आमेर पहुंचे। कुछ दूर पैदल चलकर वें आमेर महल तक आए। यहां पहुंचकर उन्होंने महल का दीदार किया और उसकी कला कृति की तारीफ की। इस मौके पर उनके साथ उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी मौजूद रही। महल के इतिहास के बारे में उन्होंने मैक्रों को बताया। यहां की कला-संस्कृति से भी इस दौरान मैक्रों को रूबरू कराया गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/rajasthan-news-how-much-did-pm-modi-pay-after-drinking-tea-what-gift-did-macron-get/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Republic Day 2024 : CM भजनलाल ने दी गणतंत्र दिवस पर बधाई, जानें कब करेंगे राज्यपाल झण्डारोहण]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/republic-day-2024-cm-bhajan-lal-congratulated-on-republic-day-know-when-the-governor-will-hoist-the-flag/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। पूरे देश में आज गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। ऐसे में राजस्थान की बात करें तो यहां के विधान सभा पर प्रातः ही झण्डारोहण होगा। प्रदेशवासियों को CM भजनलाल शर्मा व विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी नेगणतन्त्र दिवस की बधाई दी। राजस्थान के राज्यपाल सुबह 9.30 बजे जयपुर में [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर</strong>। पूरे देश में आज गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। ऐसे में राजस्थान की बात करें तो यहां के विधान सभा पर प्रातः ही झण्डारोहण होगा। प्रदेशवासियों को CM भजनलाल शर्मा व विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी नेगणतन्त्र दिवस की बधाई दी। राजस्थान के राज्यपाल सुबह 9.30 बजे जयपुर में एसएमएस स्टेडियम में ध्वजारोहण करेंगे। इसके पश्चात् राज्य स्तरीय कार्यकर्म का आयोजन होगा। CM भजनलाल बड़ी चौपड़ पर झंडातोलन करेंगे। पीसीसी मुख्यालय में गोविंद सिंह डोटासरा झंडारोहण करेंगे। गणतन्त्र दिवस के अवसर पर विधान सभा में प्रातः ही प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी झण्डारोहण करेंगे। इससे पहले प्रातः 7.15 बजे वासुदेव देवनानी अपने निवास पर झण्डारोहण कर चुके हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कार्यकर्म का शुभारम्भ वन्देमातरम से</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गणतन्त्र दिवस पर होने वाले राजस्थान विधानसभा में कार्यकर्म का शुभारम्भ वन्देमातरम से होगा। पुलिस बैंड द्वारा राष्ट्रगान पेश किया जाएगा। विधायकगण एवं पूर्व विधायकगण समेत प्रमुख सचिव महावीर प्रसाद शर्मा, विधानसभा के अधिकारीगण व कर्मचारीगण गणतंत्र दिवस पर आयोजित समारोह में शामिल होंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रदेशवासियों को सीएम ने दी शुभकामनाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राजस्थान CM भजनलाल गणतन्त्र दिवस की बधाई देते हुए अपने पोस्ट में लिखा कि भारतीय लोकतंत्र के महापर्व 75वें गणतंत्र दिवस की आप सभी देश व प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। आइए, इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि आज के महान उपलक्ष्य पर हम सभी भारत माँ की स्वाधीनता के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले अमर शहीदों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर उनके सपनों का भारत बनाने के लिए संकल्प लें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आइए जानते हैं विधानसभा अध्यक्ष के कार्यक्रम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय गणतन्त्र दिवस कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी भी शामिल होंगे। देवनानी राजभवन में आयोजन होने वाले स्वल्पहार कार्यक्रम में भी मौजूद होंगे। शुक्रवार को दोपहर 1.15 बजे विधानसभा अध्यक्ष देवनानी सीतापुरा स्थित स्वास्थ्य कल्याण होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एण्ड रिसर्च सेन्टर में होने वाले गणतन्त्र दिवस कार्यक्रम में झण्डारोहण करेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/republic-day-2024-cm-bhajan-lal-congratulated-on-republic-day-know-when-the-governor-will-hoist-the-flag/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Bhai Dooj 2023: आज है भाई दूज, इस विधि से लगाएं टीका]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/bhai-dooj-2023-today-is-bhai-dooj-get-vaccinated-with-this-method/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। देश भर में फेस्टिव सीजन चल रहा है। ऐसे में आज पुरे देश भर में भाई दूज का त्योहार मनाया जा रहा है। जैसा की हिंदू शास्त्र में भी कहा गया है कि दिवाली पर्व की आरंभ धनतेरस से होती है लेकिन इसका समापन भाई दूज के साथ होता है। गोवर्धन पूजा के अगले [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> देश भर में फेस्टिव सीजन चल रहा है। ऐसे में आज पुरे देश भर में भाई दूज का त्योहार मनाया जा रहा है। जैसा की हिंदू शास्त्र में भी कहा गया है कि दिवाली पर्व की आरंभ धनतेरस से होती है लेकिन इसका समापन भाई दूज के साथ होता है। गोवर्धन पूजा के अगले सुबह भाई दूज का पर्व मनाया जाता है। तो चलिए ऐसे में हम आपको इस पर्व से जुड़ी तमाम जानकारी देंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>माथे पर लाल टिका लगाती है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिन्दू शास्त्रों के अनुसार हर पर्व का अपना अलग पहचान होता है। बता दें कि दिवाली पर्व की शुरुआत भले ही धनतेरस से होता है लेकिन इसका समापन भाई दूज से ही होता है। भाई दूज के शुभ अवसर पर बहनें अपने भाइयों के माथे पर लाल टिका लगाती है। इसके पीछे का कारण बताया गया है कि बहन अपने भाइयों की लंबी उम्र के लिए भाई के माथे पर तिलक लगा कर उसकी दीर्घ आयु की कामना करती है। इस पर्व को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाते है। इस साल यह पर्व 15 नवंबर यानी आज बुधवार को मनाया जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सफल जीवन के लिए फास्टिंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों की दीर्घ आयु और सफल जीवन के लिए फास्टिंग रखती है। आपको बता दें कि हिन्दू शास्त्र में हर पर्व के लिए कुछ न कुछ नियम बताया गया हुआ है, ऐसे में भाई दूज के लिए भी कुछ नियम है जो हम आपको बतायेंगे - माना जाता है कि भाई दूज पर अगर हम नियमानुसार भाई के लिए फास्टिंग के साथ तिलक लगाते है तो ऐसे में हमें शुभ फलों की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तिलक के समय रखें इन बातों का ख्याल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भाई दूज के अवसर पर सभी बहनों को भाई को तिलक करने से पहले कुछ नियम का पालन जरूर करना चाहिए, जैसे में हिन्दू शास्त्र में भी कहा गया हुआ है कि अगर हम भाई दूज पर अपने भाइयों को शुभ मुहूर्त में तिलक करें तो यह अधिक शुभ माना जाता है। भाई दूज का शुभ मुहूर्त आज यानी 15 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे से 3:19 बजे तक रहेगा। इस शुभ मुहूर्त में बहनें अपने भाइयों को तिलक कर सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/bhai-dooj-2023-today-is-bhai-dooj-get-vaccinated-with-this-method/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Govardhan Puja 2023: गोवर्धन पूजा कब? जानें पूजा की श्रेष्ठ मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/govardhan-puja-2023-when-is-govardhan-puja-know-the-best-time-for-worship/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। देश भर में फेस्टिव सीजन की शुरआत हो चुकी है। ऐसे में 12 नवंबर को दिवाली मनाई गई है और अब बात करें गोवर्धन पूजा की तो चलिए जानते है कब है गोवर्धन पूजा? 12 नवंबर को देश में दिवाली तो मनाया गया लेकिन गोवर्धन पूजा की तिथि को लेकर दूसरी तरफ लोगों में [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>देश भर में फेस्टिव सीजन की शुरआत हो चुकी है। ऐसे में 12 नवंबर को दिवाली मनाई गई है और अब बात करें गोवर्धन पूजा की तो चलिए जानते है कब है गोवर्धन पूजा? 12 नवंबर को देश में दिवाली तो मनाया गया लेकिन गोवर्धन पूजा की तिथि को लेकर दूसरी तरफ लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से आपका भ्रम दूर करेंगे तो चलिए जानते है पूजा से जुड़ी तमाम जानकारी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दिवाली पर्व के चौथे दिन गोवर्धन पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गोवर्धन पूजा पांच दिवसीय दिवाली पर्व के चौथे दिन की जाती है। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। घरों में इस दिन गोवर्धन पर्वत बनाया जाता है और इसके साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा तैयार की जाती है। इसके बाद गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा शाम के समय होती है और अन्नकूट और कढ़ी चावल का उन्हें भोग लगाया जाता है। इस साल लोगों में गोवर्धन पूजा की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। तो आइए आपको बताते हैं कि गोवर्धन पूजा कब की जाएगी और इस पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें सही डेट और शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बार 13 नवंबर दिन सोमवार को दोपहर 2:56 बजे से कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की आरंभ हो रही है और 14 नवंबर दिन मंगलवार को दोपहर 2:36 बजे समापन होगा। उदया तिथि को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया जाता है। ऐसे में 14 नवंबर को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाएगा। द्रिक पंचांग के मुताबिक प्रातः काल 14 नवंबर को सुबह 6:43 बजे से 08:52 बजे के बीच शुभ गोवर्धन पूजा का मुहूर्त है। ऐसे में दो घंटे नौ मिनट तक गोवर्धन पूजा के लिए पूजा का मुहूर्त रहेगा। घर के आंगन में गोवर्धन पूजा पर गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा की जाती है। प्रकृति की पूजा भी गोवर्धन पूजा को कहा जाता है, स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इसकी शुरुआत की थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>यह योग बन रहा है गोवर्धन पूजा पर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बार शुभ योग गोवर्धन पूजा के दिन बन रहे हैं। गोवर्धन पूजा पर प्रात:काल से लेकर दोपहर 01 बजकर 57 मिनट तक शोभन योग है। अतिगंड योग उसके बाद से शुरू हो जाएगा। अतिगंड योग को शुभ नहीं माना जाता है। हालांकि एक शुभ योग शोभन योग को माना जाता है। इसके अलावा सुबह से ही गोवर्धन पूजा के दिन अनुराधा नक्षत्र होगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें गोवर्धन पूजा की विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सुबह जल्दी उठकर गोवर्धन पूजा के दिन स्नानादि करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>फिर गाय के गोबर से शुभ मुहूर्त में गिरिराज गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं और इसके साथ ही गाय, बछड़े आदि की आकृति भी बनाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके बाद विधिवत पूजा धूप-दीप आदि से करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दुग्ध से भगवान कृष्ण को स्नान कराने के बाद उनका पूजा-अर्चना करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके बाद भगवान कृष्ण को अन्नकूट का प्रसाद अर्पित करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानिए गोवर्धन पूजा का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रकृति को समर्पित पर्व गोवर्धन पूजा को ही कहते है। माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन इंद्रदेव का घमंड तोड़ा था और अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी। प्रकृति की सेवा और पूजा करने का संदेश लोगों को दिया था। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा का यह दिन था। उस दौरन से से ही इस दिन पर लोग गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना करते है और इस अवसर पर सभी तरह की मौसमी सब्जियों से तैयार अन्नकूट का प्रसाद भगवान को चढ़ाते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p></p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p></p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/govardhan-puja-2023-when-is-govardhan-puja-know-the-best-time-for-worship/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Diwali 2023: दिवाली पर बन रहा 700 साल बाद महासंयोग, जानिए पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/diwali-2023-a-great-coincidence-is-happening-on-diwali-after-700-years-know-the-best-time-for-worship/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। देश भर में फेस्टिव सीजन की शुरआत हो चुकी है। ऐसे में रविवार को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर स्वाति नक्षत्र के साथ आयुष्मान और सौभाग्य योग के विशेष संयोग के दौरान दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। इस अवसर पर 5 राजयोग के साथ 8 शुभ संयोग भी बन रहेंगे। लक्ष्मी पूजन प्रदोषयुक्त अमावस्या होने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> देश भर में फेस्टिव सीजन की शुरआत हो चुकी है। ऐसे में रविवार को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर स्वाति नक्षत्र के साथ आयुष्मान और सौभाग्य योग के विशेष संयोग के दौरान दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। इस अवसर पर 5 राजयोग के साथ 8 शुभ संयोग भी बन रहेंगे। लक्ष्मी पूजन प्रदोषयुक्त अमावस्या होने से स्थिरलग्न व स्थिर नवांश में होगा। इस दिन राजस्थान में प्रदोषकाल शाम 5 बजकर 34 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। वहीं शाम 5 बजकर 50 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट तक वृषभ लग्न रहेगा। वहीं मध्यरात्रि 12 बजकर 20 मिनट से रात 2 बजकर 36 मिनट तक सिंह लग्न रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ज्योतिषाचार्य के अनुसार -</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको बता दें कि ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया है कि स्वाति नक्षत्र का दीपोत्सव पर विशेष संयोग बन रहा है, इसकी शुरुआत शनिवार रात एक बजकर 47 मिनट पर होगा, जो रविवार को दिवाली के दिन रात 2 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इस दौरान मां लक्ष्मी का पूजन श्रेष्ठ बताया गया है। बता दें कि दिवाली के दिन आयुष्मान और सौभाग्य योग का भी संयोग बन रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>लक्ष्मी पूजन लेकर आएगा सुख-समृद्धि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिषाचार्य डॉ. रवि शर्मा ने बताया है कि रविवार को शाम 06:02 से 06:15 बजे तक लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय माना गया है, इस समय प्रदोषकाल, स्थिर वृषलग्न तथा कुम्भ का नवांश भी दिखेगा। इस कारण वह बताते है कि इस सर्वश्रेष्ठ समय में लक्ष्मी पूजन करना सुख-समृद्धि का प्रतिक होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शाम 06:02 से 06:15 बजे तक लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय बताया गया है। शाम 05:34 से रात 08:13 बजे तक प्रदोष काल रहेगा।<br>शाम 05:50 से 7:47 बजे तक वृषलग्न और<br>सिंह लग्न मध्यरात्रि 12:20 बजे से अंतरात्रि 02:36 बजे तक रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p><strong>चौघड़िए के मुताबिक लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त -<br></strong>चौघड़िए -समय<br>लाभ और अमृत - सुबह 9.29 से दोपहर 12.11 बजे तक<br>शुभ - दोपहर 1.32 से 2.52 बजे तक<br>शुभ, अमृत और चर का चौघड़िया - शाम 05:34 से रात 10:32 बजे तक, लाभ का चौघड़िया मध्यरात्रि 01:50 से अंतरात्रि 3:30 बजे तक</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>700 साल बाद बना ऐसा संयोग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल दीपावली पर ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि एक साथ 3 शुभ योग और 5 राजयोग का संयोग बन रहा है, इस साल के दिवाली पर गजकेसरी, हर्ष, उभयचरी, काहल और दुर्धरा नामक योग बन रहे है। शुक्र, बुध, चंद्रमा और गुरु ग्रह स्थितियों के कारण इन राजयोगों का निर्माण हो रहा है। आयुष्मान, सौभाग्य और महालक्ष्मी योग भी लक्ष्मी पूजा के समय बनेंगे। शुभ योगों की ऐसी स्थिति पिछले 700 सालों में दीपावली पर नहीं बनी है। इतने शुभ संयोग बनने के कारण यह दिवाली सुख-समृद्धि से भरपूर होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गजकेसरी योग होगा लाभदायक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वैदिक ज्योतिष में गजकेसरी योग को ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया है कि यह योग सम्मान और लाभ देने वाला माना जाता है। धन लाभ, संपत्ति और प्रतिष्ठा हर्ष योग बढ़ता है। स्थिरता और सफलता काहल योग देता है। वहीं, आर्थिक संपन्नता उभयचरी योग से बढ़ती है। शांति और शुभता दुर्धरा योग बढ़ाता है। वहीं दीपावली पर कई सालों बाद दुर्लभ संयोग भी देखने को मिल रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इनकी आराधना से होगा सुख-समृद्धि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिषाचार्य बताते है कि दीपावली की शाम को शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, मां सरस्वती और धन के देवता कुबेर की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि दीपावली की रात में मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और अपनी कृपा बरसाती हैं। इस अवसर पर दीपावली के दिन श्रीसूक्त एवं विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी करना अच्छा माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/diwali-2023-a-great-coincidence-is-happening-on-diwali-after-700-years-know-the-best-time-for-worship/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Karva Chauth Special: पत्नी को दें ये उपहार, हो जाएगी खुश]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/karva-chauth-special-give-this-gift-to-your-wife-she-will-be-happy/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। देश भर में फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में आज ( बुधवार) करवा चौथ मनाया जा रहा है। करवा चौथ पर महिलाएं अपने सुहाग के लिए कठिन व्रत रखती है। तो ऐसे में पति भी उनके लिए गिफ्ट के तौर पर कुछ खास देने की योजना बनाते दिखते हैं। वहीं ज्योतिष [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> देश भर में फेस्टिव सीजन की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में आज ( बुधवार) करवा चौथ मनाया जा रहा है। करवा चौथ पर महिलाएं अपने सुहाग के लिए कठिन व्रत रखती है। तो ऐसे में पति भी उनके लिए गिफ्ट के तौर पर कुछ खास देने की योजना बनाते दिखते हैं। वहीं ज्योतिष आचार्य बताते हैं कि नाम और राशि के तौर पर खास उपहार देकर पति अपने पत्नी का दिल जीत सकते हैं। इसके साथ ही वह बताते हैं कि ऐसा करने से आप करवा चौथ के शुभ अवसर को यादगार और रोचक बना सकते हैं। वहीं आचार्य शिव प्रकाश दाधीच ने बताया हैं कि राशियों का जीवन में गहरा संबंध होता है। मौजूदा कल में युवा अपने जीवन से जुड़ी सभी कार्यों में ज्योतिष का सहारा लेते नजर आ रहे हैं। इस मौके पर राशियों के अनुसार गिफ्ट देना और करना पसंद किया जा रहा है। आजकल यह एक नया ट्रेंड भी बन गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>उपहार के तौर पर ये दें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बात करें अगर राशियों के अनुसार उपहार देने की तो मेष राशि वालों को लाल रंग की कोई वस्तु, लाल चूड़ी, लाल साड़ी, लाल ड्रेस आदि लाल रंग की कोई वस्तु आप अपनी पार्टनर को गिफ्ट दे सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वृष राशि वालों को मल्टी कलर्स वाली वस्तु जैसे चूड़ी और कॉस्मेटिक आइटम गिफ्ट कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सिंह राशि वालों को सुनहरी वस्तु मतलब सोने के आभूषण और गहने आदि भेंट दे सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कर्क राशि वालों को ठंडक देने वाली वस्तु जैसे चांदी से बने आभूषण, श्वेत मिठाई इत्यादि गिफ्ट कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कन्या राशि वालों को हरे रंग की वस्तु देने से पार्टनर को सुकून मिलती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धनु राशि वालों को सोने से युक्त समान और पीले वस्त्र भेंट दे सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वृश्चिक राशि वालों को गुलाब का फूल, विद्युत उपकरण गिफ्ट दे सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कुंभ राशि वालों को इलेक्ट्रॉनिक सामान, यातायात के साधन, कपड़े आदि भेंट कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मीन राशि वालों को पीली वस्तु, आभूषण, आदि गिफ्ट कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>तुला राशि वालों को कॉस्मेटिक आइटम्स के साथ मोबाइल फोन और मनोरंजन के समान भेंट कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>यह भी जरूरी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रसिद्ध आचार्य दाधीच बताते हैं कि पार्टनर को गिफ्ट देना कोई बड़ी चीज नहीं है इससे पहले आप अपने पार्टनर की भावनाओं को समझे। वहीं वह बताते हैं कि अपने घर में अनावश्यक गुस्सा को एंट्री न करने दे। इसके साथ ही वह बताते हैं कि नशे आदि से बचे। महिलाएं के फास्टिंग के दौरान उनका सहयोग करें। आपकी थोड़ी सी जिम्मेदारी आपकी पार्टनर की भावना को खुशी दे सकती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/karva-chauth-special-give-this-gift-to-your-wife-she-will-be-happy/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Karva Chauth 2023: करवा चौथ कल, जाने पूजन का शुभ मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/karva-chauth-2023-karva-chauth-tomorrow-know-the-auspicious-time-for-worship/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। देश भर में त्योहारी मौसम की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में करवा चौथ व्रत की बात करें तो पूरे देश में करवा चौथ एक नवंबर यानी बुधवार को मनाया जाएगा। पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त बुधवार शाम 7:30 से 10:20 बजे तक बताया गया है। वहीं चांद अपनी अलौकिक सुंदरता के साथ रात 8:26 [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> देश भर में त्योहारी मौसम की शुरुआत हो चुकी है। ऐसे में करवा चौथ व्रत की बात करें तो पूरे देश में करवा चौथ एक नवंबर यानी बुधवार को मनाया जाएगा। पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त बुधवार शाम 7:30 से 10:20 बजे तक बताया गया है। वहीं चांद अपनी अलौकिक सुंदरता के साथ रात 8:26 बजे पर दिखाई देगा। इस त्योहार पर महिलाएं निर्जल और निराहार रहकर वर्त रखेंगी। सुहागिन महिलाएं रात को चांद देखने के बाद पूजा-अर्चना कर व्रत खोलेंगी। पौराणिक दृश्टिकोण से बताया जाता है कि सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना करने के लिए करवा चौथ का व्रत रखती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>खास संयोग का अनुमान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष आचार्य बताते हैं कि इस साल करवा चौथ के अवसर पर खास संयोग बनने जा रहा है। मौके पर उन्होंने बताया कि करवा चौथ के व्रत के समय सर्वार्थ सिद्धि का संयोग बनेगा। इसके साथ ही ज्योतिष आचार्य बताते हैं कि करवा चौथ विशेष संयोग में होने के वजह से महिलाओं के लिए समृद्धि दायक साबित होने वाला है। उन्होंने बताया कि करवा चौथ के दिन सुबह 3:58 से शाम 4:34 बजे तक मृगशिरा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>यह राशि में रहेंगे कुछ ग्रह</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि इस साल करवा चौथ के शुभ अवसर पर 100 साल बाद तुला राशि में तीन ग्रहों को रहने का संयोग बन रहा है। प्रमुख ग्रहों में मंगल, सूर्य और बुध शामिल है। तमाम ज्योतिष के अनुसार बताया जा रहा है कि इस करवा चौथ के शुभ अवसर पर 100 साल बाद त्रिग्रही योग बनेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पूजा पाठ के लिए महत्वपूर्ण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल करवा चौथ व्रत पर सूर्य और बुध ग्रह एकसाथ होने के वजह से पंच महापुरुष योग भी बनेगा। इस अवसर पर पूजा-पाठ करना पवित्र बताया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महिलाएं की तैयारी जारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सभी महिलाएं करवा चौथ व्रत को लेकर तैयारी में जुटी हुई है। वहीं बाजारों में अधिक रौनक भी बढ़ते हुए देखा जा रहा है। महिलाएं की खरीदारी जमकर चल रही है। वहीं भोग के लिए मिठाई और लड्डू भी बनाया जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/karva-chauth-2023-karva-chauth-tomorrow-know-the-auspicious-time-for-worship/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan : चंद्र ग्रहण के साये में मनेगी इस साल की शरद पूर्णिमा, जानिए ग्रहण से जुड़ी…]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-this-years-sharad-purnima-will-be-celebrated-under-the-shadow-of-lunar-eclipse-know-about-the-eclipse/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। हिंदू धर्म में अश्विन शुक्ल पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नामों से जाना जाता है। वर्ष में 12 पूर्णिमा होते हैं जिसमें शरद पूर्णिमा को सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इस पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। माना जाता है कि इस पूर्णिमा पर ही भगवान कृष्ण लला ने ब्रजमंडल में [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> हिंदू धर्म में अश्विन शुक्ल पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा के नामों से जाना जाता है। वर्ष में 12 पूर्णिमा होते हैं जिसमें शरद पूर्णिमा को सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। इस पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। माना जाता है कि इस पूर्णिमा पर ही भगवान कृष्ण लला ने ब्रजमंडल में गोपियों के साथ रासलीला रचाई थी। इसलिए शरद पूर्णिमा को "रास पूर्णिमा" भी कहते हैं। मान्यताओं के अनुसार इस अवसर पर समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी प्रकट हुई थी। इस पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी के पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ में मां लक्ष्मी के आशीर्वाद के रूप में सुख-समृद्धि भी मिलती हैं । बात करें इस साल शरद पूर्णिमा की तो इस साल शरद पूर्णिमा पर साल का अंतिम चंद्र ग्रहण लगने वाला है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शनिवार को शरद पूर्णिमा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर ग्रहण का साया परने जा रहा है। इस साल शरद पूर्णिमा शनिवार को हैं। बात करें पूर्णिमा की तिथि की तो शनिवार को सुबह 4:17 पर पूर्णिमा शुरू होगी और इसकी समापन रविवार को दोपहर 1:53 पर होगा लेकिन शनिवार रात 1:14 बजे से मध्य रात्रि 2:28 तक चंद्र ग्रहण का साया बना रहेगा। शनिवार शाम 4:14 से चंद्र ग्रहण का सूतक शुरू हो जाएगा। इस दौरान मंदिरों के दरवाजे बंद रहेंगे। बता दें कि शरद पूर्णिमा के अवसर पर सभी मंदिरों में विशेष पूजा पाठ का आयोजन किया जाता है। वहीं लोग शरद पूर्णिमा के मौके पर घरों में खीर बनाकर चांदनी रात में आसमान के नीचे रखते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आचार्य शिवदयाल ने क्या बताया?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शरद पूर्णिमा को लेकर ज्योतिष आचार्य शिवदयाल शास्त्री ने बताया कि इस साल शरद पूर्णिमा पर खण्डग्रास चंद्रग्रहण उपछाया रात्रि 11:30 से शुरू होगी। शनिवार की रात के उपरांत 29 अक्टूबर की तिथि लगते हैं रात को 1: 14 से रात्रि 2:28 तक चंद्र ग्रहण रहेगा। शरद पूर्णिमा के शुभ अवसर पर यह सूतक पूरे देश में मान्य होगा। उन्होंने बताया कि सूतक काल शनिवार शाम 4:14 पर शुरू हो जाएगा। इस दौरान रोगी, वृद्ध, बालक, बच्चे और गर्भवती महिलाएं को छोड़कर सूतक के समय भोजन, शयन, मूर्ति पूजन पर निषेध रहेगा। उन्होंने बताया कि अगर ग्रहण के दौरान दान, पूजन, हवन विशेष करते हैं तो विशेष फलदायी माना जाता है। ज्योतिष आचार्य ने यह भी स्पष्ट तौर पर बताया कि ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाएं को शांत भाव से ईश्वर और मां दुर्गा का भजन-कीर्तन करना अच्छा माना जाता हैं। वहीं ग्रहण समाप्ति के बाद अन्न अथवा वस्त्र दान करने के बाद स्नान जरूर करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विशेषज्ञ मीना रानी का कहना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दूसरी तरफ ध्यान योगी विशेषज्ञ मीना रानी गौतम बताती हैं कि इस साल शरद पूर्णिमा शनिवार शाम 7:30 बजे से 9:15 के बीच में मेडिटेशन करना अच्छा माना जाएगा। इस अवधि के दौरान अगर कोई व्यक्ति ध्यान के माध्यम से चंद्रलोक की यात्रा करना चाहता है तो वह ऐसा करने में सफल होगा। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में अगर कोई व्यक्ति सुई और धागा पिरोता है तो उसके घर में सुख-समृद्धि और शांति अवश्य आती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-this-years-sharad-purnima-will-be-celebrated-under-the-shadow-of-lunar-eclipse-know-about-the-eclipse/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dussehra 2023: दशहरे पर निभाई जाती है वर्षो पुरानी खास परम्परा, पैरों तले रौंदा जाता है रावण का अहंकार]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/society/dussehra-2023-years-old-special-tradition-is-performed-on-dussehra-ravanas-ego-is-trampled-under-his-feet/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। देशभर में दशहरे पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। आज (मंगलवार) बड़े धूम-धाम से देश भर में विजयादशमी का त्योहार मनाया जा रहा है। राजस्थान के कोटा के दशहरा मैदान में इस अवसर पर असत्य पर सत्य की विजय के रूप में विशालकाय रावण के पुतलों का दहन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> देशभर में दशहरे पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया जाता है। आज (मंगलवार) बड़े धूम-धाम से देश भर में विजयादशमी का त्योहार मनाया जा रहा है। राजस्थान के कोटा के दशहरा मैदान में इस अवसर पर असत्य पर सत्य की विजय के रूप में विशालकाय रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा तो वहीं शिक्षा नगरी कोटा में आज जेठी समुदाय के लोग मिट्टी से बने दशानन के अहंकार को पैरों तले रौंदेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जयकारों के बीच रावण से लड़ते कुश्ती</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि राजस्थान में रावण के अहंकार को जेठी समाज पैरों तले रौंदने कि पौराणिक परम्परा को वर्षो से विधि-विधान तरीके से मनाते आ रहे है। कोटा में पौराणिक परम्परा के अनुसार किशोरपुरा और नांता इलाके स्थित जेठी समाज के अखाड़े में मिट्टी का रावण बनाकर दशहरे पर पहलवान जय श्री राम के नारे के साथ रावण से कुश्ती लड़ते हैं। वहीं रावण को कुश्ती में हरा कर वध करते हैं और इस मौके पर अखाड़े में मौजूद सभी छोटे- बड़े पहलवानों की ख़ुशी देखने योग्य होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>समाज की यह रियायतकालीन परम्परा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कोटा किशोरपुरा समाज के ईश्वरलाल जेठी ने बताया है कि समाज की यह वर्षो पुरानी पौराणिक परम्परा है। इस अवसर पर नवरात्र के पहले दिन अखाड़े की मिट्टी को एक जगह जमा कर रावण का प्रतीकात्मक रूप से बनाया जाता है। बता दें कि इस प्रतीकात्मक रूप पर ज्वारे उगाए जाते हैं। नौ दिन तक परिसर में विशेष कार्यक्रम चलता है। इस अवसर पर गरबा का भी आयोजन होता है। नवरात्रि के नवमी पर माता लिम्ब्जा मंदिर में हवन पूजा के साथ फलों का भोग समर्पित किया जाता है। वहीं दशहरे पर अखाड़े के पहलवान दशानन से युद्ध करते हैं और इस दौरान रावण को पैरों तले रौंदकर उसके अहंकार को मिट्टी में मिलाते है। इसके पश्चात् प्रशाद बांटा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ज्वारे खुशहाली का प्रतीक है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राजस्थान में नवरात्रि के पहले दिन रावण रुपी प्रतिक पर ज्वारे उगाए जाते हैं। बता दें कि नवरात्रि के दौरान इन ज्वारों को खुशहाली का प्रतिक माना जाता है। बताया जाता है कि अगर ज्वारे हरे भरे उगते है तो घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती है। रावण पुतला दहन से पहले ज्वारे भगवान को चढ़ाया जाता है और आपस में बांटा भी जाता है। इस दौरान लोग एक दूसरे को दशहरे की शुभकामनाएं भी देते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/society/dussehra-2023-years-old-special-tradition-is-performed-on-dussehra-ravanas-ego-is-trampled-under-his-feet/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Navratri 2023: बंगाली समाज 68 वर्ष से झीलों के शहर में कर रहा दुर्गा पूजा, सैकड़ों लोग जुड़े]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/navratri-2023-bengali-society-has-been-performing-durga-puja-in-the-city-of-lakes-for-68-years-hundreds-of-people-participated/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। नवरात्रि का दौर शुरू है। ऐसे में कोलकाता की गलियों में जाएंगे तो वहां भव्य दुर्गा पंडालों के अनोखा नजारा देखने को मिलेगा। बता दें कि पूरी दुनिया में कोलकाता का दुर्गा पूजा मशहूर है। लेकिन बंगाल से पलायन हुए बंगाली समाज के लोगों ने करीब 68 साल पहले उदयपुर में दुर्गा पूजा के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> नवरात्रि का दौर शुरू है। ऐसे में कोलकाता की गलियों में जाएंगे तो वहां भव्य दुर्गा पंडालों के अनोखा नजारा देखने को मिलेगा। बता दें कि पूरी दुनिया में कोलकाता का दुर्गा पूजा मशहूर है। लेकिन बंगाल से पलायन हुए बंगाली समाज के लोगों ने करीब 68 साल पहले उदयपुर में दुर्गा पूजा के आयोजन की शुरुआत की थी। आपको बता दें कि वर्त्तमान में उदयपुर समाज के सैकड़ों लोग इस पूजा से जुड़ चुके हैं। शुक्रवार को यहां षष्ठी पूजा के साथ ही मां दुर्गा पूजा का शुभारंभ किया गया। उदयपुर शहर के भूपालपुरा स्थित बंग भवन, अशोकनगर के केंद्र भवन और सेक्टर 4 काली बाड़ी सोसाइटी में बंगाल की दुर्गा पूजा के हु-बहू नजारे देखने को मिलता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>केंद्र भवन में हो रही पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्राचीनतम दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत अनिल भट्टाचार्य ने उदयपुर में की थी। बता दें कि भट्टाचार्य सुप्रीम कोर्ट के वकील के साथ उदयपुर विधि महाविद्यालय के प्रिंसिपल भी रह चुके हैं। सन 1956 में उन्होंने दुर्गा पूजा मनाने की शुरुआत पहली बार उदयपुर में की थी। आपको बता दें कि भट्टाचार्य परिवार के अंजलि एवं इंदिरा भट्टाचार्य ने बताया है कि भट्टाचार्य परिवार पिछले 68 सालों से यह दुर्गा पूजा पारंपरिक विधि-विधान से आयोजन करते आ रहा है। दुर्गा पूजा के दौरान मां की प्रतिमा की स्थापना कर दी गई हैं। वहीं कल (शुक्रवार) षष्ठी पूजा से दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शास्त्री सर्कल स्थित चटर्जी बंगले में दुर्गा पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पूजा सचिव तपन रॉय ने बताया है कि करीब 62 वर्ष पहले शास्त्री सर्कल स्थित चटर्जी बंगले में दुर्गा पूजा का आयोजन होता था। बाद में महाराष्ट्र भवन को किराए पर लेकर पूजा की जाती थी। साथ ही उन्होंने बताया कि साल 1982 में यूआईटी ने भूपालपुरा में बंग भवन निर्माण के लिए जमीन दी, इसके बाद से ही यहां दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा हैं। खास बात यह है कि यहां के दुर्गा पूजा को बंगाली रीति रिवाज से की जाती है। वहीं अष्टमी वाले दिन मां दुर्गा को 108 कमल के फूल चढ़ाए जाते हैं और नवमी पर सुबह पूजा और हवन होता है। दसवीं पर मां का विसर्जन की रस्म निभाई जाती है। इस दौरान सिंदूर खेला की परंपरा सभी सुहागिन महिलाएं हमेशा की तरह निभाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/navratri-2023-bengali-society-has-been-performing-durga-puja-in-the-city-of-lakes-for-68-years-hundreds-of-people-participated/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan: राजस्थान के रामलीला मैदान में दशहरा उत्सव आयोजन पर संशय]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/politics/rajasthan-doubt-over-organizing-dussehra-festival-in-ramlila-maidan-of-rajasthan/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। देशभर में त्योहारी सीजन की शुरुआत नवरात्रि से हो गई है। हर वर्ष नवरात्रि के दौरान रामलीला मैदान में दशहरा उत्सव का आयोजन होता है लेकिन इस साल राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है जिस कारण राज्य में आचार संहिता लागू है। इस चुनावी माहौल के बीच नवरात्रि के दौरान रामलीला मैदान [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> देशभर में त्योहारी सीजन की शुरुआत नवरात्रि से हो गई है। हर वर्ष नवरात्रि के दौरान रामलीला मैदान में दशहरा उत्सव का आयोजन होता है लेकिन इस साल राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है जिस कारण राज्य में आचार संहिता लागू है। इस चुनावी माहौल के बीच नवरात्रि के दौरान रामलीला मैदान में होने वाला दशहरा उत्सव का आयोजन नहीं हो रहा है । वहीं बता दें कि साल 1951 से रामलीला मैदान में दशहरा उत्सव का आयोजन होता रहा है। इतने लंबे साल से यह परंपरा आज तक बिना रुके चल रही थी लेकिन इस साल विधानसभा चुनाव के कारण आचार संहिता को देखते हुए इस उत्सव का आयोजन नहीं किया जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>निर्वाचन विभाग ने साफ इनकार किया</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको बता दें कि दशहरा पर्व के संबंध में नगर परिषद प्रशासन ने जिला निर्वाचन विभाग से मार्गदर्शन मांगा था लेकिन जिला निर्वाचन विभाग ने साफ मना कर दिया है। ऐसे में बताया जा रहा है कि इस वर्ष दशहरे पर रामलीला मैदान में रावण परिवार नजर नही आएगा। साथ ही बता दें कि इस साल दशहरे पर रावण परिवार के पुतलों का दहन भी नहीं होगा। वहीं नगर परिषद आयुक्त का कहना है कि दशहरा उत्सव के आयोजन के लिए कम से कम 7 दोनों का समय चाहिए लेकिन वर्तमान नगर परिषद आयुक्त ने इस पर कोई विचार नहीं किया है। बता दें कि नए आयुक्त यशपाल आहूजा ने दशहरा उत्सव के टेंडर की मांग को लेकर निर्वाचन अधिकारी के पास बात रखी। हालांकि नगर परिषद आयुक्त यशपाल आहूजा ने इस टेंडर को जारी करने से मना कर दिया। उनका कहना है कि प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव होने जा रहा है। ऐसे में प्रदेशभर में आचार संहिता लागू है जिस कारण दशहरा उत्सव का आयोजन नहीं किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि नगर परिषद सभापति पिछले साल की तर्ज पर इस साल भी अपने स्तर पर दशहरा उत्सव आयोजित करेगी तो आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए उन पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष राजस्थान में आचार संहिता नहीं थी लेकिन इस बार चुनावी माहौल के बीच आचार संहिता का पालन करने के लिए नगर परिषद प्रशासन दशहरा उत्सव आयोजन के लिए हामी नहीं भरेगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सामूहिक तौर पर मनाया जाता है</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि सनातन धर्म महावीर मंदिर कमेटी सचिव शेरवाला का कहना है कि प्रदेश में एकमात्र दशहरा ऐसा पर्व है जिसे हम सामूहिक तौर पर मानते हैं । लेकिन इस बार चुनावी माहौल के बीच राजनीति इस पर्व में बाधा बनी है। उन्होंने कहा कि इस बार दशहरे पर रामलीला मैदान में उत्सव नहीं होने के कारण इलाके के लिए निराशाजनक ख़बर है। इस दौरान उन्होंने बताया कि हमारी संस्था साल 1951 से लगातार आज तक दशहरा उत्सव आयोजित कर रही हैं। आपको बता दें कि रामलीला मैदान में दशहरा उत्सव की परंपरा को सनातन मंदिर के कमेटी ने साल 2016 तक निभाई है। इसके बाद नगर परिषद प्रशासन के अधीन में रामलीला मैदान में विजयदशमी पर्व की जिम्मेदारी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>श्री गंगानगर के इतिहास में पहली बार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस निराशा जनक सूचना को सुनने के बाद नगर परिषद के नेता प्रतिपक्ष बबीता गौड़ ने बताया कि श्री गंगानगर के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब हमारी धार्मिक आस्था व संस्कृति का प्रतीक दशहरा पर्व इस साल रामलीला मैदान में नहीं मनाया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि इस साल रामलीला मैदान में दशहरा उत्सव का आयोजन नहीं होने का पूरा श्रेय नगर परिषद सभापति और आयुक्त को दिया जाता है। उन्होंने कहा कि दशहरा की तारीख तो पहले से ही ज्ञात थी फिर इसे नजरंदाज किया गया और इस बीच चुनावी तारीख की घोषणा के साथ ही प्रदेश भर में आचार संहिता लागू कर दिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य के सभापति चुनाव में व्यस्त है और नगर परिषद आयुक्त इधर आचार संहिता का हवाला देकर श्रद्धालु के भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम कर रही है। इतिहास में जो नहीं हुआ वह इस साल सच होते दिख रहा है। रामलीला मैदान में 71 साल की परंपरा को दरकिनार कर दशहरा उत्सव का आयोजन बंद कर दिया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/politics/rajasthan-doubt-over-organizing-dussehra-festival-in-ramlila-maidan-of-rajasthan/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Navratri Special : तीन दिन तक नवरात्र में पानी से अखंड ज्योत जलती है, आपने देखा ?]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/navratri-special-during-navratri-a-continuous-flame-burns-with-water-for-three-days-did-you-see/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान के कोटा जिले में कोटसुवां गांव स्थित मां चामुंडा माता का मंदिर भक्तों की आस्था का बड़ा केन्द्र माना जाता है। इस मंदिर कि खास बात है कि यहां नवरात्र में तीन दिन तक पानी से अखंड ज्योत जलाई जाती है। बता दें कि मंदिर के पुजारी और आस पास के लोगों का [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>राजस्थान के कोटा जिले में कोटसुवां गांव स्थित मां चामुंडा माता का मंदिर भक्तों की आस्था का बड़ा केन्द्र माना जाता है। इस मंदिर कि खास बात है कि यहां नवरात्र में तीन दिन तक पानी से अखंड ज्योत जलाई जाती है। बता दें कि मंदिर के पुजारी और आस पास के लोगों का मानना है कि माता का यह मंदिर लगभग नौ सौ साल पुराना है। वहीं मंदिर समिति ने बताया कि मंदिर में नवरात्री के दौरान अधिक संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ होती है। नवरात्र को लेकर सुबह चार बजे से भक्तों की आवाजाही शुरू हो जाती है, इसके बाद रात तक भक्त माँ का एक झलक पाने के लिए पंक्ति में लगे रहते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मंदिर से जुड़ा किस्सा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको बता दें कि गांव के कुछ वरिष्ठ ने बताया कि नवरात्र में कई सालों से माता का जस गीत गाया जाता है, जिसके माध्यम से माता की स्थापना के बारे में विस्तार से बताया जाता है। उन्होंने बताया कि मंदिर स्थापना तब हुई जब सन 1169 में कोटसुवां गांव में चम्बल नदी के दूसरी ओर एक दिव्य कन्या ने कालू कीर नामक नाविक को बुलाया और उसे नाव से पार करवाने के लिए कहा। जहां दिव्य कन्या ने उसे इन्द्रासन से आने की बात कही। साथ ही वरिष्ठ ने बताया कि इस बीच नाविक के मन में पाप आ गया। जिसके बाद दिव्य कन्या ने उसे नाव में ही चिपका दिया। इसकी ख़बर जब गांववासी को हुई तो वह मौके पर एकत्रित हुए, उसके बाद दिव्य कन्या ने अपना परिचय बताते हुए कहा कि 14 साल बाद यह नाविक आपलोगों को सही सलामत वापस मिलेगा। कन्या ने कहा कि आपलोग मंदिर बनवाइए, इसके बाद कन्या ने जैसा कहा था ठीक वैसा ही हुआ। साथ ही वरिष्ठ ने बताया कि उस समय के आखाराम पटेल ने माता का मन्दिर बनवाया और इसके बाद से माता रानी की पूजा-अर्चना उसी कालू कीर की पीढ़ी के लोग करते आ रहे हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पानी से जलाए जाते हैं दीपक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>माता के इस मंदिर में नवरात्र की पंचमी, षष्ठी और सप्तमी तक पानी से अखंड ज्योत जलाई जाती है। वहीं मानना है कि प्राचीन परंपरा के अनुसार इस मंदिर में नवरात्र के प्रथम दिन भोपे के शरीर पर माता विरजमान होती हैं। मंदिर पुजारी ने बताया कि इसके बाद भोपे को ढोल-नगाड़ों के साथ चंबल नदी ले जाया जाता है, इस दौरान नदी के बीचों-बीच से दो घड़े में पानी भरकर लाया जाता है, जिस पानी के घड़े को मंदिर में रखा जाता है। अब यहीं से भोपा को पवित्र किया जाता है। बता दें कि नवरात्र के दौरान माता का भोपा निराहार रहकर मंदिर परिसर में ध्यान में मगन रहता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दूध के सहारे नौ दिन व्यतीत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मंदिर कमेटी ने बताया कि माता का भोपा नवरात्री के दौरान रोजाना सिर्फ एक गिलास दूध के सहारे ही रहता है। वहीं उन्होंने बताया कि पंचमी की शाम को महाआरती के बाद भोपा के शरीर में माता का आगमन होता है। फिर घड़े वाली पानी को माता को दिया जाता है, उसके बाद पानी को ज्योत में डाला जाता है और फिर उसके बाद पानी से माता का दीपक जलाया जाता है। यह सिलसिला सप्तमी तक चलता है। यह चमत्कार को हजारों श्रद्धालु सामने से देखते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/navratri-special-during-navratri-a-continuous-flame-burns-with-water-for-three-days-did-you-see/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan: गुलाबों से तैयार किया जा रहा इत्र, विदेशों में काफी डिमांड]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-perfume-being-prepared-from-roses-in-great-demand-in-foreign-countries/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान के राजसमंद जिले में खमनौर गांव का एक परिवार अपने 4 पीढ़ियों से इत्र बनाने का काम कर रहा है. इस गांव में गुलाबों से इत्र तैयार किया जाता है जिसका डिमांड देश से लेकर विदेशों में भरी मांग के साथ होता है। राजस्थान के इस इत्र की खुशबू से पूरा भारत समेत [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान के राजसमंद जिले में खमनौर गांव का एक परिवार अपने 4 पीढ़ियों से इत्र बनाने का काम कर रहा है. इस गांव में गुलाबों से इत्र तैयार किया जाता है जिसका डिमांड देश से लेकर विदेशों में भरी मांग के साथ होता है। राजस्थान के इस इत्र की खुशबू से पूरा भारत समेत अन्य देश भी सुगंधित हो जाता है। ऐसे प्रदेश में इस जिला को इत्र की नगरी से भी जाना जाता है। खास बात है कि इस जिले में लोग इत्र के साथ-साथ औषधीय और पेय पदार्थ तैयार करने में भी मशहूर हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चंदन और मोगरा के इत्र</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इत्र बनाने वाला मोतीलाल ने बताया कि उनका यह काम 4 पीढ़ियों से आज तक जारी है। उन्होंने कहा कि साल 1964 से ही उनका सारा परिवार इत्र के साथ-साथ औषधीय और पेय पदार्थ भी तैयार करता है. इस इत्र को भारत के सभी कोनों में सप्लाई किया जाता है। लोगों में इस इत्र की मांग अधिक हैं। जिस कारण हमलोग चार पीढ़ियों से लगातार इस काम में लगे हुए है। आपको बता दें कि गुलाब से तैयार किया हुआ इत्र अहमदाबाद, कोलकाता, दिल्ली, चैन्नई, गुजरात, वड़ोदरा, गुडग़ांव सहित झारखण्ड, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, जम्मू-कश्मीर सहित भारत के अन्य राज्यों में भी सप्लाई किया जाता हैं. यही नहीं इस इत्र की विदेशों में भी खूब मांग हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चौथी पीढ़ी का योगदान</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं मोतीलाल ने साथ में बताया कि इस काम को आगे और बढ़ाने में हमारी चौथी पीढ़ी का बड़ा योगदान है। जिसने अपने परम्परागत काम को जारी रखा हैं. इस काम में मोतीलाल की बहुएं समेत पोतियां भी शामिल हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दस से बारह हजार गुलाब के पौधे</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गुलाब से तैयार किया गया इस इत्र को भट्टी के माध्यम से बनाया जाता है। इसको तैयार करने में 1 महीना का समय लगता है। बता दें कि इस जिले में माली समाज अपने खेतों में करीब दस से बारह हजार गुलाब का पौधा लगाते हैं जिससे इत्र को तैयार करने में मोतीलाल के परिवार को सहूलियत मिलती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-perfume-being-prepared-from-roses-in-great-demand-in-foreign-countries/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan Election 2023 : विप्र फाउंडेशन ने राजस्थान में मतदान तिथि बदलने की मांग क्यों शुरू कर दी, जानें वजह]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-election-2023-why-did-vipra-foundation-start-demanding-change-of-polling-date-in-rajasthan-know-the-reason/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनाव के तारीख की घोषणा कल (सोमवार) चुनाव आयोग द्वारा जारी कर दिया गया है। ऐसे में विप्र फाउंडेशन ने मतदान तिथि बदलने की मांग शुरू कर दी है। विप्र फाउंडेशन ने देवउठनी एकादशी ( 23 नवंबर) को देखते हुए यह मांग की है। वहीं राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान में विधानसभा चुनाव के तारीख की घोषणा कल (सोमवार) चुनाव आयोग द्वारा जारी कर दिया गया है। ऐसे में विप्र फाउंडेशन ने मतदान तिथि बदलने की मांग शुरू कर दी है। विप्र फाउंडेशन ने देवउठनी एकादशी ( 23 नवंबर) को देखते हुए यह मांग की है। वहीं राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग को असंस्कृत बताते हुए चुनाव आयोग से वोटिंग तिथि पर पुनर्विचार करने का विनती किया है। आपको बता दें कि विप्र फाउंडेशन के संस्थापक सुशील ओझा द्वारा देश के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को पत्र लिखा गया जिसमें मतदान तिथि में बदलाव की मांग की गई है. वहीं राजस्थान में लोगों का यह पर्व देव प्रबोधिनी एकादशी का अहम महत्व बताया जाता है , ऐसे में यह पर्व सनातन धर्म में भी सबसे उत्सवी माना जाता है। इस पर्व के चार माह बाद शादी विवाह जैसे मांगलिक कार्यो की शुभारंभ हो जाती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>लाखों लोग होंगे शामिल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको बता दें कि ओझा ने पत्र में आगे लिखा है कि राजस्थान में देवउठनी एकादशी पर हजारों शादियां होने की अनुमान हैं, जिनमें लाखों लोगों के पहुंचने की ख़बर आ रही है. वहीं शादी सीजन में मैरिज गार्डन, वाहनों आदि की डिमांड बढ़ जाती है। वहीं साथ में उन्होंने पत्र में लिखा कि चुनाव आयोग के कई मतदान केंद्र विवाह स्थलों पर ही बने हुए हैं उनकी बुकिंग अब रद्द होगी । इन सब के बीच शादी विवाह वाले परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में उन्होंने चुनाव आयोग को आग्रह करते हुए पत्र में लिखा कि मतदान तिथि को बदलने की कोशिश करे। साथ में उन्होंने मीडिया से बात चित करते हुए कहा कि राजस्थान में चुनाव की तिथि जरूर बदला जाएगा क्योंकि जिस दिन प्रदेश में चुनाव होना है उस तिथि पर हजारों की संख्या में विवाह का आयोजन है. जिस कारण वोटिंग में परेशानी होने का पूरा अनुमान है , इसलिए मैं चुनाव आयोग को पत्र लिख चुका हूं, जिसमे वोटिंग तिथि में बदलाव की मांग की गई हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चुनाव तिथि का लेखा-जोखा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राज्य में इस साल 23 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने जा रहा है. वहीं चुनाव की तिथि सामने आने से प्रदेश में आचार संहिता भी शुरू हो गया है. ऐसे में चुनाव आयोग ने कहा है कि राज्य में चुनाव के परिणाम भी 3 दिसंबर को घोषित किया जाएगा साथ में उन्होंने सभी अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा है राज्य में किसी तरह की कोई अनुशासनहीनता बर्दास्त नहीं किया जाएगा , इसलिए अलर्ट हो कर अपना कार्य शुरू कर दें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-election-2023-why-did-vipra-foundation-start-demanding-change-of-polling-date-in-rajasthan-know-the-reason/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[राजस्थान: इस मंदिर में होंगे राधा अष्टमी पर होंगे चरण दर्शन, बधाई गायन का होगा आयोजन]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-charan-darshan-will-be-held-on-radha-ashtami-in-this-temple-congratulatory-singing-will-be-organised/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। भाद्रपद शुक्ल अष्टमी पर शनिवार को राधा अष्टमी पर शनिवार को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। जयपुर शहर के श्रीकृष्ण मंदिरों में राधारानी का जन्माभिषेक होगा। वहीं बधाई गायन के आयोजन होंगे। गोविंदेवजी मंदिर में होगा आयोजन राधा अष्टमी का मुख्य आयोजन गोविंददेवजी मंदिर में होगा। दिर में राधा रानी के प्राकट्योत्सव के आयोजन शुरू [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> भाद्रपद शुक्ल अष्टमी पर शनिवार को राधा अष्टमी पर शनिवार को राधा अष्टमी मनाई जाएगी। जयपुर शहर के श्रीकृष्ण मंदिरों में राधारानी का जन्माभिषेक होगा। वहीं बधाई गायन के आयोजन होंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गोविंदेवजी मंदिर में होगा आयोजन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राधा अष्टमी का मुख्य आयोजन गोविंददेवजी मंदिर में होगा। दिर में राधा रानी के प्राकट्योत्सव के आयोजन शुरू हो चुके है। जामकारी के अनुसार मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में राधा अष्टमी पर सुबह 4.45 से 5 बजे तक तिथि पूजा होगी। इसके बाद राधा रानी को 21 लीटर दूध, 11 किलो दही, 1 किलो घी, 5 किलो बूरा और 500 ग्राम शहद से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। इस दौरान वेद पाठ किए जाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>छप्पन भोग से झांकी सजेगी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ठाकुरजी को पीली पोशाक धारण कराकर विशेष लंकरण धारण कराए जाएंगे। फूलों के श्रृंगार के साथ छप्पन भोग की झांकी सजाई जाएगी। राधा रानी को पंजीरी के लड्डू, पंजीरी और मावे की बर्फी का विशेष भोग लगाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>राधा रानी का जन्मोत्सव</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मंदिर के प्रवक्ता गोस्वामी मे बताया कि सुबह 7:45 बजे धूप झांकी खुलने पर ठाकुर जी का अधिवास पूजन होगा और छप्पन भोग के दर्शन होंगे वहीं सुबह 9:30 बजे श्रृंगार झांकी के बाद राधा रानी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस बीच कपड़े, फल, टॉफी आदि राधे रानी को अर्पित कर उछाल लुटाई जाएगी। वहीं शाम 7 बजे से रात 8:30 बजे तक विशेष उत्सव दर्शन होंगे। इस दिन शयन आरती रात 9 बजे से 9.15 बजे तक होगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-charan-darshan-will-be-held-on-radha-ashtami-in-this-temple-congratulatory-singing-will-be-organised/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व, इस दिन व्रत रहने से भगवान वासुदेव की मिलती है विशेष कृपा]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/today-is-the-festival-of-krishna-janmashtami-fasting-on-this-day-gives-special-blessings-of-lord-vasudev/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का हिन्दू धर्म में एक अलग स्थान है. जातक कथाओं और महाभारत के अनुसार मथुरा के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म देवकी माता के गर्भ से उस समय हुआ था जब चारों तरफ अन्याय, पाप और आतंक का प्रकोप था, धर्म जैसे ख़त्म सा हो गया था. धर्म [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण का हिन्दू धर्म में एक अलग स्थान है. जातक कथाओं और महाभारत के अनुसार मथुरा के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म देवकी माता के गर्भ से उस समय हुआ था जब चारों तरफ अन्याय, पाप और आतंक का प्रकोप था, धर्म जैसे ख़त्म सा हो गया था. धर्म को पुनः स्थापित करने के लिए ही द्वापर युग में कान्हा का जन्म हुआ था. आज जन्माष्टमी इस उद्देश्य से मनाई जाती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज जन्माष्टमी का पर्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जन्माष्टमी के पर्व को कृष्ण भगवान के जन्म के रूप में मनाया जाता है. यह पर्व पूरी दुनिया में श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है. बता दें, इस पर्व को लेवल भारत में ही नहीं अपितु विदेशों में बसे भारतीय भी पूरी आस्था व उल्लास से मनाते हैं. श्रीकृष्ण युगों-युगों से हमारी आस्था के केंद्र रहे हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भगवान श्रीकृष्ण ने लिया था 8 वां अवतार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मान्यताओं के अनुसार श्री हरि विष्णु ने धर्म की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण के रूप में आठवां अवतार लिया था. इस दिन श्री कृष्ण के भक्त व्रत रखते हैं. और कृष्ण की महिमा का गुणगान करते हैं. दिनभर घरों और मंदिरों में श्री हरे कृष्णा के गुड़गान चलते रहते हैं. मंदिरों को जबरदस्त तरीके से सजाया जाता है और स्कूलों में श्रीकृष्ण लीला का मंचन होता है. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्त्व है. भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि पर पूर्णावतार योगिराज श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. इसी दिन उमा-महेश्वर व्रत भी किया जाता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/today-is-the-festival-of-krishna-janmashtami-fasting-on-this-day-gives-special-blessings-of-lord-vasudev/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[रक्षाबंधन त्यौहार पर होगा भद्रा का प्रभाव, इस समय पर बिलकुल ना बांधे राखी]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/bhadra-will-have-effect-on-rakshabandhan-festival-do-not-tie-rakhi-at-all-at-this-time/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन त्यौहार पर शुभ मुहूर्त देखकर ही भाई की कलाई पर राखी बांधी जाती है. कहते हैं कि राखी केवल एक रिवाज नहीं अपितु भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है. रक्षाबंधन पर क्या रहेगी भद्रा ? मान्यता है कि रक्षाबंधन के दिन जो बहन शुभ मुहूर्त में अपने भाई को [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन त्यौहार पर शुभ मुहूर्त देखकर ही भाई की कलाई पर राखी बांधी जाती है. कहते हैं कि राखी केवल एक रिवाज नहीं अपितु भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रक्षाबंधन पर क्या रहेगी भद्रा ?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मान्यता है कि रक्षाबंधन के दिन जो बहन शुभ मुहूर्त में अपने भाई को रक्षासूत्र बांधती हैं उसके भाई पर कभी भी संकट के बादल नहीं मंडराते और जीवन में खूब तरक्की भी मिलती है. जानकारी के अनुसार इस बार रक्षाबंधन पर बड़हरा भी रहेगी। ऐसे में शुभ मुहूर्त पर ही राखी बांधे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या रहेगा शुभ मुहूर्त ?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बार दो पूर्णिमा होने यानी श्रावण शुक्ल द्वितीया पूर्णिमा बुधवार और गुरुवार को होने से भद्रा उपरान्त ही राखी बंधवाना और बांधना श्रेष्ठ रहेगा। जानकारी के अनुसार श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर शुभमुहूर्त 30 अगस्त को प्रात: 10.59 पर शुरू होकर दूसरे दिन 31 अगस्त गुरुवार प्रात: 7:6 बजे तक रहेगी। बता दें, रक्षा बंधन पूर्व पूर्णिमा को मनाया जाता है तो उसके अनुसार पूर्णिमा पर कभी भी राखी बंधवाई और बांधी जा सकती है मगर इस बार भद्रा होने से भद्रा उपरान्त ही राखी बंधवाना शुभ रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कब लगेगी भद्रा ?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस बार पूर्णिमा शुरू होते ही भद्रा लगेगी। जो तक़रीबन 10 घंटे 3 मिनट तक रहेगी। समय की बात करें तो 30 अगस्त को प्रात: 10.59 से प्रारम्भ होकर रात्रि 09:2 बजे तक भद्रा रहेगी। और यही कारण है कि 30 अगस्त को भद्रा के उपरांत 09:3 बजे से दूसरे दिन 31 अगस्त को प्रात 7.06 बजे तक राखी बंधवाना श्रेष्ठ रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या है भद्रा और इसका प्रभाव ?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भद्रा भगवान सूर्यदेव की पुत्री और न्याय के देवता शनिदेव की बहन है भगवान शनि की तरह ही माता भद्रा का स्वाभाव भी उग्र है और यही कारण है कि भद्रा के समय कोई भी कार्य करना शुभ नहीं माना जाता है. शास्त्रों के मुताबिक चंद्रमा की राशि में भद्रा का वास होता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/bhadra-will-have-effect-on-rakshabandhan-festival-do-not-tie-rakhi-at-all-at-this-time/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan: सांवलिया सेठ के दरबार में आया 9 करोड़ से अधिक का दान राशि]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-a-donation-of-more-than-9-crores-came-in-the-court-of-sanwalia-seth/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: राजस्थान के प्रमुख मंदिर में शुमार श्री सांवलिया सेठ मंदिर में इस माह भी रिकॉर्ड तोड़ दान राशि प्राप्त हुई है। इस माह मंदिर के दान पात्र से करीब 9 करोड़ रुपए से अधिक धन राशि और सोना-चांदी के गहने प्राप्त हुए हैं। वहीं मंदिर में चार चरणों में यह दान पात्र खोले गए। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर</strong>: राजस्थान के प्रमुख मंदिर में शुमार श्री सांवलिया सेठ मंदिर में इस माह भी रिकॉर्ड तोड़ दान राशि प्राप्त हुई है। इस माह मंदिर के दान पात्र से करीब 9 करोड़ रुपए से अधिक धन राशि और सोना-चांदी के गहने प्राप्त हुए हैं। वहीं मंदिर में चार चरणों में यह दान पात्र खोले गए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रुपए के साथ सोने-चांदी की भी बारिश</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस माह श्रावण मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को खोले गए धन पेटी से चार चरणों में गणना हुई। इसमें 9 करोड़ 29 लाख 33 हजार 618 रुपए दान राशि प्राप्त हुई। साथ ही 233 किलोग्राम सोना, 11 किलो 80 ग्राम चांदी, भेट कक्ष से 166 ग्राम सोना और 54 किलो 424 ग्राम चांदी प्राप्त हुई। वहीं ऑनलाइन और मणि आर्डर से 1 करोड़ 20 लाख 96 हजार 723 रुपए की राशि दान की गई।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को खोला गया भंडारा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>श्री सांवलिया सेठ मंदिर में हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को यह भंडारा खोला जाता है और खास बात यह है की मंदिर में अंदर ही भगवान के सामने ही चौक में दान पात्र से राशि को गणना की जाती है। इसमें गणना में मंदिर ट्रस्ट से जुड़े हुए सदस्य और कुछ भक्त और बैंक से जुड़े अधिकारी शामिल होते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>श्री सांवलिया सेठ देश के प्रमुख मंदिर में शामिल है, जिनमें सबसे अधिक चढ़ावा आता है। बता दें की यह राजस्थान का प्रमुख मंदिर है, जिसमें इतनी अधिक राशि दान के रूप में प्राप्त होती है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए यहां आते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-a-donation-of-more-than-9-crores-came-in-the-court-of-sanwalia-seth/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[महामृत्युंजय मंत्र के क्या फायदे, सावन में क्यों करना चाहिए जाप]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/what-are-the-benefits-of-mahamrityunjaya-mantra-why-it-should-be-chanted-in-sawan/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। सावन 4 जुलाई से शुरू होने वाला है. सावन में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है. ऐसे में महामृत्युंजय मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से मन शांत रहता है और सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है. सावन 4 जुलाई से शुरू आपको बता दें कि सावन में भगवान शिव शंकर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>सावन 4 जुलाई से शुरू होने वाला है. सावन में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है. ऐसे में महामृत्युंजय मंत्र का जाप अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से मन शांत रहता है और सभी मनोकामना पूर्ण हो जाती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सावन 4 जुलाई से शुरू</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको बता दें कि सावन में भगवान शिव शंकर का सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है. यह मंत्र हमारे मन और शरीर दोनों को प्रभावित करता है. भगवान शिव का सबसे प्रिय मंत्र नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महामृत्युंजय मंत्र</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ओम त्र्यंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम<br>उर्वारुकमिव बंधनान मृत्योर मुक्षीय मामृतात्</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"id":4075,"sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image size-full"><img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/07/download-2023-07-03T051220.964.png" alt="" class="wp-image-4075" /></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मंत्र का अर्थ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ है कि आइए हम भगवान शिव की पूजा करें, जो पवित्र हैं और सभी प्राणियों का पोषण करते हैं. जिस तरह एक पका हुआ खीरा प्राकृतिक रूप से पौधे से निकलता है, उसी तरह हम सभी को मृत्यु से मुक्ति मिले और हमें हमारी अमर प्रकृति प्रदान की जाए.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस मंत्र का प्रभाव</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस मंत्र के जाप करने से मन शुद्ध हो जाता हो. इस मंत्र से परिवार को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक विपदाओं से बचता है. शास्त्रों के अनुसार इस मंत्र के जाप करने से स्वास्थ स्वस्थ रहता है और अकाल मृत्यु नहीं होती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कब करें इस मंत्र का जाप</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मंत्र जाप के लिए सुबह- सुबह स्नान करने के बाद सबसे अच्छा समय माना जाता है. इसे ब्रह्म मुहूर्त( सुबह 4 बजे से 6 बजे) के दौरान करना शुभ माना जाता है. मंत्र जाप के लिए रुद्राक्ष माला का उपयोग करना सबसे अच्छा तरीका है क्योंकि रुद्राक्ष स्वयं भगवान शिव का प्रतिनिधित्व करता है. दिन में कम से कम पांच बार मंत्र का जाप करें. मंत्र जाप से पहले आपका मन शांत होना चाहिए. मंत्र पढ़ते समय अपने सामने भगवान शिव की मूर्ति या तस्वीर रखें, अगर इससे आपको ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है. महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख होना चाहिए.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/what-are-the-benefits-of-mahamrityunjaya-mantra-why-it-should-be-chanted-in-sawan/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan: 450 दुल्हनों ने भगवान शिव को दूल्हा मान किया समर्पण, 15 हजार बाराती बने साक्षी]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-450-brides-surrendered-to-lord-shiva-as-groom-15-thousand-baraatis-became-witnesses/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: श्रावण मास शुरू होने वाला है ऐसे में लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के अनेक उपाय करते थे। श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण मान जाता है। खास कर लड़कियों के लिए यह पर्व खासा मायने रखता है। कहा जाता है कि इसमें लड़कियां भगवान शिव की तरह [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर</strong>: श्रावण मास शुरू होने वाला है ऐसे में लोग भगवान शिव को प्रसन्न करने के अनेक उपाय करते थे। श्रावण मास को भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण मान जाता है। खास कर लड़कियों के लिए यह पर्व खासा मायने रखता है। कहा जाता है कि इसमें लड़कियां भगवान शिव की तरह पति पाने के लिए सोमवार का व्रत रखती हैं। यह मास पूरे एक महीना चलता है। इस बार श्रावण मास 4 जुलाई को शुरू हो रहा है। लेकिन इसके पहले राजस्थान में आबूरोड के ब्रह्माकुमारी संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन में शुक्रवार रात्रि को आयोजित समर्पण समारोह में पहली बार एक साथ देशभर की 450 युवतियों का दिव्य विवाह हुआ।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>15 हजार बाराती बने साक्षी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>विवाह में 450 दुल्हनों ने भगवान शिव को दूल्हे के रूप में अपनाया। इस दुल्हनों में सीए, इंजीनियर, एमटेक, एमएससी, डॉक्टर, फैंशन डिजाइनर, स्कूल शिक्षिका भी शामिल थी। समारोह में उपस्थित 15 हजार लोग बाराती के रूप में इस दिव्य विवाह का के साक्षी बने। सभी 450 बेटियों ने भगवान शिव को वर मन कर स्वयं को परमात्मा को समर्पित कर संयम का मार्ग अपनाया। सभी 450 बेटियों ने शिव को वर मान कर स्वयं को परमात्मा को समर्पित कर संयम का मार्ग अपनाया। इस दौरान खुशी में भावुक माता-पिता ने कहा कि उनका जीवन धन्य हो गया। परमात्मा से यहीं कामना है कि हर जन्म में ऐसी शक्ति स्वरूपा, कुल उद्धार करने वाली बेटी मिले।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>450 बेटियों ने धारण किया ब्रह्मचर्य व्रत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>संस्थान के इतिहास में पहली बार एक साथ 450 बेटियों ने ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर ब्रह्माकुमारी के रूप में आजीवन समाजसेवा का संकल्प लिया। इन बेटियों को खुशी में नाचते देख हर कोई भावुक हो उठा। समारोह में बेटियों के माता-पिता ने अपनी-अपनी लाड़लियों का हाथ संस्थान की मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दीदी रतनमोहिनी, संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी मुन्नी दीदी, राजयोगिनी संतोष दीदी के हाथों में सौंपा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अलसुबह 3.30 बजे से शुरू हुई बहनों की दिनचर्या</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>परमात्मा को अपना जीवन समर्पण करने वाली सभी बहनों की पहले दिन की दिनचर्या अलसुबह ब्रह्ममुहूर्त में 3.30 बजे से शुरू हुई। सबसे पहले सभी बहनों ने परमपिता शिव परमात्मा, शिव बाबा का एक घंटे ध्यान किया। इसके बाद सुबह 7 बजे से आठ बजे तक सत्संग (मुरली क्लास) में भाग लिया। शाम को दिव्य अलौकिक समर्पण समारोह में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी ने कहा कि आज एक साथ इतनी बहनों का समर्पण देखकर मन खुशी से झूम रहा है। ये बेटियां बहुत भाग्यशाली हैं। महासचिव बीके निर्वैर भाई ने कहा कि सभी बहनें जीवन में अपने कर्मों से समाज में नए उदाहरण प्रस्तुत करें। अतिरिक्त महासचिव बीके बृजमोहन भाई ने कहा कि अपना जीवन परमात्मा पर अर्पण करने से बड़ा भाग्य कुछ नहीं हो सकता है। कार्यकारी सचिव बीके मृत्युंजय ने कहा कि आपकी वाणी दुनिया के कल्याण का माध्यम बने। आपका एक-एक कर्म उदाहरणमूर्त हो। मधुरवाणी ग्रुप के कलाकारों ने गीत व कटक के कलाकारों ने विभिन्न नृत्यों की प्रस्तुति दी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/rajasthan-450-brides-surrendered-to-lord-shiva-as-groom-15-thousand-baraatis-became-witnesses/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan: क्रेन की मदद से बनाया गया 2700 किलो का रोट, इसे बनाने लगे 22 घंटे]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/society/rajasthan-2700-kg-bread-made-with-the-help-of-a-crane-it-took-22-hours-to-make-it/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: राजस्थान के सीकर जिले के प्रसिद्ध देवीपुरा बालाजी धाम में आज शनिवार के दिन हनुमान जी को 2700 किलो के रोट का भोग लगाया जाएगा। ये विशेष रोट शुक्रवार को सुबह पांच बजे बनना शुरू हुआ था और शनिवार रात तीन बजे बनाकर तैयार हुआ है। इस रोट को बनाने में पूरे 22 घंटे [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर</strong>: राजस्थान के सीकर जिले के प्रसिद्ध देवीपुरा बालाजी धाम में आज शनिवार के दिन हनुमान जी को 2700 किलो के रोट का भोग लगाया जाएगा। ये विशेष रोट शुक्रवार को सुबह पांच बजे बनना शुरू हुआ था और शनिवार रात तीन बजे बनाकर तैयार हुआ है। इस रोट को बनाने में पूरे 22 घंटे का समय लगा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बना विश्व का सबसे बड़ा रोट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस विशेष रोट की हर चीज बेहद खास है। दावा किया जा रहा है ये विश्व का सबसे बड़ा रोट है। इसे बनाने की तैयारियां दो महीने पहले से ही शुरू कर दी गई थी। वहीं इस रोट को बनाने में क्रेन का भी इस्तेमाल करना पड़ा। रोट को क्रेन की सहायता से ही बेला और सेका गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्यों बनाया गया है रोट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार देवीपुरा बालाजी धाम के महंत ओमप्रकाश शर्मा का कहना है कि इस रोट को विश्व शांति की कामना के लिए बनाया गया है। आज हनुमान जी को इसका भोग लगाया जाएगा और उसके बाद भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया जायेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या है खास</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस रोट को बनाने में 20 लाख रुपये का खर्च आया है। इसका कुल वजन 2700 किलो है। इसमें 1125 किलो आटा, 125 किलो सूजी, 1100 किलो ड्राई फ्रूट्स, 400 लीटर दूध और 400 लीटर गाय के देसी घी का इस्तेमाल किया गया है। इस रोट की गोलाई 11 फीट और मोटाई 2 फीट की है। पूरनासर धाम के संत रामदास महाराज (बापजी) के सानिध्य में इस रोट को सूरत और पूरनासर के 20 शेफ ने बनाया है। इसे बनाने में 22 घंटे का समय लगा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"id":3976,"sizeSlug":"large","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image size-large"><img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/07/महंगाई-राहत-शिविर-में-खूब-लगा-4-1024x576.png" alt="" class="wp-image-3976" /></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>स्पेशल तवा और बेलन का इस्तेमाल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:image {"id":3977,"sizeSlug":"large","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image size-large"><img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/07/महंगाई-राहत-शिविर-में-खूब-लगा-5-1024x576.png" alt="" class="wp-image-3977" /></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>2700 किलो के रोट को बनाने के लिए स्पेशल तवा, बेलन और मिक्सर की जरूरत थी। ऐसे में देवीपुरा धाम की ओर से सीकर के विश्वकर्मा इंजीनियरिंग वर्कशॉप को ऑर्डर दिया गया, जहां ये सारा सामान तैयार कराया गया। रोट को सेकने के लिए जो तवा बनाया गया उसका वजन 300 किलो और बेलन का वजन 250 किलो है। तवा, बेलन और मिक्सर तैयार करने में 2.15 लाख रुपये का खर्च आया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/society/rajasthan-2700-kg-bread-made-with-the-help-of-a-crane-it-took-22-hours-to-make-it/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[आज है देवशयनी एकादशी, जाने इस दिन क्यों वर्जित होता है चावल]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/today-is-devshayani-ekadashi-know-why-rice-is-prohibited-on-this-day/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। 29 जून को देवशयनी एकादशी है. आज सृष्टि के पालनहार भगवान वासुदेव देवशयनी एकादशी से क्षीर सागर में योग निद्रा में लीन हो जाएंगे। आज के दिन मनोकामना मांगने से भगवान हरी उन्हें पूरी कर देते हैं। आज है देवशयनी एकादशी आपको बता दें कि गुरूवार यानी आज देवशयनी एकादशी है. आज के दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>29 जून को देवशयनी एकादशी है. आज सृष्टि के पालनहार भगवान वासुदेव देवशयनी एकादशी से क्षीर सागर में योग निद्रा में लीन हो जाएंगे। आज के दिन मनोकामना मांगने से भगवान हरी उन्हें पूरी कर देते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज है देवशयनी एकादशी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको बता दें कि गुरूवार यानी आज देवशयनी एकादशी है. आज के दिन देवशयनी एकादशी व्रत रखने से सारी मुरादों की पूर्ति हो जाती है. वहीं 30 जून से चातुर्मास शुरू हो जाएगा जिसके बाद सभी शुभ कार्यों पर विराम लग जाएगा। चातुर्मास लगने के बाद ध्यान योग साधन के कार्यक्रम होंगे। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने पर देवउठनी एकादशी तक भगवान शिव धरती का कार्य भार संभालते हैं. यही कारण है कि इन महीनों में भगवान शिव की विशेष पूजा आराधना होती है. धर्म शास्त्रों के दौरान चातुर्मास को कर राशि वालों को संत सेवा जरूर करना चाहिए। वहीं इन महीनों में किए गए तप, दान, सेवा का फल जरूर प्राप्त होता है. शस्त्रों के अनुसार देवशयनी एकादशी का व्रत महिला और पुरुष दोनों को करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"id":3895,"sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image size-full"><img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/06/download-2023-06-29T021927.707.png" alt="" class="wp-image-3895" /></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित क्यों ?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिन्दू मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल नहीं खाना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है. जल पर चन्द्रमा का प्रभाव ज्यादा होता है. ऐसे में चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा अधिक हो जाती है जिससे मन विचलित और चंचल हो जाता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या है देवशयनी एकादशी की पूजा विधि ?</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जानकारी के माध्यम से भगवान नारायण यानी भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करना चाहिए। इसके बाद पीले पुष्प, धूप और दीपक से पूजा अर्चना करने के साथ आरती करनी चाहिए। अगर प्रसाद की बात करें तो देसी घी से बनी मिठाइयां अथवा खीर बना कर भगवान को चढ़ाना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/today-is-devshayani-ekadashi-know-why-rice-is-prohibited-on-this-day/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan News: इस जगह 500 वर्ष पूर्व प्रकट हुई थी हनुमान जी की यह अनोखी मूर्ति, यह है मान्यता]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/tourism/rajasthan-news-this-unique-idol-of-hanuman-ji-appeared-at-this-place-500-years-ago-this-is-the-belief/</link>
                    <description><![CDATA[नागौर: राजस्थान के नागौर में हनुमान जी के वैसे तो बहुत से मंदिर बने हुए हैं। जहां पर अलग-अलग मान्यताएं और अपना अलग-अलग इतिहास है। कई मंदिरों में मूर्ति जमीं से प्रकट हुई है तो कई जगहों पर हनुमान जी के चमत्कार की वजह से हनुमान जी के मंदिर बनाए गए हैं. ऐसा ही एक [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>नागौर</strong>: राजस्थान के नागौर में हनुमान जी के वैसे तो बहुत से मंदिर बने हुए हैं। जहां पर अलग-अलग मान्यताएं और अपना अलग-अलग इतिहास है। कई मंदिरों में मूर्ति जमीं से प्रकट हुई है तो कई जगहों पर हनुमान जी के चमत्कार की वजह से हनुमान जी के मंदिर बनाए गए हैं. ऐसा ही एक मंदिर नागौर के बुगरड़ा गांव में हुआ था। जिसमें हनुमानजी की पश्चिमी मुखी मूर्ति जो जमीन से 500 वर्ष पूर्व प्रकट हुई थी। यहां पर हनुमान जी ने कई प्रकार के चमत्कार दिखाए हैं। लेकिन सबसे ज्यादा हनुमान जी का प्रभाव प्लेग महामारी के दौरान देखने को मिला। क्योकिं अन्य गांव की तुलना में अलग यहां पर प्लैग महामारी का असर बहुत ही काम था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>500 वर्ष पुराना पेड़ आज भी है हरा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हनुमान जी के इस मंदिर की बात करें तो यहां पर मूर्ति जमीन से अचानक प्रकट हुई थी। जिन्हें वीर हनुमान जी के नाम से जाना जाता है. इसका कारण है कि यहां पर प्लेग महामारी का असर ना के बराबर देखने को मिला। वहीं मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां पर 500 वर्ष पुराना कैर का वृक्ष आज हरा भरा मौजूद है। यहां पर यह मंदिर हनुमानजी के भक्त रहते थे जिनके समय इस मंदिर का निर्माण हुआ था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हर मनोकामना होती है पूर्ण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मंदिर के पुजारी रामनिवास ने बताया कि गांव में रहने वाले सभी ब्राह्मण समाज के किसी की भी व्यक्ति शादी हो तो यहां पर आकर परिक्रमा लगानी होती है। जिससे उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहे। इस मंदिर की मान्यता की बात करे तो यहां पर आने वाले भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है और वीर हनुमान जी कृपा से गांव में सब खुशहाल है। वर्तमान समय में यह मंदिर बुगरड़ा गांव में बना हुआ है जो पुरानी शैली में मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर की बनावट की बात करे तो हवेली जैसा बना हुआ है। यदि आप इस मंदिर में जाना चाहते हो तो यह मंदिर नागौर डीडवाना बाईपास से मात्र 2.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[सीएम गहलोत प्रदेशवासियों को देंगे सौगात, महाकाल लोक की तर्ज पर बनेगा यह मंदिर]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/cm-gehlot-will-give-a-gift-to-the-people-of-the-state-this-temple-will-be-built-on-the-lines-of-mahakal-lok/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की जनता से वादा किया है कि वे तीन प्रमुख मंदिरों का विकास कर उनकी भव्यता बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। सीएम गहलोत देंगे सौगात आपको बता दें कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान वासियों को बड़ा उपहार देने जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने रविवार [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की जनता से वादा किया है कि वे तीन प्रमुख मंदिरों का विकास कर उनकी भव्यता बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सीएम गहलोत देंगे सौगात</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आपको बता दें कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान वासियों को बड़ा उपहार देने जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने रविवार को गोविंददेवजी मंदिर का दर्शन किया उसके बात उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ और महाकाल मंदिर को भव्य बनाया गया है. मेरी इच्छा है कि उसी तर्ज पर जयपुर में गोविंद देवजी मंदिर का भव्य तरीके से निर्माण हो.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सीएम ने कही मन की बात</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि मंदिर दर्शन के बाद मुख्यमंत्री गहलोत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि हम चाहते हैं कि काशी विश्वनाथ और महाकाल के मंदिर के तर्ज़ पर गोविंद देव जी मंदिर का निर्माण हो जिससे आने वाले 10 वर्ष तक सुविधा मिले. ये मंदिर लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है इसलिए उसके अनुरूप मंदिर का निर्माण हो. उन्होंने कहा कि इसी प्रयास के तहत 25 करोड़ पास किए गए थे, बाद में इसे बढ़ाकर 100 करोड़ कर दिया गया. डीपीआर बन रही है, तैयार होते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा, यह प्रयास है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन तीन मंदिर के विकास संभव</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंदिर दर्शन से जुड़ा वीडियो अपने ट्वीटर अकाउंट पर शेयर किया। उन्होंने शेयर करते हुए लिखा कि श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा। जयपुर के श्री गोविंद मंदिर में बहनों से मिली प्रभु कृपा व जनसेवा की आशीष ने राहत के संकल्प को सशक्ति प्रदान की। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री ने मार्च के महीने में अजमेर के पुष्कर, डूंगरपुर जिले में बेनेशे्वर धाम मंदिरऔर जयपुर में गोविंददेव जी मंदिर के निर्माण और विकास के लिए धन राशि की घोषणा की थी. उन्होंने कहा था कि महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर की तर्ज पर गोविंद देवजी मंदिर का विकास किया जाएगा।</p>
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                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
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                    <title><![CDATA[Ujjain Mahakal : 150 किलो मोगरे से महक उठा महाकाल दरबार, जयपुर के भक्त ने करवाई सजावट]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/ujjain-mahakal-the-mahakal-court-smelled-of-150-kg-mogra-the-devotee-of-jaipur-got-the-decoration-done/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: महाकाल के तो करोड़ो दीवाने और भक्त है। लोग अपनी श्रद्धा अनुसार महाकाल को कुछ ना कुछ चढ़ाते रहते है। ऐसे ही जयपुर के एक भक्त ने उज्जैन के महाकाल मंदिर को मोगरे की खुशबू से महका दिया। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर को रविवार शाम जयपुर के श्रद्धालु द्वारा 150 किलो मोगरे से [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/12/CYT.webp"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर</strong>: महाकाल के तो करोड़ो दीवाने और भक्त है। लोग अपनी श्रद्धा अनुसार महाकाल को कुछ ना कुछ चढ़ाते रहते है। ऐसे ही जयपुर के एक भक्त ने उज्जैन के महाकाल मंदिर को मोगरे की खुशबू से महका दिया। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर को रविवार शाम जयपुर के श्रद्धालु द्वारा 150 किलो मोगरे से आकर्षक रूप से सजवाया गया। यह श्रद्धालु गत 10 वर्षो से इसी प्रकार बाबा महाकाल का दरबार सजाते आ रहा है। जो कि आज मंदिर की सजावट के दौरान बाबा महाकाल का पूजन अर्चन अभिषेक करने के लिए मंदिर भी पहुंचे थे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>150 किलो मोगरे से सजा बाबा का दरबार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राजस्थान के जयपुर शहर में रहने वाले शेखर अग्रवाल द्वारा महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह से लेकर नदीमंडप तक 150 किलो मोगरे के फूलों से शृंगारित करवाया गया। मंदिर में की गई मोगरे की आकर्षक सजावट को देखकर यहां पहुंचे श्रद्धालु बेहद खुश नजर आए और यह समझ नहीं पाए कि आखिर आज ऐसा कौन सा विशेष पर्व है, जब बाबा महाकाल का दरबार मोगरे की महक से सुगंधित हो रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>10 वर्षो से लगातार करते आ रहे सजावट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बाबा महाकाल के दरबार को मोगरे से सजवाने वाले श्रद्धालु शेखर अग्रवाल ने बताया कि बाबा महाकाल का ही आशीर्वाद है कि मुझे और मेरे परिवार को उन्नति मिल रही है। मैंने 10 वर्ष पूर्व बाबा महाकाल का दरबार मोगरे से सजवाया था जिसके बाद में प्रतिवर्ष मंदिर आता हूँ और इसी प्रकार मंदिर की सजावट करवाता हूं। आज भी जयपुर से मोगरे के 150 किलो फूल लाकर मैंने यह सजावट करवाई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>December 3, 2024, 9:16 am</pubDate>
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                    <language>hi</language>
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