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        <title></title>
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        <lastBuildDate>April 6, 2026, 1:03 am</lastBuildDate>
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            <title>rajasthan Inkhabar</title>
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                    <title><![CDATA[राजस्थान में गुलाल गोटे से खेलते है होली, क्या है यह रंगों की गेंद]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/in-rajasthan-holi-is-played-with-gulal-gote-what-is-this-ball-of-colors/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। आज होलिका दहन की जाएगी। होलिका दहन के बाद होली का त्योहार मनाया जाएगा। होली के त्योहार हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। इसे हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। रंगों का यह त्योहार हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा को आता है। होली का त्योहार पूरे देश [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> आज होलिका दहन की जाएगी। होलिका दहन के बाद होली का त्योहार मनाया जाएगा। होली के त्योहार हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। इसे हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। रंगों का यह त्योहार हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा को आता है। होली का त्योहार पूरे देश में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है।
<h2><strong>राजस्थान की अनोखी परंपरा</strong></h2>
इस दौरान लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हैं और होली की बधाई देते हैं। होली के दिन लोगों के घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। आमतौर पर होली खेलने के लिए लोग आर्टिफिशियल रंग का इस्तेमाल करते हैं, जो कई मायनों में हानिकारक होता है। आप बाजार से कितने की हर्बल रंग क्यों नाखऱीद, लेकिन इसमें मिलावट की संभावना रहती ही है। देशभर में होली खेलने की कई सारी परंपराएं मशहूर हैं। इन्हीं में से एक जयपुर का मशहूर गुलाल गोटा। गुलाल गोटा होली मनाने का एक अनोखा तरीका है। आइए जानते हैं इस अनूठी परंपरा के बारे में।
<h2><strong>लाख से तैयार होती है गुलाल की गेंद</strong></h2>
गुलाल गोटा लाख से बनी एक छोटी सी गेंद होती है। इसमें अलग-अलग रंग के सूखे गुलाल को भरे जाते हैं। गुलाल से भरे जाने पर इसका वजन लगभग 20 ग्राम होता है। होली के दिन लोग इन्हीं गेंदों को एक-दूसरे पर फेंकते हैं, जो टकराने पर टूट जाती है और यह रंग लोगों के ऊपर गिरता है। जयपुर में होली खेलने की यह परंपरा करीबन 300 साल पुरानी है। गुलाल गोटे से होली खेलने की यह परंपरा राजा-महाराजाओं के समय से चली आ रही है। यहां कुछ मुस्लिम परिवार पीढ़ियों से गुलाल गोटे को बनाते आ रहे हैं।
<h2><strong>शाही परिवारों मे खेली जाती है गोटा होली</strong></h2>
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें स्थानीय कारीगर इन गुलाल गोटे को बनाते नजर आ रहे हैं। यूं तो गुलाल गोटे से होली खेलने की रस्म शाही परिवारों से शुरू हुई थी और तब से लेकर आज तक राजस्थान में इसी से होली खेली जाती है। खास बात यह है जयपुर में तैयार होने वाले ये इन गुलाल गोटे की मांग केवल देश ही नहीं, विदेश में भी काफी ज्यादा है। मथुरा-वृंदावन से लेकर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और सिंगापुर तक लोग इसे काफी पसंद करते हैं।
<h2><strong>इस तरह बनता है गुलाल गोटा</strong></h2>
इन्हें बनाने वाले स्थानीय कारीगरों के मुताबिक गुलाल गोटे को बनाने के लिए प्राकृतिक लाख का उपयोग किया जाता है। सबसे पहले लाख को आग में तपाकर पिघलाया जाता है। पिघले हुए इस लाख को छोटी-छोटी गेंदों का आकार दिया जाता है। इसके बाद इन गेंदों को ठंडा करने के लिए पानी में डाला जाता है। ठंडा होने के बाद इन गेंदों में अलग-अलग रंगों के गुलाल भरे जाता हैं और फिर इन्हें सील कर दिया जाता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
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                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[जानें कब है आमलकी एकादशी, का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और लाभ]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/know-when-is-amalaki-ekadashi-its-auspicious-time-worship-method-and-benefits/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। आमलकी एकादशी 10 मार्च को है। होली और महाशिवरात्रि के बीच में पड़ने वाली इस एकादशी को आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। फाल्‍गुन मास के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> आमलकी एकादशी 10 मार्च को है। होली और महाशिवरात्रि के बीच में पड़ने वाली इस एकादशी को आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। फाल्‍गुन मास के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन भगवान विष्‍णु की पूजा का खास महत्व होता है।
<h2><strong>आमलकी एकादशी के लाभ</strong></h2>
आमलकी एकादशी पर आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आवंले के पेड़ का खास तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। यह व्रत उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य के लिए रखा जाता है। इस दिन मंदिर में आंवला का पेड़ लगाने की मान्यता होती है। ऐसा माना जाता है कि आंवले के वृक्ष की पूजा और उसका सेवन करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। साथ ही भाग्य अच्छा होता है। आइए जानते है कि मूहुर्त और पूजा विधि।
<h3>आमलकी एकादशी का शुभ मूहुर्त</h3>
आमलकी एकादशी 10 मार्च, सोमवार को मनाई जाएगी। फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी 9 मार्च, रविवार सुबह 7 बजकर 45 मिनट से शुरू होगी। वहीं इसकी शुरूआत 10 मार्च, सोमवार सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर जाकर समाप्त होगी। उदया तिथि के मुताबिक आमलकी एकादशी 10 मार्च को मनाई जानी है। आमलकी एकादशी का व्रत 10 मार्च को रखा जाएगा। आमलकी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को कई तरह के लाभ मिलते हैं। धर्मग्रंथों के मुताबिक इस व्रत को करने से सैकड़ों तीर्थयात्राओं और यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
<h3><strong>आमलकी एकादशी की पूजा विधि</strong></h3>
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी तरह के पापों का नाश होता है। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। इससे जीवन के सभी दुख दूर होते हैं। व्रत करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह व्रत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और साथ ही करियर कारोबार में आगे बढ़ने के प्रयासों को सफलता मिलती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/know-when-is-amalaki-ekadashi-its-auspicious-time-worship-method-and-benefits/</guid>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[कब है होली? जान लें महाशिवरात्रि समेत कई व्रत-त्योहारों की डिटेल्स]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/when-is-holi-know-the-details-of-many-fasts-and-festivals-including-mahashivratri/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: हिंदू पंचांग का आखिरी महीना फाल्गुन आज से शुरू हो रहा है। इस महीने की शुरुआत शोभन योग में हो रही है. फाल्गुन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। फाल्गुन का महीना त्योहारों के लिहाज से भी बहुत खास माना जाता है। इस महीने होली, महाशिवरात्रि और आमलकी एकादशी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><strong>जयपुर:</strong> हिंदू पंचांग का आखिरी महीना फाल्गुन आज से शुरू हो रहा है। इस महीने की शुरुआत शोभन योग में हो रही है. फाल्गुन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। फाल्गुन का महीना त्योहारों के लिहाज से भी बहुत खास माना जाता है। इस महीने होली, महाशिवरात्रि और आमलकी एकादशी जैसे कई बड़े त्योहार आने वाले हैं। आइए देखते हैं इस महीने आने वाले व्रत और त्योहारों की पूरी लिस्ट।
<h2><strong>ये हैं त्यौहारों की लिस्ट</strong></h2>
13 फरवरी, गुरुवार- फाल्गुन माह का शुभारंभ, प्रतिपदा तिथि, ललिता जयंती
16 फरवरी, रविवार- द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी
18 फरवरी, मंगलवार- यशोदा जयंती
20 फरवरी, गुरुवार- कालाष्टमी व्रत
24 फरवरी, सोमवार- विजया एकादशी
25 फरवरी, मंगलवार- भौम प्रदोष व्रत
26 फरवरी, बुधवार- फाल्गुन शिवरात्रि, महाशिवरात्रि, महाकुंभ का अंतिम स्नान

&nbsp;
<h2><strong>3 मार्च को फाल्गुन विनायक चतुर्थी</strong></h2>
27 फरवरी, गुरुवार- फाल्गुन अमावस्या
28 फरवरी, शुक्रवार- फाल्गुन शुक्ल पक्ष प्रारंभ, प्रतिपदा ति​​थि
1 मार्च, शनिवार- फुलैरा दूज, रामकृष्ण जयंती
3 मार्च, सोमवार- फाल्गुन विनायक चतुर्थी
4 मार्च, मंगलवार- स्कन्द षष्ठी
5 मार्च, बुधवार- मासिक कार्तिगाई
6 मार्च, गुरुवार- रोहिणी व्रत
7 मार्च, शुक्रवार- मासिक दुर्गाष्टमी, होलाष्टक का प्रारंभ

&nbsp;
<h2><strong>14 मार्च को होली</strong></h2>
&nbsp;

10 मार्च, सोमवार- आमलकी एकादशी, नृसिंह द्वादशी
11 मार्च, मंगलवार- आमलकी एकादशी पारण, भौम प्रदोष व्रत
13 मार्च, गुरुवार- होलिका दहन, छोटी होली, फाल्गुन पूर्णिमा व्रत
14 मार्च, शुक्रवार- होली, चैतन्य महाप्रभु जयंती, पहला चंद्र ग्रहण, फाल्गुन पूर्णिमा का स्नान और दान

&nbsp;]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आखिरी दिन, शामिल हुए कई बड़े अभिनेता और गायक]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/last-day-of-jaipur-literature-festival-many-big-actors-and-singers-participated/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजधानी के क्लार्क्स आमेर में आयोजित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आज आखिरी दिन है। &#8216;रघुपति राघव राजा राम&#8217; भजन के साथ सोमवार को कार्यक्रम का आरंभ हुआ। बॉलीवुड एक्टर, डायरेक्टर, लेखक, प्ले राइटर मानव कौल ने &#8216;अ बर्ड ऑन माय विंडो सिल&#8217; सेशन में अपनी जिंदगी से जुड़े कई अनुभव लोगों के साथ शेयर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> राजधानी के क्लार्क्स आमेर में आयोजित जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आज आखिरी दिन है। 'रघुपति राघव राजा राम' भजन के साथ सोमवार को कार्यक्रम का आरंभ हुआ। बॉलीवुड एक्टर, डायरेक्टर, लेखक, प्ले राइटर मानव कौल ने 'अ बर्ड ऑन माय विंडो सिल' सेशन में अपनी जिंदगी से जुड़े कई अनुभव लोगों के साथ शेयर किए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मानव कौल ने बताया चाय से जुड़ा अनुभव</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मानव कौल ने कहा कि मैंने कई तरह के काम किए। चाय की दुकान खोली, पतंगें बेचने का काम किया। मैं कुछ और अच्छा कर पाऊं या नहीं। चाय बहुत अच्छी बनाता हूं। चाय मेरी जिंदगी का अहम हिस्सा है। थिएटर के दौरान जब भी ब्रेक मिलता था, उसे 'चाय ब्रेक' कहते थे, क्योंकि उस वक्त चाय के साथ बिस्किट भी मिलते थे। थिएटर करने वाले अक्सर भूखे ही रह जाते है। चाय के प्रति मेरा लगाव वहीं से शुरू हुआ था। अभिनेता और लेखक मानव कौल से कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में हिंदी के प्रोफेसर ऐश्वर्या कुमार ने चर्चा की।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अपने दोस्तों के साथ ट्रेन देखता था</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दौरान मानव कौल ने कहा कि मेरा जन्म कश्मीर के बारामूला में हुआ। होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) में बढ़ा हुआ। गांव और छोटे शहरों में पले-बढ़े लोगों में एक खास तरह की आजादी और एक तरह का कॉम्प्लेक्स होता हैं। बचपन में दुनिया देखने की चाह थी। इसलिए अक्सर अपने दोस्त सलीम के साथ होशंगाबाद रेलवे स्टेशन जाकर ट्रेनों को आते-जाते देखा था और सोचते था कि ये ट्रेनें आखिर कहां जाती हैं?</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कैलाश ने रिवील किया अपनी बुक का नाम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन गायक कैलाश खेर शामिल हुए। उन्होंने कहा कि एमबीए टाइप के लोग कन्फ्यूज होते हैं, जो ज्यादा कन्फ्यूज होते हैं, वे सीईओ बन जाते हैं। क्योंकि उनके पास कन्फ्यूज लोगों की टीम होती है। यह मेरी अगली किताब का नाम होगा। कोई रिवील नहीं करता, लेकिन मैं कर रहा हूं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[Vivah Panchami: आज विवाह पंचमी पर जानें, क्या है इसका महत्व और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/vivah-panchami-know-today-on-vivah-panchami-what-is-its-importance-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। हिंदू धर्म में विवाह पंचमी का खास महत्व होता है। विवाह पंचमी भगवान श्री राम और माता सीता के दिव्य मिलन का प्रतीक होता है। विवाह पंचमी के दिन श्रद्धा भाव के साथ माता सीता और भगवान राम की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस माता सीता और भगवान राम की पूजा करने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> हिंदू धर्म में विवाह पंचमी का खास महत्व होता है। विवाह पंचमी भगवान श्री राम और माता सीता के दिव्य मिलन का प्रतीक होता है। विवाह पंचमी के दिन श्रद्धा भाव के साथ माता सीता और भगवान राम की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस माता सीता और भगवान राम की पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विवाह पंचमी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल 2024 में विवाह पंचमी 06 दिसंबर यानी शुक्रवार को मनाई जाएगी। विवाह पंचमी शुभ मुहूर्त 5 दिसंबर की सुबह 12:49 बजे से शुरू होगा। जो 6 दिसंबर 2024 की दोपहर 12:07 बजे समाप्त होगा। विवाह पंचमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 07 बजे से आरंभ होकर 10:54 बजे तक समाप्त होगा। वहीं दूसरा पूजा का मुहूर्त शाम में 06:06 बजे से लेकर शाम 05:24 बजे तक खत्म हो जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विवाह पंचमी की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद मंदिर की सफाई करनी चाहिए। मंदिर की सफाई करने के बाद माता सीता और भगवान श्री राम की मूर्ति को स्थापित करना चाहिए। माता सीता और श्री राम के विवाह का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद भगवान राम को पीले वस्त्र और माता सीता को लाल वस्त्र चढ़ाने चाहिए। दोनों के विवाह के लिए बालकाण्ड के विवाह का पाठ करना चाहिए। पाठ करने के बाद दोनों को मीठे का भोग लगाना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>विवाह पंचमी का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके बाद दोनों की आरती उतारें। दोनों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद ले। आखिर में प्रसाद को लोगों में बांट दे। माता सीता और राम जी का विवाह करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। इतना ही नहीं दोनों का वस्त्र अर्पित करने से घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं रह जाती है। पंसदीदा वर पाने के लिए इनकी विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। दोनों की आज के दिन पूजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/vivah-panchami-know-today-on-vivah-panchami-what-is-its-importance-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Annakut Festival: लक्खी अन्नकूट महोत्सव का आयोजन, पौने 2 लाख लोगों का बांटा जाएगा प्रसाद]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/annakut-festival-lakhi-annakut-festival-organized-prasad-will-be-distributed-to-1-75-lakh-people/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। खोले के हनुमान मंदिर में रविवार को 64 वें लक्खी अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसमें अमीर-गरीब और जात-पांत के भेदभाव से हटकर शहरवासी पंगत में बैठकर अन्नकूट प्रसादी (मूंग, चौला, बाजरा, चावल, गडमढ सब्जी, कढ़ी, हलवा और भुजिया) खाएंगे। दोपहर 12.30 से रात 11 बजे तक लगभग पौने दो लाख भक्तजन प्रसादी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> खोले के हनुमान मंदिर में रविवार को 64 वें लक्खी अन्नकूट महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसमें अमीर-गरीब और जात-पांत के भेदभाव से हटकर शहरवासी पंगत में बैठकर अन्नकूट प्रसादी (मूंग, चौला, बाजरा, चावल, गडमढ सब्जी, कढ़ी, हलवा और भुजिया) खाएंगे। दोपहर 12.30 से रात 11 बजे तक लगभग पौने दो लाख भक्तजन प्रसादी दी जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रसादी बनाने की तैयारी आज से</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रसादी बनाने का काम शनिवार यानी आज से शुरू हो जाएगा। सबसे पहले लक्ष्मण डूंगरी के शिखर पर विराजे हनुमानजी, भगवान राम, माता अन्नपूर्णा, गायत्री और माता वैष्णो, द्वादश ज्योतिर्लिंग समेत सभी देवालयों में 56 व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। पवनपुत्र हनुमान को 26 किलो वजनी चांदी की पोशाक पहनाई जाएगी। साथ ही समूचे मंदिर परिसर को खास तरह से सजाया जाएगा। सुबह हनुमान जी का अभिषेक कर उन्हें चांदी की पोशाक पहनाई जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्यंजनों की निकाली जाएगी झांकी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शृंगार के बाद 56 भोग की झांकी सजेगी। सुबह 9 बजे से हरिनाम संकीर्तन, वेद पाठ और अन्नकूट भोग की महाआरती की जाएगी। साथ ही भक्तों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मुफ्त जांच और दवा बांटी जाएगी। अन्नपूर्णा माता के मंदिर में व्यंजनों की झांकी और शिव परिवार की बर्फ की झांकी निकाली जाएगी। आसपास के 61 मन्दिरों में भी भोग लगेगा। हड्डीशाह बाबा की मजार पर प्रसादी का भोग लगाकर चादर चढ़ाई जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/annakut-festival-lakhi-annakut-festival-organized-prasad-will-be-distributed-to-1-75-lakh-people/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Shyam&#8217;s  Birthday: बाबा श्याम के जन्मदिन पर मंदिरों में लगा श्रद्धालुओं का तांता]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/shyams-birthday-devotees-flock-to-temples-on-baba-shyams-birthday/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान के सीकर जिला स्थित बाबा खाटू श्याम जी में भक्तों के लिए खास इंतजाम किए गए है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को बाबा श्याम का जन्मदिवस मनाया जाता है। इस दिन बाबा श्याम को खास तरह के फूलो से सजाया जाता है। जवान सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे मेले के दौरान सुरक्षा की दृष्टि [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान के सीकर जिला स्थित बाबा खाटू श्याम जी में भक्तों के लिए खास इंतजाम किए गए है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को बाबा श्याम का जन्मदिवस मनाया जाता है। इस दिन बाबा श्याम को खास तरह के फूलो से सजाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जवान सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मेले के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस थाने में 400 सिक्योरिटी गार्ड्स, 500 आरएसी, 100 होमगार्ड्स और पुलिस के जवान श्याम श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था को संभालेंगे। श्री श्याम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष के मुताबिक कार्तिक एकादशी के दिन मंदिर कमेटी द्वारा बाबा श्याम को छप्पन भोग लगाकर भक्तों को प्रसाद बांटा जाता है। इस बार बाबा श्याम के निज मंदिर के प्रवेश द्वार पर श्रद्धालु अंदर आने से पहले श्रीनाथ जी और राधा कृष्णा की झांकियों के दर्शन करेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके साथ ही पहले श्रीनाथ जी के दर्शन किए जाएंगे। इसके बाद 10 लाइन में एंट्री करने वाले श्रद्धालु राधा-कृष्ण के दर्शन कर बाबा श्याम के दर्शन करेंगे। श्री श्याम मंदिर कमेटी ने पत्र जारी कर श्रद्धालुओं से अपील की है कि कार्तिक मेला महोत्सव के दौरान श्रद्धालु आतिशबाजी न करें। उसकी जगह पशु-पक्षियों और मानव कल्याण के लिए बाबा खाटू श्याम से मंगल कामना करें। मेले को लेकर श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगाातार जारी है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आतिशबाजी पर लगी रोक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रशासन ने भी 12 नवंबर को बाबा श्याम के जन्मदिन के मौके पर आतिशबाजी करने पर पूर्णतया रोक लगाी दी है। इसके अतिरिक्त बाबा श्याम के जन्मदिन के मौके पर मेले की वजह से 10 से 13 नवंबर तक श्याम कुंड को बंद रहेगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/shyams-birthday-devotees-flock-to-temples-on-baba-shyams-birthday/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ekadashi: राजस्थान में कब है देवउठनी एकादशी, किस दिन करें शुभ काम]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ekadashi-when-is-devuthani-ekadashi-in-rajasthan-on-which-day-should-auspicious-work-be-done/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। दीवाली के कुछ दिनों बाद पड़ने वाली एकादशी को देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। पंचाग के मुताबिक कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी की तारीख 11 नवंबर को शाम 6.46 मिनट से शुरु होगी । जो 12 नवंबर 4.4 मिनट पर समाप्त होगी। इस मुख्य कारण उदया तिथि है। उदया तिथि के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> दीवाली के कुछ दिनों बाद पड़ने वाली एकादशी को देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। पंचाग के मुताबिक कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की एकादशी की तारीख 11 नवंबर को शाम 6.46 मिनट से शुरु होगी । जो 12 नवंबर 4.4 मिनट पर समाप्त होगी। इस मुख्य कारण उदया तिथि है। उदया तिथि के मुताबिक 12 नवंबर को एकादशी तिथि मनाई जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>17 जुलाई देवशयनी एकादशी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल 17 जुलाई को देवशयनी एकादशी थी। वहीं देवउत्थान एकादशी 12 नंवबर को मनाई जाएगी। इसे देव प्रबोधनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। देवउत्थान एकादशी तिथइ के बाद सभई शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। यहीं कारण है कि हिंदू धर्म में देवउत्थान का बहुत महत्व होता है। देवउत्थान एकादशई के बाद शादी-विवाह जैसे रुके हुए सभी काम शुरू हो जाते है। शादी-विवाह की खरीदारी के कारण बाजार में भी रौनक आने लगती है। पवित्र धर्म ग्रंभ वेद-पुराण के मुताबिक एकादशी को देव जग जाते हैं। इस दिन से चतुर्मास खत्म हो जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>देवउत्थान को जागते हैं देवता</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सभी तरह के काम जैसे मुंडन संस्कार, शादी विवाह, गृह प्रवेश जैसे कई अन्य शुभ कार्य देवउत्थान के बाद किए जा सकते है। इस साल 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी है। और देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता की माने तो देवशयनी एकादशी तिथि से भगवान विष्णु स्थाई विश्राम स्थल क्षीर सागर में आराम करने के लिए चले जाते हैं। वह करीबन 4 महीने बाद आराम करने के बाद विष्णु कार्तिक माह में पड़ने वाली देवउत्थान एकादशी को जागते हैं। साथ ही संसार के कामों के भी देखते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ekadashi-when-is-devuthani-ekadashi-in-rajasthan-on-which-day-should-auspicious-work-be-done/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Govardhan Puja:  बृज में उमड़ी भक्तों की भीड़, परिक्रमा के लिए दूर-दूर से आए श्रद्धालु]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/govardhan-puja-crowd-of-devotees-gathered-in-brij-devotees-came-from-far-and-wide-for-parikrama/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। 2 नवंबर को पूरे भारत में गोवर्धन पूजा को मनाया जा रहा है। गोवर्धन पूजन के मौके पर भरतपुर में पर्व को लेकर लोगों में हर्षोउल्लास है। गोवर्धन पूजा के लिए घर-घर में गोवर्धन बनाया जा रहा है। साथ ही इसकी पूजा को लेकर तैयारी की जा रही है। गोवर्धन की खास तैयारी बृज [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> 2 नवंबर को पूरे भारत में गोवर्धन पूजा को मनाया जा रहा है। गोवर्धन पूजन के मौके पर भरतपुर में पर्व को लेकर लोगों में हर्षोउल्लास है। गोवर्धन पूजा के लिए घर-घर में गोवर्धन बनाया जा रहा है। साथ ही इसकी पूजा को लेकर तैयारी की जा रही है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गोवर्धन की खास तैयारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बृज क्षेत्र में इस त्योहार को लेकर खास तैयारी की जाती है। जहां गाय के गोबर से गोवर्धन बनाया जाता है और फिर लोग इकट्ठे होकर उसकी विधि-विधान से पूजा की जाती हैं। इस दिन छप्पन प्रकार के भोजन बनाए जाते हैं। सब्जी से बने अन्नकूट और कढ़ी से गोवर्धन भगवान को भोग लगाया जाता है। गोवर्धन, जिन्हें गिरिराज के नाम से भी जाना जाता है। इनकी परिक्रमा 7 कोस या 21 किमी की है। गिरिराज महाराज की 21 किमी में से डेढ़ किमी परिक्रमा राजस्थान के डीग जिले के पूछरी गांव में आती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>परिक्रमा का तरीका</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गोवर्धन पूजा के अवसर पर गिरिराज जी के दर्शन और परिक्रमा के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं यहां आते है। श्रद्धालु गिरिराज महाराज, कान्हा और राधा के जयकारे लगाते है। जयकारे लगाते हुए 21 किमी की यात्रा पूरी कर गिरिराज जी की परिक्रमा पूरी करते हैं। भक्त इस परिक्रमा को कई तरीके से पूरी करते हैं। कभी पैदल चलकर, दुग्ध कलश के साथ, तो कभी नली से दूध प्रवाह के साथ। ऐसे में कई भक्त कठिन परिक्रमा दंडवत के जरिए पूरी करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रास्ते के प्रमुख स्थल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भक्तग अपनी पूरी परिक्रमा दंडवत ही पूरी करते हैं। गिरिराज गोवर्धन की परिक्रमा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। गोवर्धन पर्वत को योगेश्वर भगवान कृष्ण का साक्षात रुप माना गया है। मार्ग में पड़ने वाले प्रमुख स्थल गोविन्दकुंड, आन्यौर, श्रीनाथजी, पूंछरी का लौठा, मुकुट मुखारविंद, कुसुम सरोवर, दाऊजी महराज, जतिपुरा राधाकुंड, दानघाटी और मानसी गंगा आदि है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/govardhan-puja-crowd-of-devotees-gathered-in-brij-devotees-came-from-far-and-wide-for-parikrama/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Karwa Chauth: करवा चौथ के पर जाने कब निकलेगा चांद, शुभ मुहूर्त और पूजा सामग्री]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/karwa-chauth-know-when-the-moon-will-rise-on-karwa-chauth-auspicious-time-and-puja-materials/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं की जिंदगी में महत्वपूर्ण होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए उपवास करती हैं। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस बार करवा चौथ का व्रत 20 अक्टूबर 2024 के दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं की जिंदगी में महत्वपूर्ण होता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए उपवास करती हैं। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक करवा चौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस बार करवा चौथ का व्रत 20 अक्टूबर 2024 के दिन मनाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जाने करवा चौथ का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके करवा चौथ पर कथा सुनती है और अपने पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती है। इस दिन भगवान गणेश और शिव-पार्वती के साथ करवा माता की पूजा की जाती है। इस दिन व्रती महिलाएं रात में चांद देखने के बाद ही पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं। करवा चौथ में चतुर्थी तिथि आरंभ सुबह 06:46 मिनट से शुरु होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चंद्र दर्शन का समय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जो 21 अक्टूबर 2024 को सुबह 04:16 मिनट पर समाप्त होगा। उदया तिथि के मुताबिक करवा चौथ का व्रत 20 अक्टूबर 2024 यानी रविवार को रखा जाएगा।इस दिन चंद्रमा शाम 07:57 बजे उदय होगा। ऐसे में व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं को केवल एक घंटे तक ही चांद के दर्शन होंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>व्रत के लिए पूजा सामग्री</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>करवा चौथ के व्रत में महिलाओं को इन चीजों को अपनी पूजा सामग्री में शामिल करना चाहिए। टोंटी व ढक्कन समेत मिट्टी का बर्तन, गंगाजल, जल का लोटा, दीपक, मिठाई, बूरा, मेहंदी, महावर साबुत चावल, फूल, चंदन, कुमकुम, रुई, धूपबत्ती, दही, देसी घी, शहद, चीनी, कंघी, बिंदी, चुनरी, चूड़ियां, रोली, कच्चा दूध, हल्दी, चावल, सिंदूर,बिछिया, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलवा और दक्षिणा के लिए पैसे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/karwa-chauth-know-when-the-moon-will-rise-on-karwa-chauth-auspicious-time-and-puja-materials/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Fair: कोटा के दशहरे मेले में हादसा, रावण के गिरने से टूटी गर्दन]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/fair-accident-in-dussehra-fair-of-kota-ravanas-neck-broken-due-to-fall/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान के कोटा में रावण के कुनबे को खड़ा करने काम दशहरा मैदान के विजय श्रीरंग मंच के पास किया जा रहा था। इस दौरान एक हादसा हो गया। देर रात अचानक से हाइड्रोलिक क्रेन पर लगा बेल्ट का पट्टा टूट गया। जिससे रावण का आधा शरीर ऊंचाई से नीचे गिर गया। नीचे लकड़ियों [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>राजस्थान के कोटा में रावण के कुनबे को खड़ा करने काम दशहरा मैदान के विजय श्रीरंग मंच के पास किया जा रहा था। इस दौरान एक हादसा हो गया। देर रात अचानक से हाइड्रोलिक क्रेन पर लगा बेल्ट का पट्टा टूट गया। जिससे रावण का आधा शरीर ऊंचाई से नीचे गिर गया। नीचे लकड़ियों का पेड़ा बनया गया था जिससे रावण को खड़ा करना था। पेड़े पर यह गिर गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रावण का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके चलते रावण की गर्दन और कमर की तरफ का कुछ हिस्सा टूट गया। अचानक हुए इस हादसे से बवाल मच गया। मौके पर मौजूद निगम अधिकारियों का कहना है कि रावण ज्यादा क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है। रावण बांस और रस्सी से ही बनाया गया है। ऐसे में कुछ बांस और रस्सी टूट गई है। रावण बनेाने वाले कारीगर रावण को ठीक करने में लगे हुए हैं। साथ ही रावण पर लगे हुए कपड़े और कागज को भी सही किया गया। शनिवार को समय से दशहरा मैदान में रावण खड़ा कर दिया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>लोगों ने हादसे का वीडियो बनाया</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जिस मसमय यह हादसा हुआ, उस समय दशहरा मैदान में बड़ी संख्या में लोग रावण को देखने के लिए पहुंचे थे। साथ ही लोगों ने इस हादसे का वीडियो भी बनाया। सोशल मीडिया पर यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया। इसकी सूचना मिलने के बाद नगर निगम और मेले से संबंधित अफसर और जनप्रतिनिधि घटनास्थल पर पहुंचे। दुर्घटनाग्रसित रावण को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद कारीगर तेजी से रावण को ठीक करने में लग गए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जान की हानि नहीं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दौरान गनीमत रही कि रावण को खड़ा करने के लिए जो पेड़ा बनाया गया था। उस पर कोई कारीगर मौजूद नहीं था। दूसरी ओर रावण केवल पेड़े पर ही गिरा, जिससे कम नुकसान हुआ। यदि वह नीचे गिरता तो शायद उसे दोबारा बनाने मुश्किल आती।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/fair-accident-in-dussehra-fair-of-kota-ravanas-neck-broken-due-to-fall/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Dussehra: कोटा में दशहरे मेले का अद्भुत नजारा, 500 ड्रोन से आसमान में दिखाई जाएगी रामायण]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/dussehra-amazing-view-of-dussehra-fair-in-kota-ramayana-will-be-shown-in-the-sky-with-500-drones/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान के कोटा में आज 13 वें राष्ट्रीय दशहरे मेले पर भव्य आतिशबाजी के साथ रावण दहन किया जाएगा। रावण का दहन पूरी रीति रिवाज से साथ किया जाएगा। इसके बाद शाम के 6 बजे भगवान लक्ष्मी नारायण की सवारी गढ़ पैलेस से निकाली जाएगी फिर कई मार्गों से गुजरती हुई दशहरा मैदान में [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>राजस्थान के कोटा में आज 13 वें राष्ट्रीय दशहरे मेले पर भव्य आतिशबाजी के साथ रावण दहन किया जाएगा। रावण का दहन पूरी रीति रिवाज से साथ किया जाएगा। इसके बाद शाम के 6 बजे भगवान लक्ष्मी नारायण की सवारी गढ़ पैलेस से निकाली जाएगी फिर कई मार्गों से गुजरती हुई दशहरा मैदान में पहुंचेगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ज्वार पूजन किया जाएगा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दशहरे मैदान में रियासत काली परंपरार के ज्वार पूजन और सीता जी के पाने का पूजन किया जाएगा। रावण दहन के शुभ मुहूर्त पर रावण का दहन किया जाएगा। रावण दहन को देखने के लिए लाखों की संख्या में लोग मैदान में आएंगे। ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से भी प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से सतर्क रहेगी। इस बार मेले का 20 करोड़ रुपए का इंश्योरेंस भी कराया गया है।<br>राष्ट्रीय दशहरे मेले को भव्य और ऐतिहासिक बनाने के लिए मेला समिति और निगम के अधिकारियों ने इस बार कुछ नया करने का सोचा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मेले का लाइव प्रसारण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दशहरा मेला को देश के लोगों के साथ-साथ विदेश के लोग विदेश के लोगों द्वारा लाइव देखा जा सकेगा। इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लिया जाएगा। दशहरा मेला को लाइव किया जाएगा। इतना ही नहीं कोटा के आसमान में 500 ड्रोन की मदद से रामायण का प्रसारण किया जाएगा। पुतले तैयार करने वाले कारीगरों का कहना है कि रावण का पुतला 80 फीट का होगा। कुंभकरण और मेघनाथ की पुतलों की ऊंचाई 60-60 फीट होगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रावण का 3D लुक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं इस बार रावण को 3D लुक में तैयार किया गया है। रावण के पुतले में 3D इफेक्ट डाला गया है। जिससे रावण गर्दन घुमाने,तलवार चलाने और होंठ हिलाने का भी काम करेगा। रावण के खड़े होने पर उसके कुर्ते की झालर हिलती हुई दिखाई देगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/dussehra-amazing-view-of-dussehra-fair-in-kota-ramayana-will-be-shown-in-the-sky-with-500-drones/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Vijayadashami: 184 साल से मौजूद है रावण का परिवार, प्रसाद के रुप में बांटे जाते है मंदोदरी के वस्त्र]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/vijayadashami-ravans-family-exists-for-184-years-mandodaris-clothes-are-distributed-as-prasad/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान में झालावाड़ जिले में एक ऐसी जगह है। जहां रावण का अस्तित्व आज भी मौजूद है। रावण का पूरा कुनबा आज भी मौजूद है। रावण का यह कुनबा आज से 184 साल पहले सन् 1840 में यहां स्थापित किया गया, जो आज भी यहां रहता है। रावण का विधि-विधान से वध यहीं पर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> राजस्थान में झालावाड़ जिले में एक ऐसी जगह है। जहां रावण का अस्तित्व आज भी मौजूद है। रावण का पूरा कुनबा आज भी मौजूद है। रावण का यह कुनबा आज से 184 साल पहले सन् 1840 में यहां स्थापित किया गया, जो आज भी यहां रहता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रावण का विधि-विधान से वध</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यहीं पर रावण का दरबार लगता है, और यहीं पर 184 वर्षों से विजयदशमी वाले दिन रावण का विधि-विधान से वध से किया जाता है। खास बात यह है कि यहां रावण के अलावा कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले भी जलाए जाते हैं। रावण के इस कुनबे को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। नेशनल हाइवे से गुजरने वाले लोगों की नजर जब सड़क किनारे खड़े इस रावण के कुनबे पर पड़ती है, तो भी उन्हें देखने के लिए रुक जाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दरबार और पुतले मिट्टी से तैयार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस रावण दरबार की स्थापना झालावाड़ के तत्कालीन नरेश महाराजा मदन सिंह ने साल 1840 में की थी। उस समय दरबार और पुतले मिट्टी से तैयार किए जाते थे। जिनको संभाल कर रखा जाता है। उसके बाद साल 1920 में झालावाड़ के नरेश महाराजा भवानी सिंह ने यहां मरम्मत का कार्य करवाया। इन पुतलों को पक्का बनवा दिया गया। तभी से यहां हर साल रंगने और रखरखाव का काम किया जाता है। जिसकी वजह से यह संरचना सकुशल आज भी मौजूद है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बीमार लोग ठीक होते हैं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बीमारियों और जादू टोने से परेशान लोग यहां आकर पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो लोग किसी भी प्रकार की बीमारी और जादू टोने से ग्रसित है, वह यहां आकर पूजा करते है, तो लाभ मिलता है। वह जल्दी ही ठीक हो जाते है। यहां पर प्रसाद के रुप में मंदोदरी के वस्त्र दिए जाते है। पुतले पर मंदोदरी के वस्त्र पहनाए जाते है। जिसको फाड़कर लोगों में बांटा जाता है। ऐसा माना जाता है कि मंदोदरी के वस्त्र रखने से घर में समृद्धि आती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/vijayadashami-ravans-family-exists-for-184-years-mandodaris-clothes-are-distributed-as-prasad/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[राजस्थान का एक ऐसा मंदिर जहां नवरात्रि में मां दुर्गा करती हैं अग्नि स्नान]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/a-temple-in-rajasthan-where-maa-durga-takes-fire-bath-during-navratri/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: इन दिनों देशभर में नवरात्रि की धूम मची हुई है। ऐसे में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। बता दें कि नवरात्रि आते ही मां दुर्गा के दरबार में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है. वैसे तो कई मंदिर ऐसे हैं जहां पूरे साल भक्तों की भीड़ [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> इन दिनों देशभर में नवरात्रि की धूम मची हुई है। ऐसे में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। बता दें कि नवरात्रि आते ही मां दुर्गा के दरबार में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है. वैसे तो कई मंदिर ऐसे हैं जहां पूरे साल भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा करने की एक अलग परंपरा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>भक्तों की पूरी होती है मनोकामना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आज हम आपको राजस्थान में मां दुर्गा के एक ऐसे ही शक्तिपीठ की यात्रा पर ले चलते हैं। यहां मान्यता है कि मां दुर्गा अग्नि में स्नान करती हैं। कहा जाता है कि यह मंदिर बेहद चमत्कारी है। जहां भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>उदयपुर से 60 km दूर मेवाड़ में स्थित है मंदिर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आइए आज शुरू करते हैं झीलों की नगरी उदयपुर से करीब 60 किलोमीटर दूर मेवाड़ा के प्रमुख शक्तिपीठ ईडाणा माता के ऐसे चमत्कारी मंदिर की यात्रा। यहां की मान्यता सुनकर सभी लोग दौड़े चले आते हैं। कहा जाता है कि ईडाणा माता अग्नि स्नान करती हैं। इस मंदिर में अचानक भीषण आग लग जाती है और देखते ही देखते पूरा मंदिर आग का गोला बन जाता है। वहां पर मौजूद भक्तों का कहना है कि ऐसा अब तक कई बार हो चुका है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चढ़ावा जलकर बन जाता है राख</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मंदिर से जुड़े भक्तों का कहना है कि वैसे तो माताजी कभी-कभी अग्नि स्नान करती हैं, लेकिन यह चमत्कारी घटना साल में एक या दो बार होती है। ईडाणा मां के दर्शन करने आने वाले भक्त चुनरी, प्रसाद, माला आदि लेकर आते हैं। जब मां अग्नि स्नान करती हैं तो पलक झपकते ही सब कुछ जलकर राख हो जाता है, लेकिन जब मां की मूर्ति की तस्वीर भक्तों को दिखाई देती है। चमत्कार के अलावा कुछ नहीं देखें.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>लकवा पीड़ित यहां पहुंचते ही हो जाता है ठीक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मां का दरबार एक खुले चौराहे पर स्थित है। इसके चारों ओर समिति कार्यालय, धर्मशाला आदि बने हुए हैं। मान्यता है कि लकवा से पीड़ित रोगी देवी मां के दरबार में आकर ठीक हो जाते हैं। मूर्ति के पीछे त्रिशूल स्थापित है, भक्त अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए यहां त्रिशूल चढ़ाते हैं। संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले भक्त यहां झूला चढ़ाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चैत्र नवरात्रि में अग्नि स्नान कर चुकी है मां</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मेवाड़ की शक्ति पीठ ईडाणा माता ने छह महीने पहले चैत्री नवरात्रि के पहले दिन अग्नि स्नान किया था. सुबह 10.20 बजे अचानक प्रतिमा के आसपास आग की लपटें उठने लगीं। आग की तेज लपटों का नजारा आधे घंटे तक रहा। इससे पहले पिछले साल भी 24 मार्च 2023 को चौत्र माह में ईडाणा माता ने अग्नि स्नान किया था.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>यह चमत्कार होते हुए किसी ने नहीं देखा अबतक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हालांकि, भक्तों को अभी तक इस नवरात्रि में अग्नि स्नान देखने को नहीं मिला है. माना जाता है कि देवी मां यह चमत्कार नवरात्रि के दौरान कभी भी कर सकती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/a-temple-in-rajasthan-where-maa-durga-takes-fire-bath-during-navratri/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Anant Chaturdashi: अनंत चतुदर्शी पर बप्पा को जयकारों के साथ दी जाएगी विदाई, जाने शुभ मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/anant-chaturdashi-farewell-will-be-given-with-the-cheers-of-bappa-know-the-auspicious-time/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। पूरे देश में अनंत चतुदर्शी का त्योहार बड़े जोरो-शोरो से मनाया जा रहा है। गणेश उत्सव का यह त्योहार पूरे देश में 10 दिनों तक मनाया जाता है। इसके बाद 10 दिवसीय उत्सव का समापन आज 17 सितंबर 2024 को अनतं चतुदर्शी के दिन होगा। इन दिन बप्पा अपने घर कैलाश वापस लौट जाएंगे। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>पूरे देश में अनंत चतुदर्शी का त्योहार बड़े जोरो-शोरो से मनाया जा रहा है। गणेश उत्सव का यह त्योहार पूरे देश में 10 दिनों तक मनाया जाता है। इसके बाद 10 दिवसीय उत्सव का समापन आज 17 सितंबर 2024 को अनतं चतुदर्शी के दिन होगा। इन दिन बप्पा अपने घर कैलाश वापस लौट जाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अनंत चतुर्दशी के दिन दी जाती है विदाई</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अनंत चतुर्दशी से पहले गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। भगवान गणेश भक्तों के बीच खुशहाली लेकर आते है। गणेश चतुर्थी से लेकर 10 दिनों तक देशभर के गणेश मंदिरों के साथ जगह- जगह गणेश पंडाल लगाए जाते हैं। पंडालों में गणेश जी की मूर्ति की स्थापना की जाती है। इस मौके पर भक्त गणेश जी के कई स्वरूपों को पूजते हैं। 10 दिनों के बाद अनंत चतुर्दशी पर भारी मन से बप्पा को विदाई दी जाती है। अनंत चतुर्दशी को अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अनंत चतुदर्शी का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन भगवान विष्णु को पूजा जाता है, लेकिन इस दिन गणेश जी की पूजा-अर्चना भी की जाती है। हिंदू पंचांग के मुताबिक अनंत चतुर्दशी का त्योहार भाद्रपद माह की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल चतुर्दशी 16 सितंबर को दोपहर 3:10 से आरंभ होकर और 17 सितंबर को सुबह 11:44 बजे खत्म होगी। अगर आप गणेश चतुर्थी पर शुभ मुहूर्त के मुताबिक पूजा करना चाहते हैं तो आप सुबह विष्णु भगवान की पूजा कर सकते हैं। जिसका शुभ मुहूर्त सुबह 6:07 बजे से 7:51 बजे तक है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अनंत चतुदर्शी की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गणेश विसर्जन से पहले गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के दौरान उन्हें मोदक और फल का भोग लगााया जाता है। इसके साथ ही मंत्रोच्चारण के साथ बप्पा की आरती उतारी जाती है। भगवान गणेश जी की विदाई की प्रार्थना करें। गणपति जी की मूर्ति को पूजा स्थल से उठाए। बप्पा को भारी मन से विदाई दें और अगले साल फिर आने की कामना करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/anant-chaturdashi-farewell-will-be-given-with-the-cheers-of-bappa-know-the-auspicious-time/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ganesh Chaturthi:160 साल पुराने गणेश मंदिर में दर्शन करने आते है मुस्लिम समुदाय]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ganesh-chaturthimuslim-community-comes-to-visit-160-year-old-ganesh-temple/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। देशभर में आज गणेश चतुर्थी का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। गणेश मंदिरों में भगवान गणपति की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। इस अवसर पर राजस्थान में डीडवाना के दोजराज गणेश मंदिर में भगवान लंबोदर की 9 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। भगवान गणेश की यह प्रतिमा राजस्थान की [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> देशभर में आज गणेश चतुर्थी का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा है। गणेश मंदिरों में भगवान गणपति की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। इस अवसर पर राजस्थान में डीडवाना के दोजराज गणेश मंदिर में भगवान लंबोदर की 9 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। भगवान गणेश की यह प्रतिमा राजस्थान की सबसे बड़ी प्रतिमा है। अभी तक इससे बड़ी प्रतिमा केवल इंदौर में ही स्थापित है। जिसे बड़ा गणपति कहा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>निकाह का पहला निमंत्रण बप्पा को</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस मंदिर की खास बात यह है कि शादी का पहला निमंत्रण देने से हर काम बिना किसी रुकावट के पूर्ण हो जाता है। इसीलिए यहां सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी यहां बप्पा के दर्शन के लिए आते हैं। भगवान गणेश को पहली पात्री चढ़ाकर उन्हें अपने निकाह का निमंत्रण देते हैं। भगवान गणेश की इस प्रतिमा की ऊंचाई 9 फीट है। मंदिर के पुजारी रामावतार दाधीच के मुताबिक इस गणेश मंदिर की स्थापना लगभग 160 साल पहले हुई थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भगवान की मूर्ति बनाकर स्थापित की</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मंदिर की स्थापना के दौरान निरंजनी संप्रदाय के संत यहां से गुजर रहे थे और नमक झील स्थित पाढ़ाय माता मंदिर जा रहे थे। इस दौरान जब वे इस जगह रुके तो दुन्दराज नाम के साधु ने बड़ी मटकी, मुरड़ और मिट्टी से भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमा बनाई। जब यह बात स्थानीय लोगों को इस बात का पता चला तो उन्होंने इस स्थान पर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवाई। तभी से भगवान गणेश का यह मंदिर इसी स्थान पर स्थित है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कई जानवरों की मूर्तियों वाला मंदिर</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भगवान गणेश की प्रतिमा के पास उनकी पत्नियों रिद्धि और सिद्धि की मूर्तियां भी स्थापित की गई है। इसी मंदिर परिसर में एक दिशा में बालाजी और दूसरी दिशा में राम दरबार स्थापित है। इस मूर्ति की खास बात यह है कि भगवान गणेश के ठीक बगल में नाग देवता स्थापित हैं। मंदिर के मुख्य द्वार पर दो शेरों की मूर्तियां स्थापित हैं और पास में तोते की मूर्तियां भी स्थापित हैं। डीडवाना में गणेशजी के साथ शेर, नाग और तोते की मूर्तियों वाला यह एकमात्र मंदिर है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ganesh-chaturthimuslim-community-comes-to-visit-160-year-old-ganesh-temple/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Teachers Day: राजस्थान का ऐसा शहर जहां बड़े-बड़े ऑफरों को ठुकराकर टीचिंग को बनाया अपना करियर]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/teachers-day-a-city-in-rajasthan-where-teaching-became-its-career-by-rejecting-big-offers/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। आज शिक्षक दिवस है और ऐसा हो सकता है कि शिक्षक दिवस के मौके पर हम कोचिंग कैपिटल कहे जाने वाले कोटा की बात न करें। यहां जैसे युवा और एनर्जेटिक शिक्षक शायद ही किसी दूसरे शहर में मिलेंगे। वो भी डॉक्टर- इंजीनियर की पढ़ाई छोड़कर टीचिंग में कॅरियर बनाने का ऐसा जुनून कोटा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> आज शिक्षक दिवस है और ऐसा हो सकता है कि शिक्षक दिवस के मौके पर हम कोचिंग कैपिटल कहे जाने वाले कोटा की बात न करें। यहां जैसे युवा और एनर्जेटिक शिक्षक शायद ही किसी दूसरे शहर में मिलेंगे। वो भी डॉक्टर- इंजीनियर की पढ़ाई छोड़कर टीचिंग में कॅरियर बनाने का ऐसा जुनून कोटा में ही है। यहां पढ़ने वाले छात्रों का पैशन ही आईआईटी और एम्स जैसे संस्थानों से इंजीनियर डॉक्टर प्रोफेशन चुनते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>करोड़ो का पैकेज ठुकराकर बने शिक्षक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यहां के छात्र देश-विदेश में करोड़ों के पैकेज को ठुकराकर कोटा में स्टूडेंट्स को डॉक्टर इंजीनियर बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। यहां सैकड़ों टीचर है जिन्होंने आईआईटी जैसे बड़े संस्थानों से बीटेक और देश के बड़े मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस और फिर एमडी की डिग्री लेने के बाद टीचिंग में अपना कॅरियर देखा। यहां कई आईआईटीयन्स ऐसे है जिनका सालाना पैकेज एक करोड़ से ज्यादा का है। डॉक्टरी इंजीनियरिंग कर चुके टीचर्स को यहां 30 लाख से 1.20 करोड़ तक का एनुअल पैकेज मिल रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>टीचिंग को बनाया अपना करियर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जब आप क्लास मे एंट्री लेते हैंऔर बच्चों के चेहरे पर खुशी देखते है तो वो सबसे जरूरी समय होता है। अमरनाथ आनन्द ने बीटेक IIT दिल्ली ,IIT मद्रास से कैमिकल में बीटेक किया है। नौकरी के कई बड़े ऑफर्स भी आए। लेकिन उसमें सेल्फ सेटिसफेक्शन नहीं थी। पकंज बिरला ने बीटेक के लिए IITमद्रास कोटा से कोचिंग की है। इसके बाद एमबीबीएस और फिर एम्स से पीजी किया है। पढ़ाने का पैशन उनमे शुरु से ही था। इसलिए इसी फील्ड में करियर बनाने कोटा आए थे। ऐसे कई छात्र ने जिन्होंने शिक्षक को अपना करियर बनाया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/teachers-day-a-city-in-rajasthan-where-teaching-became-its-career-by-rejecting-big-offers/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Janmashtami 2024: नंद लला के आगमन की पूरी तैयारी, 108 कलशों से होगा जलाभिषेक]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/janmashtami-2024-all-preparations-are-complete-for-the-arrival-of-nand-lala-jalabhishek-will-be-done-with-108-urns/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। पूरे देश में कृष्ण जन्माष्टमी हर्षोल्लास से मनाई जा रही है। शहर में सुबह से ही मंदिरों के सजाया जा रहा है। भक्तों ने अपने कृष्ण के स्वागत के लिए धूम-धाम से तैयारी कर रहे हैं। प्रदेश वासियों के आराध्य गोविन्ददेवजी मंदिर में मंगल आरती से ही भक्तों का आगमन शुरू हो गया है। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> पूरे देश में कृष्ण जन्माष्टमी हर्षोल्लास से मनाई जा रही है। शहर में सुबह से ही मंदिरों के सजाया जा रहा है। भक्तों ने अपने कृष्ण के स्वागत के लिए धूम-धाम से तैयारी कर रहे हैं। प्रदेश वासियों के आराध्य गोविन्ददेवजी मंदिर में मंगल आरती से ही भक्तों का आगमन शुरू हो गया है। सुबह ठाकुरजी का पंचामृत अभिषेक किया गया।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>श्रीकृष्ण का श्रृंगार किया गया</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पीली पोशाक व विशेष अलंकार से श्रीकृष्ण को सजाया गया है। फूलों से बाल-गोपाल की झांकी सजाई गई। कनक बाग स्थित श्रीराधा माधव मंदिर, जगतपुरा रोड के कृष्ण बलराम मंदिर,पुरानी बस्ती स्थित गोपीनाथ जी मंदिर, वैशाली नगर स्थित अक्षर धाम मंदिर,धौलाई स्थित इस्कॉन मंदिर में भी कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। गोविन्ददेवजी मंदिर समेत शहर के सभी वैष्णव मंदिरों में मध्य रात्रि में ठाकुरजी का जलाभिषेक होगा। गोविंददेवजी मंदिर के महंत अंजन गोस्वामी के सान्निध्य में रात 12 से 12.30 बजे तक तिथि पूजन और ठाकुरजी का जन्माभिषेक होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>31 तोपों से हवाई गर्जना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वेद मंत्रों के साथ 425 लीटर दूध, 11 किलो घी, 365 लीटर दही, 85 किलो बूरा और 11 किलो शहद से गोविंद देवजी का जन्माभिषेक किया जाएगा। ठाकुरजी को भोग लगाया जाएगा। जिसमें पंजीरी लड्डू, खीरसा व रबड़ी शामिल होगी। जन्माभिषेक के समय 31 तोपों से हवाई गर्जना एवं आतिशबाजी की जाएगी। जगतपुरा, महल योजना स्थित हरे कृष्णा मूवमेंट अक्षय पात्र परिसर में स्थित कृष्ण- बलराम मंदिर में आधी रात में 108 कलशों से जलाभिषेक किया जाएगा। श्रद्धालुओं के दर्शन की विशेष व्यवस्था की गई है। भजन मंडली श्रीकृष्ण का गुणगान कर रही है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/janmashtami-2024-all-preparations-are-complete-for-the-arrival-of-nand-lala-jalabhishek-will-be-done-with-108-urns/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Janmashtami 2024: जयपुर में जन्माष्टमी पर छुट्टी का ऐलान, त्योहार पर शोभायात्रा का आयोजन]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/janmashtami-2024-holiday-announced-on-janmashtami-in-jaipur-procession-organized-on-the-festival/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर : राजस्थान की भजनलाल सरकार की तरफ से राजधानी जयपुर में जन्माष्टमी पर हाफ डे का अवकाश घोषित किया गया है। यह छुट्टी जयपुर में मौजूद प्रदेश सरकार के सभी कार्यालयों, राजकीय उपक्रमों एवं शिक्षण संस्थानों में लागू रहेगा। यह निर्णय राजधानी जयपुर में निकलने वाली शोभायात्रा को देखते हुए लिया गया है। दोपहर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर </strong>: राजस्थान की भजनलाल सरकार की तरफ से राजधानी जयपुर में जन्माष्टमी पर हाफ डे का अवकाश घोषित किया गया है। यह छुट्टी जयपुर में मौजूद प्रदेश सरकार के सभी कार्यालयों, राजकीय उपक्रमों एवं शिक्षण संस्थानों में लागू रहेगा। यह निर्णय राजधानी जयपुर में निकलने वाली शोभायात्रा को देखते हुए लिया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दोपहर 1:30 बजे के बाद छुट्टी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस निर्णय के तहत दिन तय समय पर कार्यालय खुलेंगे लेकिन दोपहर 1:30 बजे के बाद छुट्टी रहेगी। संयुक्त शासन सचिव नीतू राजेश्वर ने गवर्नर का निर्देश जारी किया है। जिसमें बताया गया है कि, "भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की शोभा यात्रा के उपलक्ष्य में 27 अगस्त को दोपहर 1.30 बजे से जयपुर शहर में स्थित सभी राज्य सरकार के कार्यालयों, सरकारी उपक्रमों एवं शैक्षणिक संस्थानों में आधे दिन का अवकाश घोषित किया जाता है।"</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>त्योहार पर शोभायात्रा का आयोजन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>राजधानी जयपुर में बड़े पैमाने पर शोभायात्रा निकाली जाती है। इस यात्रा में सियासी जगत की हस्तियां भी शामिल होते हैं। पीछे वर्ष जयपुर में बड़ी चौपड़ पर जुलूस निकाला गया. जिसमें बीजेपी की वसुंधरा राजे और कांग्रेस के महेश जोशी भी नजर आए. यह जुलूस हवामहल से भी होकर गुजरता है जिसमें श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आते हैं। इस जुलूस को लेकर महिलाओं में काफी उत्साह होता है और वे रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर इसमें शामिल होती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जयपुर के मंदिरों में भक्तों की भीड़</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जन्माष्टमी पर जयपुर के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है. इस दौरान मंदिर को विशेष प्रकार के फूलों से सजाया जाता है। जन्माष्टमी के त्योहार पर कुछ राज्यों में श्री कृष्ण के बाल रूप को झूला झुलाने की परंपरा है, कुछ जगहों पर उनके जन्मोत्सव पर झांकी निकाली जाती है तो कुछ जगहों पर जुलूस निकालने की परंपरा है। वहीं महाराष्ट्र और गुजरात में दही-हांडी का आयोजन किया जाता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/janmashtami-2024-holiday-announced-on-janmashtami-in-jaipur-procession-organized-on-the-festival/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Raksha Bandhan: आज है रक्षाबंधन का त्योहार, जाने शुभ मूर्हूत और विधि]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/raksha-bandhan-today-is-the-festival-of-rakshabandhan-know-the-auspicious-time-and-method/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। सनातन धर्म में रक्षाबंधन के त्योहार को बहुत होता है। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन का रिश्ते का प्रतीक होता है। सावन पूर्णिमा पर बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। ऐसे में भाई अपनी बहन को गिफ्ट या पैसे देते हैं। यह त्योहार काफी लंबे से [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> सनातन धर्म में रक्षाबंधन के त्योहार को बहुत होता है। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन का रिश्ते का प्रतीक होता है। सावन पूर्णिमा पर बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं और उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। ऐसे में भाई अपनी बहन को गिफ्ट या पैसे देते हैं। यह त्योहार काफी लंबे से मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना की जाती है। इसके बाद रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। आइए जानते हैं रक्षाबंधन का शुभ मूर्हूत और पूजा विधि</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रक्षाबंधन का शुभ मूर्हूत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रक्षाबंधन के त्योहार में शुभ मूहूर्त का बहुत महत्व होता है। रक्षाबंधन वाले दिन मूर्हूत के मुताबिक ही राखी को बांधा जाता है। पंचांग के मुताबिक सावन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 19 अगस्त को शुभ मुहूर्त 03 बजकर 43 मिनट से शुरू होगा। इसके बाद पूर्णिमा तिथि का आरंभ हो जाएगा। सरल भाषा में बताएं तो अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक सावन पूर्णिमा तिथि 19 अगस्त को 03 बजकर 43 मिनट पर आरंभ हो जाएगी। वहीं, इस तिथि का समापन 19 अगस्त को रात 11 बजकर 55 मिनट पर होगा। ऐसे में रक्षाबंधन का पर्व 19 अगस्त को मनाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रक्षाबंधन की पूजा विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन सुबह स्नान करने के बाद चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। मां लक्ष्मी को श्रृंगार की चीजें अर्पित करें। भगवान विष्णु-लक्ष्मी की प्रतिमा के आगे दीपक जलाएं। इसके बाद देवी-देवता को रोली या हल्दी का तिलक लगाएं और राखी बांधे। इसके बाद अपने भाई को तिलक लगाएं और दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधें। भाई को मिठाई खिलाएं। साथ ही भगवान उनके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करें। अंत में अपने बड़े भाई के चरण स्पर्श करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/raksha-bandhan-today-is-the-festival-of-rakshabandhan-know-the-auspicious-time-and-method/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Independence Day 2024: आजादी की सूचना पर्चें बांटकर दी गई , 2 दिन तक मना आजादी का जश्न]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/independence-day-2024-information-about-independence-was-given-by-distributing-pamphlets-independence-day-was-celebrated-for-2-days/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। देश आज आजादी का जश्न मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ उस समय लोगों को इसकी सूचना देने माहोला राग एक मात्र सहारा था। वह भी गिने – चुने लोगों व शहरों तक ही सीमित था। आजादी तक रींगस स्वतंत्रता सैनानियों का आश्रय था। यहां से अनेक स्वतंत्रता सैनानी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> देश आज आजादी का जश्न मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ उस समय लोगों को इसकी सूचना देने माहोला राग एक मात्र सहारा था। वह भी गिने – चुने लोगों व शहरों तक ही सीमित था। आजादी तक रींगस स्वतंत्रता सैनानियों का आश्रय था। यहां से अनेक स्वतंत्रता सैनानी निकले। कई स्वतंत्रता सैनानियों का रींगस गुप्त अड्डा हुआ करता था। यहीं पर वे आजादी के लिए गुप्त बैठकों का आयोजन करते थे। आजादी के लिए रणनीति भी यहीं बनाई जाती थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नारों की वजह से नाम पड़ा आजाद चौक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रींगस में आजाद चौक का नाम भी वहां पर नारे लगने की वजह से पड़ा है। आजादी के साक्षी रहे शहर के वृद्धोवृद शिक्षाविद राम सिंह शेखावत का कहना है कि उस समय 'हम बहुत छोटे-छोटे हुआ करते थे'। 2 दिन तक आजाद चौक में आजादी का जश्न मनाया गया। दो दिन लगातार ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद यहां का नाम आजाद चौक रख दिया गया। इससे पहले इसका नाम कचहरी चौक था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हवाई जहाजो से उड़ाए आजादी के पर्चें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>गांव के ही स्व. सीताराम बडतला, महावीर बडतल्ला, सेडमल डाकवाला मदन लाल डाकवाला और कई अन्य लोग रामानन्द पाठशाला में पढाई करते थे। उस समय पढ़ाई भी काफी मुश्किल हुआ करती थी। हम लोग इधर – उधर घूमकर आनासागर में गायों को चरा रहे थे। उसी समय आसमान में हवाई जहाज गुजरा। उन्होंने हवाई जहाज से पर्चे नीचे डाल दिए। एक बार तो हम डर कर पेड़ों के नीचे छिप गए। बाद में उन पर्चे को देखा तो लिखा था आज से भारत आजाद। हमने वे पर्चे उठाए तथा घरों को निकल पड़े। रास्ते में जो भी मिलता उन्हें यह खबर पढ़कर सुनाते थे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/independence-day-2024-information-about-independence-was-given-by-distributing-pamphlets-independence-day-was-celebrated-for-2-days/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Muharram 2024: जयपुर में 200 साल पुराने सोने-चांदी का ताजिया, जानें क्या है महत्व]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/muharram-2024-200-year-old-gold-and-silver-tiara-in-jaipur-know-its-significance/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर : आज बुधवार को देश भर में मुस्लिम समाज का पर्व मुहर्रम मनाया जा रहा है। ऐसे में राजस्थान की राजधानी जयपुर के बाजार में 200 साल पुराना सोने चांदी से बना ताजिया रखा हुआ है। इसके बारे में कहा जाता है कि ताजिए को राजा-महराजाओं ने अपनी मन्नत पूरी होने की ख़ुशी में [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर </strong>: आज बुधवार को देश भर में मुस्लिम समाज का पर्व मुहर्रम मनाया जा रहा है। ऐसे में राजस्थान की राजधानी जयपुर के बाजार में 200 साल पुराना सोने चांदी से बना ताजिया रखा हुआ है। इसके बारे में कहा जाता है कि ताजिए को राजा-महराजाओं ने अपनी मन्नत पूरी होने की ख़ुशी में बनवाया था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>200 वर्ष पुराना सोने व चांदी से बना ताजिया</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि गुलाबी शहर के नाम से मशहूर जयपुर के त्रिपोलिया बाजार में स्थित त्रिपोलिया गेट पर 200 वर्ष पुराना सोने व चांदी से बना ताजिया रखा हुआ है। इस ताजिया को राजा-महराजाओं ने बनवाया था। इस ताजिए में करीब 10 किलो सोना और डेढ़ मण चांदी का इस्तेमाल हुआ है। इस खास ताजिए को तब बनवाया गया जब महराजाओं की मन्नत पूरी हुई थी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इमाम हुसैन की याद में मनाया जाता मुहर्रम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इमाम हुसैन की याद में मुस्लिम समुदाय आज मोहर्रम पर्व मना रहा है। मुस्लिम समाज के लिए यह महत्वपूर्ण पर्व है। इस दौरान कर्बला में इमाम हुसैन की शहादत की याद में ताजिए को दफनाया जाता है। इस प्रक्रिया में ताजिया एक अहम रोल अदा करता है, जो लोगों की आस्था और धार्मिक विश्वास को दिखाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन चीजों का प्रतिक</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जयपुर में त्रिपोलिया गेट का यह ताजिया हिस्टोरिकल, धार्मिक समेत सांस्कृतिक महत्व रखता है। हर साल मुहर्रम के मौके पर इस ताजिया को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और यह समारोह जयपुर की समृद्ध संस्कृति और साझेदारी का प्रतीक है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/muharram-2024-200-year-old-gold-and-silver-tiara-in-jaipur-know-its-significance/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Skand Shashthi 2024: आज है स्कंद षष्ठी का व्रत, जाने इसका महत्व और पूजन विधि]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/skand-shashthi-2024-today-is-skand-shashthi-fast-know-its-importance-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। भगवान शिव और देवी पार्वती के बेटे कार्तिकेय की पूजा हर महीने शुक्ल की षष्ठी तिथि को की जाती है। शास्त्रों के मुताबिक आषाढ़ के महीने में पड़ने वाली स्कंद षष्ठी का अधिक महत्व है। स्कंद षष्ठी जिसे षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस बार यह व्रत 11 जुलाई को [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> भगवान शिव और देवी पार्वती के बेटे कार्तिकेय की पूजा हर महीने शुक्ल की षष्ठी तिथि को की जाती है। शास्त्रों के मुताबिक आषाढ़ के महीने में पड़ने वाली स्कंद षष्ठी का अधिक महत्व है। स्कंद षष्ठी जिसे षष्ठी व्रत के नाम से भी जाना जाता है। इस बार यह व्रत 11 जुलाई को रखा गया है। इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>स्कंद षष्ठी की पूजन विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>दक्षिण भारत में पूजे जाने वाले मुख्य देवाताओं में से एक भगवान कार्तिकेय है। जो माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र है। भगवान स्कंद शक्ति के अद्धदेव माने जाते है। कार्तिकेय को सुब्रमण्यम, स्कंद और मुरुगन के नाम से भी जाना जाता है। भगवान कार्तिकेय को देवताओं का सेनापित कहा जाता है। स्कंद षष्ठी पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा- अर्चना की जाती है। इस दिन ब्रह्मा मुहूर्त में सुबह जल्दी उठकर स्नान करके साफ वस्त्र पहनने चाहिए। पूजा स्थल पर भगवान कार्तिकेय को फल, फूल, मिठाई और जल अर्पित करना चाहिए। षष्ठी व्रत के दिन उपवास रखकर षष्ठी व्रत की कथा सुननी चाहिए। इस दिन मांस,शराब, प्याज और लहसुन से परहेज करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>स्कंद षष्ठी का महत्व</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>स्कंद षष्ठी में पुराण के नारद-नारायण संवाद में संतान प्राप्ति और संतान पीड़ाओं जैसी समस्याओं को दूर करने वाले इस उपवास का विधान बताया गया है। इस उपवास को रखने से संतान और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। भगवान कार्तिकेय का यह उपवास करने से दुश्मनों पर जीत हासिल होती है। माना जाता है कि इस दिन उपवास करने से लोगों की जिंदगी से परेशानियां दूर हो जाती हैं। साथ ही घर में सुख-शांति बनी रहती है। पुराणों के मुताबिक स्कंद षष्ठी की उपासना से च्यवन ऋषि को आखों की ज्योति की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/skand-shashthi-2024-today-is-skand-shashthi-fast-know-its-importance-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rath Yatra 2024: आज से रथ यात्रा की शुरुआत, कितने दिन रुकते हैं भगवान जगन्नाथ मौसी के घर]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/rath-yatra-2024-rath-yatra-starts-from-today-how-many-days-does-lord-jagannath-stay-at-auntys-house/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: आज रविवार, 7 जुलाई से भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत होगी। आज से लेकर पूरे 10 दिनों तक भगवान जनमानस के बीच रहेंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितिया तिथि को रथ यात्रा मनाई जाती है। मान्यता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान अपने भाई बलराम और [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर</strong>: आज रविवार, 7 जुलाई से भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत होगी। आज से लेकर पूरे 10 दिनों तक भगवान जनमानस के बीच रहेंगे. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितिया तिथि को रथ यात्रा मनाई जाती है। मान्यता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ मौसी के घर जाते हैं। इस पर्व को देश भर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन ओड़िशा के पूरी शहर में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में भव्य रथयात्रा निकाली जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गुंडीचा भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि यह यात्रा दुनियाभर में प्रशिद्ध है। इस दौरान देश विदेश से लोग पहुंचते हैं। ऐसा इसलिए करते है क्योंकि माना जाता है कि रथ यात्रा के दर्शन मात्र से व्यक्ति को हजारों यज्ञों के पुण्य प्राप्त होते हैं। आज तीनों भगवान रथ में सवार होकर गुंडीचा मंदिर की तरफ प्रस्थान करेंगे इसके बाद सोमवार या मंगलवार तक भगवान गुंडीचा मंदिर पहुंच जाएंगे और 15 जुलाई तक यहीं रुकेंगे, फिर 16 जुलाई को सभी देवी-देवता को वापस जगन्नाथ मंदिर लाया जाएगा। यह परंपरा सदियों से चलती आ रही है। यहां भगवान के लिए तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। बता दें कि गुंडीचा को मौसी का घर माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्यों खास है रथ यात्रा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भक्तों के लिए रथयात्रा इसलिए अधिक खास होता है कि इस दौरान भगवान मंदिर से बाहर निकल कर भक्तों को दर्शन देते हैं। इस वजह से रथयात्रा को अधिक खास बताया गया है। वहीं इस पर्व को भाई बहन की पूजा का पर्व माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज से शुरू होगी यात्रा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>-वैदिक पंचांग के मुताबिक, जगन्नाथ रथ यात्रा 07 जुलाई को सुबह 8:05 बजे से शुरू हो चुकी है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>– यह यात्रा सुबह 09 बजकर 27 मिनट तक निकाली गई है.<br>– इसके बाद यात्रा दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से फिर से शुरू होगी.<br>– इस बार यात्रा 01 बजकर 37 मिनट पर विश्राम लेगी.<br>– इसके बाद शाम 04 बजकर 39 मिनट से यात्रा शुरू होगी.<br>– अब यह यात्रा 06 बजकर 01 मिनट तक चलेगी.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/rath-yatra-2024-rath-yatra-starts-from-today-how-many-days-does-lord-jagannath-stay-at-auntys-house/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ashadha Amavasya: आज है आषाढ़ अमावस्या, जानिए पूजन विधि और शुभ मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ashadha-amavasya-today-is-ashadha-amavasya-know-the-method-of-worship-and-auspicious-time/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। आषाढ़ अमास्या के दिन नदी में स्नान करने के बाद पितरों का तर्पण किया जाता है। दान-धर्म के कार्य किए जाने की परंपरा होती है। इस दिन किसान हल और खेती से संबंधित सभी उपकरणों की पूजा करते हैं। आषाढ़ अमास्या 5 जुलाई यानी आज के दिन मनाई जा रही है। आषाढ़ मास की [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> आषाढ़ अमास्या के दिन नदी में स्नान करने के बाद पितरों का तर्पण किया जाता है। दान-धर्म के कार्य किए जाने की परंपरा होती है। इस दिन किसान हल और खेती से संबंधित सभी उपकरणों की पूजा करते हैं। आषाढ़ अमास्या 5 जुलाई यानी आज के दिन मनाई जा रही है। आषाढ़ मास की अमास्या का मुहूर्त 5 जुलाई 4:57 मिनट पर शुरू हो चुका है। मुहूर्त का समापन 6 जुलाई 4:26 मिनट पर होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गंगा घाट पर स्नान करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>उदयातिथि के मुताबिक आषाढ़ अमास्या 5 जुलाई को मनाई जा रही है। ब्रह्मा मुहूर्त में उठकर सभी कामों को जल्दी से निपटाकर स्नान कर लेना चाहिए। आषाढ़ अमास्या के दिन गंगा स्नान का बहुत महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि आषाढ़ अमावस्या के दिन गंगा नदी में जरुर स्नान करें। अगर आप स्नान करने के लिए गंगा घाट नहीं जा पा रहे है तो घर में नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल डालकर स्नान कर लें। इसके बाद भगवान सुर्य को अर्घ्य दें। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा- अर्चना करनी चाहिए। आषाढ़ अमास्या के दिन अपनी योग्यता के अनुसार दान जरुर करें। पितरों की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध आदि कर सकते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बुरी नजर से बचाने का उपयुक्त तरीका</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अमास्या का व्रत करने से हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। आषाढ़ अमावस्या का व्रत बुरी नजर से बचाने के लिए बहुत उपयुक्त माना जाता है। इसके साथ ही यह सभी बुरी शक्तियों के प्रभाव को कम करने के लिए भी कारगर साबित होता है। अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए अमास्या व्रत का अधिक महत्व होता है। इस दिन यदि मुमकिन हो तो अपने पूर्वजों के लिए खाने-पीने का सामान अवश्य निकाल दें। इसके अतिरिक्त ऐसा माना जाता है कि कोई भी व्यक्ति अमास्या व्रत का रखता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ashadha-amavasya-today-is-ashadha-amavasya-know-the-method-of-worship-and-auspicious-time/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Sawan 2024: सावन की शुरुआत? पहला सोमवार का डेट क्या है?]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/sawan-2024-when-does-sawan-start-what-is-the-date-of-first-monday/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: सावन (Shravan) हिंदू पंचांग का 5वां माह है. यह माह देवों के देव महादेव का सबसे प्रिय महीना है। इस पूरे पवित्र माह में भोलेशंकर (Shiv ji) का अभिषेक, पूजा, मंत्र जाप आदि करने वालों को जीवन से सारी परेशानी खत्म हो जाती है। ऐसे में सावन माह में सोमवार व्रत (Sawan somwar vrat) [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर</strong>: सावन (Shravan) हिंदू पंचांग का 5वां माह है. यह माह देवों के देव महादेव का सबसे प्रिय महीना है। इस पूरे पवित्र माह में भोलेशंकर (Shiv ji) का अभिषेक, पूजा, मंत्र जाप आदि करने वालों को जीवन से सारी परेशानी खत्म हो जाती है। ऐसे में सावन माह में सोमवार व्रत (Sawan somwar vrat) का अपना एक खास महत्व है. बता दें कि भगवान शिव के भक्तों को सावन के माह का बेसब्री से इंतजार रहता है. ऐसे में चलिए जानते है, इस साल सावन 2024 में कब से शुरू है, इस बार कितने सोमवार व्रत पड़ेंगे, और इस उपवास का क्या महत्व है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सावन 2024 डेट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सावन शुरू होगा - 22 जुलाई 2024</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सावन खत्म होगा - 19 अगस्त 2024</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस बार पांच सावन सोमवार 2024</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>22 जुलाई 2024 - पहला सावन सोमवार<br>29 जुलाई 2024 - दूसरा सावन सोमवार<br>5 अगस्त 2024 - तीसरा सावन सोमवार<br>12 अगस्त 2024 - चौथा सावन सोमवार<br>19 अगस्त 2024 - पांचवां सावन सोमवार</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सावन माह को कहा जाता है श्रावण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस माह में श्रवण नक्षत्र वाली पूर्णिमा पड़ती है. इस कारण से भी सावन माह को श्रावण कहा जाता हैं. बता दें कि सावन की शुरुआत के साथ ही सभी मंदिरों में भगवान शिव के जयकारे गूंजने लगते हैं. सावन माह के सभी दिनों में भक्तो का तांता लगा रहता है। इस दौरान भोलेनाथ भक्तों की भक्ति से काफी खुश रहते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शिवपुराण के अनुसार इस माह की मान्यता</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शिवपुराण के अनुसार, सावन का महीना श्रवण करने यानी सुनने का है, इसलिए इसका नाम श्रावण है. इस माह में धार्मिक कथाएं और प्रवचन सुनने की अपनी एक अलग परंपरा है. सावन माह भोलेनाथ को प्रिय होने की दो खास वजहें हैं. पहली, इसी महीने से देवी पार्वती ने शिव जी को पति रूप में पाने के लिए तप शुरू किया था. दूसरी, देवी सती के जाने के बाद शिव जी को फिर से अपनी शक्ति यानी देवी पार्वती पत्नी के रूप में वापस मिली थीं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/sawan-2024-when-does-sawan-start-what-is-the-date-of-first-monday/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Eid Mubarak: भारत-पाक बॉर्डर पर &#8216;ईदमुबारक&#8217; के साथ बंटीं मिठाइयां, देखें तस्वीरें]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/world/eid-mubarak-sweets-distributed-with-eid-mubarak-on-india-pak-border-see-pictures/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर : देश भर में कल सोमवार को मुस्लिम समाज का पर्व ईद-उल-अजहा बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान सौहाद्र का रिस्ता बना रहे इसके लिए पड़ोसी देश पाकिस्तान को भारत ने बधाई बात के साथ मिठाइयां भी दी। ईद के मौके पर पश्चिमी राजस्थान बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ के जवानों ने पाकिस्तान [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर : </strong>देश भर में कल सोमवार को मुस्लिम समाज का पर्व ईद-उल-अजहा बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान सौहाद्र का रिस्ता बना रहे इसके लिए पड़ोसी देश पाकिस्तान को भारत ने बधाई बात के साथ मिठाइयां भी दी। ईद के मौके पर पश्चिमी राजस्थान बॉर्डर पर तैनात बीएसएफ के जवानों ने पाकिस्तान रेंजर के साथ मिठाइयों और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान किया.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सौहार्दपूर्ण संबंधों को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बीएसएफ के जवानों ने राजस्थान के श्रीगंगानगर, बीकानेर और जैसलमेर समेत भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर अलग-अलग बॉर्डर चौकिया पर मिठाइयां और शुभकामनाएं बांटीं. बता दें कि इस अनोखे अंदाज को भारत-पाकिस्तान की सौहार्दपूर्ण संबंधों और तालमेल को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कई बार नहीं दिए गए मिठाई</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इससे पहले कई बार दोनों देश के जवानों ने एक दूसरे को मिठाइयां तो दूर पर्व की बधाई भी नहीं दी। क्योंकि कुछ सामाजिक तत्व ने हिंसा को अंजाम दिया जिसको लेकर यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि विशेष मौके पर मिठाइयों और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करने की परंपरा दोनों देशों के बीच सदियों से चलती आ रही है. यह सद्भावना का प्रतीक है. इसलिए इस परंपरा को कायम रखते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सीमा पर BSF के जवान सुरक्षा को लेकर है अलर्ट</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इंडिया -पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर तैनात BSF के जवान सुरक्षा को लेकर भी हमेशा अलर्ट मोड पर रहते हैं. ईद हो या अन्य त्योहार, सभी पर्व पर एक दूसरे के साथ शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करते है। हालांकि सीमा सुरक्षा बल बॉर्डर इलाकों में जगह-जगह पर कड़ी चौकसी बरतता है. देश की बॉर्डर की सुरक्षा के लिए 24 घंटे मुस्तेदी के साथ तैनात रहते हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/world/eid-mubarak-sweets-distributed-with-eid-mubarak-on-india-pak-border-see-pictures/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[dhumavati jayanti: आज है धूमावती जयंती, जानिए क्यो महादेव ने अपनी ही पत्नी को दिया श्राप?]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/dhumavati-jayanti-today-is-dhumavati-jayanti-know-why-mahadev-cursed-his-own-wife/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। इस साल धूमावती जयंती 14 जून यानि आज के दिन मनाई जाती है। धूमावती मां पार्वती का ही एक रूप है। मां धूमावती के हाथ में तलवार देखी जा सकता है। धूमावती देवी के बाल बिखरे हुए होते है। देवी का यह रूप काफी भयानक और रौद्र है। मां धूमावती की पूजा से पापियों [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> इस साल धूमावती जयंती 14 जून यानि आज के दिन मनाई जाती है। धूमावती मां पार्वती का ही एक रूप है। मां धूमावती के हाथ में तलवार देखी जा सकता है। धूमावती देवी के बाल बिखरे हुए होते है। देवी का यह रूप काफी भयानक और रौद्र है। मां धूमावती की पूजा से पापियों और राक्षसों का नाश होता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मां धूमावती की पूजन विधि</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हर साल ज्येष्ठ के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां धूमावती की जयंती के रूप में मनाया जाता है।इनकी अराधना से व्यक्ति के जीवन की विपत्ति, रोग और अन्य कई समस्याए दूर हो जाती है। लेकिन मां धूमावती की पूजा सुहागिन महिलाओं को नहीं करनी चाहिए। धूमावती जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहन लें। देवता को अर्घ्य अर्पित करें। गंगाजल से पूरे घर को पवित्र करें। मां धूमावती की पूजा करें जिसमें सफेद फूल और सफेद रंग के कपडे अर्पित करें। अपने पूजा में अक्षत, धतूरा, शहद, फल, चंदन, कपूर, नारियल, कुमकुम, आक, दूर्वा, सुपारी और पंचमेवा जरूर शामिल करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मां धूमावती की पौराणिक कथा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मां धूमावती की कई पौराणिक कथाएं चर्चित है। इनमें से मुख्य महादेव और देवी पार्वती की एक कथा है। इस पौराणिक कथा में एक बार देवी पार्वती ने महादेव से अपने लिए खाने की व्यवस्था करने को कहा था। लेकिन जब तक महादेव देवी पार्वती के खाने की व्यवस्था कर पाते। उनकी भूख से सब्र का बांध टूट जाता हैं। देवी पार्वती क्रोधित हो जाती है। उन्होंने भूख से व्याकुल होकर अपने ही पति महादेव को निगल लेती है। परंतु महादेव के गले में जहर होने के कारण वह महादेव को अपने गले से नीचे नहीं निगल पाती हैं। उनके शरीर से धुंआ निकलने लगता है और उनका रूप रौद्र हो जाता हैं। देवी-देवताओं के कहने पर देवी पार्वती ने  महादेव को मुक्त किया। मुक्त होने के बाद क्रोध में आकर महादेव ने देवी पार्वती को वृद्ध विधवा होने का श्राप दिया था।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/dhumavati-jayanti-today-is-dhumavati-jayanti-know-why-mahadev-cursed-his-own-wife/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[ज्येष्ठ पूर्णिमा पर कर लें ये कार्य, मिलेगी सफलता, मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/do-this-work-on-jyeshtha-purnima-you-will-get-success-goddess-lakshmi-will-be-happy/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर : ज्येष्ठ पूर्णिमा ज्येष्ठ माह में मनाया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा का अपना एक अलग महत्व है। ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि को हिंदू धर्म में सबसे शुभ तिथियों में से एक बताई गई है. इस तिथि पर भगवान चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण दिखते हैं. इसके साथ ही पूर्णिमा तिथि [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर : </strong>ज्येष्ठ पूर्णिमा ज्येष्ठ माह में मनाया जाता है। हिंदू धर्म के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा का अपना एक अलग महत्व है। ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि को हिंदू धर्म में सबसे शुभ तिथियों में से एक बताई गई है. इस तिथि पर भगवान चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण दिखते हैं. इसके साथ ही पूर्णिमा तिथि पर भगवान चंद्रमा की किरणें धरती पर पहुंच कर समृद्धि और सौभाग्य बढाती हैं. इस तिथि पर स्नान और दान-धर्म करना अति पुण्यदायी बताया गया है. ऐसे में इस अवसर पर अगर आप कुछ विशेष उपाय करते हैं तो आपके जीवन में आएं सभी परेशानी नस्ट हो जाएंगे। तो आइए जानते हैं उन उपायों को।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>21 जून को सुबह 6:1 बजे से होगी शुरुआत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा की शुरुआत 21 जून 2024 को सुबह 6:1 बजे से होगी. वहीं, इसका समापन 22 जून 2024 को सुबह 5:7 मिनट पर होगा. ऐसे में इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा का उपवास 21 जून, शुक्रवार को रखा जाएगा. इसके साथ ही स्नान-दान 22 जून, शनिवार के दिन करना शुभ बताया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पीपल पेड़ में चढ़ाएं जल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, ज्येष्ठ पूर्णिमा पर एक लोटे में पानी भर कर उसमें कच्चा दूध और पतासा डालकर पीपल के पेड़ को चढाने से व्यक्ति का फंसा धन वापस मिल जाता है और उसे कार्य क्षेत्र में भी लाभ मिलता है .</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दूध में शहद और चंदन मिलाकर जल चढ़ाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यदि आपकी कोई इच्छा पूरी नहीं हो रही है, तो आपको ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन चंद्र देव की पूजा -अर्चना करनी चाहिए और दूध में शहद और चंदन मिलाकर चंद्रमा को जल अर्पित करना चाहिए. कहा जाता है कि इस उपाय को करने से आपकी मनोकामनाएं पूरी होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सवा किलो चावल को लाल कपड़े में बांध कर रखे</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आपको मेहनत करने के बावजूद सफलता हाथ नहीं लग रही है, तो जातक ज्‍येष्‍ठ पूर्णिमा तिथि पर लाल रंग के कपड़े में सवा किलो चावल रखे और इसे अपनी तिजोरी में रख दें. इससे आपके घर के अंदर से दरिद्रता खत्म हो जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/do-this-work-on-jyeshtha-purnima-you-will-get-success-goddess-lakshmi-will-be-happy/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Special Day: जून में ख़ास होने वाले है ये दिन, वट सावित्री से योग दिवस भी इसी माह में]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/special-day-these-days-are-going-to-be-special-in-june-yoga-day-from-vat-savitri-will-also-be-in-this-month/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: आज से जून माह की शुरुआत हो चुकी है। इस माह में निर्जला एकादाशी के साथ, मुस्लिमों का पर्व बकरीद भी है। साथ ही इस माह में कई बड़े त्योहार भी हैं। इस माह में 6 जून को वट सावित्री व्रत भी मनाया जाएगा। साथ में विश्व पर्यावरण दिवस भी है। इस स्पेशल दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> आज से जून माह की शुरुआत हो चुकी है। इस माह में निर्जला एकादाशी के साथ, मुस्लिमों का पर्व बकरीद भी है। साथ ही इस माह में कई बड़े त्योहार भी हैं। इस माह में 6 जून को वट सावित्री व्रत भी मनाया जाएगा। साथ में विश्व पर्यावरण दिवस भी है। इस स्पेशल दिन पर वन विभाग की तरफ से कई कार्यकर्मों का आयोजन होने वाला है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>फादर्स डे के साथ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि जून माह में ही फादर्स डे मनाया जाता है। इस स्पेशल डे सभी फादर को समर्पित होता है। इस तिथि पर घरों में जश्न क माहौल देखने को मिलता है। इस माह में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी है, जो 21 तारीख को मनाया जाएगा। इस दिवस पर शहर में कई जगहों पर योग शिविरों का आयोजन भी होना है। 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाएगा, इस दिन राजस्थान में कई जगहों पर रक्तदान शिविर लगेंगे। वहीं हिंदी में इसे ज्येष्ठ का महीना कहा जाता है। इस माह को विशेष तौर पर दान.पुण्य का महीना कहा जाता है। इस माह के एकादशी और पूर्णिमा पर लोगों को शरबत व शिकंजीए जूस निशुल्क में बांटा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस माह में ये दिन खास</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>1 जून को विश्व दूध दिवस<br>2 जून को अपरा एकादशी<br>3 जून को विश्व साइकिल दिवस<br>4 जून को मासशिवरात्रि, भौम प्रदोष व्रत, आमचुनाव का रिजल्ट<br>5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस<br>6 जून ज्येष्ठ वट सावित्री व्रत, देवपितृकार्य अमावस्या, शनि जयंती<br>7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस<br>9 जून को रवि पुष्य नक्षत्र व महाराणा प्रताप जयंती<br>12 जून को बाल श्रम निषेध दिवस<br>14 जून को विश्व रक्तदान दिवस<br>16 जून को फादर्स डे<br>17 जून को इदुलजूहा बकरीद<br>18 जून को निर्जला एकादशी, अंतरराष्ट्रीय पिकनिक दिवस<br>20 जून से वर्षा ऋतु प्रारंभ<br>20 जून राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस<br>21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, अंतरराष्ट्रीय संगीत दिवस<br>22 जून संत कबीर जयंती<br>23 जून विश्व ओलंपिक दिवस<br>25 जून संकष्टी चतुर्थी<br>26 जून विश्व मादक द्रव निषेध दिवस 28 जून शुक्र उदय</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/special-day-these-days-are-going-to-be-special-in-june-yoga-day-from-vat-savitri-will-also-be-in-this-month/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Nirjala Ekadashi : निर्जला एकादशी कब? जानें इस दिन पूजा करने का क्या है नियम]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/nirjala-ekadashi-when-is-nirjala-ekadashi-know-what-are-the-rules-for-worshiping-on-this-day/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अपना अलग एक महत्व होता है. महीने में 2 और पूरे साल में कुल 24 एकादशी होते हैं. लेकिन इन एकादशियों में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का अधिक महत्व है. इसे हम निर्जला एकादशी, भीमसेन एकादशी भी कहते हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अगर [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर : </strong>हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अपना अलग एक महत्व होता है. महीने में 2 और पूरे साल में कुल 24 एकादशी होते हैं. लेकिन इन एकादशियों में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का अधिक महत्व है. इसे हम निर्जला एकादशी, भीमसेन एकादशी भी कहते हैं. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक अगर कोई इंसान इस एकादशी के व्रत को करता है तो उसे साल के 24 एकादशी व्रत का फल मिलता है. खास बात है कि महाभारत काल में इस व्रत को पांडवों ने भी रखा था.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>17 जून को रखा जाएगा व्रत</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>एकादशी के कथा के मुताबिक भीमसेन को सबसे अधिक भूख लगती थी. लेकिन उन्होंने भी इस व्रत को किया था. इसलिए इस व्रत को सभी एकादशी में सर्वश्रेष्ठ एकादशी कहा गया है. इस व्रत को लेकर ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 16 जून दिन रविवार को रात 2:54 बजे से एकादशी तिथि की शुरुआत होगी। जो अगले दिन सोमवार को पूरे दिन रहेगा. इसलिए यह व्रत 17 जून सोमवार के दिन ही किया जाए तो अधिक शुभ होगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ऐसे करें पूजा पाठ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू शास्त्रों के मुताबिक निर्जला एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. इसके बाद भगवान विष्णु का पूजा-पाठ करें। साथ ही व्रत का संकल्प लें. ऐसे इस व्रत को कठिन व्रत कहा जाता है. क्योंकि ज्येष्ठ माह में भीषण गर्मी पड़ती है और इस भीषण गर्मी में बिना जल लिए जो भी भक्त इस एकादशी व्रत को रखता है, उसे भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मिलता है 24 एकादशी का फल</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जो भक्त पूरे साल एकादशी का व्रत नहीं रखता है, अगर वो इस निर्जला एकादशी का व्रत करता है तो उसे पूरे साल के 24 एकादशी का फल मिलता है. इसके साथ भगवान विष्णु खुश होते हैं और भक्त को ढेर सारा आशीर्वाद भी देते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/nirjala-ekadashi-when-is-nirjala-ekadashi-know-what-are-the-rules-for-worshiping-on-this-day/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Nautapa News : नौतपा में जरूर लगाएं ये पौधे, धन-दौलत में होगी वृद्धि]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/nautapa-news-must-plant-these-plants-in-nautapa-there-will-be-increase-in-wealth/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: इन दिनों देश का अधिकांश भाग भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। वहीं नौतपा का भी एंट्री होने जा रहा है। नौतपा वह समय है जब पृथ्वी पर पूरे 9 दिन सूर्य की किरणों का प्रकोप पड़ता है. इस कड़ी में भीषण गर्मी से हर व्यक्ति का हाल बेहाल होता है. इस [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> इन दिनों देश का अधिकांश भाग भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। वहीं नौतपा का भी एंट्री होने जा रहा है। नौतपा वह समय है जब पृथ्वी पर पूरे 9 दिन सूर्य की किरणों का प्रकोप पड़ता है. इस कड़ी में भीषण गर्मी से हर व्यक्ति का हाल बेहाल होता है. इस साल नौतपा 25 मई से शुरू होने जा रही है, नौतपा का समापन 2 जून को होगा. ऐसे में हिंदू धर्म के अनुसार नौतपा के 9 दिनों में दान-पुण्य करना अति शुभ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इन दिनों में दान-पुण्य करने दसे भाग्य चमक सकता है. सनातन धर्म में नौतपा का विशेष महत्व है. वहीं इन नौ दिनों में 3 तरह के पेड़-पौधे लगाना अति शुभ बताया गया है.तो चलिए जानते हैं वो कौन सा पेड़ लगाएं जिसे हमें सुख-समृद्धि मिलें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पीपल का पेड़ लगाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>1 . ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, जो व्यक्ति नौतपे के दौरान पीपल का पेड़ लगाता है, उसे अपने पूर्वजों का भरपूर आशीर्वाद मिलता है. इस नौ दिनों में पीपल का पेड़ लगाने से सूर्य देव का भी आशीर्वाद मिलता है क्योंकि पीपल का पेड़ सूर्य ग्रह को शांत करता है। माना जाता है कि इसे लगाने से सूर्य के नकारात्मक असर जातक को प्रभावित नहीं कर पाते हैं. नौतपे में पीपल का पेड़ लगाने से सभी देवी-देवता का आशीर्वाद बना रहता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शमी का पौधा लगाना शुभ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>2 . माना जाता है कि नौपता के दौरान अपने घर के मंदिर प्रांगण में शमी का पौधा लगाना अति फलदायक होता है, शनि का पौधा लगाने से शनि के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है. इसके साथ सूर्य ग्रह की स्थिति भी मजबूत होती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तुलसी का पौधा जरूर लगाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>3 . सनातन धर्म में तुलसी को मां लक्ष्मी का रूप बताया गया है और हिंदू समुदाय में हर घर में तुलसी की पूजा की जाती है. अगर आप अपने जीवन में समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं तो नौतपा में तुलसी का पौधा जरूर लगाएं. ऐसा करने से आपके कुंडली में अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम होगा और साथ में कमजोर ग्रहों को मजबूती भी मिलेगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/nautapa-news-must-plant-these-plants-in-nautapa-there-will-be-increase-in-wealth/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ravivar ke Upay: अगर आप रविवार को करते हैं ये खास उपाय तो पूरी होगी सभी मनोकामना]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ravivar-ke-upay-if-you-do-these-special-remedies-on-sunday-all-your-wishes-will-be-fulfilled/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: रविवार का दिन ग्रहों का राजा यानी सूर्य देव को पूरी तरह से समर्पित है। आज रविवार का दिन है, इस दिन सूर्य देवता की पूजा पाठ की जाती है। शास्त्रों के अनुसार माना गया है कि अगर कोई व्यक्ति रविवार के दिन भगवान सूर्य की उपासना करता है तो उसे जीवन में सुख, समृद्धि, [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर: </strong>रविवार का दिन ग्रहों का राजा यानी सूर्य देव को पूरी तरह से समर्पित है। आज रविवार का दिन है, इस दिन सूर्य देवता की पूजा पाठ की जाती है। शास्त्रों के अनुसार माना गया है कि अगर कोई व्यक्ति रविवार के दिन भगवान सूर्य की उपासना करता है तो उसे जीवन में सुख, समृद्धि, मान सम्मान की प्राप्ति होती है। तो ऐसे में चलिए जानते हैं रविवार को क्या करें जिससे भगवान सूर्य देव प्रसन्न हो और सभी मनोकामना को पूर्ण करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस तरह करें पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रविवार को सूर्य देवता की पूजा पाठ की जाती है। सूर्य देव को इस दिन जल अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन सूर्य देव की पूजा अर्चना कर उन्हें जल समर्पित करता है, उसके जीवन में सुख, समृद्धि की प्राप्ति होती है। दूसरी तरफ यह भी मान्यता है कि सूर्य अगर अशुभ स्थिति में हो तो व्यक्ति चाहे जितनी भी मेहनत कर लें उसे असफलता ही मिलती है। अगर किसी व्यक्ति के जीवन में सूर्य की स्थिति सही नही हैं तो उसे जीवन में सम्मान पाने के लिए हमेशा संघर्ष करना पड़ता है। तो ऐसे में ज्योतिष आचार्य बताते हैं कि सूर्य ग्रह को सही करने के लिए रविवार के दिन कुछ उपाय करने चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>रविवार को करें यह खास उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रविवार को सूर्य देवता को जल जरुर चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय ओम सूर्याय नमः ओम वासुदेवाय नमः ओम आदित्य नमः मंत्र का जाप करें। इससे सूर्य देव प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रविवार को घर से बाहर जाते वक्त लाल चंदन का तिलक लगाएं। इन उपायों को करने से आपको सफलता मिलती है। साथ हीं रविवार को लाल कपड़ा अवश्य पहनें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस दिन घर के मेन गेट पर दोनों तरफ घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से भगवान सूर्य देव के साथ-साथ मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>रविवार को सूर्य देवता को खुश करने के लिए दूध, चावल, गुड़, कपड़े का दान करें। ऐसा करने से आपको सभी कामों में सफलता मिलेगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यदि आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि और यश पाना चाहते हैं तो रविवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे आटे से बना एक दिया जलाएं, उस दिए में सरसों का तेल इस्तेमाल करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ravivar-ke-upay-if-you-do-these-special-remedies-on-sunday-all-your-wishes-will-be-fulfilled/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rohini Nakshatra : कब से शुरू होगा रोहिणी नक्षत्र? इस बार कैसा रहेगा किसानों के लिए मानसून]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/rohini-nakshatra-when-will-rohini-nakshatra-start-how-will-the-monsoon-be-for-farmers-this-time/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: जब सूर्य एक राशि से किसी दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इसका सीधा असर राशियों के ऊपर दिखता है. लेकिन, जब सूर्य नक्षत्र बदलता है तो इसका असर राशि के साथ मौसम पर भी दिखता है. वहीं, ग्रहण के राजा सूर्य वृषभ राशि में गोचर कर लिया है. इसके साथ ही मई [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> जब सूर्य एक राशि से किसी दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो इसका सीधा असर राशियों के ऊपर दिखता है. लेकिन, जब सूर्य नक्षत्र बदलता है तो इसका असर राशि के साथ मौसम पर भी दिखता है. वहीं, ग्रहण के राजा सूर्य वृषभ राशि में गोचर कर लिया है. इसके साथ ही मई यानी इस माह के अंत में सूर्य अपना नक्षत्र बदलने वाला है. सूर्य के नक्षत्र बदलने से राशि के साथ मौसम पर भी प्रभाव पड़ेगा. इसलिए राशि के तरह नक्षत्र बदलाव में बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है. तो आइए जानते है कि कब सूर्य नक्षत्र बदलने वाला है. इसका प्रभाव क्या होने वाला है?.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नक्षत्र परिवर्तन भी अधिक महत्वपूर्ण</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष आचार्य ने इस साल शुरू होने वाले रोहिणी नक्षत्र और उसके प्रभाव को लेकर कहा कि राशि परिवर्तन के जैसा नक्षत्र परिवर्तन भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है . वहीं, ग्रहण के राजा सूर्य 25 मई को अपना नक्षत्र बदलने वाले हैं. 25 मई को सूर्य रोहिणी नक्षत्र में गोचर करेंगे। जैसे ही सूर्य रोहिणी नक्षत्र में गोचर करेंगे. उसके ठीक 9 दिनों तक नौतप्पा रहेगी. नौतप्पा मे पृथ्वी सबसे अधिक गर्म रहती है. इस वर्ष गुरु और शुक्र अस्त होने के कारण से आंधी बारिश के भी आसार हैं. जैसे ही सूर्य रोहिणी नक्षत्र में गोचर करेंगे किसान बीज की बुआई शुरू कर देगा. बता दें कि सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करना अति शुभ बताया गया है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस वर्ष मानसून में होगी अच्छी बारिश</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष आचार्य ने बताया कि इस वर्ष ग्रहण नक्षत्र की दृष्टि अच्छी होने वाली है, जिससे किसानों के लिए खेती के समय अच्छी बारिश होगी. क्योंकि, नौतपा में जितनी गर्मी पड़ेगी उतनी ही बारिश भी होगी। इस वर्ष मानसून में अच्छी बारिश होने वाली है। जिससे खेती किसानी भी अच्छी होगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/rohini-nakshatra-when-will-rohini-nakshatra-start-how-will-the-monsoon-be-for-farmers-this-time/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Shani Dev 2024: शनिवार के दिन गलती से भी न करें इस समय पूजा, यह है सही मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/shani-dev-2024-do-not-worship-at-this-time-even-by-mistake-on-saturday-this-is-the-right-time/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: सभी ग्रहों में शनि देव को न्याय का देवता माना गया है। (Shani Dev 2024) शास्त्रों के मुताबिक शनि देव हर व्यक्ति को उसके द्वारा किए गए कर्मों के हिसाब से न्याय देते हैं। यानी अगर कोई व्यक्ति अच्छा कर्म करता है तो वह शनि देव की कृपा से आसमान की बुलंदियों तक पहुंचता [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर: </strong>सभी ग्रहों में शनि देव को न्याय का देवता माना गया है। (Shani Dev 2024) शास्त्रों के मुताबिक शनि देव हर व्यक्ति को उसके द्वारा किए गए कर्मों के हिसाब से न्याय देते हैं। यानी अगर कोई व्यक्ति अच्छा कर्म करता है तो वह शनि देव की कृपा से आसमान की बुलंदियों तक पहुंचता है। वहीं अगर कोई व्यक्ति बुरे कर्मों के लिए जाना जाता है तो उसे उसके कर्मों के हिसाब से शनि देवता राजा से रंक बना देते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति की चाहत होती है कि शनि देवता की टेढ़ी नजर से बचें और ऐसा क्या कार्य करें जिससे शनि देवता प्रसन्न रहें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पीपल वृक्ष के नीचे तेल का दीपक जलाएं</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अक्सर आप देखते होंगे कि शनिवार के दिन लोग पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाते हैं या शनि देवता के ऊपर काले तिल और तेल भी चढ़ाते हैं। शनिवार के दिन मंदिर में पूजा भी करते हैं। लेकिन क्या आपको मालूम है कि शनि देवता की पूजा का सही समय क्या है, हमें किस समय शनि देव की पूजा करनी चाहिए तो आईए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सूर्यास्त के बाद कड़े शनि देव की पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक शनि देव की पूजा हमेशा सूर्यास्त के बाद करना शुभ माना गया है। बताया गया है कि इस वक्त की गई सभी प्रकार की पूजा शनि देव को प्रसन्न करता है। ऐसे में इस समय पर पूजा करने से अधिक फल की प्राप्ति होती है। लेकिन सूर्यास्त के बाद ही शनि देवता की पूजा क्यों करनी चाहिए, इसकी वजह जानते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पश्चिम दिशा के स्वामी हैं शनि देव</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मान्यताओं के अनुसार शनि देव पश्चिम दिशा के स्वामी कहे जाते हैं। वहीं सूर्य का आगमन पूर्व दिशा से होता है। तो ऐसे में पूर्व दिशा की ओर शनि देव की पीठ पड़ती है, जिस वजह से शनि देव की पूजा सूर्यास्त के बाद करना अति शुभ माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शनि और सूर्य के बीच पिता और पुत्र का संबंध</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू शास्त्रों के मुताबिक शनि और सूर्य के बीच पिता और पुत्र का संबंध है। लेकिन यह दोनों एक दूसरे के लिए बैर की भावना रखते हैं। सुबह से शाम तक सूर्य देव का प्रभाव रहता है। इसलिए कभी भी शनि देव की पूजा सूर्यास्त के बाद करनी चाहिए। ऐसा करने से शनि देव शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों के जीवन में सुख समृद्धि भर देते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>शनिवार के दिन इन कार्यों को करने से बचें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शनिवार के दिन लोहे की वस्तु भूलकर भी न खरीदें। ऐसा करने से शनि देव क्रोधित हो जाते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शनिवार के दिन गलती से भी नमक की खरीदारी ना करें। माना जाता है कि इस दिन नमक खरीदने से इंसान कर्ज में डूबा रहता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शनिवार के दिन किसी को उपहार के रूप में कैंची न दें, क्योंकि ऐसा करने से लड़ाई झगड़ा होने की चांसेस बढ़ जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/shani-dev-2024-do-not-worship-at-this-time-even-by-mistake-on-saturday-this-is-the-right-time/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Mohini Ekadashi 2024 : मोहिनी एकादशी पर करें ये तीन उपाय, दूर होगी सभी परेशानी]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/mohini-ekadashi-2024-do-these-three-measures-on-mohini-ekadashi-all-problems-will-go-away/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का अपना एक अलग महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, जो भक्त इस पवित्र तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा-पाठ करता है, उसके जीवन से सभी परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही युवकों के जीवन में कभी धन-धान्य की कमी नहीं आती है. बता दें कि [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर: </strong>हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का अपना एक अलग महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यता के मुताबिक, जो भक्त इस पवित्र तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा-पाठ करता है, उसके जीवन से सभी परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही युवकों के जीवन में कभी धन-धान्य की कमी नहीं आती है. बता दें कि वैशाख मास के शुल्क पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी मनाया जाता है. इस साल 19 मई को मोहिनी एकादशी मनाई जाएगी. माना जाता है कि अगर इस तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा-पाठ की जाएं तो जीवन से सभी प्रकार की कष्ट और दरिद्रता से मुक्ति मिलती है और साथ में भक्तों की जीवन में सुख-समृद्धि में आती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>मोहिनी एकादशी पर करें ये उपाय</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol><!-- wp:list-item -->
<li><strong>जीवन से खत्म हो जाएंगे सारे कष्ट</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आप मोहिनी एकादशी पर तुलसी के सामने घी का दीपक जलाते और तुलसी माता के मंत्रों का जाप करते है तो इससे आपकी जिंदगी में खुशियां आएगी। साथ ही इस तिथि पर तुलसी माता की 11 परिक्रमा करें. ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है और सभी पापों से मुक्ति मिलती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":2} -->
<ol start="2"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>विवाह में आ रही परेशानी होगी दूर</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जिन लोगों के विवाह में परेशानी आ रही है. उन लोगों को मोहिनी एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए. इस तिथि पर भगवान विष्णु को पीले फूल चढ़ाएं। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति ऐसा करता है, उसकी विवाह में आ रही सभी परेशानीखत्म हो जाती हैं और जल्द ही शादी हो जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":3} -->
<ol start="3"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>अगर जीवन में सुख-समृद्धि चाहते हैं तो करें ये उपाय</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अगर आप अपने जीवन में सुख-समृद्धि चाहते हैं तो मोहिनी एकादशी के शुभ तिथि पर आप अपने घर पर आए किसी भी लोगों को भूखा न जाने दें. उन्हें कुछ न कुछ जरूर खिलाएं। ऐसा करने से भक्तों के परिवार पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/mohini-ekadashi-2024-do-these-three-measures-on-mohini-ekadashi-all-problems-will-go-away/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ganga Saptami 2024 : आज गंगा सप्तमी, इन चीजों का करें परहेज]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ganga-saptami-2024-today-ganga-saptami-avoid-these-things/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: आज देश भर में गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जा रहा है। (Ganga Saptami 2024) भारत में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदियों में से एक माना गया है। आज इस शुभ तिथि पर, देवी गंगा की पूजा-अर्चना की जाती है क्योंकि ऐसा माना गया है कि सप्तमी तिथि पर माता गंगा अपने भक्तों [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> आज देश भर में गंगा सप्तमी का पर्व मनाया जा रहा है। (Ganga Saptami 2024) भारत में गंगा नदी को सबसे पवित्र नदियों में से एक माना गया है। आज इस शुभ तिथि पर, देवी गंगा की पूजा-अर्चना की जाती है क्योंकि ऐसा माना गया है कि सप्तमी तिथि पर माता गंगा अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर आती हैं। इस पर्व को लोग हर वर्ष सप्तमी तिथि को मनाते है। इस तिथि को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है। इस दिन, भक्त पवित्र स्नान करने के बाद माता गंगा का आशीर्वाद लेते है। इस अवसर पर भक्त गंगा नदी के तट पर जुटते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस मुहूर्त में करें पूजा-पाठ</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू पंचांग के मुताबिक, इस साल गंगा सप्तमी 14 मई को मनाई जा रही है। गंगा सप्तमी मध्याह्न मुहूर्त 14 मई को सुबह 10:56 बजे से दोपहर 1:39 बजे तक रहेगा। इस दिन, भक्त सुबह जल्दी उठकर माता गंगा की पूजा करते हैं। गंगा नदी में डुबकी लगाते है. इसके बाद वो एक दीपक जलाते हैं और उसे नदी में प्रवाहित करते हैं। साथ ही मां गंगा को माला और मिठाई चढ़ाया जाता हैं। शाम के समय मां गंगा का आशीर्वाद लेने के लिए एक विशेष आरती होती है। भक्त शाम को देवी गंगा की आराधना करते है। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, पानी और कपड़े दान करने से आपके सभी दुःख दूर होते है। साथ ही गंगा नदी के तट पर बैठकर महा मृत्युंजय मंत्र का जाप भी करना शुभ माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>गंगा सप्तमी पर इन कामों को करने से बचें -</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस तिथि पर किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आज के दिन बुजुर्गों और महिलाओं का अपमान नहीं करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>उपवास के दौरान दिन में सोने से बचें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>तामसिक भोजन का परहेज करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ganga-saptami-2024-today-ganga-saptami-avoid-these-things/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Vat Savitri Vrat 2024: वट सावित्री व्रत कब? जानें क्या है शुभ मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/vat-savitri-vrat-2024-when-is-vat-savitri-vrat-know-what-is-the-auspicious-time/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: भारत त्यौहरों का देश है। यहां हर रोज किसी न किसी व्रत-त्यौहार को मनाया जाता है। (Vat Savitri Vrat 2024) ऐसे में कुछ जगहों पर वट सावित्री व्रत बहुत ही क्ष्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। इस व्रत को सुहागिन महिला बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाती है। इस त्यौहार को जेष्ट कृष्ण [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> भारत त्यौहरों का देश है। यहां हर रोज किसी न किसी व्रत-त्यौहार को मनाया जाता है। (Vat Savitri Vrat 2024) ऐसे में कुछ जगहों पर वट सावित्री व्रत बहुत ही क्ष्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है। इस व्रत को सुहागिन महिला बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाती है। इस त्यौहार को जेष्ट कृष्ण पक्ष के अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. इस साल इस पर्व को 6 जून दिन गुरुवार को मनाया जाएगा.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong> सत्यवान सावित्री की कथा से</strong> <strong>संबंध </strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मान्यताओं के अनुसार इस त्यौहार का संबंध पौराणिक सत्यवान सावित्री की कथा से जुड़ी हुई है. कथा के अनुसार सावित्री ने अपने चलाकी और धर्म के जरिए यमराज से लड़कर अपने पति सत्यवान की जिंदगी वापस ली थी. इस कारण से यह त्यौहार बहुत प्रचलित है और इस पर्व को उस दिन से सभी सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निश्चित तौर पर इस दिन उपवास रख कर बड़े ही विधि विधान से बड़गड़ के पेड़ की पूजा करती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस पर्व को लेकर पंडितों ने कहा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू धर्म में महिलाएं अपने पति के लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती रहती है. ऐसे में महिलाएं वट सावित्री व्रत भी व्रत, सौभाग्य पाने के लिए रखती है. इस त्यौहार को लेकर पंडितों का मानना है कि यह त्यौहार जेष्ट महीने के कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि को मनाया जाता है. वहीं इस बार वट सावित्री व्रत 6 जून दिन गुरुवार को मनाया जाएगा. वहीं इस दिन उपवास रखने से सुखद जीवन और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हिंदू धर्म में की जाती है वटवृक्ष की पूजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>कुछ पंडितों का मनना है कि हिंदू धर्म में वटवृक्ष की पूजा की जाती है. धर्मशास्त्र की माने तो वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों भगवान वास करते है. बरगद के तने में भगवान विष्णु का वास होता है तो जड़ में ब्रह्मदेव का जगह है. शाखोंओ में भगवान शिव रहते है. वट की लटकती शाखों को मान्यताओं के अनुसार सावित्री स्वरूप माना जाता हैं. इसलिए पूरा पेड़ पूजा योग्य माना गया है। वहीं वट वृक्ष लंबे वक्त तक अक्षय रहता है. इसलिए इसे अक्षयवट भी कहा जाता हैं. इसी वजह से हिंदू धर्म में इस वृक्ष की पूजा की जाती है और वट सावित्री व्रत पर इस वृक्ष की पूजा सुहागिन महिलाएं करती है, साथ ही अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/vat-savitri-vrat-2024-when-is-vat-savitri-vrat-know-what-is-the-auspicious-time/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Sita Navami 2024 : सीता नवमी पर करें यह उपाय, परेशानी होगी दूर, मिलेगा देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/sita-navami-2024-do-this-remedy-on-sita-navami-problems-will-go-away-you-will-get-blessings-of-goddess-lakshmi/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: इस साल सीता नवमी 16 मई को मनाई जाएगी। (Sita Navami 2024) हिंदू ग्रंथों के मुताबिक सीता नवमी को मां सीता या जानकी जयंती भी कहा जाता है। माना जाता है कि माता सीता इसी दिन धरती से प्रकट हुई थीं। इस तिथि को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> इस साल सीता नवमी 16 मई को मनाई जाएगी। (Sita Navami 2024) हिंदू ग्रंथों के मुताबिक सीता नवमी को मां सीता या जानकी जयंती भी कहा जाता है। माना जाता है कि माता सीता इसी दिन धरती से प्रकट हुई थीं। इस तिथि को वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है। इस वर्ष 16 मई को सुबह 06:22 बजे से नवमी तिथि का शुरुआत होगी, जो अगले दिन 17 मई को सुबह 08:48 बजे तक रहेगा। इस दिन सभी घरों में मां जानकी की पूजा की जाती हैं. जिन लोगों के दांपत्य जीवन में प्रेम नहीं है या कोई धन के संकट से परेशान चल रहा है, उन सभी लोगों को इस दिन मां जानकी के लिए उपवास रख कर शुद्ध मन से पूजा-पाठ करना चाहिए। तो ऐसे में चलिए जानते है कि इस तिथि पर किस प्रकार के उपाय करने से सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस उपाय से चमकेगा किस्मत!</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list {"ordered":true} -->
<ol><!-- wp:list-item -->
<li><strong>अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि सीता नवमी के तिथि पर हर सुहागन महिलाओं को माता सीता की पूजा जरूर करनी चाहिए. पूजा करने के समय माता सीता को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करनी चाहिए. ऐसा करने से माता सीता के आशीर्वाद मिलते है, साथ ही आपका दांपत्य जीवन खुशहाल होता है। आपको अखंड सौभाग्य की प्राप्ति भी होती है। अगर आप सुखी जीवन पाना चाहते है तो इस तिथि पर आपको श्री जानकी रामाभ्यां नमः मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":2} -->
<ol start="2"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>लव मैरिज करना चाहते है तो करें ये उपाय</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>यदि आपकी शादी नहीं हुई हैं और आप प्रेम संबंध में है. ऐसे में आप लव मैरिज करना चाहते हैं तो आपको सीता नवमी की तिथि पर उपवास रखकर भगवान श्री राम और माता सीता की एक साथ पूजा-अर्चना करनी चाहिए. साथ ही माता सीता को चुनरी के साथ श्रृंगार का सामान चढ़ाना चाहिए. इसके बाद जानकी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. ऐसा करने से माता सीता खुश कर भक्तों की सभी मोकामना पूरी करती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:list {"ordered":true,"start":3} -->
<ol start="3"><!-- wp:list-item -->
<li><strong>धन संकट से छुटकारा पाने के लिए</strong></li>
<!-- /wp:list-item --></ol>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सीता नवमी के शुभ अवसर पर आप जब भी भगवान राम और माता सीता की पूजा करेंगे तो खीर का भोग अवश्य लगाएं. माता सीता को देवी लक्ष्मी का रूप माना गया है. ऐसे में सभी अविवाहित कन्याओं को खीर का प्रसाद भी दें. ऐसा करने से आपके सभी संकट दूर हो जाएंगे और आर्थिक स्थिति भी ठीक हो जाएगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/sita-navami-2024-do-this-remedy-on-sita-navami-problems-will-go-away-you-will-get-blessings-of-goddess-lakshmi/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Parshuram Jayanti 2024 : परशुराम जयंती और अक्षय तृतीया आज, जानें क्या है विशेष]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/parshuram-jayanti-2024-parshuram-jayanti-and-akshaya-tritiya-today-know-what-is-special/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: आज 10 मई शुक्रवार को देश भर में परशुराम जयंती के साथ-साथ अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है। आज वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि है। मान्यता है कि इस तिथि को भगवान शिव और उनकी पत्नी माता गौरी द्वारा नियंत्रित किया जाता है. इस तिथि को गृहप्रवेश, गृह निर्माण के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> आज 10 मई शुक्रवार को देश भर में परशुराम जयंती के साथ-साथ अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जा रहा है। आज वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि है। मान्यता है कि इस तिथि को भगवान शिव और उनकी पत्नी माता गौरी द्वारा नियंत्रित किया जाता है. इस तिथि को गृहप्रवेश, गृह निर्माण के लिए नीवं, शुभ कार्यों के लिए शुभ मानी जाती है. माना जाता है कि इस तिथि के दिन झगड़ों और मुकदमों से लोगों को दूर रहना चाहिए. आज यानी शुक्रवार को परशुराम जयंती, अक्षय तृतीया, मातंगी जयंती, रोहिणी व्रत भी है. बता दें कि आज तृतीया तिथि देर रात 2.50 (11 मई) तक है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस मुहूर्त में जन्म लिए थे भगवान परशुराम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भगवान परशुराम का जन्म वैशाख माह के प्रदोष काल में हुआ था। ऐसे में जिस दिन तृतीया तिथि होती है, उस तिथि को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। इसलिए इस साल भगवान परशुराम की जयंती 10 मई (शुक्रवार) को मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया पर खरीदारी करने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज सार्वजनिक अवकाश घोषित</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि 10 मई को राजस्थान में भगवान परशुराम की जयंती को लेकर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस तिथि पर राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भगवान परशुराम की जयंती बेहद धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन अक्षय तृतीया भी है। ऐसे में इस तिथि पर नए व्यापार की शुरूआत करना शुभ माना जाता है। इस दिन हरियाणा सरकार द्वारा भी सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/parshuram-jayanti-2024-parshuram-jayanti-and-akshaya-tritiya-today-know-what-is-special/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Public Holiday : राजस्थान में 10 मई को सार्वजनिक अवकाश, जानें क्या है वजह]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/public-holiday-public-holiday-on-10th-may-in-rajasthan-know-the-reason/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: राजस्थान में 10 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। देश भर में 10 मई को परशुराम जयंती की धूमधाम रहेगी। प्रदेशवासियों को इस तिथि का इंतजार हमेशा से लगा रहता है। इस साल भगवान परशुराम की जयंती शुक्रवार को है। परशुराम जयंती की तैयारियां कई दिनों से जारी है। हिंदू धर्म में [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> राजस्थान में 10 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। देश भर में 10 मई को परशुराम जयंती की धूमधाम रहेगी। प्रदेशवासियों को इस तिथि का इंतजार हमेशा से लगा रहता है। इस साल भगवान परशुराम की जयंती शुक्रवार को है। परशुराम जयंती की तैयारियां कई दिनों से जारी है। हिंदू धर्म में परशुराम जयंती का विशेष महत्व है। परशुराम को भगवान विष्णु के 24 अवतार माने गए हैं। मान्यता के अनुसार 10 अवतारों को मुख्य अवतार बताया गया है। भगवान परशुराम इन दस अवतारों में शामिल हैं। हर वर्ष वैशाख माह में शक्ल पक्ष तृतीया तिथि को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। हालांकि इस दिन अक्षय तृतीया का त्यौहार भी मनाया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस मुहूर्त में जन्म लिए थे भगवान परशुराम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>भगवान परशुराम का जन्म वैशाख माह के प्रदोष काल में हुआ था। ऐसे में जिस दिन तृतीया तिथि होती है, उस तिथि को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है। इसलिए इस साल भगवान परशुराम की जयंती 10 मई (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>10 मई को सार्वजनिक छुट्टी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि 10 मई को राजस्थान में भगवान परशुराम की जयंती को लेकर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस तिथि पर राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में भगवान परशुराम की जयंती बेहद धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन अक्षय तृतीया भी है। ऐसे में इस तिथि पर नए व्यापार की शुरूआत करना शुभ माना जाता है। इस दिन हरियाणा सरकार द्वारा भी सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/public-holiday-public-holiday-on-10th-may-in-rajasthan-know-the-reason/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Varuthini Ekadashi 2024: कब रखें वरुथिनी एकादशी व्रत? दो दिन बन रहे संयोग]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/varuthini-ekadashi-2024-when-to-observe-varuthini-ekadashi-fast-coincidences-are-happening-in-two-days/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: हिंदू धर्म शास्त्रों में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है. वैशाख माह चल रहा है, ऐसे में लोगों को एकादशी तिथि को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। बता दें कि बैसाख माह की एकादशी व्रत को लोग वरुथिनी एकादशी व्रत के नाम से जानते हैं। इस बीच तिथि को लेकर लोगों में आशंका देखा [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> हिंदू धर्म शास्त्रों में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है. वैशाख माह चल रहा है, ऐसे में लोगों को एकादशी तिथि को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। बता दें कि बैसाख माह की एकादशी व्रत को लोग वरुथिनी एकादशी व्रत के नाम से जानते हैं। इस बीच तिथि को लेकर लोगों में आशंका देखा जा रहा है। वहीं तमाम ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस वर्ष वरुथिनी एकादशी व्रत 4 मई के दिन मनाई जाएगी। इस दिन लोग भगवान विष्णु की पूजा विशेष तौर पर करते है। तो ऐसे में चलिए जानते है इस दिन किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दोनों पक्षों में मनाई जाती है एकादशी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सनातन धर्म के अनुसार हर माह के दोनों पक्षों में एकादशी मनाई जाती है। इस दिन लोग भगवान विष्णु का पूजा पाठ कर उपवास रखते हैं। चार मई को वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकदाशी है. जिसे हम वरुथिनी एकादशी के नाम से भी जानते है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना का अधिक महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन विष्णु का नाम मात्र से ही भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण होती है। इस दिन भक्त श्री हरि को प्रसन्न करने के लिए विष्णु पाठ करते है. ऐसे में इस तिथि पर कौन सी शुभ समय माना गया है, इससे जानते है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:image {"id":11115,"sizeSlug":"full","linkDestination":"none"} -->
<figure class="wp-block-image size-full"><img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/05/download-7-1.png" alt="" class="wp-image-11115" /></figure>
<!-- /wp:image -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये हैं पूजा का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू पंचांग के मुताबिक इस साल एकादशी का व्रत 4 मई को है. माना जाता है कि इस दिन लोग धन से जुड़ी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए वरुथिनी एकादशी का व्रत रखते है. इस साल यह तिथि की शुरुआत 3 मई रात 11:24 से होगा जो अगले दिन 4 मई रात 8:38 पर खत्म होगा। इस तिथि पर व्रत और दान-पुण्य करना अति शुभ माना गया है. तो चलिए जानते है इस तिथि का शुभ मुहूर्त और इस तिथि पर क्या करें और क्या नहीं करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये कार्य जरूर करें</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list -->
<ul><!-- wp:list-item -->
<li>इस दिन तुलसी पूजन करना बेहद ही शुभ माना जाता है। तुलसी की पूजा करने से भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>इस तिथि पर राहगीरों को पानी पिलाना भी अति शुभ माना गया है.</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>इस दिन पशुओं और पक्षियों को दाना खिलाएं।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>वस्त्र और भोजन दान करें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>फल का दान करना अति शुभ होता है।</li>
<!-- /wp:list-item --></ul>
<!-- /wp:list -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये कार्य करने से बचे</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:list -->
<ul><!-- wp:list-item -->
<li>इस तिथि पर तामसिक भोजन करने से बचें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>व्रत के दौरान भोजन और पानी पिने से बचें।</li>
<!-- /wp:list-item -->

<!-- wp:list-item -->
<li>तिथि समाप्त होने पर ही व्रत का पारण करें।</li>
<!-- /wp:list-item --></ul>
<!-- /wp:list -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/varuthini-ekadashi-2024-when-to-observe-varuthini-ekadashi-fast-coincidences-are-happening-in-two-days/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Akshay Trithiya 2024: जानिए अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का मुहूर्त क्या है?]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/akshay-trithiya-2024-know-what-is-the-auspicious-time-to-buy-gold-on-akshay-tritiya/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। सनातन धर्म में अक्षय तृतीया (Akshay Trithiya 2024) का बहुत महत्व है। अक्षय का मतलब है जिसका कभी क्षय न हो या जो कभी नष्ट न हो। इसी कारण हिंदू धर्म (Hindu Dharam) में अक्षय तृतीया को अतिशुभ माना गया है। इस दिन को मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए अति उत्तम बताया गया [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> सनातन धर्म में अक्षय तृतीया (Akshay Trithiya 2024) का बहुत महत्व है। अक्षय का मतलब है जिसका कभी क्षय न हो या जो कभी नष्ट न हो। इसी कारण हिंदू धर्म (Hindu Dharam) में अक्षय तृतीया को अतिशुभ माना गया है। इस दिन को मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए अति उत्तम बताया गया है। बता दें कि पौराणिक ग्रंथों में अक्षय तृतीया (Akshay Trithiya) को लेकर बताया गया है कि इसी दिन से त्रेता युग (Tretayug) की शुरुआत हुई थी। त्रेता युग को मानवकाल का द्वितीय युग कहा गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>प्रभु श्री राम की भी होती है उपासना</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>त्रेता युग में ही भगवान विष्णु (Lord Vishnu) ने प्रभु श्रीराम (Lord Ram) के रूप में अवतार लेकर पूरे विश्व को त्याग और समर्पण का संदेश दिया था। भगवान राम की शिक्षाएं मनुष्य को महान बनाने के लिए प्रेरणा देती हैं। अक्षय तृतीया (Akshay Trithiya) का पर्व प्रभु राम की उपासना का भी पर्व होता है। इस पर्व को लोगों में ये धारणा है कि इस दिन शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने की भी आवश्यकता नहीं होती। अक्षय तृतीया का पर्व सभी शुभ पर्वों में विशेष और महत्वपूर्ण है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>ऐसा कहा जाता है कि इस दिन धन कुबेर को धन को भंडार मिला था, इसीलिए इस दिन को खरीदारी के लिए भी शुभ माना जाता है। अक्षय तृतीया के दिन सोना यानी गोल्ड खरीदना भी शुभ माना गया है। इस दिन सोना खरीदने से समृद्धि आती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सालों बाद बन रहा संयोग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>हिंदू कैलेंडर (Hindu Calendar) के मुताबिक, अक्षय तृतीया (Akshay Trithiya 2024) का पर्व हिंदू मास, वैशाख माह (Vaishakh Month) में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। मई (May) में पड़ने वाला ये खास पर्व सोना (Gold) खरीदने के वालों के लिए विशेष है। लोग इस पर्व का पूरे साल इंतजार करते हैं। अक्षय तृतीया का पर्व 10 मई 2024, शुक्रवार के दिन पड़ रहा है। कई सालों बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब वैशाख, शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि शुक्रवार के दिन पड़ रही है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>शुक्रवार का दिन धन की देवी लक्ष्मी जी (Laxmi Ji) को समर्पित होता है। ऐसे में अक्षय तृतीया (Akshay Trithiya 2024) का पर्व शुक्रवार के दिन मनाए जाने के कारण इस पर्व का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसीलिए इस दिन सोना के साथ अन्य चीजों की खरीदारी शुभ मानी गई है। अक्षय तृतीया के दिन मां लक्ष्मी (Maa Laxmi), धन के देवता कुबेर (Kuber) और गणेश जी (Ganesh Ji) की विशेष पूजा की जाती है। आइए जानते हैं कि पंचांग (Hnidu Panchang) के मुताबिक वैशाख शुक्ल की तृतीया कब से आरंभ होगी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अक्षय तृतीया 2024 का मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अक्षय तृतीया 10 मई, 2024, शुक्रवार<br>अक्षय तृतीया का पूजा मुहूर्त -सुबह 05:33 से दोपहर 12:18 तक<br>अक्षय तृतीया पूजन मुहूर्त- कुल 06 घण्टे 44 मिनट तक</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सोना खरीदने का मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>वहीं 10 मई 2024, शुक्रवार के दिन अगर आप गोल्ड (Gold) खरीदना चाहते हैं, तो इस दिन प्रात: 05 बजकर 33 मिनट से लेकर 11 मई सुबह 02.50 मिनट तक खरीदारी कर सकते हैं। इस दिन सोना के साथ-साथ गैजेट्स, एसी, फ्रिज, होम एप्लाइंसेस, मोबाइल, खेल का सामान आदि की भी खरीददारी कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>अक्षय तृतीया पर जानें चौघड़िया मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) 05:33 से 10:37 बजे तक<br>अपराह्न मुहूर्त (चर) शाम 5:21 से 7:02 बजे तक<br>अपराह्न मुहूर्त (शुभ) दोपहर 12:18 से 1:59 बजे तक<br>रात्रि मुहूर्त (लाभ) 9:40 से 10:59 बजे तक<br>रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) 00:17 से 02:50 बजे 11 मई तक</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/akshay-trithiya-2024-know-what-is-the-auspicious-time-to-buy-gold-on-akshay-tritiya/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Maha Ashtami: आज चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी पर करें महागौरी की पूजा, ये हैं विशेष मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/maha-ashtami-worship-mahagauri-today-on-maha-ashtami-of-chaitra-navratri-this-is-the-special-auspicious-time/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: देश भर में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 9 अप्रैल से हो चुकी है। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का अपना एक विशेष महत्त्व है। आज मंगलवार 16 अप्रैल को माता के आठवें रूप की पूजा की जाती है। माता के आठवें रूप में महागौरी की पूजा की जाती है। देश भर में बड़े ही [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर:</strong> देश भर में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 9 अप्रैल से हो चुकी है। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का अपना एक विशेष महत्त्व है। आज मंगलवार 16 अप्रैल को माता के आठवें रूप की पूजा की जाती है। माता के आठवें रूप में महागौरी की पूजा की जाती है। देश भर में बड़े ही धूमधाम से महाअष्टमी मनाया जा रहा है। बता दें कि नवरात्रि के दौरान सभी दिनों को विशेष माना जाता है, हालांकि अष्टमी और नवमी तिथि नवरात्रि के दो सबसे अहम माने जाते हैं। महाष्टमी के दिन माता के भक्त विशेष उपवास भी रखते हैं। इस तिथि पर लोग घरों में कन्या पूजन भी करते है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ये है शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>महाष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। इस बार महाष्टमी की तिथि आज 15 अप्रैल दोपहर 12:11 बजे से शुरू है, जो अगले दिन बुधवार 16 अप्रैल दोपहर 1:23 बजे तक रहेगा। इस दिन कन्या पूजन करना अति शुभ बताया गया है। माना जाता है कि अगर हम महाष्टमी तिथि पर कन्या भोजन करवाते है तो माता अधिक प्रसन्न होती है और अपने भक्तों की सभी मनोकामना पूर्ण करती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज कन्या पूजन के लिए ये है मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>आज महाष्टमी तिथि है. इस दिन कन्या पूजन का अलग ही महत्त्व हैं। आज मंगलवार को महाष्टमी पर कन्या पूजन के लिए मुहूर्त सुबह 7:51 बजे से लेकर सुबह 10:41 बजे तक है। बता दें कि कन्या पूजन अभिजीत मुहूर्त में भी करना शुभ बताया गया है। अभिजीत मुहूर्त आज सुबह 11:55 से लेकर दोपहर 12:47 बजे तक है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>महाअष्टमी कन्या पूजन के नियम</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि अष्टमी कन्‍या भोज या पूजन के लिए कन्‍याओं को एक दिन पहले आमंत्रित किया जाता है. गृह प्रवेश पर कन्याओं का स्वागत करते है. नव दुर्गा के सभी नौ नामों के जयकारे लगाया जाता है. इन कन्याओं को स्वच्छ जगह पर बिठाकर सभी के पैरों को थाली में रखकर अपने हाथों से धोया जाता है। फिर इसके बाद कन्या भोजन करा कर। विदाई की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/maha-ashtami-worship-mahagauri-today-on-maha-ashtami-of-chaitra-navratri-this-is-the-special-auspicious-time/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Chaitra Navratri 2024: नवरात्र में माता को पसंद है इन रंगों के वस्त्र, जानें कौन सा रंग किस दिन है अति लाभकारी]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/chaitra-navratri-2024-mother-likes-clothes-of-these-colors-during-navratri-know-which-color-is-very-beneficial-on-which-day/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है।। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपो की पूजा की जाती है। ऐसे में इस 9 दिनों के दौरान माता को नौ रंग के वस्त्र अधिक प्रिय है। तो आईए जानते हैं 9 दिनों में अलग-अलग नौ रंगो का महत्व क्या है। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर: </strong>आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है।। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपो की पूजा की जाती है। ऐसे में इस 9 दिनों के दौरान माता को नौ रंग के वस्त्र अधिक प्रिय है। तो आईए जानते हैं 9 दिनों में अलग-अलग नौ रंगो का महत्व क्या है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>माता को खुश करना चाहते हैं, तो पहने इन रंगों के वस्त्र</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अप्रैल के महीने में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हुई है। आज मंगलवार 9 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि शुरू होकर 17 अप्रैल तक चलेगी। 17 अप्रैल को देश भर में रामनवमी मनाई जाएगी। इन नौ दिनों में भारत के अलग-अलग हिस्सों में रह रहे लोगों के लिए अपना एक अलग महत्व है। नवरात्र के नौ दिनों को नौ प्रकार के रंगो से जोड़ा गया है। हर एक दिन का रंगों का अलग महत्व है। इन नौ रंगो को धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बताया गया हैं। रंगों में नीला रंग, पीला रंग, हरा रंग, ग्रे रंग, संतरी रंग, सफेद रंग, लाल रंग, आसमानी रंग और गुलाबी रंग शामिल है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पहला दिन: नीला रंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नवरात्र के पहले दिन माता के प्रथम रूप शैलपुत्री की पूजा होती है। ऐसे में इस दिन पर नीला रंग को धार्मिक दृष्टिकोण से पवित्र बताया गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दूसरा दिन: पीला रंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नवरात्र के दूसरे दिन माता के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा होती है। ऐसे में इस दिन पर पीला रंग के वस्त्र पहना शुभ माना गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>तीसरा दिन: हरा रंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नवरात्रि के तीसरे दिन मां के चंद्रघंटा रूप की पूजा होती है। इस दिन लोग हरे रंग के वस्त्र पहनते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>चौथा दिन: ग्रे रंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के कुष्मांडा रूप की पूजा होती है। इस दिन लोग ग्रे रंग का कपड़ा पहनते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>पांचवा दिन: संतरी रंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पांचवें दिन मां दुर्गा के स्कंदमाता रूप की पूजा होती है। इस दिन लोग संतरी रंग के वस्त्र धारण करते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>छठा दिन: सफेद रंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के कात्यायनी रूप की पूजा होती है। इस दिन सफेद रंग का वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>सातवां दिन: लाल रंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>सातवें दिन माता के काली रूप की पूजा होती है। इस दिन लाल रंग का विशेष महत्व है। सप्तमी तिथि पर लोग खासकर लाल रंग के वस्त्र पहनते हैं। लाल रंग को स्नेह, बलिदान, क्रोध और साहस से जोड़ा जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आठवां दिन: आसमानी रंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नवरात्र के आठवें दिन को महाअष्टमी नाम से जाना जाता है। इस दिन आसमानी रंग का अलग महत्व है। यह रंग अंतकाल और अनंता को दर्शाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>नौंवा दिन: गुलाबी रंग</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>नौवे दिन यानी महानवमी पर मां के सिद्ध रूप की पूजा होती है। इस दिन गुलाबी रंग का अलग महत्व है। यह रंग दया, स्त्रीत्व और प्रेम को दर्शाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/chaitra-navratri-2024-mother-likes-clothes-of-these-colors-during-navratri-know-which-color-is-very-beneficial-on-which-day/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Holika Dahan 2024: होलिका दहन आज, जानें सही मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/holika-dahan-2024-holika-dahan-today-know-the-correct-time-and-method-of-worship/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। होली हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। होली से एक दिन पहले होलिका दहन होता है, जो इस साल 24 मार्च यानी आज रविवार को मनाया जाएगा. यह पर्व भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को समर्पित है। इस दिन को लेकर लोगों के अपने-अपने विचार हैं। कहा जाता है कि [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> होली हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। होली से एक दिन पहले होलिका दहन होता है, जो इस साल 24 मार्च यानी आज रविवार को मनाया जाएगा. यह पर्व भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को समर्पित है। इस दिन को लेकर लोगों के अपने-अपने विचार हैं। कहा जाता है कि होलिका दहन से पहले मुहूर्त देखना बहुत जरूरी है क्योंकि इसके बिना यह त्योहार पूरा नहीं होगा. तो आईए जानते हैं पूजा के नियमों के बारे में ।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>होलिका दहन का</strong> <strong>शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इस साल होलिका दहन कुछ समय के लिए भद्रा काल के साये में रहेगा और 24 मार्च दिन रविवार रात 11:13 बजे तक रहेगा. ऐसे में होलिका दहन का सबसे अच्छा समय रात 11:14 बजे से 12:20 बजे के बीच है। इस दौरान बिना किसी परेशानी के होलिका दहन किया जा सकता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस तरह मनाएं होलिका दहन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>होलिका दहन की पूजा से पहले पवित्र स्नान करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>स्नान के बाद जहां होलिका दहन की पूजा कर रहे हो, वहां पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठ जाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पूजा के लिए गाय के गोबर से होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा बनाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके बाद रोली, अक्षत, फूल, फूलों की माला, कच्चा सूत, गुड़, साबुत हल्दी,मूंग, बताशे, गुलाल नारियल, 5 प्रकार के अनाज और एक लोटे में पानी रख लें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>फिर इन चीजों से विधि अनुसार करें</strong> <strong>पूजा </strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>फल, गुझिया, मीठी पूरी आदि का भोग लगाएं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इसके साथ ही भगवान नरसिंह की भी पूजा विधि-विधान के साथ करें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>अंत में अपनी मनोकामनाओं को होलिका दहन के समक्ष कहें।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दिन भर के शुभ मुहूर्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>होलिका दहन के दिन पड़ने वाले शुभ मुहूर्त की बात करें तो दिन भर में पड़ने वाले शुभ, लाभ और अमृत मुहूर्त काफी अच्छे होने वाले हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>लाभ – सुबह 9:24 से 10:56 तक<br>अमृत – सुबह 10:56 से दोपहर 12:00 का 27 मिनट तक<br>शुभ – दोपहर 1: 59 से 3:31 तक</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>ऐसे करें होलिका दहन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>होलिका दहन सूर्यास्त के बाद किया जाता है। इस दिन लोग होलिका जलाते हैं और मंत्रों का जाप करने के साथ पारंपरिक लोकगीत भी गाते हैं। होलिका दहन से पूर्व होली पर रोली, अक्षत, फूल कच्चे सूत का धागा, मूंग दाल, बताशा, हल्दी के टुकड़े, नारियल और गुलाल चढ़ाकर पूजा की जाती है। इसके पश्चात हाथों में जल लेकर होलिका की परिक्रमा की जाती है। इस दौरान घर परिवार की सुख समृद्धि की कामना भी की जाती है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/holika-dahan-2024-holika-dahan-today-know-the-correct-time-and-method-of-worship/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ekadashi 2024 : खाटूश्यामजी मेले में एकादशी पर लगा भक्तों का ताता, भक्तों ने किया बाबा के खास रूप के दर्शन]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ekadashi-2024-devotees-gathered-at-khatushyamji-fair-on-ekadashi-devotees-saw-the-special-form-of-baba/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटूश्यामजी मंदिर में पिछले 10 दिनों से मेले लगे हुए है। ऐसे में आज एकादशी तिथि पर बाबा के दरबार पर पहुंचने के लिए सुबह से ही लाखों की संख्या में भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। इसके साथ भक्तों की विशाल टोली बाबा का दर्शन करने के [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटूश्यामजी मंदिर में पिछले 10 दिनों से मेले लगे हुए है। ऐसे में आज एकादशी तिथि पर बाबा के दरबार पर पहुंचने के लिए सुबह से ही लाखों की संख्या में भक्तों का सैलाब उमड़ रहा है। इसके साथ भक्तों की विशाल टोली बाबा का दर्शन करने के लिए मंदिर प्रांगण में पहुंची। माना जाता हैं कि एकादशी तिथि पर बाबा का दर्शन करने से अति फल मिलता है। हालांकि आज एकादशी भी हैं इस वजह से खाटूश्यामजी लक्खी मेले में लोगों की भीड़ उमड़ी हुई है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>आज मंदिर में पहुचें हैं लाखों भक्त</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि एकादशी के पवित्र तिथि पर बाबा का दर्शन हेतु ज्यादा से ज्यादा भक्त मंदिर प्रांगण में पहुंच रहे हैं। मंदिर कमेटी के अनुसार बाबा आज एकादशी के मौके पर अपने दरबार की दहलीज पार कर भक्तों को दर्शन देने के लिए बाहर निकलेंगे। बाबा श्याम आज नील रंग के घोड़े पर सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे। अनुमान हैं कि एकादशी यानी आज 5 लाख से अधिक भक्त बाबा का दर्शन करने के लिए मंदिर पहुंचेंगे। ऐसे में आज लक्खी मेले के 10वें दिन तक 30 लाख से अधिक भक्तों ने बाबा खाटू श्याम का दर्शन कर सकते हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>बाबा की भव्य जुलूस आज निकालने की हो रही तैयारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एकादशी तिथि यानी आज बाबा श्याम मंदिर की दहलीज पार कर रथ पर सवार होकर अपने भक्तों को दर्शन देंगे । बाबा श्याम की सवारी मंदिर परिसर से निकलेगी। मुख्य बाजार, महिला श्याम कुण्ड, शनि मंदिर होते हुए सवारी अस्पताल चौराहे से होकर कबूतरिया चौक पर जाएगी । आज उम्मीद है कि मुख्य मेले पर पांच लाख से भी अधिक श्रद्धालु पहुंचेंगे। इस दौरान बाबा का रंग बिरंगे फूलों और ड्राई फ्रूट्स से मनमोहक श्रृंगार किया जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>हजारों की संख्या में तैनात हैं पुलिस</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>एकादशी के मुख्य मेले के कारण मंदिर प्रशासन के साथ-साथ पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सुरक्षा को लेकर अलर्ट है। बता दें कि सुरक्षा के लिए 5 हजार पुलिसकर्मी को मंदिर परिसर में तैनात किया गया है। वहीं, 350 CCTV कैमरे और 16 ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा रही है। सादा वर्दी में भी पुलिसकर्मी को तैनात किया गया है। जिला कलेक्टर कमर उल जमान चौधरी व SP भुवन भूषण यादव खाटूश्याम जी में ड्यूटी पर मौजूद है और लगातार व्यवस्थाओं को जायजा भी ले रहे है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>दो दिन में खत्म हो जाएंगे खाटूश्यामजी मेले</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>श्री खाटूश्यामजी के मेले की शुरुआत 12 मार्च को हुई, मेले की समापन 21 मार्च को होगी। फाल्गुन मेले में अब तक 25 लाख से ज्यादा भक्त बाबा का दर्शन कर चुके हैं। अभी मेले के दो दिन बचे हुए है। ऐसे में बताया जा रहा है कि आज और कल में 10 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन करेंगे। एकादशी पर बाबा का मुख्य मेला श्रद्धालु से भरा रहता है। ऐसे में आज 5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने के आसार हैं।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ekadashi-2024-devotees-gathered-at-khatushyamji-fair-on-ekadashi-devotees-saw-the-special-form-of-baba/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ramadan 2024 : रमजान का आज पहला रोजा, लोगों ने एक-दूसरे को दी मुबारकबाद]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ramadan-2024-today-is-the-first-fast-of-ramadan-people-congratulated-each-other/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। आज 12 मार्च से इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र माह रमजान शुरू हो गया है। देश भर में रमजान का पहला रोजा आज से रखा गया है। इस माह में मुस्लिम भाई पुरे एक माह तक रोजा रखते है। ऐसे में राजस्थान के इस्लाम भाइयों ने माहे रमजान उल मुबारक के चांद के दीदार [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर। </strong>आज 12 मार्च से इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र माह रमजान शुरू हो गया है। देश भर में रमजान का पहला रोजा आज से रखा गया है। इस माह में मुस्लिम भाई पुरे एक माह तक रोजा रखते है। ऐसे में राजस्थान के इस्लाम भाइयों ने माहे रमजान उल मुबारक के चांद के दीदार के लिए मुस्लिम भाई, बहनें सहित नन्हे-मुन्ने बच्चे अपने घरों की छतों पर सोमवार 11 मार्च को नजर आए और सभी ने चांद का दीदार करते हुए रमजान की मुबारकबाद एक दूसरे को दी।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>12 मार्च से रमजान का पवित्र माह शुरू</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>पश्चिम राजस्थान समेत देशभर में 12 मार्च से रमजान का पवित्र माह शुरू हो चुका है. बता दें कि चांद का दीदार होने के साथ ही रमजान माह का आगाज हो गया है. सोमवार की शाम चांद दिखते ही देश भर में उत्साह का माहौल देखा गया. इस्लाम भाइयों के घरों में रोजा रखने की तैयारी शुरू हो गई है। वहीं सोमवार रात से मस्जिदों में तरावीह भी जारी है. माना जाता हैं कि रमजान का माह बहुत ही रहमतों और बरकतों का माह है. इस महीने में एक नेकी के बदले 70 नेकियों के बराबर सफलता मिलती है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>11 मार्च देर रात चांद का हुआ दीदार</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>देश भर के इस्लाम भाइयों ने 11 मार्च देर रात चांद का दीदार करते हुए रमजान एक दूसरे को मुबारकबाद दिया। ऐसे में आज से रमजान का पहला रोजा रखा गया है। वहीं सोमवार देर रात देश भर के मुस्लिम भाइयों ने रोजे की नियत से मस्जिदों में तरावीह की नवाज अदा की। देर रात तक मुस्लिम भाई-बहनें ने अपने घरों में कुरान ए पाक की तिलावत करते हुए मुल्क की खुशहाली, अमनो-अमन व आपसी भाईचारे की दुआएं करते हुए अकीदत अल्लाह से पेश की है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इमाम ने दी लोगों को मुबारकबाद</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना हाजी लाल मोहम्मद सिद्दीकी के अनुसार रमजान का पहला रोजा 12 मार्च यानी आज सुबह शुरू हुआ, जिसकी खत्म सहरी का समय सुबह 5.35 बजे था और रोजा इफ्तारी का समय शाम 6 बजकर 54 मिनट होगा. ऐसे में मुस्लिम इंतजामिया कमेटी के सदर मोहम्मद मंजूर कुरैशी ने माहे रमजान की आमद की मुबारकबाद पेश करते हुए अकीदत एवं एहतराम के साथ माहे रमजान मनाने की अपील की है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>कौन रखा सकता है रोजा</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>इमाम वाहिदउज्जमा कासमी ने इस पर कहा कि इस्लाम में 13 से 14 उम्र के बच्चे बालिग हो जाते हैं. यह रोजा रख सकते हैं. वहीं इसके नीचे के बच्चे अगर रोजा रखते हैं तो इसका सबाब उनके पिता को जाता है.</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ramadan-2024-today-is-the-first-fast-of-ramadan-people-congratulated-each-other/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Rajasthan Holi 2024: राजस्थान के गोविंद दरबार में चढ़ेगा फाल्गुन का रंग, इस साल दिखेगा अद्भुत नजारा]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/rajasthan-holi-2024-the-color-of-phalgun-will-be-visible-in-govind-darbar-of-rajasthan-an-amazing-sight-will-be-seen-this-year/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। इस साल होली का पर्व मार्च माह के 24 और 25 तारीख को मनाया जाएगा। ऐसे में फाल्गुन माह शुरू होने के साथ ही राजस्थान के कहे जाने वाले छोटीकाशी में फाल्गुन माह का रंग बिखरने लगा है। बात करें गोविंद दरबार की तो यहां भी फागोत्सव का आयोजन शुरू हो गया है। 5 [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> इस साल होली का पर्व मार्च माह के 24 और 25 तारीख को मनाया जाएगा। ऐसे में फाल्गुन माह शुरू होने के साथ ही राजस्थान के कहे जाने वाले छोटीकाशी में फाल्गुन माह का रंग बिखरने लगा है। बात करें गोविंद दरबार की तो यहां भी फागोत्सव का आयोजन शुरू हो गया है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>5 मार्च को निकली रचना झांकी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>मार्च के पहले सप्ताह से ही शहर आराध्य गोविंद देवजी मंदिर में फागोत्सव कार्यक्रम शुरू है। बता दें कि 5 मार्च को यहां के मंदिरों में रचना झांकी के माध्यम से श्रीकृष्ण की अलग-अलग रूपों की झांकिया निकाली गई। ऐसे में मंदिरों में ठाकुर जी को गुलाल से रंगे वस्त्र धारण किए, इसके पश्चात भगवान को गुलाल अर्पित किया गया। गोविंददेवजी मंदिर में रचना झांकी में श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी झांकियों के दर्शन करने का सौभाग्य मिला।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>24 मार्च को गुलाल होली का आयोजन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि भगवान की झांकियों में श्री कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं को दिखाया जाएगा। झांकी में श्री कृष्ण के बाल अवस्था से लेकर महारास की लीलाएं भी दिखाई जाएगी। 5 से 16 मार्च तक रचना झांकी दर्शन का समय दोपहर 12:30 से 12: 45 बजे तक रहेगा। 24 मार्च को गोविंद देवजी मंदिर में गुलाल होली का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान ठाकुरजी राधेरानी के संग होली खेलते दिखेंगे। इस खुशी में भक्त भी होली के रंग में रंगने के लिए पहुंचेंगे। ऐसे में मंदिर में भक्त भी ठाकुरजी के साथ होली खेलते दिखेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>20-21 मार्च को पुष्प फागोत्सव का आयोजन</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>20 और 21 मार्च को पुष्प फागोत्सव का विशेष कार्यक्रम होगा। भजन सम्राट बाल व्यास श्रीकांत शर्मा दोपहर एक से शाम 4:30 बजे तक भजनों की अमृत वर्षा करेंगे। कलाकार फाल्गुनी नृत्य की प्रस्तुतियां देंगे। कोलकाता, बरसाना और शेखावाटी केे कलाकार पुष्प फागोत्सव में अपनी प्रस्तुतियों से चार चांद लगाएंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>24 मार्च को ठाकुर के समक्ष भक्त खेलेंगे होली</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>होली पद भजनामृत वर्षा अनुष्ठान का विशेष कार्यक्रम 22 मार्च को होगा। दोपहर 1 से शाम 4:30 बजे तक भजनों की स्वर लहरियां कोलकाता के पं. मालीराम शास्त्री बिखरेंगे। गोविंददेवजी को भजनों के माध्यम से रिझाया जाएगा। इस दौरान विशेष नृत्य की प्रस्तुति होगी। 24 मार्च को निज मंदिर में राजभोग आरती सुबह 11.15 बजे के बाद भक्त गुलाल से ठाकुर के समक्ष होली खेलेंगे।</p>
<!-- /wp:paragraph -->]]></content:encoded>
                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/rajasthan-holi-2024-the-color-of-phalgun-will-be-visible-in-govind-darbar-of-rajasthan-an-amazing-sight-will-be-seen-this-year/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[Ramadan 2024: जयपुर में रमजान की रौनक, खजूर समेत इन चीजों की बढ़ी डिमांड]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/ramadan-2024-celebration-of-ramadan-in-jaipur-increased-demand-for-these-things-including-dates/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। 11 मार्च को चांद का दीदार होते ही रमजान का पाकीजा महीना शुरु हो जाएगा। ऐसे में राजस्थान की राजधानी गुलाबी नगरी जयपुर में रमजान की रौनक अभी से ही दिखना शुरू है। हालांकि दो दिन बाद चांद का दीदार होते ही रहमतों और बरकतों का महीना रमजान आरंभ होगा। ऐसे में मुसलमान 30 [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-13T133636.604.jpg"/><!-- wp:paragraph -->
<p><strong>जयपुर।</strong> 11 मार्च को चांद का दीदार होते ही रमजान का पाकीजा महीना शुरु हो जाएगा। ऐसे में राजस्थान की राजधानी गुलाबी नगरी जयपुर में रमजान की रौनक अभी से ही दिखना शुरू है। हालांकि दो दिन बाद चांद का दीदार होते ही रहमतों और बरकतों का महीना रमजान आरंभ होगा। ऐसे में मुसलमान 30 दिनों तक उपवास करते हैं, जिसका सख्ती से पालन किया जाता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जयपुर में जमकर हो रही खरीदारी</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>बता दें कि रमजान से पहले ही राजधानी जयपुर के बाजारों में खरीददारों की भीड़ जुट रही हैं। हालांकि रमजान शुरू होने में अभी दो दिन बाकी है, लेकिन जयपुर में अभी से लोग विशेषकर मुस्लिम बाहुल्य बाजारों में टोपी, खजूर और इत्र की जमकर खरीददारी चल रही है। ऐसे में सभी लोगों को रमजान का इंतजार बेसब्री से रहता है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>इन चीजों की बढ़ी डिमांड</strong></h2>
<!-- /wp:heading -->

<!-- wp:paragraph -->
<p>जयपुर के परकोटे में रामगंज बाजार में रमजान को देखते हुए सभी दुकानें सजने लगी हैं। ऐसे में रमजान के पवित्र महीने में राजघानी जयपुर पूरी तरह से सजने वाली है। बाजारों में खजूर के अलावा टोपी, सुरमे एवं इत्र की भी डिमांड बढ़ गई है। इसको देखते हुए डिमांड की भरपाई के लिए लगातार इंतजाम किया जा रहा है।</p>
<!-- /wp:paragraph -->

<!-- wp:heading -->
<h2 class="wp-block-heading"><strong>जानें रमजान का महत्त्व</strong></h2>
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<p>रमज़ान में रोज़े रखना बहुत ज़रूरी है. इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक कुछ भी नहीं खाते-पीते हैं। इसके बाद वे पानी के साथ खजूर खाकर अपना रोजा खोलते हैं। इफ्तार इस पवित्र महीने में एक शानदार उत्सव है जहां परिवार के सभी सदस्य और करीबी दोस्त मौजूद होते हैं। हालांकि, यह व्रत उन लोगों के लिए कम महत्वपूर्ण है जिनकी तबीयत ठीक नहीं है या जो यात्रा कर रहे हैं।</p>
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<h2 class="wp-block-heading"><strong>रोजे में संयम जरूरी</strong></h2>
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<p>रमज़ान मुसलमानों के लिए परहेज़ का महीना है। यह उपवास की वह अवधि है जब विचारों से लेकर कार्यों तक व्यक्ति के आत्म-नियंत्रण की परीक्षा होती है। ऐसा माना जाता है कि प्रतिबंध हर व्यक्ति की ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करते हैं। इस्लाम में रमज़ान का महीना मुसलमानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।</p>
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<h2 class="wp-block-heading"><strong>30 दिनों के 3 जरूरी हिस्से</strong></h2>
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<p>रमज़ान के 30 दिनों को तीन हिस्सों में बांटा गया है. पहले दस दिन रहमत के होते हैं, अगले दस दिन आशीर्वाद के होते हैं और तीसरे या आखिरी दस दिन मगफिरत के होते हैं, जो रोजेदारों के लिए बहुत खास समय होता है। इस दौरान दुआ, जकात, भिक्षा आदि का बहुत महत्व होता है।</p>
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                    <pubDate>March 13, 2025, 8:07 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
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