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                    <title><![CDATA[निर्जला एकादशी 2025: जानें जल दान का महत्व और दीपक जलाने की सही जगहें]]></title>
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                    <description><![CDATA[जयपुर। सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का बहुत महत्व होता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। निर्जला एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का बहुत महत्व होता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। निर्जला एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से 24 एकादशियों का फल प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत करने से सभी तरह की इच्छाओं की पूर्ति होती है। आइए जानते हैं इस दिन कहां-कहां दीया जलाना शुभ होता है।
<h2><strong>एकादशी में कहां जलाएं दीपक</strong></h2>
ऐसा माना जाता है कि निर्जला एकादशी के दिन शाम के समय 4 दीपक जलाने चाहिए। पहला दीपक जलाकर अपने मंदिर में रखना चाहिए। मंदिर में इस दीपक को भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने रखना चाहिए। दूसरे दीपक को जलाकर पितरों को याद करके रखना चाहिए। दूसरा दीपक हमेशा अपने पितरों को समर्पित करना चाहिए। तीसरे दीपक को जलाकर पीपल के पेड़ के नीचे रखना चाहिए। इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक रखना शुभ होता है। चौथे दीपक को तुलसी के पौधे के नीचे रखना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि निर्जला एकादशी के दिन तुलसी के पेड़ के नीचे दीपक रखने से तुलसी मां प्रसन्न होती हैं।
<h3><strong>जल दान का महत्व</strong></h3>
निर्जला एकादशी में दान का भी बहुत महत्व होता है। इस दिन मिट्टी या तांबे के बर्तन में पानी भरकर दान करने से घर में खुशहाली बनी रहती है। साथ ही जितना आपका सामर्थ्य हो, उस हिसाब से ही आपको दान-पुण्य का काम करना चाहिए। जल को जीवनदाता और पापनाशक कहा जाता है। ऐसे में जल को दान करने से जीवन के सारे पाप नाश हो जाते हैं। साथ ही जलदान करने से पक्षियों की सेवा भी होती है। इस दिन जल दान करने से जीवन में शांति बनी रहती है। साथ ही सुखों में वृद्धि होती है। गर्मी के मौसम में तो जल दान का अधिक महत्व होता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[अक्षय तृतीया के दिन इस विधि से करें भगवान परशुराम की पूजा, होगी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/on-akshaya-tritiya-worship-lord-parshuram-in-this-way-all-your-wishes-will-be-fulfilled/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। अक्षय तृतीया के अवसर पर भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस साल अक्षय तृतीया 30 अप्रैल, 2025 को मनाई जाएगी। भगवान परशुराम का जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान परशुराम का जन्म अन्याय, अधर्म और पाप को खत्म [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> अक्षय तृतीया के अवसर पर भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस साल अक्षय तृतीया 30 अप्रैल, 2025 को मनाई जाएगी। भगवान परशुराम का जन्म ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान परशुराम का जन्म अन्याय, अधर्म और पाप को खत्म करने के लिए हुआ था।
<h2><strong>अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त</strong></h2>
हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर भगवान परशुराम का जन्मदिवस मनाया जाता है। भगवान परशुराम के जन्मदिवस को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। इस पावन दिन पर भगवान परशुराम की विधि विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त अप्रैल 29, 2025 को शाम 05:31 बजे शुरू होगा। वहीं इसकी समाप्ति अप्रैल 30, 2025 को दोपहर 02:12 बजे होगी। अक्षय तृतीया के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करना लाभकारी होता है।
<h3><strong>अक्षय तृतीया की पूजा विधि</strong></h3>
अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लेना चाहिए। हो सके तो इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने का बहुत अधिक महत्व होता है। अगर ऐसा न हो पाए तो घर के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। स्नान करने के बाद घर के मंदिर को अच्छे से साफ कर लें। मंदिर को साफ करने के बाद भगवान परशुराम की प्रतिमा को स्थापित करें। उनकी प्रतिमा के सामने दीप प्रज्वलित जलाएं। अगर आप व्रत करना चाहते हैं तो व्रत का संकल्प लें।
<h3><strong>भगवान का आशीर्वाद लें</strong></h3>
भगवान को सच्चे मन से याद करें। भगवान परशुराम को मीठे का भोग लगाएं। इस बात का खास ध्यान रखें कि भगवान परशुराम को केवल सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान की आरती उतारें। आरती उतारने के बाद उन्हें मंत्रों का जाप करें। अंत में भगवान का आशीर्वाद लें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[अक्षय तृतीया पर इन चीजों का करें दान, घर में कभी नहीं होगी अन्न-धन की कमी]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/donate-these-things-on-akshaya-tritiya-there-will-never-be-a-shortage-of-food-and-money-in-the-house-2/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का काफी महत्व होता है। इस दिन को सुख, समृद्धि और अनंत पुण्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन दान करना कभी व्यर्थ नहीं जाता। अक्षय तृतीया का दिन किया दान काफी फलदायी होता है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक इस साल [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का काफी महत्व होता है। इस दिन को सुख, समृद्धि और अनंत पुण्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन दान करना कभी व्यर्थ नहीं जाता। अक्षय तृतीया का दिन किया दान काफी फलदायी होता है। हिंदू कैलेंडर के मुताबिक इस साल अक्षय तृतीया 30 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी।
<h2><strong>किन चीजों का करें दान</strong></h2>
अक्षय तृतीया के दिन दान करना काफी शुभ माना जाता है। जो लोग इस दिन दान करते हैं, उनके घर में अन्न, धन और सुख-समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन किन चीजों का करना चाहिए दान।
<h3><strong>कपड़ा</strong></h3>
अक्षय तृतीया के दिन कपड़ों का दान शुभ माना जाता है। इस दिन अगर कपड़े दान किए जाएं तो बड़ा पुण्य प्राप्त होता है। वस्त्रों के दान से जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि दान केवल उन लोगों को किया जाए, जिन्हें असलियत में उसकी जरूरत है, ताकि आपके दान से किसी का कल्याण हो सके।
<h3>अन्न</h3>
अक्षय तृतीया के दिन अन्न का दान भी किया जाता है। इस दिन अन्न का दान करने से इच्छाओं की पूर्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन यदि किसी भूखे को खाना खिलाने या अन्न दान करने से इच्छा की पूर्ति होती है। ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा भी खुश होती हैं, जिससे घर की रसोई में कभी भी अन्न से खाली नहीं रहती।
<h2><strong>सोना-चांदी</strong></h2>
अक्षय तृतीया के मौके पर सोने और चांदी का दान करना भी लाभ देता है। सोना-चांदी का दान करने से मां लक्ष्मी खुश होती हैं। सोना-चांदी का दान करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। घर में किसी तरह का कोई कलह नहीं होता है। न घर में आर्थिक तंगी आती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[नवरात्रि में इन चीजों की खरीदारी होती है अशुभ, जानें इसकी पीछे की वजह]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/buying-these-things-during-navratri-is-inauspicious-know-the-reason-behind-it/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। आज नवरात्रि का छठा दिन है। यह दिन मां कात्यानी को समर्पित होता है। नवरात्रि में कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है। नवरात्रि के दौरान केवल सात्त्विक भोजन किया जाता है। यह नवरात्रि का एक महत्वपूर्ण नियम है। नवरात्रि में कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिन्हें खरीदने से बचना चाहिए। ऐसा न [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> आज नवरात्रि का छठा दिन है। यह दिन मां कात्यानी को समर्पित होता है। नवरात्रि में कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है। नवरात्रि के दौरान केवल सात्त्विक भोजन किया जाता है। यह नवरात्रि का एक महत्वपूर्ण नियम है। नवरात्रि में कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिन्हें खरीदने से बचना चाहिए। ऐसा न करने से मां दुर्गा नाराज हो जाती है। आइए जानते हैं कि कौन सी ऐसी चीजों जिन्हें भूलकर भी नहीं खरीदना चाहिए।
<h2><strong>मांसहारी खाने से परहेज करें</strong></h2>
नवरात्रि में केवल शुद्ध शाकाहारी भोजन ही खाना चाहिए। इस अवधि में मांसाहार से परहेज करना चाहिए। नवरात्रि में अंडे, मांस, मछली और शराब खरीदकर लाना और उसका सेवन करना पाप करने के बराबर होता है। जो व्यक्ति ऐसा करता है मां दुर्गा उनसे नाराज हो जाती हैं। ये सभी पदार्थ तामसिक भोजन माने जाते हैं, जो मन और शरीर में आक्रोश को बढ़ाते हैं।
<h2><strong>मीठी चीजों से बचें</strong></h2>
केवल मांसाहार ही नहीं, बल्कि ज्यादा तली-भुनी और बहुत मीठी चीजों को खाने से बचाना चाहिए। नवरात्रि में भारी मिठाइयां, केक या डेसर्ट को खरीदने से परहेज करना चाहिए। नवरात्रि का उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा को पवित्र बनाए रखना होता है, इसलिए भारी भोजन के सेवन से बचना चाहिए। बाहर का खाना और मीठी चीजें शरीर में उत्तेजना को बढ़ाती है।
<h2><strong>महंगे उपकरणों की खरीदारी न करें</strong></h2>
नवरात्रि के समय में नए इलेक्ट्रॉनिक्स और महंगे उपकरणों की खरीदने से बचना चाहिए। इसका मुख्य कारण यह है कि इस पवित्र अवसर पर किसी भी प्रकार की विलासिता पर राशि खर्च करना व्यर्थ होता है। इससे मां दुर्गा नाराज हो सकती हैं। साथ ही फालतू चीजों पर धन खर्च करने से मां लक्ष्मी रुठ जाती है। नवरात्रि के दौरान केवल जरूरत की चीजों पर धन करना चाहिए।
<h2><strong>भौतिक वस्तुओं की खरीद से बचें</strong></h2>
नवरात्रि में नई गाड़ी, मोबाइल, फ्रिज, टीवी या अन्य महंगे सामानों को नहीं खरीदना चाहिए, क्योंकि यह भौतिक सुख-सुविधाओं की ओर ध्यान केंद्रित करता है। ऐसा करने से अध्यात्म से ध्यान हटकर विलासिता की ओर चला जाता है। जोकि नवरात्रि के उद्देश्य से विपरीत है।
<h2><strong>काले रंग के कपड़े ना खरीदें</strong></h2>
नवरात्रि के दौरान काले रंग के कपड़े पहनना या खरीदना अशुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकता है। यह रंग शुभ समय में मानसिक शांति को बाधित करने का काम करता है। इसके बजाय आप हल्के रंग जैसे पीला, नारंगी या सफेद पहन सकते हैं। यह रंग शुभ माने जाते हैं।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[नवरात्र के चौथे दिन होती है मां कुष्मांडा की पूजा, जानें इनका स्वरूप और पौराणिक कथा]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/mother-kushmanda-is-worshipped-on-the-fourth-day-of-navratri-know-her-form-and-mythology/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। नवरात्रि के चौथा दिन मां कुष्मांडा का दिन होता है। इस दिन मां कुष्मांडा विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त उन्हें भोग में मिठाई, फल का भोग लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। जिंदगी में आने [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> नवरात्रि के चौथा दिन मां कुष्मांडा का दिन होता है। इस दिन मां कुष्मांडा विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त उन्हें भोग में मिठाई, फल का भोग लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। जिंदगी में आने वाली सभी तरह की रुकावटें दूर होती हैं।
<h2><strong>मां कुष्मांडा की पूजा का महत्व</strong></h2>
देवी पुराण के मुताबिक विद्यार्थियों को नवरात्रि में मां कुष्मांडा की पूजा जरूर करनी चाहिए। मां की पूजा करने से बुद्धि का विकास होता है। मां कुष्मांडा आठ भुजाओं वाली दिव्य शक्ति हैं, उन्हें परमेश्वरी का रूप माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मां कुष्मांडा की पूजा करने से बिगड़ते काम बन जाते हैं। मां कुष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। देवी पुराण में बताया गया है कि मां कुष्मांडा सभी पापों का हर लेती है।
<h2><strong>मां कुष्मांडा की पौराणिक कथा</strong></h2>
देवी कुष्मांडा, दुर्गा मां का चौथा रूप हैं। देवी भागवत पुराण में उनकी महिमा का वर्णन है। माना जाता है कि उन्होंने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया था। इसलिए उन्हें कुष्मांडा देवी कहा जाता है। सृष्टि के निर्माण के आरंभ में अंधकार था, जिसे मां ने अपनी हंसी से दूर किया। उनमें सूर्य की गर्मी सहने की शक्ति है। इसलिए, उनकी पूजा करने से भक्तों को शक्ति और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
<h2><strong>मां कुष्मांडा का स्वरुप</strong></h2>
मां कुष्मांडा का स्वरूप बहुत ही दिव्य है। उनकी सवारी शेर है। वह शेर पर सवार करती हैं। उनकी आठ भुजाएं हैं जिनमें कई अस्त्र होते हैं। इन भुजाओं में उन्होंने कलश, कमंडल, कमल और सुदर्शन चक्र पकड़ा होता है। मां कुष्मांडा हमें जीवन जीने की शक्ति देती हैं। मां का यह रूप हमें सकारात्मक शक्ति देता है। मां कुष्मांडा का रूप बहुत ही दिव्य है। यह शक्ति और प्रेरणा का प्रतीक है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[शनि अमावस्या के दिन अपनाएं ये अचूक उपाय, साढ़े साती होगी दूर]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/follow-these-infallible-remedies-on-the-day-of-shani-amavasya-sade-sati-will-go-away/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। अगर अमावस्या शनिवार को पड़ जाती है तो यह और भी फलदाई हो जाता है। शनिवार को पड़ने की वजह से इसे शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। शनि अमावस्या पर कई उपायों को अपनाकर शनि की कृपा आसानी से पाई जा सकती है। खासतौर से रोजगार और नौकरी की समस्याएं आसानी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> अगर <strong>अमावस्या</strong> शनिवार को पड़ जाती है तो यह और भी फलदाई हो जाता है। शनिवार को पड़ने की वजह से इसे शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। शनि अमावस्या पर कई उपायों को अपनाकर शनि की कृपा आसानी से पाई जा सकती है। खासतौर से रोजगार और नौकरी की समस्याएं आसानी से दूर हो सकती हैं।
<h2><strong>शनि देव को प्रसन्न करने के लिए</strong></h2>
शनि देव की पूजा प्रदोष काल या रात्रि में की जाती है। इस दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। इसके लिए आप व्रत भी रख सकते है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद शनि चालीसा या शनि मंत्र का जाप करें। शनिदेव से कृपा पाने की प्रार्थना करें। इस दिन किसी गरीब को खाने पीने की चीजों का दान करने से पुण्य मिलता है।
<h2><strong>भविष्य में तरक्की करने के लिए</strong></h2>
एक काला धागा ले और उसे पीपल वृक्ष की डाल में बांध दें। इस धागे में तीन गांठ लगाएं। एक कटोरी में सरसों का तेल डाल लें। उसमें बाएं हाथ की मध्यमा उंगली डालकर शनि मंत्र का जाप करें। मंत्र होगा - "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः". सरसों के तेल को पीपल के वृक्ष के नीचे रख दें। ऐसा करने से भविष्य में तरक्की मिल्गी।
<h2><strong>साढ़ेसाती को खत्म करने के उपाय</strong></h2>
शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती के असर को कम करने के लिए शनि अमावस्या का दिन सबसे बढ़िया है। शनि अमावस्या के दिन शनिदेव और महादेव की पूजा अर्चना और दान करने से घर मे साढ़ेसाती खत्म हो जाती है। इस दिन पूजा करने से राशि के दोष भी दूर हो जाते हैं।
<h2><strong>पितरों को प्रसन्न करने के उपाय</strong></h2>
इस दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं। साथ ही पितृदोष से भी मुक्ति भी मिलती है। एक लोहे का छल्ला लेकर आएं। उसे शनिवार की सुबह सरसों के तेल में डुबाकर रख दें। शाम को शनिदेव के मंत्रों का जाप करें। उनकी विधिपूर्वक आरती करें। इसके बाद लोहे के छल्ले को बाएं हाथ की मध्यमा उंगुली में धारण कर लें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <title><![CDATA[नवरात्र में 9 दिनों इन चीजों का लगाया जाता है भोग, मां दुर्गा होती है बहुत प्रसन्न]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/these-things-are-offered-for-9-days-during-navratri-maa-durga-is-very-happy/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी। नवरात्र पर देवी दुर्गा का नौ स्वरूपों की विधि- विधान से पूजा की जाती है। इस बार नवरात्र की शुरुआत 30 मार्च, रविवार से होगी। नवरात्र में देवियों को पूजा जाता है। नवरात्र के आखिरी दिन यानी नौवे दिन कन्या [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी। नवरात्र पर देवी दुर्गा का नौ स्वरूपों की विधि- विधान से पूजा की जाती है। इस बार नवरात्र की शुरुआत 30 मार्च, रविवार से होगी। नवरात्र में देवियों को पूजा जाता है। नवरात्र के आखिरी दिन यानी नौवे दिन कन्या पूजन किया जाता है। आइए जानते हैं कि इन 9 दिनों में देवी के 9 स्वरूपों को किस चीज का भोग लगाना चाहिए।
<h2><strong>गाय के घी का भोग लगाएं</strong></h2>
नवरात्र के पहला दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री को समर्पित होता है। इस दिन मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग लगाना चाहिए। इससे आरोग्य लाभ मिलता है।
<h2><strong>शक्कर का चढ़ाएं</strong></h2>
नवरात्र का दूसरा दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी का दिन होता है। इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से चिरायु का वरदान मिलता है।
<h2><strong>दूध का भोग लगाएं</strong></h2>
नवरात्र का तीसरा दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा को दूध का भोग लगाना चाहिए। साथ ही किसी गरीब या जरूरतमंद को दान कर देना चाहिए। ऐसा करने से धन-वैभव और ऐश्वर्य हासिल होता है।
<h2><strong>मालपुआ अर्पण करें</strong></h2>
नवरात्र के चौथा दिन कुष्मांडा को समर्पित होता है। यह मां दुर्गा का चौथा स्वरूप होती हैं। इस दिन मां कुष्मांडा को मालपुआ का नैवेध अर्पण करना चाहिए। मां को भोग लगाने के बाद उसे जरूरतमंद को दान कर देना चाहिए। ऐसा करने से मनोबल बढ़ता है।
<h2><strong>केले का भोग लगाएं</strong></h2>
नवरात्र के पांचवा दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। इस दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से बुद्धि का विकास होता है और भविष्य में ग्रोथ मिलती है।
<h2><strong>शहद अर्पण करें</strong></h2>
नवरात्र का छठवां दिन मां दुर्गा के षष्टम स्वरूप मां कात्यानी का होता है। इस दिन मां कात्यानी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इस दिन मां कात्यानी को शहद का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से सौंदर्य की प्राप्ति होती है। साथ ही घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
<h2><strong>गुड़ को चढ़ाएं</strong></h2>
नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि को पूजा जाता है। इस दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से निर्मित भोग को नैवेध अर्पण करना चाहिए। ऐसा करने से रोग-शोक से मुक्ति मिलती है और परिवार भी स्वस्थ्य रहता है।
<h2><strong>नारियल का भोग लगाएं</strong></h2>
नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी का होता है। इस दिन देवी महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां महागौरी को नारियल का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से मनुष्य की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और माता का आशीर्वाद बना रहता है।
<h2><strong>हलवा पूरी चढ़ाएं</strong></h2>
नवरात्र के नौवा दिन सिद्धिदात्री मां को समर्पित होता है। इस दिन सिद्धिदात्री मां को पूजा जाता है। यह नवरात्र का आखिरी दिन होता है इसलिए कन्या पूजन किया जाता है। कन्या में बनने वाली सभी चीजों का भोग पहले सिद्धिदात्री मां को लगाया जाता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी पर राशियां करें ये उपाय, मिलेगी सफलता]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/on-bhalachandra-sankashti-chaturthi-zodiac-signs-should-follow-these-remedies-you-will-get-success/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन भगवान गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करने से व्रती पर गणेश जी की कृपा बनी रहती है। इस दिन भगवान गणेश की जी पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशियां भी बनी रहती हैं। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन भगवान गणेश जी की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन व्रत करने से व्रती पर गणेश जी की कृपा बनी रहती है। इस दिन भगवान गणेश की जी पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशियां भी बनी रहती हैं। भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी के शुभ अवसर पर अपनी राशि मुताबिक कुछ उपाय करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते है। साथ ही रुपए-पैसों से जुड़ी दिक्कत की समस्या भी हल हो जाती है।

<strong>राशियां करें ये काम</strong>

भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी पर राशि के मुताबिक काम करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। आइए जानते हैं किस राशि को क्या करना चाहिए काम।

<strong>वृषभ राशि</strong>- इस राशि के लोगों को गणपति जी का आशीर्वाद पाने के लिए ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करना चाहिए।

<strong>मिथुन राशि</strong>- मिथुन राशि के लोगों को भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को बेसन के लड्डू चढ़ाने चाहिए।

<strong>कर्क राशि</strong>- श्री गणेश की कृपा प्राप्ति के लिए कर्क राशि के लोग भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान को दूर्वा घास अर्पित करनी चाहिए।

<strong>सिंह राशि</strong>- संकष्टी चतुर्थी के मौके पर इस राशि के लोगों को भगवान श्री गणेश को मोदक और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए।

<strong>कन्या राशि</strong>- भगवान गणेश की चुतर्थी पर उन्हें पीला चंदन अर्पित करना चाहिए, ऐसा करने से जीवन में सफलता मिलेगी।

<strong>मेष राशि</strong>- मेष राशि के लोगों को चतुर्थी के अवसर पर भगवान श्री गणेश का गंगाजल अर्पित करना चाहिए। साथ ही भगवान के माथे पर लाल चंदन लगाएं।

<strong>तुला राशि</strong>- आज के दिन तुला राशि के लोगों को कच्चे दूध और गंगाजल से बप्पा का अभिषेक करना चाहिए।

<strong>वृश्चिक राशि</strong>- वृश्चिक राशि के लोगों को दही और शहद से गणपति जी का अभिषेक करके मंत्र का जाप करें।

<strong>धनु राशि</strong>- भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी के दिन धनु राशि के लोगों को पीले फूल और वस्त्र चढ़ाने चाहिए।

<strong>मकर राशि</strong>- गणपति जी का आशीर्वाद पाने के लिए मकर राशि के लोगों को गणेश जी की चालीसा का पाठ करना चाहिए।

<strong>कुंभ राशि</strong>- इस राशि से संबंधित लोगों को संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को मोदक दूर्वा घास चढ़ाना चाहिए।

<strong>मीन राशि</strong>- मीन राशि के लोगों को गणपति बप्पा का आशीर्वाद पाने के लिए प्रभु को खीर का अर्पित करें।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[दिल की धड़कन,होली के रंगों में छुपी भावनाएं]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/heart-beats-emotions-hidden-in-the-colors-of-holi/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। होली रंगों का त्योहार नहीं है बल्कि भाईचारे और प्रेम का भी त्योहार है। यह त्योहार अपने साथ खुशियां और उत्साह लेकर आता है। होली के त्योहार में हम रंग-बिरगे कई तरह के रंगों का इस्तेमाल करते है। क्या आप जानते हैं हर रंग की अपनी एक कहानी होती है। रंगों का महत्व होली [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> होली रंगों का त्योहार नहीं है बल्कि भाईचारे और प्रेम का भी त्योहार है। यह त्योहार अपने साथ खुशियां और उत्साह लेकर आता है। होली के त्योहार में हम रंग-बिरगे कई तरह के रंगों का इस्तेमाल करते है। क्या आप जानते हैं हर रंग की अपनी एक कहानी होती है।

<strong>रंगों का महत्व</strong>

होली में इस्तेमाल होने वाले रंगों का अपना अलग महत्व होता है। होली का हर रंग अपनी अलग कहानी बयां करती है। क्या आपने कभी सोचा है कि जब आप किसी को लाल रंग लगाते हैं वास्तव में उसका क्या मतलब होता है। जब आप हरे रंग का इस्तेमाल करते है तो वह कौन सी भावना व्यक्त करता है। इस होली आइए जानते है रंग के रहस्यों के बारे में।
<h2><strong>लाल रंग</strong></h2>
होली में लाल का रंग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। लाल रंग ऊर्जा और प्रेम का प्रतीक है। आप अपने प्रेमी या करीबी दोस्तों को लाल रंग लगाकर उनके लिए अपना प्यार व्यक्त कर सकते हैं। आप अपने किसी ऐसे को लाल रंग लगाकर उन्हें अपनी फिलिंग के बारे में बता सकते है।
<h2><strong>हरा रंग</strong></h2>
हरा रंग बाकी के रंगों से ज्यादा चटख और गहरा होता है। हरे रंग का गुलाल देखने में काफी सुंदर लगता है। यह रंग नई शुरुआत को दर्शाता है। साथ ही यह मन के बैर-भाव को खत्म करने का प्रतीक है। हरे रंग का इस्तेमाल आप उन लोगों के लिए कर सकते है जिनसे आप अपने सभी मतभेद दूर कर सकते है। इसे लगाकर आप किसी रूठे हुए व्यक्ति को मना सकते हैं।
<h2><strong>नीला रंग</strong></h2>
नीला रंग देखने में बहुत ही सुंदर लगता है। नीला रंग लोगों को अपनी ओर काफी आकर्षित करता है। नीला रंग स्थिरता का प्रतीक होता है। अगर आप अपने किसी करीबी को धैर्य की भावना बताने चाहते है तो उन्हें नीला रंग लगा सकते है। नीला रंग जीवन में ठहराव और संतुलन का संदेश देता है।
<h2><strong>पीला रंग</strong></h2>
पीला रंग एक शांति वाला रंग है। पीला रंग सुख, शांति और मानसिक विकास का प्रतीक है। यह रंग जीवन में खुशहाली और शांति का संदेश देता है। इस रंग का गुलाल आप उस व्यक्ति को लगा सकते है, जिसके जीवन में आप चाहते है कि खुशी और समृद्धि का आगमन हो।
<h2><strong>गुलाबी रंग</strong></h2>
गुलाबी रंग होली के दौरान मिलने वाला सबसे आम रग है। गुलाबी रंग दोस्ती और स्नेह का प्रतीक है। गुलाबी रंग आप अपने करीबी दोस्तों या परिजनों को लगाकर उन्हें अपना प्रेम व्यक्त कर सके हैं। गुलाबी रंग लगाकर आप उन्हें उनकी अहमियत के बारे में बता सकते है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
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                    <title><![CDATA[राजस्थान में गुलाल गोटे से खेलते है होली, क्या है यह रंगों की गेंद]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/in-rajasthan-holi-is-played-with-gulal-gote-what-is-this-ball-of-colors/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। आज होलिका दहन की जाएगी। होलिका दहन के बाद होली का त्योहार मनाया जाएगा। होली के त्योहार हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। इसे हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। रंगों का यह त्योहार हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा को आता है। होली का त्योहार पूरे देश [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> आज होलिका दहन की जाएगी। होलिका दहन के बाद होली का त्योहार मनाया जाएगा। होली के त्योहार हर साल धूमधाम से मनाया जाता है। इसे हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। रंगों का यह त्योहार हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा को आता है। होली का त्योहार पूरे देश में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है।
<h2><strong>राजस्थान की अनोखी परंपरा</strong></h2>
इस दौरान लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हैं और होली की बधाई देते हैं। होली के दिन लोगों के घरों में तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं। आमतौर पर होली खेलने के लिए लोग आर्टिफिशियल रंग का इस्तेमाल करते हैं, जो कई मायनों में हानिकारक होता है। आप बाजार से कितने की हर्बल रंग क्यों नाखऱीद, लेकिन इसमें मिलावट की संभावना रहती ही है। देशभर में होली खेलने की कई सारी परंपराएं मशहूर हैं। इन्हीं में से एक जयपुर का मशहूर गुलाल गोटा। गुलाल गोटा होली मनाने का एक अनोखा तरीका है। आइए जानते हैं इस अनूठी परंपरा के बारे में।
<h2><strong>लाख से तैयार होती है गुलाल की गेंद</strong></h2>
गुलाल गोटा लाख से बनी एक छोटी सी गेंद होती है। इसमें अलग-अलग रंग के सूखे गुलाल को भरे जाते हैं। गुलाल से भरे जाने पर इसका वजन लगभग 20 ग्राम होता है। होली के दिन लोग इन्हीं गेंदों को एक-दूसरे पर फेंकते हैं, जो टकराने पर टूट जाती है और यह रंग लोगों के ऊपर गिरता है। जयपुर में होली खेलने की यह परंपरा करीबन 300 साल पुरानी है। गुलाल गोटे से होली खेलने की यह परंपरा राजा-महाराजाओं के समय से चली आ रही है। यहां कुछ मुस्लिम परिवार पीढ़ियों से गुलाल गोटे को बनाते आ रहे हैं।
<h2><strong>शाही परिवारों मे खेली जाती है गोटा होली</strong></h2>
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें स्थानीय कारीगर इन गुलाल गोटे को बनाते नजर आ रहे हैं। यूं तो गुलाल गोटे से होली खेलने की रस्म शाही परिवारों से शुरू हुई थी और तब से लेकर आज तक राजस्थान में इसी से होली खेली जाती है। खास बात यह है जयपुर में तैयार होने वाले ये इन गुलाल गोटे की मांग केवल देश ही नहीं, विदेश में भी काफी ज्यादा है। मथुरा-वृंदावन से लेकर ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और सिंगापुर तक लोग इसे काफी पसंद करते हैं।
<h2><strong>इस तरह बनता है गुलाल गोटा</strong></h2>
इन्हें बनाने वाले स्थानीय कारीगरों के मुताबिक गुलाल गोटे को बनाने के लिए प्राकृतिक लाख का उपयोग किया जाता है। सबसे पहले लाख को आग में तपाकर पिघलाया जाता है। पिघले हुए इस लाख को छोटी-छोटी गेंदों का आकार दिया जाता है। इसके बाद इन गेंदों को ठंडा करने के लिए पानी में डाला जाता है। ठंडा होने के बाद इन गेंदों में अलग-अलग रंगों के गुलाल भरे जाता हैं और फिर इन्हें सील कर दिया जाता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
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                    <title><![CDATA[सोमवार के दिन करें ये उपाय, जीवन में मिलेगी सफलता]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/follow-these-remedies-on-monday-you-will-get-success-in-life/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। सप्ताह का सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन देवों के देव महादेव की पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है। अगर संभव हो तो सोमवार के दिन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल और बेलपत्र जरूर अर्पित [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> सप्ताह का सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन देवों के देव महादेव की पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही सुख-समृद्धि और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है। अगर संभव हो तो सोमवार के दिन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल और बेलपत्र जरूर अर्पित करें। ऐसा करने से भोलेनाथ आपका हर दुख-दर्द कर देंगे। आइए जानते हैं सोमवार के उपायों के बारे में।

<strong>जरूरतमंद को दान करें</strong>

अगर आप अपने लक्ष्यों की प्राप्ति करना चाहते है तो आपको सोमवार के दिन किसी जरूरतमंद को अनाज दान करना होगा। ऐसा करने से आपको जीवन में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। सोमवार के दिन आपको भगवान शिव की पूजा करने के साथ ही किसी गरीब या जरूरतमंद को दान के रुप में भोजन या कुछ पैसे देने चाहिए। ऐसा करना काफी शुभ माना जाता है।

<strong>शिव के मंत्रों का जाप करें</strong>

इस दिन भगवान शिव की पूजा करने के साथ ही उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए। ऊँ नमः शिवाय मंत्र का 11 बार जाप करने से लोगों के जीवन में सकारात्मकता आती है। अगर आप चाहते है कि आपके काम में बेहतरी आए तो इसके लिए आपको सूत का धागा बेल के पेड़ पर लपेटना होगा। सूत का धागे को पेड़ पर 7 बार लपेटना होगा।

<strong>सफेद चंदन पास रखें</strong>

जिंदगी में कोई परेशानी चल रही है तो इसके लिए आप एक उपाय कर सकते है, आप सफेद चंदन की गोली को अपने पास रख सकते हैं। उसे 27 दिनों तक अपने पास रखे। 28वें दिन आपको खुद फर्क दिखने लग जाएगा। आप चाहे तो चंदन की गोली को धागे में पिरोक कर गले में धारण कर सकते है।

<strong>पानी पीकर घर से निकले</strong>

अगर आप किसी बिजनेस ट्रिप से कही बाहर जा रहे है तो आपको घर से पानी पीकर जाना चाहिए। ऐसा करने से ट्रिप में सफलता मिलती है। हो सके तो पानी पीने से कुछ मीठे का खा लें। मीठा खाने से जिंदगी में मिठास आती है।

<strong>चांदी का टुकड़ा पस रखें</strong>

यदि आपके व्यापार या काम में काफी समय से कुछ अच्छा नहीं हो रहा है तो आपको चांदी का कोई टुकड़ा उस जगह पर रखना होगा, जहां आप संपत्ति को रखते हैं। चांदी पैसों को रोकने का काम करता है। साथ ही जीवन में चल रही आर्थिक समस्या से छुटकारा दिलाता है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
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                    <title><![CDATA[जानें कब है आमलकी एकादशी, का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और लाभ]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/know-when-is-amalaki-ekadashi-its-auspicious-time-worship-method-and-benefits/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। आमलकी एकादशी 10 मार्च को है। होली और महाशिवरात्रि के बीच में पड़ने वाली इस एकादशी को आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। फाल्‍गुन मास के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> आमलकी एकादशी 10 मार्च को है। होली और महाशिवरात्रि के बीच में पड़ने वाली इस एकादशी को आंवला एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। फाल्‍गुन मास के शुक्‍ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन भगवान विष्‍णु की पूजा का खास महत्व होता है।
<h2><strong>आमलकी एकादशी के लाभ</strong></h2>
आमलकी एकादशी पर आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आवंले के पेड़ का खास तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। यह व्रत उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य के लिए रखा जाता है। इस दिन मंदिर में आंवला का पेड़ लगाने की मान्यता होती है। ऐसा माना जाता है कि आंवले के वृक्ष की पूजा और उसका सेवन करने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है। साथ ही भाग्य अच्छा होता है। आइए जानते है कि मूहुर्त और पूजा विधि।
<h3>आमलकी एकादशी का शुभ मूहुर्त</h3>
आमलकी एकादशी 10 मार्च, सोमवार को मनाई जाएगी। फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी 9 मार्च, रविवार सुबह 7 बजकर 45 मिनट से शुरू होगी। वहीं इसकी शुरूआत 10 मार्च, सोमवार सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर जाकर समाप्त होगी। उदया तिथि के मुताबिक आमलकी एकादशी 10 मार्च को मनाई जानी है। आमलकी एकादशी का व्रत 10 मार्च को रखा जाएगा। आमलकी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को कई तरह के लाभ मिलते हैं। धर्मग्रंथों के मुताबिक इस व्रत को करने से सैकड़ों तीर्थयात्राओं और यज्ञों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।
<h3><strong>आमलकी एकादशी की पूजा विधि</strong></h3>
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी तरह के पापों का नाश होता है। साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। इससे जीवन के सभी दुख दूर होते हैं। व्रत करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह व्रत जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और साथ ही करियर कारोबार में आगे बढ़ने के प्रयासों को सफलता मिलती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                  </item><item>
                    <title><![CDATA[फुलेरा दूज के दिन करें ये काम, नहीं तो होगा भारी नुकसान]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/do-this-work-on-the-day-of-phulera-dooj-otherwise-there-will-be-huge-loss/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। पंचांग के मुताबिक हर साल फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करनी चाहिए। फुलेरा दूज का दिन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित होता है। इस दिन उन पर फूलों की वर्षा की जाती है। [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> पंचांग के मुताबिक हर साल फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को फुलेरा दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करनी चाहिए। फुलेरा दूज का दिन भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित होता है। इस दिन उन पर फूलों की वर्षा की जाती है।
<h2><strong>राधा रानी की उपासना</strong></h2>
इस पर्व को मथुरा और वृंदावन समेत पूरे ब्रज में बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी की उपासना करने से सुख-समृद्धि आती है। साथ ही श्री कृष्ण का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे में आइए जानते हैं फुलेरा दूज के दिन क्या करें और क्या न करें?
<h3><strong>फुलेरा दूज के दिन क्या करना चाहिए?</strong></h3>
इस दिन सुबह उठकर जल्दी स्नान कर लेना चाहिए। स्नान करने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। शुभ मुहूर्त को देखते हुए भगवान कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। उन पर फूल अर्पित करने चाहिए। इसके अलावा उन्हें गुलाल भी लगा सकते है। उनकी प्रतिमा के आगे घी का दीपक जलाएं। फुलेरा दूज के दिन माखन, फल और मिश्री से भोग लगाना चाहिए। अन्न और धन का दान करना चाहिए। जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करनी चाहिए। कृष्ण चालीसा का पाठ करना भी शुभ होता है।
<h3><strong>फुलेरा दूज के दिन ना करें ये काम</strong></h3>
फुलेरा दूज के दिन काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। किसी के गलत भाषा में बात ना करें। किसी के ऊपर अभद्र टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। लड़ाई-झगड़े से दूर रहना चाहिए। बुजुर्गों और महिलाओं का अपमान करने से बचें। इस दिन मादक पदार्थ जैसे दारू और मांस का सेवन करने से बचना चाहिए। इस दिन नाखुन काटने से बचना चाहिए। ऐसा करने से अशुभ होता है।
फुलेरा दूज के दिन किसी भी गलत काम करने से बचना चाहिए।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[शुक्रवार के दिन इन उपायों को करने से होगी मनोवांछित फलों की प्राप्ति]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/by-doing-these-measures-on-friday-you-will-get-the-desired-results/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। सनातन धर्म में शुक्रवार के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही लक्ष्मी वैभव व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही धन संबधी परेशानी दूर हो जाती है। ज्योतिष भी सुखों में वृद्धि और संकटों से मुक्ति [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> सनातन धर्म में शुक्रवार के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही लक्ष्मी वैभव व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही धन संबधी परेशानी दूर हो जाती है। ज्योतिष भी सुखों में वृद्धि और संकटों से मुक्ति के लिए मां लक्ष्मी की पूजा करने की सलाह देते है।
<h2><strong>मां लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करना </strong></h2>
साधक शुक्रवार के दिन भक्ति भाव से धन की देवी मां लक्ष्मी संग भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। इस दिन पूजा के समय विशेष उपाय भी किया जाता है। इन उपायों को करने से साधक पर मां लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है। अगर आप भी आर्थिक तंगी से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो शुक्रवार के दिन पूजा के समय ये उपाय अवश्य करें।
<h3><strong>सफेद या गुलाबी फूल चढ़ाए</strong></h3>
धन की देवी लक्ष्मी को सफेद और लाल रंग के फूल बहुत प्रिय होते हैं। आज के दिन मां को इसी रंग के अर्पित करने चाहिए, इससे लक्ष्मी मां बहुत खुश होती है। आप चाहे तो मां लक्ष्मी को गुलाब या कमल का फूल चढ़ा सकते हैं। इससे मन की सभी इच्छाएं पूरी होती है।
<h3><strong>सफेद चीजों का दान करें</strong></h3>
अगर कुंडली में शुक्र को मजबूत करना चाहते है तो इस दिन स्नान करने के बाद सफेद वस्त्र धारण करने चाहिए। साथ ही सफेद रंग जैसे आटा, चावल, दूध और दही जैसी चीजों को दान में देना चाहिए। इस चीजों को दान करने से बिगड़े काम सुधर जाते हैं।
<h3><strong>खीर का भोग लगाएं</strong></h3>
अगर आप पैसों से जुड़ी समस्याओं से सूझना रहे है तो शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। वहीं मां को प्रसाद के रूप में चावल की खीर का भोग लगा सकते हैं। ऐसे उपाय करने से आय में वृद्धि होती है।
<h3><strong>16 शुक्रवार का व्रत करें</strong></h3>
इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करने के साथ-साथ कमल से बनी फूलों की माला अर्पित करनी चाहिए। साथ ही देवी लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से सभी दुख दूर होते हैं। करियर में सफलता मिलती है। सभी तरह के संकटों से छुटकारा पाने के लिए 16 शुक्रवार के व्रत रखने चाहिए। इस व्रत को करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[मंगलवार के दिन इन कामों से करें परहेज, नहीं तो झेलना पड़ेगा हनुमान जी का प्रकोप]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/avoid-these-things-on-tuesday-otherwise-you-will-have-to-face-the-wrath-of-hanuman-ji/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर। हिंदू धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। ऐसे ही मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित होता है। इस दिन हनुमान जी विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मंगलवार के दिन बजरंगबली जी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन की सभी प्रकार की [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर।</strong> हिंदू धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है। ऐसे ही मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित होता है। इस दिन हनुमान जी विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक मंगलवार के दिन बजरंगबली जी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन की सभी प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती हैं।
<h2><strong>इन कामों को करने से बचें</strong></h2>
वहीं, अगर आप मंगलवार के दिन इन कामों को करते हैं तो इससे जीवन में कई तरह की समस्याएं भी आ सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार के दिन बाल और दाढ़ी नहीं काटनी चाहिए। मंगलवार के दिन नाखून काटना अशुभ माना जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से मंगल देव और हनुमान जी नाराज हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति को जीवन में कई तरह की परेशानी झेलनी पड़ सकती है। यही कारण है कि मंगलवार के दिन बाल काटने, दाढ़ी बनाने और नाखून काटने से बचना चाहिए।
<h2><strong>व्रत में इन चीजों का परहेज करें</strong></h2>
ऐसा माना जाता है कि मंगलवार के दिन मांस और शराब का सेवन भी नहीं करना चाहिए। ये सभी चीजें तामसिक प्रवृत्ति को बढ़ावा देती हैं। ऐसे में अगर आप मंगलवार के दिन इन चीजों का सेवन करते हैं तो आप हनुमान जी को नाराज करते हैं। मंगलवार के दिन हनुमान जी का व्रत करने से सुख-शांति आती है। ध्यान रखें कि इस व्रत में नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से आपका व्रत टूट जाता है और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। माना जाता है कि मंगलवार के दिन किसी को उधार के रूप में पैसा नहीं देना चाहिए।
<h3><strong>गुड़ खाकर घर से निकले</strong></h3>
मान्यताओं के मुताबिक इस दिन दिया गया उधार वापस लेने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। वहीं, मंगलवार के दिन यात्रा पर जाने से भी बचना चाहिए, लेकिन किसी कारणवश अगर आपको यात्रा पर जाना पड़ जाए तो घर से गुड़ खाकर घर से निकलना चाहिए।]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[कब है महाशिवरात्रि? यहां देखें चार प्रहर की पूजा का मुहूर्त]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/when-is-mahashivratri-see-here-the-auspicious-time-of-worship-of-four-hours/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार सर्दियों के अंत में यानी फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में आता है, जब गर्मियां आने वाली होती हैं। साल 2025 में महाशिवरात्रि 26 फरवरी को मनाई [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर:</strong> हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार सर्दियों के अंत में यानी फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में आता है, जब गर्मियां आने वाली होती हैं। साल 2025 में महाशिवरात्रि 26 फरवरी को मनाई जाएगी. कई लोगों का मानना ​​है कि शिवरात्रि और महाशिवरात्रि एक ही त्योहार हैं, लेकिन असल में दोनों में अंतर है।

&nbsp;
<h2><strong>माह में एक बार होती है शिवरात्रि</strong></h2>
पूरे साल भर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है और हर महीने में एक बार शिवरात्रि का आयोजन किया जाता है। इसे मासिक शिवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। यह 12 मासिक शिवरात्रियों में से आध्यात्मिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्यौहार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक है।

&nbsp;
<h2><strong>शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक</strong></h2>
महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर है। मासिक शिवरात्रि हर महीने मनाई जाती है, लेकिन महाशिवरात्रि अपनी विशेष तिथियों और पूजा अनुष्ठानों के कारण विशेष महत्व रखती है। 2025 में यह त्योहार 26 फरवरी से शुरू होकर 27 फरवरी तक चलेगा, जिसमें अलग-अलग पूजा का समय तय किया गया है.

&nbsp;
<h2><strong>महाशिवरात्रि 2025 समय</strong></h2>
चतुर्दशी तिथि
प्रारंभ: 26 फरवरी 2025, प्रातः 11:08 बजे
समाप्ति: 27 फरवरी 2025, प्रातः 08:54 बजे
<h2><strong>निशिता काल पूजा</strong></h2>
समय: 27 फरवरी 2025, सुबह 12:08 बजे से 12:58 बजे तक]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
                    <guid>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/when-is-mahashivratri-see-here-the-auspicious-time-of-worship-of-four-hours/</guid>
                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
                  </item><item>
                    <title><![CDATA[कब है होली? जान लें महाशिवरात्रि समेत कई व्रत-त्योहारों की डिटेल्स]]></title>
                    <link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/when-is-holi-know-the-details-of-many-fasts-and-festivals-including-mahashivratri/</link>
                    <description><![CDATA[जयपुर: हिंदू पंचांग का आखिरी महीना फाल्गुन आज से शुरू हो रहा है। इस महीने की शुरुआत शोभन योग में हो रही है. फाल्गुन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। फाल्गुन का महीना त्योहारों के लिहाज से भी बहुत खास माना जाता है। इस महीने होली, महाशिवरात्रि और आमलकी एकादशी [&hellip;]]]></description>
                    <content:encoded><![CDATA[<img src="https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2025/06/Clipboard-36.jpg"/><strong>जयपुर:</strong> हिंदू पंचांग का आखिरी महीना फाल्गुन आज से शुरू हो रहा है। इस महीने की शुरुआत शोभन योग में हो रही है. फाल्गुन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। फाल्गुन का महीना त्योहारों के लिहाज से भी बहुत खास माना जाता है। इस महीने होली, महाशिवरात्रि और आमलकी एकादशी जैसे कई बड़े त्योहार आने वाले हैं। आइए देखते हैं इस महीने आने वाले व्रत और त्योहारों की पूरी लिस्ट।
<h2><strong>ये हैं त्यौहारों की लिस्ट</strong></h2>
13 फरवरी, गुरुवार- फाल्गुन माह का शुभारंभ, प्रतिपदा तिथि, ललिता जयंती
16 फरवरी, रविवार- द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी
18 फरवरी, मंगलवार- यशोदा जयंती
20 फरवरी, गुरुवार- कालाष्टमी व्रत
24 फरवरी, सोमवार- विजया एकादशी
25 फरवरी, मंगलवार- भौम प्रदोष व्रत
26 फरवरी, बुधवार- फाल्गुन शिवरात्रि, महाशिवरात्रि, महाकुंभ का अंतिम स्नान

&nbsp;
<h2><strong>3 मार्च को फाल्गुन विनायक चतुर्थी</strong></h2>
27 फरवरी, गुरुवार- फाल्गुन अमावस्या
28 फरवरी, शुक्रवार- फाल्गुन शुक्ल पक्ष प्रारंभ, प्रतिपदा ति​​थि
1 मार्च, शनिवार- फुलैरा दूज, रामकृष्ण जयंती
3 मार्च, सोमवार- फाल्गुन विनायक चतुर्थी
4 मार्च, मंगलवार- स्कन्द षष्ठी
5 मार्च, बुधवार- मासिक कार्तिगाई
6 मार्च, गुरुवार- रोहिणी व्रत
7 मार्च, शुक्रवार- मासिक दुर्गाष्टमी, होलाष्टक का प्रारंभ

&nbsp;
<h2><strong>14 मार्च को होली</strong></h2>
&nbsp;

10 मार्च, सोमवार- आमलकी एकादशी, नृसिंह द्वादशी
11 मार्च, मंगलवार- आमलकी एकादशी पारण, भौम प्रदोष व्रत
13 मार्च, गुरुवार- होलिका दहन, छोटी होली, फाल्गुन पूर्णिमा व्रत
14 मार्च, शुक्रवार- होली, चैतन्य महाप्रभु जयंती, पहला चंद्र ग्रहण, फाल्गुन पूर्णिमा का स्नान और दान

&nbsp;]]></content:encoded>
                    <pubDate>June 6, 2025, 5:42 am</pubDate>
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                    <copyright>rajasthan Inkhabar</copyright>
                    <language>hi</language>
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