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       <title>Today अशोक गहलोत की कहानी News | Latest अशोक गहलोत की कहानी News | Breaking अशोक गहलोत की कहानी News in English | Latest अशोक गहलोत की कहानी News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का अशोक गहलोत की कहानी समाचार:Today अशोक गहलोत की कहानी News ,Latest अशोक गहलोत की कहानी News,Aaj Ka Samachar ,अशोक गहलोत की कहानी समाचार ,Breaking अशोक गहलोत की कहानी News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>अशोक गहलोत के ससुर ने कर दिया था बारात लाने से मना, जाने क्यों</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/politics/ashok-gahlot-marriage-father-in-law-said-not-accepted-rajasthan-news-pkdnh/</link><pubDate>February 8, 2023, 11:37 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/02/ashok-shadi.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर: अशोक गहलोत का सियासी सफर करीब 50 सालों का हो गया है. अशोक गहलोत शिवचरण माथुर से लेकर हरीदेव जोशी और परसराम मदेरणा से लेकर राजेश पायलट और अब सचिन पायलट के साथ सरकार साझा कर रहे हैं. अशोक गहलोत को जादूगर के नाम से जाना जाता है और अभी तक अश...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर: &lt;/strong&gt;अशोक गहलोत का सियासी सफर करीब 50 सालों का हो गया है. अशोक गहलोत शिवचरण माथुर से लेकर हरीदेव जोशी और परसराम मदेरणा से लेकर राजेश पायलट और अब सचिन पायलट के साथ सरकार साझा कर रहे हैं. अशोक गहलोत को जादूगर के नाम से जाना जाता है और अभी तक अशोक गहलोत का राजनीतिक जादु चल ही रहा है. साथ ही उन्होंने कांग्रेसी नेताओं के दौर में खुद को सियासत का जादूगर साबित किया. भैरोसिंह शेखावत से लेकर वसुंधरा राजे और अब सतीश पूनिया जैसे नेताओं के साथ प्रदेश में उन्होंने सरकार को साझा किया है. साथ ही नरेंद्र मोदी अमित शाह के दौर में भी अशोक गहलोत का जादू बरकरार है. यूथ कांग्रेस से अपनी सियासी सफर शुरू करने वाले अशोक गहलोत को इंदिरा गांधी ने कांग्रेस की एक्टिव पॉलिटिक्स में एंट्री दिलाई थी.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;शादी में बवाल&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि अशोक गहलोत की शादी में बवाल हो गया था. साल 1977 की बात है, उस दैरान अशोक गहलोत एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष थे. पिता ने उनकी शादी तय की. शादी जोधपुर में ही सुनीता से तय हुई. इस दौर में देश में छुआछूत हावी थी. जातिगत भेदभाव बहुत ज्यादा होता था. उस वक्त जोधपुर में अशोक गहलोत जिस इलाके में रहते थे वहां कई अन्य जातियों के लोग भी रहते थे. सियासत में अपना करियर बनाने के लिए गहलोत को सभी को साथ लेकर चलना जरुरी और मजबूरी दोनों था. सभी जाति के लोगों से मिलना जुलना था. तो उनकी बारात में सभी वर्ग के लोग थे.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;ससुर ने किया था मना&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि अशोक गहलोत की जब बारात रवाना हुई. तो उनके ससुराल पक्ष के लोग नाराज हो गए. उनके ससुर ने कहा कि उनके यहां सभी जातियों के लोग बारात में नहीं आ सकते. केवल उनके समाज के और सगे संबंधी ही बारात में आ सकते हैं. तब उनके पिता लक्ष्मण सिंह ने कहा कि अगर सभी लोगों को अनुमति नहीं मिलती है तो वो बारात ही नहीं ले जाएंगे. उपने पिता के फैसले से अशोक गहलोत भी सहमत थे. जब बात बढ़ने लगी तो ससुराल वाले मान गए.&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;सियासी जादूगर&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;अशोक गहलोत बतौर मुख्यमंत्री राजस्थान में 15 साल पूरे कर चुके हैं. इस दौर में भी उनके सामने परसराम मदेरणा से लेकर सीपी जोशी और शीशराम ओला से लेकर गिरीजा व्यास और अब सचिन पायलट जैसे कई नेताओं से मुकाबला रहा. लेकिन हर वक्त गहलोत ने सियासी जादूगरी से हर मुश्किल को पार किया.&lt;/p&gt;
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