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       <title>Today इंदिरा गांधी News | Latest इंदिरा गांधी News | Breaking इंदिरा गांधी News in English | Latest इंदिरा गांधी News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का इंदिरा गांधी समाचार:Today इंदिरा गांधी News ,Latest इंदिरा गांधी News,Aaj Ka Samachar ,इंदिरा गांधी समाचार ,Breaking इंदिरा गांधी News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>Emergency 1975: देश का वो काला अध्याय, जब इंदिरा गांधी ने लगाया था आपातकाल, इन नेताओं की थी अहम भूमिका</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/politics/emergency-1975-the-dark-chapter-of-the-country-when-indira-gandhi-imposed-emergency-these-leaders-played-an-important-role/</link><pubDate>June 25, 2023, 8:06 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/06/download-2023-06-25T133720.889.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर: देश ने आज से 48 वर्ष पूर्व एक काला अध्याय देखा था। जब 25 जून 1975 को राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कांग्रेस की सरकार ने आपातकाल को देश पर थोपा था। आज भारत में ऐतिहासिक आपातकाल के 48 वर्ष पूरे हो गए। 21 महीने तक लागू आंतरिक आपातकाल...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: देश ने आज से 48 वर्ष पूर्व एक काला अध्याय देखा था। जब 25 जून 1975 को राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कांग्रेस की सरकार ने आपातकाल को देश पर थोपा था। आज भारत में ऐतिहासिक आपातकाल के 48 वर्ष पूरे हो गए। 21 महीने तक लागू आंतरिक आपातकाल के दौरान 1 लाख से ज्यादा राजनीतिक विरोधियों को जेल में डाला गया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नागरिकों के अधिकार छीन लिए गए&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपातकाल के दौरान आम नागरिकों के जीने के अधिकार भी छीन लिए गए थे। राजनीतिक विरोधियों पर आतंरिक सुरक्षा व्यवस्था अधिनियम (मीसा) के तहत कार्रवाई होती थी। मीसा कानून वाले आरोपियों की सुनवाई अदालत में भी नहीं होती थी। कई पत्रकारों को भी जेल में डाल दिया गया था। 21 महीने की आपातकाल ने भारत के लोकतंत्र को हिला कर रख दिया था। इसे लागू करने में देश के 5 नेताओं की अहम भूमिका थी। जिस पर बाद में सवाल भी उठा। आज जब आपातकाल के 48 वर्ष पूरे होने पर हम उन्हीं 5 नेताओं के बारे में जानते हैं-&lt;/p&gt;



&lt;ol class=&quot;wp-block-list&quot;&gt;
&lt;li&gt;&lt;strong&gt;सिद्धार्थ शंकर रे&lt;/strong&gt;&amp;#8211; स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देशबंधु चित्तरंजन दास के पोते और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे की आपातकाल लगाने में बड़ी भूमिका थी। शंकर रे ने ही इंदिरा गांधी को आपातकाल लगाने की सलाह दी थी। आपातकाल का प्रस्ताव तैयार करने से लेकर वरिष्ठ नेताओं तक को मनाने का काम शंकर रे ने ही किया था। 2009 में बीबीसी को दिए गए इंटरव्यू में रे ने आपातकाल को सही भी ठहराया था। इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उस वक्त चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी और उसे कंट्रोल करने के लिए आपातकाल लगाना जरूरी था।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;&lt;strong&gt;बंसीलाल&lt;/strong&gt;&amp;#8211; हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री और संजय गांधी के करीबी बंसीलाल की भी गिनती आपातकाल के खलनायकों में होती है। इंदिरा गांधी के चचेरे भाई और गुजरात के राज्यपाल रहे बीके नेहरू ने अपनी अपनी आत्मकथा, &amp;#8216;नाइस गाइज़ फ़िनिश सेकेंड&amp;#8217; में इसका जिक्र भी किया है। नेहरू लिखते हैं- मैं आपातकाल लगने से पहले बंसीलाल से मिला था। उन्हें मैंने राष्ट्रपति शासन के बारे में बताया तो वे हरियाणवी लहजे में बोले- अरे नेहरू साहब, ये सब इलेक्शन-फिलेक्शन का झगड़ा खत्म करिए। मैं तो कहता हूं बहनजी को प्रेसिडेंट फॉर लाइफ बना दीजिए।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;&lt;strong&gt;संजय गांधी&lt;/strong&gt;&amp;#8211; आपातकाल लगाने को लेकर अपनी मां को मनाने का काम संजय ने ही किया था। संजय उस वक्त कांग्रेस के युवा संगठन में थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट से इंदिरा की सदस्यता खारिज करने के बाद संजय ने उनसे पीएम कुर्सी न छोड़ने की अपील की थी। संजय का तर्क था कि अगर किसी दूसरे व्यक्ति को प्रधानमंत्री की कुर्सी दी गई तो वे तख्तापलट भी कर सकते हैं। आपातकाल की घोषणा के बाद संजय ने प्रशासन की पूरी कमान अपने हाथों में ले ली।&lt;/li&gt;



&lt;li&gt;&lt;strong&gt;इंदिरा गांधी&lt;/strong&gt;&amp;#8211; 1971 में रायबरेली के लोकसभा चुनाव में इंदिरा गांधी ने जीत हासिल की। समय से पहले कराए गए इस चुनाव में कांग्रेस को पूरे देश में जबरदस्त जीत मिली थी, लेकिन राजनरायण ने इंदिरा की सांसदी के खिलाफ कोर्ट में चुनौती दे दी। राजनारायण का आरोप था कि इंदिरा गांधी ने चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी और संसाधनों का दुरुपयोग किया है, इसलिए उनका चुनाव निरस्त कर दिया जाए। 1975 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा की बेंच ने राजनारायण के आरोप को सही माना और इंदिरा की सदस्यता रद्द कर दी।&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;



&lt;p&gt;इससे बौखलाई इंदिरा गांधी ने कैबिनेट की मीटिंग बुला ली। इंदिरा ने आनन-फानन में आंतरिक आपातकाल लगाए जाने की सिफारिश कर दी। आपातकाल लगाने की दूसरी वजह सरकार के खिलाफ आंदोलन था। देश के कई हिस्सों में महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ विपक्षी नेताओं ने आंदोलन शुरू कर दिया था।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;आपातकाल की घोषणा खुद इंदिरा गांधी ने ही की थी। बाद में एक इंटरव्यू में भी इंदिरा ने स्वीकार किया कि भारत को एक &amp;#8216;शॉक ट्रीटमेंट&amp;#8217; की जरूरत थी, इसलिए आपातकाल लगाया गया।&lt;/p&gt;



&lt;ol class=&quot;wp-block-list&quot; start=&quot;5&quot;&gt;
&lt;li&gt;&lt;strong&gt;फखरुद्दीन अली अहमद&lt;/strong&gt;&amp;#8211; 1974 में बड़े दावेदार गोपाल स्वरूप पाठक की अनदेखी कर इंदिरा गांधी ने फखरुद्दीन अली अहमद को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया था। अहमद राष्ट्रपति बनने के एक साल बाद ही इंदिरा का यह कर्ज चुकता कर दिया। 1975 को इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाने की बात राष्ट्रपति से कहने गईं, जिस पर अहमद ने बिना विचार किए सहमति दे दी। अहमद ने इंदिरा से कहा कि अगर कोई ऑप्शन नहीं है, तो फाइल भेज दीजिए।&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;



&lt;p&gt;प्रधानमंत्री कार्यालय से फाइल जाने के तुरंत बाद राष्ट्रपति अहमद ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए और त्वरित गति में लिए गए इस फैसले ने राष्ट्रपति की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए। हालांकि, अहमद ने कभी भी इस पर कोई जवाब नहीं दिया।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>राजस्थान: आज के दिन मुस्कुराये थे बुद्ध, भारत ने लहराया था परचम</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/national/buddha-smiled-on-this-day-india-hoisted-the-flag/</link><pubDate>May 18, 2023, 7:31 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/05/download-3-8-300x169.png</image><category>देश</category><excerpt>जयपुर। राजस्थान के पोखरण टेस्टिंग रेंज में 18 मई 1974 को परमाणु परीक्षण हुआ था. आज के दिन देश का पहला परमाणु परिक्षण हुआ था. परिक्षण के सफल होने के बाद देश ने अपना लोहा पूरी दुनिया में मनवाया था. आज के दिन हुआ था परमाणु परीक्षण आपको बता दें कि ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; राजस्थान के पोखरण टेस्टिंग रेंज में 18 मई 1974 को परमाणु परीक्षण हुआ था. आज के दिन देश का पहला परमाणु परिक्षण हुआ था. परिक्षण के सफल होने के बाद देश ने अपना लोहा पूरी दुनिया में मनवाया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आज के दिन हुआ था परमाणु परीक्षण&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि भारत का पहला परमाणु परीक्षण 18 मई यानी गुरूवार के दिन 1974 में हुआ था. यह परीक्षण पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के नेतृत्व में हुआ था. आज के दिन ही बुद्ध मुस्कुराये थे जिसकी वजह से इस मिशन का नाम &amp;#8216;स्माइलिंग बुद्धा &amp;#8216; रखा गया. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस मिशन का नाम स्माइलिंग बुद्धा दिया था. 49 वर्ष पहले भारत ने दुनिया को परमाणु परीक्षण करके चौंका दिया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कांग्रेस ने मनाया जश्न&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आज के दिन को महत्ता देते हुए कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं. वहीं एक कांग्रेस कार्यकर्त्ता ने कहा कि आज के दिन 1974 को जैसलमेर के पोखरण में भारत का पहला परमाणु परीक्षण किया गया था. यह परमाणु परीक्षण करके तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने पूरे विश्व को चौंका दिया था और पूरे विश्व को चौंकाने के साथ यह एहसास दिला दिया था कि भारत भी परमाणु सम्पन्न देश बन चुका है. यह अपने आपमें ऐतिहासिक बात है और निश्चित तौर पर पूरे विश्व पटल पर इंदिरा गांधी की जो आयरन लेडी की छवि को और भी ज्यादा मजबूत किया गया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ऑपरेशन का नाम स्माइलिंग बुद्धा क्यों रखा गया ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि 18 मई 1974 को बुद्ध पूर्णिमा था इसी दिन इस मिशन को अंजाम दिया गया यह एक कारण है कि इसे स्माइलिंग बुद्ध का नाम दिया गया था. भारत बुद्ध पूर्णिमा के दिन विश्व को शांति का सन्देश देना चाहता था यह दूसरा कारण है कि परमाणु परीक्षण के ऑपरेशन का नाम स्माइलिंग बुद्धा का नाम दिया गया. किसी भी मिशन को अंजाम देने के लिए कोड शब्दों का प्रयोग किया जाता है. इस मिशन को जब अंजाम दिया जा रहा था तब वैज्ञानिकों ने इसे स्माइलिंग बुद्धा, इंडियन आर्मी ने हैप्पी कृष्णा और वहीं ऑफिसियल तौर पर इसे पोखराम- 1 कोडनेम दिया गया था. वैज्ञानिकों ने पहले परीक्षण के लिए जो कोड वर्ड का इस्तमाल किया था वो &amp;#8216; बुद्धा इज स्माइलिंग था&amp;#8217;. जब यह परीक्षण संपन्न हुआ था तब डॉक्टर रमन्ना ने तत्कालीन प्रधानमंत्री को परमाणु परीक्षण की सूचना दी थी. उन्होंने फोन पर कहा था कि बुद्धा मुस्कुरा रहे हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत पर लगाए थे प्रतिबन्ध&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका समेत अन्य विकसित देशों ने मिलकर भारत पर कड़े प्रतिबन्ध लगाए थे. उनका मानना था कि भारत के परमाणु परीक्षण करने से विश्व में परमाणु बनाने का दौर शुरू हो जाएगा। जानकारी के अनुसार इस ऑपरेशन की तैयारी 7 दिसंबर 1972 को हुई थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री ने स्वदेशी न्युक्लीयर डिवाइस बनाने का आदेश दिया था. 1998 में स्माइलिंग बुद्धा के नाम से भारत ने पांच परमाणु परीक्षण किए. तीन को 11 मई 1998 और दो को 13 मई 1998 को किए गए थे. उस दौरान देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे. जिन्होंने जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान का नारा दिया था.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;परमाणु सम्पन्न छठा देश बना भारत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दुनिया में भारत के पहले परमाणु परीक्षण करने से पूर्व पांच देश के पास परमाणु हथियार थे जिसमें अमेरिका समेत फ्रांस, चीन, सोवियत यूनियन (आज का रूस), यूनाइटेड किंगडम देश शामिल थे. यह सभी देश नहीं चाहते थे की इनके अलावा किसी और देश के पास परमाणु हथियार हो. जिससे उनका दबदबा पूरे देश में कायम रहे. जिसके बाद भारत ने खुफिया तरीके से स्माइलिंग बुद्धा मिशन को अंजाम दिया और छठा परमाणु सम्पन्नदेश उभर कर आया.&lt;/p&gt;
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