<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
    xmlns:ag="http://purl.org/rss/1.0/modules/aggregation/"  
    xmlns:annotate="http://purl.org/rss/1.0/modules/annotate/" 
    xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app"
    xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
    xmlns:company="http://purl.org/rss/1.0/modules/company"
    xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
    xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
    xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/"
    xmlns:email="http://purl.org/rss/1.0/modules/email/"
    xmlns:ev="http://purl.org/rss/1.0/modules/event/"
    xmlns:rdf="http://www.w3.org/1999/02/22-rdf-syntax-ns#"
    xmlns:rdfs="http://www.w3.org/2000/01/rdf-schema#"
    xmlns:ref="http://purl.org/rss/1.0/modules/reference/"
    xmlns:taxo="http://purl.org/rss/1.0/modules/taxonomy/"
    xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom">
    <channel>
       <title>Today इसरो News | Latest इसरो News | Breaking इसरो News in English | Latest इसरो News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का इसरो समाचार:Today इसरो News ,Latest इसरो News,Aaj Ka Samachar ,इसरो समाचार ,Breaking इसरो News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/%e0%a4%87%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a5%8b</link>
        <lastBuildDate>April 25, 2026, 5:37 am</lastBuildDate>
        <copyright>Inkhabar</copyright>
        <generator>Inkhabar</generator>
        <language>hi</language>
        <image>
            <url>https://www.inkhabar.com/wp-content/themes/inkhabar/images/inkhbar-logo.png</url>
            <title>Inkhabar</title>
            <link>https://www.inkhabar.com/</link>
            <description>Feed provided by Inkhabar.</description>
        </image><item><title>इसरो की वैज्ञानिक एन वलारमथी का निधन, चंद्रयान-3 मिशन में निभाया महत्वपूर्व भागीदारी</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/isro-scientist-n-valarmathi-passes-away-played-important-role-in-chandrayaan-3-mission/</link><pubDate>September 4, 2023, 5:01 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-34.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। भारत के चंद्रयान-3 मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की वैज्ञानिक एन वलारमथी का शनिवार शाम को निधन हो गया. इसरो वैज्ञानिक एन वलारमथी का निधन एन वलारमथी को शनिवार शाम को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ा जिसके...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; भारत के चंद्रयान-3 मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की वैज्ञानिक एन वलारमथी का शनिवार शाम को निधन हो गया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो वैज्ञानिक एन वलारमथी का निधन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;एन वलारमथी को शनिवार शाम को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ा जिसके कारण उनकी मौत हो गई. 14 जुलाई को लॉन्च किया गया बेहद सफल चंद्रयान-3 उनके लिए अंतिम उल्टी गिनती साबित हुआ. इस मिशन लॉन्चिंग के लिए काउंटडाउन की पीछे की वे आवाज थीं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने किया ट्वीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा कि कई लोगों के पीछे की आवाज एन वलारमथी जी के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ. उनके परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो के पूर्व निदेशक वेंकटकृष्णन ने जताया दुःख&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उनके निधन पर शोक व्यक्त लरते हुए इसरो के पूर्व निदेशक पीवी वेंकटकृष्णन ने एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा कि वलारमथी मैडम की आवाज श्रीहरिकोटा से इसरो के भविष्य के मिशनों की उलटी गिनती के लिए अब नहीं होगी. चंद्रयान-3 उनकी अंतिम उलटी गिनती की घोषणा थी. एक अप्रत्याशित निधन. बहुत दुख महसूस हो रहा है, प्रणाम! वहीं उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सभी लॉन्चों के लिए उल्टी गिनती की घोषणाएं करती थीं वलारमथी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जानकारी के अनुसार वलारमथी ने इसरो की प्री-लांच उलटी गिनती घोषणाएं की थी. उन्होंने आखिरी घोषणा 30 जुलाई को की थी जब PSLV-56 रॉकेट एक समर्पित वाणिज्यिक मिशन के हिस्से के रूप में 7 सिंगापुरी उपग्रहों को लेकर रवाना हुआ था. बता दें, वह पिछले 6 सालों से सभी लॉन्चों के लिए उलटी गिनती की घोषणाएं कर रही थीं. बताया गया कि वह कुछ समय से अस्वस्थ थीं. 50 साल की उम्र में, शनिवार शाम को हृदय गति रुकने से चेन्नई के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>इस धातु से बना है आदित्य L-1 सैटेलाइट, सूर्य की तपिश का इसपर नहीं होगा कोई असर</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/national/aditya-l-1-satellite-is-made-of-this-metal-suns-heat-will-not-affect-it/</link><pubDate>September 2, 2023, 8:35 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-22-300x169.png</image><category>देश</category><excerpt>जयपुर। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने के बाद इसरो ने अब सूर्य पर रिसर्च करने के लिए आदित्य मिशन को भेज दिया है. आज आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से आदित्य L-1 को लांच किया गया. इसरो ने सूर्य पर भेजा आदित्य आदित्य L-1 सूर्य पर लैंड नहीं करेगा। आद...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने के बाद इसरो ने अब सूर्य पर रिसर्च करने के लिए आदित्य मिशन को भेज दिया है. आज आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से आदित्य L-1 को लांच किया गया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो ने सूर्य पर भेजा आदित्य&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आदित्य L-1 सूर्य पर लैंड नहीं करेगा। आदित्य कई लाख किलोमीटर की दूरी से ही सूर्य का अध्यन करेगा। अगर चेतावनी की बात यह है कि जिस जगह पर आदित्य मिशन सूर्य का अध्यन करेगा उस जगह पर भी असहनीय गर्मी होगी। जहां कोई भी आम धातु आसानी से पिघल जाएगा. लेकिन आदित्य L-1 को उम्दा मटेरियल से बनाया गया है. जिस वजह से वह अधिकतम गर्मी को भी झेल लेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो का पहला सूर्य मिशन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आदित्य मिशन सूर्य पर जाने वाला इसरो का पहला मिशन है. इससे पूर्व नासा समेत कई अन्य स्पेस एजेंसियो ने अपना अंतरिक्ष यान मिशन के लिए सूर्य पर भेजा है. मगर इनमें से से कई मिशन सफल भी हुए हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत में ही किया गया डिजाइन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आदित्य एल-1 को भारत में ही डिजाइन किया गया है. इसमें मौजूद 7 पेलोड में से 6 भारत में ही बने हैं. यह सूरज के नजदीक नहीं जाएगा, मगर लैग्रेंजियन पॉइंट पर रहकर सूरज पर रिसर्च करेगा। यह किस धातु का बना है इसरो ने इसकी जानकारी नहीं दी है. बता दें कि स्पेस एजेंसी ने मिशन से जुड़ी कई जानकारियां सीक्रेट रखी है. इसरो के इस मिशन पर हर देशवासी ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजर इस मिशन पर है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>चांद के बाद सूर्य पर तिरंगा लहराने की तैयारी, इस दिन लांच होगा सूर्यायान</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/world/preparation-to-hoist-tricolor-on-sun-after-moon-suryaan-will-be-launched-on-this-day/</link><pubDate>August 26, 2023, 11:11 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-41-1-300x169.png</image><category>दुनिया</category><excerpt>जयपुर: भारत अंतरिक्ष में दिन-प्रतिदिन नया इतिहास स्थापित कर रहा है। बीते 23 अगस्त को भारत ने चंद्रयान 3 मिशन में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैंडिंग करवाई थी। अब अंतरिक्ष में एक और इतिहास रचने जा र...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: भारत अंतरिक्ष में दिन-प्रतिदिन नया इतिहास स्थापित कर रहा है। बीते 23 अगस्त को भारत ने चंद्रयान 3 मिशन में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैंडिंग करवाई थी। अब अंतरिक्ष में एक और इतिहास रचने जा रहा है भारत, 2 सितम्बर को इसरो आदित्य-एल 1 मिशन को लांच कर सकता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो के वैज्ञानिक ने दी जानकारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) अहमदाबाद के निदेशक नीलेश एम. देसाई ने मिडिया से बातचीत करते हुए बताया कि सूर्य का अध्ययन करने के लिए, हमने आदित्य-एल1 मिशन की योजना बनाई है और यह तैयार है। संभावना है कि इसे 2 सितंबर को लॉन्च किया जाएगा&amp;#8221; ।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;en&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;#WATCH&lt;/a&gt; |  &amp;quot;To study Sun, we have planned Aditya-L1 mission and it is ready&amp;#8230;there is a possibility that it will be launched on 2nd September&amp;quot;, says Nilesh M. Desai, the Director of Space Applications Centre (SAC), Ahmedabad &lt;a href=&quot;https://t.co/Hkirjn0AZn&quot;&gt;pic.twitter.com/Hkirjn0AZn&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/ANI/status/1695299227658989789?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;August 26, 2023&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan 3 Landing: चंद्रयान-3 को लेकर पूरी दुनिया हुई भारत की मुरीद, पाकिस्तानियों ने कहा- अल्लाह करे वो….</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/world/chandrayaan-3-landing-the-whole-world-became-a-follower-of-india-regarding-chandrayaan-3-pakistanis-said-may-allah-do-that/</link><pubDate>August 23, 2023, 6:06 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-10-4-300x169.png</image><category>दुनिया</category><excerpt>Chandyaan-3: रूस के लूना-25 मून मिशन फेल हो जाने के बाद अब सारी दुनिया की निगाहें भारत के चंद्रयान-3 की लैंडिंग पर टिकी हुई है। आज चंद्रयान-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव सतह पर लैंड करेगा। फिलहाल चंद्रयान-3 का लैंडर चांद की सतह से 25 किमी की दूरी पर ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chandyaan-3: &lt;/strong&gt;रूस के लूना-25 मून मिशन फेल हो जाने के बाद अब सारी दुनिया की निगाहें भारत के चंद्रयान-3 की लैंडिंग पर टिकी हुई है। आज चंद्रयान-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव सतह पर लैंड करेगा। फिलहाल चंद्रयान-3 का लैंडर चांद की सतह से 25 किमी की दूरी पर है, और आज शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। वहीं भारत के इस खास मिशन की पूरी दुनिया मुरीद हुई है। इसी बीच पाकिस्तानी यूट्यूबर शोएब चौधरी ने वहां की आवाम के बीच जाकर उनसे चंद्रयान-3 की लैंडिंग को लेकर प्रतिक्रिया जाननी चाही।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पाकिस्तानी आवाम ने मांगी दुआएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पाकिस्तानी आवाम ने भारत के चंद्रयान-3 की लैंडिंग को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अल्लाह करे भारत का चंद्रयान-3 सही सलामत लैंड कर जाए। उन्हें इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट में सफलता हासिल हो। वहीं एक दूसरे पाकिस्तानी शख्स ने कहा कि इस वक्त सारी दुनिया टेक्नोलॉजी के फील्ड में आगे बढ़ रही है। वहीं हम सिर्फ देख सकते है, हम कुछ नहीं कर सकते है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पाकिस्तानी नेताओं के पास विजन नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पाकिस्तानी शख्स अपने ही देश की आलोचना करते नजर आया, कहा- हम सिर्फ दूसरे देशों की असफलता पर खुशियां मनाते हैं और खुद कुछ भी नहीं करते हैं। दूसरे देश के लोग हम पर हंसते है। उन्हें पता है कि हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं। रूस के मून मिशन के फेल हो जाने पर पाकिस्तानी शख्स ने दुख जाहिर किया। वहीं भारत के चंद्रयान-3 पर कामयाबी की इच्छा जाहिर की। एक दूसरे शख्स ने कहा- हमारे देश के नेता का किसी भी तरह की विजन नहीं है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>चंद्रयान-3 मिशन में राजस्थान की इस बेटी का अहम योगदान</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/important-contribution-of-this-daughter-of-rajasthan-in-chandrayaan-3-mission/</link><pubDate>July 21, 2023, 4:18 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/download-59-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। चंद्रयान-3 मिशन के सफल होने के बाद देश का हर नागरिक गर्व महसूस कर रहा है. इसी मिशन में राजस्थान की बेटी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. राजस्थान की इस बेटी का नाम सुनीता खोकर है. चंद्रयान-3 में राजस्थान की बेटी का योगदान चंद्रयान-3 मिशन ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर। &lt;/strong&gt;चंद्रयान-3 मिशन के सफल होने के बाद देश का हर नागरिक गर्व महसूस कर रहा है. इसी मिशन में राजस्थान की बेटी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. राजस्थान की इस बेटी का नाम सुनीता खोकर है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चंद्रयान-3 में राजस्थान की बेटी का योगदान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चंद्रयान-3 मिशन की सफलता में राजस्थान की सुनीता खोकर का अहम योगदान रहा. सुनीता नागैर के डीडवाना तहसील के डाकीपूरा गांव की बेटी है. सुनीता का ससुराल नागौर जिले के डीडवाना तहसील के मिडीयावट गांव में है. सुनीता ने किसान के परिवार में जन्म लिया, वहीं सुनीता की प्रारंभिक शिक्षा प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुनीता खोकर ने दी जानकारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनीता खोकर ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी कामयाबी का श्रेय परिजनों और ससुराल को जाता है. सुनीता ने बेटे और बेटियों में मतभेद करने वालों को एक सन्देश देते हुए कहा कि प्रतिभा बेटे और बेटी में भेद करने से दब सकती है, लेकिन प्रतिभा को पहचान कर उसे आगे बढ़ाना चाहिए.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ग्रामीण छात्र-छात्राओं को भी दिया सन्देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनीता ने ग्रामीण छात्र-छात्राओं को सन्देश देते हुए कहा कि वे अभाव में भी संघर्ष करके आगे बढ़ सकती हैं. अच्छी स्कूल और अच्छे संस्थान में शिक्षा लेने पर बच्चों को कम संघर्ष करना पड़ता है. लेकिन ग्रामीण परिवेश के बच्चों को उस लेवल पर जाने के लिए 4 गुना मेहनत करनी होती है. उसके बाद कामयाबी की सीढ़ी प्राप्त कर सकते हैं. सुनीता ने आगे कहा, मैं बिल्कुल ही साधारण परिवार से थी. उनके जुनून और परिजनों के सहयोग की वजह से वे आज इस मुकाम पर पहुंची हैं . उन्होंने कहा कि वे आगे भी देश के लिए काम करती रहेगी और देश का नाम रोशन करती रहेंगी.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan 3: चांद के सफर पर निकला भारत, अगस्त में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/chandrayaan-3-india-set-out-on-a-journey-to-the-moon-will-land-on-this-south-pole-of-the-moon-in-august/</link><pubDate>July 14, 2023, 9:59 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/download-10-300x169.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग हो गई है। एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए शुक्रवार दोपहर 02:35 बजे इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा बैंगलूर से चंद्रमा के लिए प्रक्षेपित किया गया। इसरो की ओर से कहा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग हो गई है। एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए शुक्रवार दोपहर 02:35 बजे इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा बैंगलूर से चंद्रमा के लिए प्रक्षेपित किया गया। इसरो की ओर से कहा गया कि चंद्रयान-3 मिशन के जरिए अपने चंद्रमा मॉड्यूल द्वारा सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करके और घूमकर अंतरिक्ष एजेंसी नई सीमाओं को पार करेगी। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने 23 या 24 अगस्त तक चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग होने की संभावना है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अगस्त में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर करेगा लैंड&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चंद्रयान-3 शुक्रवार 14 जुलाई को दोपहर 02:35 बजे लॉन्च किया गया। पृथ्वी से चंद्रमा की दुरी 384,400 किलोमीटर है। यानि चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर पहुंचने की संभावित तिथि 23-24 अगस्त है। यानि चंद्रयान-3 को चांद की यात्रा पूरी करने में लगभग 40-41 दिनों का समय लगेगा। इस मिशन का पहला टारगेट चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग है। ये मिशन का सबसे जटिल हिस्सा भी है। दूसरा टारगेट रोवर का चंद्रमा की सतह पर चहलकदमी करना और तीसरा लक्ष्य रोवर से जुटाई जानकारी के आधार पर चंद्रमा के रहस्यों से परदा उठाना है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पृथ्वी से चांद की कक्षा का सफर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;क्रॉयोजनिक इंजन चंद्रयान-3 को पृथ्वी के बाहरी ऑर्बिट में स्थापित करेगा। इसके बाद इसके सौर पैनर खुलेंगे और चंद्रयान पृथ्वी के चक्कर लगाना शुरू कर देगा। धीरे-धीरे चांद अपनी कक्षा को बढ़ाएगा और चांद की कक्षा में प्रवेश करेगा। चंद्रमा के 100 किमी की कक्षा में आने के बाद लैंडर को प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग किया जाएगा और इसके बाद लैंडर की चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग होगी।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;लैंडर के सफलतापूर्वक लैंड होने के बाद रोवर जिसमें 6 पहिए लगे हैं, इसमें से बाहर आएगा और चंद्रमा की सतह पर चलेगा। यहां ये जानना जरूरी है कि इसके पूर्व में भेजे गए मून मिशन चंद्रयान-2 के लैंडर ने चंद्रमा की सतह से 2 किमी पहले ही अपना संपर्क खो दिया था।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>