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       <title>Today bikaner news | Bikaner News News | Latest bikaner news | Bikaner News News | Breaking bikaner news | Bikaner News News in English | Latest bikaner news | Bikaner News News Headlines - Inkhabar</title>
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        </image><item><title>Rajasthan Election: देश की पहली लेजिस्लेटिव असेंबली यहां हुई थी गठित, ये बने थे पहले सभापति</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/election/rajasthan-election-the-countrys-first-legislative-assembly-was-formed-here-he-became-the-first-chairman/</link><pubDate>October 30, 2023, 5:27 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/download-6-14.png</image><category>चुनाव</category><excerpt>जयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनाव अगले महीने होने जा रहा है। ऐसे में हम आपको देश की आजादी के बाद लोकसभा और विधानसभा की कुछ चुनावी तथ्यों के बारे में बताते हैं। आजादी के बाद भले ही देश में लोकसभा और विधानसभाओं के माध्यम से आम लोगों की बात को बा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर। &lt;/strong&gt;राजस्थान में विधानसभा चुनाव अगले महीने होने जा रहा है। ऐसे में हम आपको देश की आजादी के बाद लोकसभा और विधानसभा की कुछ चुनावी तथ्यों के बारे में बताते हैं। आजादी के बाद भले ही देश में लोकसभा और विधानसभाओं के माध्यम से आम लोगों की बात को बारीकी के साथ रखने की व्यवस्था शुरू हुई है। लेकिन अगर बीकानेर जिले की बात कर तो बीकानेर में आज से 110 वर्ष पूर्व ही यह व्यवस्था शुरू हुई थी। देश की पहली विधानसभा असेंबली का गठन 1913 में बीकानेर रियासत में हुआ था। खास बात यह है कि उस दौरान इस सभा में कानून बनाने, बजट पेश करने पर चर्चाओं के साथ आम लोगों से जुड़े मुद्दे और सवाल-जवाब का भी अधिकार सभापति को प्राप्त था। उस दौरान महाराजा गंगा सिंह बीकानेर राज्य के महाराजा थे। उस वक्त बीकानेर के इस विधानसभा असेंबली के पहले सभापति के रूप में महाराजा गंगा सिंह को सभापति नियुक्त किया गया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;असेंबली की पहली बैठक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आजादी के बाद बीकानेर रियासत में विधानसभा असेंबली की पहली बैठक 10 नवंबर वर्ष 1913 में हुई थी। अगर आज की बीकानेर जिले की बात करें तो जहां आज शिक्षा निदेशालय है वहां पहले कभी विधानसभा असेंबली की बैठक हुआ करती थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहली विधानसभा में 31 सदस्य&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आजादी के बाद बीकानेर विधानसभा असेंबली में 31 सदस्य थे। बता दें कि डॉ. महेन्द्र खड़गावत बताते हैं कि महाराजा गंगा सिंह इस असेंबली के पहले सभापति माने जाते थे। मौके पर डॉ महेंद्र बताते हैं कि लेजिसलेटिव असेंबली के उप सभापति के तौर पर भैरव सिंह को नियुक्त किया गया था । वहीं लेजिसलेटिव असेंबली के 31 सदस्य में हरि सिंह महाजन, राव राजा जीवराज सिंह, ठाकुर विजय सिंह सांखू, शेख मोहम्मद इब्राहिम, सेठ रतन दास बागड़ी, ठाकुर सादुल सिंह जसाना आदि सदस्य का नाम शामिल था । इसके साथ ही उन्होंने बताया कि क्षेत्र विशेष के विशेषज्ञ इस लेजिस्लेटिव असेंबली के सदस्यों के रूप में चुने जाते थे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;36 साल तक चली संचालन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;डॉ. खड़गावत बताते हैं कि महाराजा गंगा सिंह ने अपने शासन के 25 वर्ष पूरे होने पर बहुत सारी घोषणाएं की थी। जिसमें लेजिसलेटिव ( विधानसभा) असेंबली की घोषणा भी शामिल थी। आपको बता दें कि वर्ष 1912 में 24 सितंबर को गंगा सिंह ने विधानसभा असेंबली की घोषणा की थी। इस मौके पर खड़गावत बताते हैं कि इस असेंबली का संचालन 3 दिसंबर 1946 तक हुआ। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि लेजिस्लेटिव असेंबली में सदस्यों की बैठक और सेशन समय-समय पर होते रहते थे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सवाल-जवाब का हक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि मौजूदा कल में जिस प्रकार से लोकसभा और विधानसभाओं में सदस्यों को सवाल करने और मंत्रियों की ओर से जवाब देने की व्यवस्था है ठीक उसी प्रकार राजस्थान के बीकानेर स्थित लेजिसलेटिव असेंबली में भी यह व्यवस्था की गई थी। इसके साथ ही खड़गावत बताते हैं कि उन्होंने अपनी पुस्तक लेजिसलेटिव असेंबली ऑफ बीकानेर स्टेट में बीकानेर विधानसभा असेंबली की अभिलेख को अलंकृत करते हुए बताया है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Rajasthan News: तकनीक के कमाल से पूरा हुआ महिला का सपना, 58 साल की उम्र में बनी जुड़वा बच्चों की मां</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/society/rajasthan-news-womans-dream-fulfilled-by-the-wonders-of-technology-mother-of-twins-at-the-age-of-58/</link><pubDate>June 25, 2023, 7:17 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/06/download-2023-06-25T124410.826-300x169.png</image><category>समाज</category><excerpt>बीकानेर: एक कहावत जो आप सब ने हमेशा सुना होगा, &amp;#8216;भगवान के घर देर है अंधेर नहीं&amp;#8217;। एक महिला के साथ ऐसा कुछ हुआ, जिसके बाद उसने अपनी उम्मीद छोड़ दी थी। किसी महिला के लिए मां बनना सबसे बड़ा खुशी का पल होता है और हर महिला इस खुशी को महसूस क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;बीकानेर&lt;/strong&gt;: एक कहावत जो आप सब ने हमेशा सुना होगा, &amp;#8216;भगवान के घर देर है अंधेर नहीं&amp;#8217;। एक महिला के साथ ऐसा कुछ हुआ, जिसके बाद उसने अपनी उम्मीद छोड़ दी थी। किसी महिला के लिए मां बनना सबसे बड़ा खुशी का पल होता है और हर महिला इस खुशी को महसूस करना चाहती है लेकिन 58 वर्षीय महिला शेरा भादू तो मां बनने की उम्मीद छोड़ चुकी थी। आईवीएफ तकनीक के बारे में पता चला लेकिन अपनी उम्र ज्यादा होने के चलते उन्होने संकोच में कुछ दिन निकाल दिए। परिवार के सदस्यों को विश्वास में लेकर यहां के एक निजी क्लिनिक में पहुंची और आईवीएफ तकनीक से मां बनने का सपना पूरा हुआ। महिला ने एक लड़का और एक लड़की ( जुड़वा ) को जन्म दिया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;महिला ने दिया जुड़वा बच्चों को जन्म&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;श्री कृष्णा न्यूरो स्पाइन एंड मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल की डॉ. शैफाली दाधीच तुंगारिया ने शनिवार को सफल प्रसव कराया। डॉ. शैफाली ने बताया कि 50 साल के बाद मां बनने की उम्मीद समाप्त नहीं होती है। खासकर आईवीएफ के प्रति जागरूकता में कमी और इंतजार करने के चलते आमतौर पर 45 से 50 साल की आयु के केस तो खूब आते हैं। महिला 55 साल से बड़ी हो, ऐसा पहला ही केस हमारे पास आया। जिसमें महिला का शारीरिक चेकअप करने के बाद उम्मीद की किरण नजर आई। जिसके बाद हार्मोन्स को ठीक कर एक साल निगरानी में रखा गया। इसमें सफलता मिली और शनिवार को बीकानेर निवासी शेरा भादू ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। जच्चा-बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या होता है आईवीएफ तकनीक ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आईवीएफ (IVF) का मतलब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन होता है। जब शरीर अंडों को निषेचित करने में विफल रहता है, तो उन्हें प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है। इसलिए इसे आईवीएफ कहा जाता है। एक बार जब अंडे निषेचित हो जाते हैं, तो भ्रूण को मां के गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता है। इसमें महिला के एग को पुरुष के स्पर्म से मिलाना और फिर गर्भ में स्थापित किया जाता है, ये साडी प्रक्रिया नेचुरल तरीके से किया जाता है।&lt;/p&gt;
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