<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
    xmlns:ag="http://purl.org/rss/1.0/modules/aggregation/"  
    xmlns:annotate="http://purl.org/rss/1.0/modules/annotate/" 
    xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app"
    xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
    xmlns:company="http://purl.org/rss/1.0/modules/company"
    xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
    xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
    xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/"
    xmlns:email="http://purl.org/rss/1.0/modules/email/"
    xmlns:ev="http://purl.org/rss/1.0/modules/event/"
    xmlns:rdf="http://www.w3.org/1999/02/22-rdf-syntax-ns#"
    xmlns:rdfs="http://www.w3.org/2000/01/rdf-schema#"
    xmlns:ref="http://purl.org/rss/1.0/modules/reference/"
    xmlns:taxo="http://purl.org/rss/1.0/modules/taxonomy/"
    xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom">
    <channel>
       <title>Today chaitra navratri News | Latest chaitra navratri News | Breaking chaitra navratri News in English | Latest chaitra navratri News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का chaitra navratri समाचार:Today chaitra navratri News ,Latest chaitra navratri News,Aaj Ka Samachar ,chaitra navratri समाचार ,Breaking chaitra navratri News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/chaitra-navratri</link>
        <lastBuildDate>April 7, 2026, 3:23 am</lastBuildDate>
        <copyright>Inkhabar</copyright>
        <generator>Inkhabar</generator>
        <language>hi</language>
        <image>
            <url>https://www.inkhabar.com/wp-content/themes/inkhabar/images/inkhbar-logo.png</url>
            <title>Inkhabar</title>
            <link>https://www.inkhabar.com/</link>
            <description>Feed provided by Inkhabar.</description>
        </image><item><title>नवरात्र के चौथे दिन होती है मां कुष्मांडा की पूजा, जानें इनका स्वरूप और पौराणिक कथा</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/mother-kushmanda-is-worshipped-on-the-fourth-day-of-navratri-know-her-form-and-mythology/</link><pubDate>April 2, 2025, 5:49 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2025/04/Clipboard-2025-04-02T111911.226.jpg</image><category>अध्यात्म</category><excerpt>जयपुर। नवरात्रि के चौथा दिन मां कुष्मांडा का दिन होता है। इस दिन मां कुष्मांडा विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त उन्हें भोग में मिठाई, फल का भोग लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने से सभी इच्छाओं की ...</excerpt><content>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; नवरात्रि के चौथा दिन मां कुष्मांडा का दिन होता है। इस दिन मां कुष्मांडा विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त उन्हें भोग में मिठाई, फल का भोग लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। जिंदगी में आने वाली सभी तरह की रुकावटें दूर होती हैं।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;मां कुष्मांडा की पूजा का महत्व&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;देवी पुराण के मुताबिक विद्यार्थियों को नवरात्रि में मां कुष्मांडा की पूजा जरूर करनी चाहिए। मां की पूजा करने से बुद्धि का विकास होता है। मां कुष्मांडा आठ भुजाओं वाली दिव्य शक्ति हैं, उन्हें परमेश्वरी का रूप माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मां कुष्मांडा की पूजा करने से बिगड़ते काम बन जाते हैं। मां कुष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। देवी पुराण में बताया गया है कि मां कुष्मांडा सभी पापों का हर लेती है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;मां कुष्मांडा की पौराणिक कथा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;देवी कुष्मांडा, दुर्गा मां का चौथा रूप हैं। देवी भागवत पुराण में उनकी महिमा का वर्णन है। माना जाता है कि उन्होंने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया था। इसलिए उन्हें कुष्मांडा देवी कहा जाता है। सृष्टि के निर्माण के आरंभ में अंधकार था, जिसे मां ने अपनी हंसी से दूर किया। उनमें सूर्य की गर्मी सहने की शक्ति है। इसलिए, उनकी पूजा करने से भक्तों को शक्ति और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;मां कुष्मांडा का स्वरुप&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;मां कुष्मांडा का स्वरूप बहुत ही दिव्य है। उनकी सवारी शेर है। वह शेर पर सवार करती हैं। उनकी आठ भुजाएं हैं जिनमें कई अस्त्र होते हैं। इन भुजाओं में उन्होंने कलश, कमंडल, कमल और सुदर्शन चक्र पकड़ा होता है। मां कुष्मांडा हमें जीवन जीने की शक्ति देती हैं। मां का यह रूप हमें सकारात्मक शक्ति देता है। मां कुष्मांडा का रूप बहुत ही दिव्य है। यह शक्ति और प्रेरणा का प्रतीक है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Ram Navami 2024 : राम नवमी आज, अयोध्या में धूम, जानें कैसे और क्यों मनाए ?</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/ram-navami-2024-ram-navami-today-know-how-and-why-to-celebrate/</link><pubDate>April 17, 2024, 2:39 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/04/download-18-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर: आज देश भर में राम नवमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व हर साल चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन को भगवान विष्णु के सातवें अवतार राम जी के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्‍...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर: &lt;/strong&gt;आज देश भर में राम नवमी का पर्व मनाया जा रहा है। यह पर्व हर साल चैत्र महीने की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन को भगवान विष्णु के सातवें अवतार राम जी के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्‍नान करने के बाद पीले रंग के वस्‍त्र धारण करते है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राम नवमी पर ऐसे करें पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस दिन भगवान राम का विशेष पूजा पाठ किया जाता है। बता दें कि पूजा करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखें। विष्‍णु अवतार होने के कारण भगवान राम की पूजा में तुलसी और कमल का फूल अवश्य रखें। घर के पूजा स्‍थल में चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर राम दरबार की तस्‍वीर या फिर मूर्ति स्‍थापित करें। पूजा शुरू करने के लिए भगवान की प्रतिमा पर सबसे पहले गंगाजल से छीटें दें। तांबे का कलश चावल के ढेर पर रखें और उस पर चौमुखी दीया जलाकर रखें।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-image size-full&quot;&gt;&lt;img loading=&quot;lazy&quot; decoding=&quot;async&quot; width=&quot;790&quot; height=&quot;445&quot; src=&quot;https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/04/download-19.png&quot; alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-10583&quot; srcset=&quot;https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/04/download-19.png 790w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/04/download-19-300x169.png 300w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/04/download-19-768x433.png 768w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/04/download-19-150x84.png 150w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/04/download-19-696x392.png 696w&quot; sizes=&quot;auto, (max-width: 790px) 100vw, 790px&quot; /&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मिष्‍ठान का भोग अवश्य चढ़ाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ऐसे लोग राम नवमी पर भगवान राम के बाल रूप की पूजा करते है। इस दिन लोग श्री राम के बाल रूप की प्रतिमा को पालने में झुलाते हैं। ऐसा करने के बाद भगवान की आरती की जाती है। इस मौके पर भक्त विष्‍णु सहस्‍त्रनाम का पाठ भी करते हैं। और साथ में भगवान राम की मनपसंद व्यंजन की भोग लगाते है। भगवान को खीर, फल और मिष्‍ठान अधिक पसंद है। इसलिए राम नवमी की पूजा पर लोग इन व्यंजनों का भोग अवश्य लगाते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हिंदू धर्म ग्रथों के मुताबिक ये हैं राम नवमी मानाने की प्रथा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हिंदू धर्म ग्रथों यानी रामायण में भगवान राम और उनके तीनों भ्राताओं के जन्‍म से जुड़ी कहानिया अंकित है। ऐसे में रामायण ग्रंथ के अनुसार एक पौराणिक कथा बताई गई है। इसके मुताबिक राजा दशरथ अयोध्या नगरी के राजा थे उनकी तीन रानिया थी। तीनों रानियों में कौशल्‍या, सुमित्रा और कैकयी, तीनों को जब पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई थी तो राजा दशरथ ने एक यज्ञ करवाया। प्रसाद में यज्ञ से निकली खीर को तीनों रानियों को खिला दिया गया। कुछ समय के बाद राजा दशरथ के घर में खुशखबरी सुनने को मिली यानी तीनों रानियों ने गर्भधारण किया। उसके बाद चैत्र शुक्‍ल नवमी के दिन कौशल्‍या माता ने राम, कैकयी ने भरत और सुमित्रा ने लक्ष्‍मण और शत्रुघ्‍न को जन्‍म दिया। राजा दशरथ को अब उनके उत्‍तराधिकारी मिल चुके थे। तब से यह तिथि राम नवमी के रूप में मनाई जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अयोध्या में राम नवमी की धूम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;ऐसे आज चैत्र नवरात्री का समापन भी हुआ है। देश भर में राम नवमी बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। खास कर अयोध्या में यह पर्व विशेष तौर पर इस साल भव्य रूप से मनाया जा रहा है। भवन राम अपने महल में 500 वर्ष बाद विराजमान हुए हैं. इस ख़ुशी में भक्त अधिक खुश हैं।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-image size-full&quot;&gt;&lt;img loading=&quot;lazy&quot; decoding=&quot;async&quot; width=&quot;420&quot; height=&quot;315&quot; src=&quot;https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/04/image-6.png&quot; alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-10581&quot; srcset=&quot;https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/04/image-6.png 420w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/04/image-6-300x225.png 300w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2024/04/image-6-150x113.png 150w&quot; sizes=&quot;auto, (max-width: 420px) 100vw, 420px&quot; /&gt;&lt;/figure&gt;
</content></item><item><title>Chaitra Navratri 2024: आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत, इस समय करें कलश स्थापना और पूजा</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/chaitra-navratri-2024-chaitra-navratri-starts-from-today-establish-kalashthapana-and-worship-at-this-time/</link><pubDate>April 9, 2024, 2:10 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/04/download-12-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर: भारत त्योहारों का देश है। यहां हर रोज हम कोई न कोई त्योहार को सेलिब्रेट करते हैं। ऐसे में आज मंगलवार से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही हैं। इस त्योहार का हिंदू धर्म में अपना एक अलग ही महत्व है। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन मां के प्रथम ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर:&lt;/strong&gt; भारत त्योहारों का देश है। यहां हर रोज हम कोई न कोई त्योहार को सेलिब्रेट करते हैं। ऐसे में आज मंगलवार से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही हैं। इस त्योहार का हिंदू धर्म में अपना एक अलग ही महत्व है। ऐसे में नवरात्रि के पहले दिन मां के प्रथम रूप शैलपुत्री की पूजा होती है। इस साल चैत्र नवरात्रि पर पूरे 30 वर्षों बाद शुभ योग बन रहा है। तो ऐसे में आईए जानते हैं कलश स्थापना से पूजा तक का शुभ मुहूर्त।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नवरात्रि का समापन 17 को&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इस साल चैत्र नवरात्रि पर पूरे 30 वर्षों बाद अमृत सिद्धि योग, अश्विनी नक्षत्र योग समेत अन्य संयोग बन रहे हैं। तमाम ज्योतिषाचार्य के अनुसार आज 9 अप्रैल के दिन अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। ऐसे में आज सुबह 7:32 बजे से यह दोनों संयोग शुरू होंगे, जो अगले दिन बुधवार सुबह 5:06 तक रहेंगे। आज से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होने जा रही है। नवरात्रि पूरे 9 दिन चलेंगे, इसका समापन 17 अप्रैल को होगा। 17 अप्रैल को देश भर में रामनवमी मनाई जाएगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सभी प्रकार की मनोकामना होती है पूर्ण&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि चैत्र नवरात्रि पूरी तरह से मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित है। ऐसे में लोग श्रद्धा पूर्वक 9 दिनों तक उपवास रख मां के चरणों में जाते हैं। शास्त्रों का मानना है कि इन नौ दिनों में देवी की विधिवत पूजा पाठ करने से सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण होती है। सभी प्रकार की कठिनाइयों से छुटकारा मिलता है। इन दिनों मां का नाम लेने से बिगड़े हुए काम भी बन जाते हैं। ऐसे में माता के भक्त नवरात्रि के दौरान पूरे 9 दिनों तक व्रत रखते हैं। नवरात्रि के आठवें दिन यानी अष्टमी तिथि पर कन्या पूजन करते हैं। इस बार अष्टमी तिथि 16 अप्रैल को है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शुभ मुहूर्त में बन रहे ये संयोग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भक्त नवरात्रि के नौवे दिन महानवमी पर कन्या पूजन के साथ माता की विदाई करते हैं। ऐसे में इस साल चैत्र नवरात्रि पर 30 सालों बाद शुभ संयोग बनने जा रहा है। तमाम ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस साल चैत्र नवरात्रि पर पूरे 30 वर्षों बाद कई तरह के शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। शुभ मुहूर्त मंगलवार सुबह 7:32 से शुरू हो कर बुधवार सुबह 5:06 तक रहेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कलशस्थापना का शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के बाद ही नवरात्रि के व्रत शुरू होते हैं। इस बार चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के दो शुभ मुहूर्त हैं।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;पहला शुभ मुहूर्त:&lt;/strong&gt; आज सुबह 6:11 से लेकर सुबह 10:23 तक। इस दौरान आप कलश स्थापना कर सकते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;strong&gt;दूसरा शुभ मुहूर्त:&lt;/strong&gt; कलश स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त का संयोग भी बन रहा है। जो आज सुबह 11:57 से लेकर दोपहर 12:48 तक रहेगा, इस बीच आप माता के समीप घटस्थापना कर सकते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कलश स्थापना के लिए यह सामग्री है जरूरी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अगर आप चैत्र नवरात्रि में कलश स्थापना के लिए सोच रहे हैं, तो आपको कुछ आवश्यक सामग्री की जरूरत होगी। कलश स्थापना के लिए लकड़ी की एक छोटी चौकी, मिट्टी का घड़ा, साफ सुथरा जगह की मिट्टी, सात तरह के अनाज (सतंझा), कलश, सुपारी, आम के पत्ते, अक्षत (चावल), नारियल, लाल कपड़ा, लाल फूल व माला, गंगाजल, तिल, जौं जैसे जरूरी सामान चाहिए।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>