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       <title>Today chandrayaan 3 news News | Latest chandrayaan 3 news News | Breaking chandrayaan 3 news News in English | Latest chandrayaan 3 news News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का chandrayaan 3 news समाचार:Today chandrayaan 3 news News ,Latest chandrayaan 3 news News,Aaj Ka Samachar ,chandrayaan 3 news समाचार ,Breaking chandrayaan 3 news News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/chandrayaan-3-news</link>
        <lastBuildDate>April 25, 2026, 3:06 am</lastBuildDate>
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        </image><item><title>चंद्रयान-3 द्वारा Hop Test ने इसरो में जगाया होप, जानिए क्या है यह परीक्षण</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/hop-test-by-chandrayaan-3-raised-hope-in-isro-know-what-is-this-test/</link><pubDate>September 9, 2023, 8:30 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-72.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर। विक्रम लैंडर ने किसी हैलीकॉप्टर की तरह चांद पर उड़ते हुए एक बार फिर सॉफ्ट लैंडिंग की है.14 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इसरो ने हॉप टेस्ट के जरिए विक्रम को 40 सेमी तक उछाल गया और जमीन पर लैंड करने में सफल हो गया. इसरो के हॉप टेस्ट ने किया क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर। &lt;/strong&gt;विक्रम लैंडर ने किसी हैलीकॉप्टर की तरह चांद पर उड़ते हुए एक बार फिर सॉफ्ट लैंडिंग की है.14 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इसरो ने हॉप टेस्ट के जरिए विक्रम को 40 सेमी तक उछाल गया और जमीन पर लैंड करने में सफल हो गया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो के हॉप टेस्ट ने किया कमाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने दो हफ्ते की मेहनत करने के बाद एक प्रयोग करने का निर्णय लिया। इसरो ने विक्रम लैंडर को कमांड दिया और इसके परिणामस्वरूप विक्रम ने चांद की सतह पर खुद को 40 सेमी तक ऊंचा उठाया और फिर 30-40 सेमी दूर जाकर लैंड किया। इसरो ने इस प्रक्रिया को &amp;#8216;हॉप टेस्ट&amp;#8217; बताया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है इसरो का हॉप टेस्ट ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हॉप टेस्ट के माध्यम से इसरो ने चंद्रयान-3 के विक्रम पर हेलीकॉप्टर जैसा कंट्रोल बनाया फिर उसे वर्टिकली टेक-ऑफ करवाया गया और फिर उसकी वर्टिकल लैंडिंग करवाई गई। हॉप को आसान भाषा में अगर समझा जाए तो यह किसी व्यक्ति के प्री-वर्कआउट वार्मअप की तरह है. जिसमे व्यक्ति उछलता है और कुछ दूर जाकर लैंड करता है. इसरो द्वारा यह टेस्ट भी कुछ इस प्रकार ही थी जो सफल रहा. हालांकि यह आसान प्रक्रिया नहीं है और ऐसा इसलिए क्योंकि चांद पर पृथ्वी का 1/6 वां गुरुत्वाकर्षण है, जिसके कारण चांद की सतह पर ये प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहला हॉप टेस्ट किसने किया था ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जानकारी के लिए बता दें कि नासा के सर्वेयर-6 ने चांद पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी, जिसके बाद सन 1969 में 17 नवंबर को सर्वेयर-6 के इंजन को पहली बार 2.5 सेकेंड के लिए फायर किया गया था, जिसकी वजह से सर्वेयर ने चांद की सतह पर 3 से 4 मीटर तक छलांग लगाई थी और फिर अपने ऑरिजिनल पॉजिशन से 2.4 मीटर पश्चिम में लैंड किया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो ने किया ट्वीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं इसरो ने ट्वीट करते हुए कहा कि कमांड दिए जाने पर विक्रम लैंडर का इंजन फिर से शुरू हो गया और यह 40 सेमी तक ऊपर उठा। इसके बाद इसने फिर 30-40 सेमी दूर जाकर सॉफ्ट लैंड किया। इसरो ने बताया कि हमारा उद्देश्य भविष्य में लैंडर की वापसी और मानवीय मिशन के लिए ट्रायल करना था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>इसरो की वैज्ञानिक एन वलारमथी का निधन, चंद्रयान-3 मिशन में निभाया महत्वपूर्व भागीदारी</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/isro-scientist-n-valarmathi-passes-away-played-important-role-in-chandrayaan-3-mission/</link><pubDate>September 4, 2023, 5:01 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-34-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। भारत के चंद्रयान-3 मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की वैज्ञानिक एन वलारमथी का शनिवार शाम को निधन हो गया. इसरो वैज्ञानिक एन वलारमथी का निधन एन वलारमथी को शनिवार शाम को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ा जिसके...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; भारत के चंद्रयान-3 मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की वैज्ञानिक एन वलारमथी का शनिवार शाम को निधन हो गया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो वैज्ञानिक एन वलारमथी का निधन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;एन वलारमथी को शनिवार शाम को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ा जिसके कारण उनकी मौत हो गई. 14 जुलाई को लॉन्च किया गया बेहद सफल चंद्रयान-3 उनके लिए अंतिम उल्टी गिनती साबित हुआ. इस मिशन लॉन्चिंग के लिए काउंटडाउन की पीछे की वे आवाज थीं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने किया ट्वीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा कि कई लोगों के पीछे की आवाज एन वलारमथी जी के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ. उनके परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो के पूर्व निदेशक वेंकटकृष्णन ने जताया दुःख&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उनके निधन पर शोक व्यक्त लरते हुए इसरो के पूर्व निदेशक पीवी वेंकटकृष्णन ने एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा कि वलारमथी मैडम की आवाज श्रीहरिकोटा से इसरो के भविष्य के मिशनों की उलटी गिनती के लिए अब नहीं होगी. चंद्रयान-3 उनकी अंतिम उलटी गिनती की घोषणा थी. एक अप्रत्याशित निधन. बहुत दुख महसूस हो रहा है, प्रणाम! वहीं उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सभी लॉन्चों के लिए उल्टी गिनती की घोषणाएं करती थीं वलारमथी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जानकारी के अनुसार वलारमथी ने इसरो की प्री-लांच उलटी गिनती घोषणाएं की थी. उन्होंने आखिरी घोषणा 30 जुलाई को की थी जब PSLV-56 रॉकेट एक समर्पित वाणिज्यिक मिशन के हिस्से के रूप में 7 सिंगापुरी उपग्रहों को लेकर रवाना हुआ था. बता दें, वह पिछले 6 सालों से सभी लॉन्चों के लिए उलटी गिनती की घोषणाएं कर रही थीं. बताया गया कि वह कुछ समय से अस्वस्थ थीं. 50 साल की उम्र में, शनिवार शाम को हृदय गति रुकने से चेन्नई के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan 3 Landing: चंद्रमा की सतह पर किस रफ्तार से लैंड होगा चंद्रयान-3, जानें रोवर और लैंडर का काम</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/world/chandrayaan-3-landing-at-what-speed-will-chandrayaan-3-land-on-the-surface-of-the-moon-know-the-work-of-rover-and-lander/</link><pubDate>August 23, 2023, 6:57 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-11-3-300x169.png</image><category>दुनिया</category><excerpt>Chandrayaan 3 Landing: चंद्रयान 2 के विफल होने के चार साल बाद, चंद्रयान 3 बुधवार (23 अगस्त) को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा की सतह पर अपनी सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। ऐसे में भारत के साथ पूरी दुनिया के लिए आज बेहद ही अहम दिन है। 140 करोड़ देशवासियों के...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chandrayaan 3 Landing&lt;/strong&gt;: चंद्रयान 2 के विफल होने के चार साल बाद, चंद्रयान 3 बुधवार (23 अगस्त) को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा की सतह पर अपनी सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। ऐसे में भारत के साथ पूरी दुनिया के लिए आज बेहद ही अहम दिन है। 140 करोड़ देशवासियों के साथ पूरी दुनिया की नजर भारत के इस महत्वपूर्ण मिशन चंद्रयान-3 की लैंडिंग पर टिकी है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दुनिया का पहला देश बनेगा भारत&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अगर सब कुछ ठीक रहा और आज चंद्रयान 3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग हो जाती है तो ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन जायेगा। वहीं अमेरिका, चीन और तत्कालीन सोवियत संघ के बाद भारत चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन जाएगा। चंद्रयान-2 के विफल होने के बाद चंद्रयान-3 मिशन को 14 जुलाई को लॉन्च किया गया था। 5 अगस्त को चंद्रयान-3 चंद्रमा की ऑर्बिट चंद्रमा में प्रवेश किया था।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-video is-provider-youtube wp-block-embed-youtube wp-embed-aspect-16-9 wp-has-aspect-ratio&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;iframe loading=&quot;lazy&quot; title=&quot;Chandrayaan 3 Landing: चंद्रमा की सतह पर किस रफ्तार से लैंड होगा चंद्रयान । Chandrayaan 3। ISRO।&quot; width=&quot;500&quot; height=&quot;281&quot; src=&quot;https://www.youtube.com/embed/qzLdTmbTOj8?feature=oembed&quot; frameborder=&quot;0&quot; allow=&quot;accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share&quot; referrerpolicy=&quot;strict-origin-when-cross-origin&quot; allowfullscreen&gt;&lt;/iframe&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सॉफ्ट लैंडिंग VS हार्ड लैंडिंग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;1- सॉफ्ट लैंडिंग वह जगह है जहां अंतरिक्ष यान नियंत्रित तरीके से नीचे उतरता है। लैंडिंग के दौरान स्पीड कम होगी और अंतरिक्ष यान लगभग 0 की स्पीड से चांद की सतह को छुएगा।&lt;br&gt;2- हार्ड लैंडिंग एक क्रैश लैंडिंग है, जहां अंतरिक्ष यान सतह से टकराते ही नष्ट हो जाता है।&lt;br&gt;3- चार साल पहले चंद्रयान 2 सॉफ्ट लैंडिंग के दौरान फेल हो गया था।&lt;br&gt;4- चंद्रयान 2 के मिशन के फेल होने के बाद इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने आश्वासन दिया कि चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैंडिंग होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कितनी स्पीड में होगा अंतरिक्ष यान ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;1- चंद्रयान-3, 30 किमी की ऊंचाई से 1.68 किमी प्रति घंटे की गति से उतरना शुरू होगा।&lt;br&gt;2- जब अंतरिक्ष यान चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा तब इसकी स्पीड लगभग 0 हो जाएगी।&lt;br&gt;3- आज अंतरिक्ष यान का चंद्रमा की सतह को टच करने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।&lt;br&gt;4- जैसे-जैसे अंतरिक्ष यान चांद की ओर बढ़ता जाएगा वैसे ही यह हॉरिजॉन्टल को वर्टिकल डायरेक्शन में टर्न हो जाएगा।&lt;br&gt;5- यहीं पर चंद्रयान 2 को समस्या का सामना करना पड़ा था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चंद्रयान 3: सफल सॉफ्ट लैंडिंग के बाद क्या होगा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;1- चंद्रयान -3 के सॉफ्ट लैंडिंग के बाद रोवर, लैंडर से अलग होगा और चांद की सतह पर उतरेगा। रोवर चांद की सतह का पूरा विश्लेषण करेगा।&lt;br&gt;2- लैंडर और रोवर चांद में एक दिन के लिए रहेंगे, चांद का एक दिन पृथ्वी पर 14 दिन के बराबर है।&lt;br&gt;3- लैंडर और रोवर चांद के आस-पास के जगह की अध्ययन करेंगे।&lt;br&gt;4- एक चंद्र दिवस वह समय होता है जब सूर्य चंद्रमा पर चमकता है।&lt;br&gt;5- जब तक सूरज चमकता रहेगा सभी सिस्टम ठीक से काम करेंगी।&lt;br&gt;6- जब सूर्य चंद्रमा पर डूबेगा, तो अंधेरा हो जाएगा और तापमान शून्य से 180 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाएगा।&lt;br&gt;7- इस दौरान अंतरिक्ष यान के चांद पर जीवित रहने की संभावना कम हो जाएगी।&lt;br&gt;8- अगर अंतरिक्ष यान इन चुनौतियों का सामना कर गया तो यह इसरो की एक और बड़ी उपलब्धि साबित होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चंद्रयान 3: अगर आज की लैंडिंग सफल नहीं हुई तो क्या होगा?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;1- इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ ने पहले ही कहा था कि इस बार चूक की कोई संभावना नहीं है।&lt;br&gt;2- अगर विक्रम लैंडर के सभी इंजन और सेंसर काम करना बंद कर देते हैं, तब भी इसकी सॉफ्ट लैंडिंग होगी।&lt;br&gt;3- एस सोमनाथ ने कहा कि इसे इसी तरह डिजाइन किया गया है।&lt;br&gt;4- अगर विक्रम के दो इंजन इस बार भी काम नहीं करते हैं, तब भी यह लैंडिंग में सक्षम होगा।&lt;br&gt;5- अगर फिर भी नाममुकिन हुआ तो इसरो 27 अगस्त को दूसरी लैंडिंग का प्रयास करेगा।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>चंद्रयान-3 पर नहीं होगा लूना-25 के क्रैश होने का असर- पूर्व ISRO चीफ माधवन नायर</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/national/chandrayaan-3-will-not-be-affected-by-the-crash-of-luna-25-former-isro-chief-madhavan-nair/</link><pubDate>August 22, 2023, 2:17 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-1-8-300x169.png</image><category>देश</category><excerpt>जयपुर। इसरो के पूर्व अध्यक्ष माधवन नायर ने जानकारी देते हुए इस बात को खारिज किया कि रूस चद्रंमा पर पहुंचने की दौड़ में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि लूना-25 का दुघर्टनाग्रस्त होना दुर्भाग्यपूर्ण है. लूना के क्रैश का चंद्रयान-3 पर प्रभाव नहीं रूस क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; इसरो के पूर्व अध्यक्ष माधवन नायर ने जानकारी देते हुए इस बात को खारिज किया कि रूस चद्रंमा पर पहुंचने की दौड़ में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि लूना-25 का दुघर्टनाग्रस्त होना दुर्भाग्यपूर्ण है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;लूना के क्रैश का चंद्रयान-3 पर प्रभाव नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोसमोस ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि अनियंत्रित कक्षा में प्रवेश करने के बाद लूना-25 यान चंद्रमा पर दुघर्टनाग्रस्त हो गया. रूस के चंद्र मिशन की नाकामी के बाद भारत के शीर्ष वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 पर लूना-25 के क्रैश होने का कोई असर नहीं होने की बात कही.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूर्व ISRO चीफ माधवन नायर ने दी जानकारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पूर्व ISRO चीफ माधवन नायर ने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन पूरी तरह से आत्मनिर्भर है और हम रूस पर निर्भर नहीं हैं. अभी रूस के साथ भारत का अंतरिक्ष सहयोग मानव को अंतरिक्ष में भेजने के गगनयान अंतरिक्ष अभियान के लिए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियोम को प्रशिक्षण देने तक सीमित है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सिवन चंद्रयान-2 मिशन के रहें प्रमुख&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सिवन ने 2019 में चंद्रयान-2 मिशन को भेजे जाने के समय इसरो के प्रमुख रहे हैं. जब उनसे एक सवाल में पूछा गया कि रूसी मिशन की नाकामी के बाद क्या इसरो साफ्ट लैंडिग से पहले अतिरिक्त दबाव में हैं, तो इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि चंद्रयान-3 मिशन योजना के मुताबिक आगे बढ़ रहा है. यह (साफ्ट लैंडिग) योजना के अनुसार होगा। उन्होंने कहा कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार चंद्रयान-2 के उलट यह सतह पर उतरने में सफल रहेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रूस चंद्रमा पर पहुंचने की दौड़ में शामिल नहीं- नायर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पूर्व इसरो चीफ माधवन नायर ने इस चर्चा को खारिज कर दिया कि भारत और रूस चंद्रमा पर पहुंचने की दौड़ में शामिल हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan 3: अरबों सालों से अंधेरे में डूबे दक्षिणी ध्रुव का खुलेगा राज, भारत बनेगा विश्व का पहला देश</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/chandrayaan-3-the-secret-of-south-pole-immersed-in-darkness-for-billions-of-years-will-be-revealed-india-will-become-the-first-country-in-the-world/</link><pubDate>July 14, 2023, 11:10 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/download-11-300x169.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) ने अंतरिक्ष में लंभी छलांग लगाने के लिए अपने तीसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान-3 की लांच कर दिया है। एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए शुक्रवार दोपहर 02:35 बजे इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा बैंगलोर से चंद्रमा के ल...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) ने अंतरिक्ष में लंभी छलांग लगाने के लिए अपने तीसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान-3 की लांच कर दिया है। एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए शुक्रवार दोपहर 02:35 बजे इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा बैंगलोर से चंद्रमा के लिए प्रक्षेपित किया गया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत बनेगा पहला देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चंद्रयान-3 पृथ्वी से 384,400 किलोमीटर सफर तय करके 41 से 42 दिनों बाद करीब 23-24 अगस्त को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चंद्रयान-3 अगर सफलता पूर्वक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करता है तो भारत विश्व का पहला देश बन जाएगा, जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;अब तक तीन देश ही चंद्रमा पर उतरने में सफल रहे हैं। अगर चंद्रयान-3, चंद्रमा की दक्षिणी ध्रुव पर सफलता पूर्वक लैंड करता है, तो इन तीन देशों की लिस्ट में भारत का नाम भी शामिल जाएगा और भारत विश्व का पहला देश बन जाएगा जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;खुलेगा दक्षिणी ध्रुव का राज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो के इस चंद्रयान-3 मिशन अगर सफल रहता है तो आने वालों दिनों में अरबों सालों से अंधेरे में डूबी चांद की दक्षिणी ध्रुव का राज खुलेगा। जैसा पृथ्वी का दक्षिणी ध्रुव है, वैसा ही चांद का भी है। पृथ्वी का दक्षिणी ध्रुव अंटार्कटिका में है। पृथ्वी का सबसे ठंडा इलाका। ऐसा ही चांद का दक्षिणी ध्रुव है सबसे ठंडा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;पहले चंद्रयान-2 और अब चंद्रयान-3 के जरिए चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने की कोशिश है। ऐसा अंदाजा है कि हमेशा छाया में रहने और तापमान कम होने की वजह से यहां पानी और खनिज हो सकते हैं। इसकी पुष्टि पहले हुए मून मिशन में भी हो चुकी है। ऐसे में चंद्रयान-3 में मौजूद लैंडर और रोवर के पेलोड चांद की सतह का अध्ययन करेंगे। ये चांद की सतह पर मौजूद पानी और खनिजों का पता लगाएंगे। सिर्फ यही नहीं, इनका काम ये भी पता करना है कि चांद पर भूकंप आते हैं या नहीं।&lt;/p&gt;
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