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       <title>Today Freedom fighter News | Latest Freedom fighter News | Breaking Freedom fighter News in English | Latest Freedom fighter News Headlines - Inkhabar</title>
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        </image><item><title>Independence Day 2024: आजादी की सूचना पर्चें बांटकर दी गई , 2 दिन तक मना आजादी का जश्न</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/independence-day-2024-information-about-independence-was-given-by-distributing-pamphlets-independence-day-was-celebrated-for-2-days/</link><pubDate>August 15, 2024, 6:55 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/ै्ू-1.webp</image><category>त्योहार</category><excerpt>जयपुर। देश आज आजादी का जश्न मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ उस समय लोगों को इसकी सूचना देने माहोला राग एक मात्र सहारा था। वह भी गिने – चुने लोगों व शहरों तक ही सीमित था। आजादी तक रींगस स्वतंत्रता सैनानियों का आश्रय था। यहां से अनेक...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; देश आज आजादी का जश्न मना रहा है। 15 अगस्त 1947 को जब देश आजाद हुआ उस समय लोगों को इसकी सूचना देने माहोला राग एक मात्र सहारा था। वह भी गिने – चुने लोगों व शहरों तक ही सीमित था। आजादी तक रींगस स्वतंत्रता सैनानियों का आश्रय था। यहां से अनेक स्वतंत्रता सैनानी निकले। कई स्वतंत्रता सैनानियों का रींगस गुप्त अड्डा हुआ करता था। यहीं पर वे आजादी के लिए गुप्त बैठकों का आयोजन करते थे। आजादी के लिए रणनीति भी यहीं बनाई जाती थी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नारों की वजह से नाम पड़ा आजाद चौक&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;रींगस में आजाद चौक का नाम भी वहां पर नारे लगने की वजह से पड़ा है। आजादी के साक्षी रहे शहर के वृद्धोवृद शिक्षाविद राम सिंह शेखावत का कहना है कि उस समय &amp;#8216;हम बहुत छोटे-छोटे हुआ करते थे&amp;#8217;। 2 दिन तक आजाद चौक में आजादी का जश्न मनाया गया। दो दिन लगातार ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद यहां का नाम आजाद चौक रख दिया गया। इससे पहले इसका नाम कचहरी चौक था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;हवाई जहाजो से उड़ाए आजादी के पर्चें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;गांव के ही स्व. सीताराम बडतला, महावीर बडतल्ला, सेडमल डाकवाला मदन लाल डाकवाला और कई अन्य लोग रामानन्द पाठशाला में पढाई करते थे। उस समय पढ़ाई भी काफी मुश्किल हुआ करती थी। हम लोग इधर – उधर घूमकर आनासागर में गायों को चरा रहे थे। उसी समय आसमान में हवाई जहाज गुजरा। उन्होंने हवाई जहाज से पर्चे नीचे डाल दिए। एक बार तो हम डर कर पेड़ों के नीचे छिप गए। बाद में उन पर्चे को देखा तो लिखा था आज से भारत आजाद। हमने वे पर्चे उठाए तथा घरों को निकल पड़े। रास्ते में जो भी मिलता उन्हें यह खबर पढ़कर सुनाते थे।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Republic Day 2024: स्वतंत्रता सेनानी का निधन, राजकीय सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/republic-day-2024-freedom-fighter-passes-away-cremated-with-state-honors/</link><pubDate>January 25, 2024, 9:00 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/01/download-8-2-300x264.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर। पूरे देश में गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी चल रही है और ऐसे में उदयपुर से एक दुखद ख़बर सामने आई है। बता दें कि उदयपुर में गणतंत्र दिवस से ठीक दो दिन पहले 24 जनवरी को स्वतंत्रता सेनानी मनोहर लाल का निधन हो गया है. उनकी उम्र 99 साल थी। औदिच्...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; पूरे देश में गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी चल रही है और ऐसे में उदयपुर से एक दुखद ख़बर सामने आई है। बता दें कि उदयपुर में गणतंत्र दिवस से ठीक दो दिन पहले 24 जनवरी को स्वतंत्रता सेनानी मनोहर लाल का निधन हो गया है. उनकी उम्र 99 साल थी। औदिच्य का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. उन्हें जिला कलक्टर अरविंद पोसवाल, पुलिस अधीक्षक डॉ भुवन भूषण यादव समेत अन्य ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी, बता दें कि आजादी की लड़ाई में मनोहरलाल औदिच्य नेतृत्वकर्ता थे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आइए जानते है स्वतंत्रता सेनानी की जीवनी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;स्वतंत्रता सेनानी औदिच्य के पिता का नाम गणपत लाल और माता का नाम जशोदा देवी था। इनके तीन पुत्र हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा उदयपुर में हुई, उसके बाद वे वर्ष 1946 में आगरा विश्वविद्यालय से कला स्नातक (बी.ए.) और राजपूताना विश्वविद्यालय से 1948 में एल.एल.बी. की. भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन से औदिच्य अपने छात्र जीवन से ही जुड़ गए थे. उन्होंने आजादी के बाद राजस्थान सरकार के सार्वजनिक निर्माण विभाग में कई सालों तक अपनी सेवाएं भी दी. विभाग के कार्यालय अधीक्षक के पद से 1980 में सेवानिवृत्त हुए. सेवानिवृत्ति के बाद भी हर तरह से वे विभाग एवं समाज को सेवा देते रहे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत छोड़ो आंदोलन में रहा योगदान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मनोहर लाल ने अंग्रेजों के विरुद्ध वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में विद्यार्थियों का नेतृत्व किया. उस दौरान 22 अगस्त 1942 को डिफेन्स ऑफ इंडिया रूल धारा 26 के तौर पर उन्हें अनिश्चित काल के लिए कारागर में बन्दी बना लिया गया था. इस घटना के बाद पूरे मेवाड़ में आंदोलन ने हलचल मचा दिया था. बता दें कि उस दौर में भी विद्यार्थियों को बंदी बनाए जाने से हर तरफ आक्रोश का माहौल था। इस कारण जगह-जगह पर लोगों का प्रदर्शन बढ़ने लगा। बढ़ते विरोध को देखते हुए 2 सितम्बर 1942 को सरकार को बिना शर्त के उन्हें जेल से रिहा करना पड़ा. उसके बाद भी स्वाधीनता आन्दोलन में औदिच्य सक्रिय रहे. राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयन्ती समारोह व अनेक अन्य मौके पर औदिच्य को स्मृति चिह्न, ताम्रपत्र, शॉल आदि भेंट कर सम्मानित भी किया गया है.&lt;/p&gt;
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