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       <title>Today Health News | Latest Health News | Breaking Health News in English | Latest Health News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का Health समाचार:Today Health News ,Latest Health News,Aaj Ka Samachar ,Health समाचार ,Breaking Health News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/health</link>
        <lastBuildDate>June 13, 2026, 8:54 am</lastBuildDate>
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            <title>Inkhabar</title>
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        </image><item><title>Raw Turmeric: सर्दियों में बीमारी से बचने के लिए खाए कच्ची हल्दी, मिलेंगे जबरदस्त फायदें</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/raw-turmeric-eat-raw-turmeric-to-avoid-diseases-in-winter-you-will-get-tremendous-benefits/</link><pubDate>December 24, 2024, 9:57 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/12/ERGH.webp</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर। सर्दियां आते ही बाजार में कच्ची हल्दी बिकना शुरू हो जाती है। आयुर्वेद में इसके कई गुण बताए गए हैं, जो ठंड के मौसम में सर्दियों से बचाने में कारगर साबित होते है। कच्ची हल्दी में मिनरल्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो सर्...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; सर्दियां आते ही बाजार में कच्ची हल्दी बिकना शुरू हो जाती है। आयुर्वेद में इसके कई गुण बताए गए हैं, जो ठंड के मौसम में सर्दियों से बचाने में कारगर साबित होते है। कच्ची हल्दी में मिनरल्स और एंटी-ऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं जो सर्दियों में ठंड लगने से बचाते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कई तरह के पोषक तत्व होते है&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;कच्ची हल्दी में पोटैशियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, फॉस्फोरस, कैल्सियम, सोडियम, कॉपर, सेलेनियम, जिंक, आयरन, फाइबर, विटामिन B6,विटामिन B3, विटामिन C, विटामिन A, कोलीन और फोलेट पाया जाता है। इसमें पाया जाने वाला सबसे खास तत्व करक्यूमिन होता है, जो पॉलिफेनोल कंपाउंड होता है, इसी की वजह से इसका रंग पीला होता है। बाबा रामदेव ने भी कच्ची हल्दी के कई फायदे बताए हैं। उनका कहना है कि कच्ची हल्दी खाने से स्वास्थ्य सही रहता है। यह 100 साल तक सेहत को बनाए रखने का काम करती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;जानिए कच्ची हल्दी खाने के फायदे..&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;सुबह-सुबह कच्ची हल्दी खाने से कैंसर का खतरा कम होता है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;दूध में कच्ची हल्दी को उबालकर पीने से इम्यूनिटी बढ़ती है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;कच्ची हल्दी का सेवन करने से सर्दी जुकाम कम होता है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;हल्दी का सेवन ऑटो इम्यून डिजीज से बचाता है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;वात-कफ और पित्त नाशक होता है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;सौंदर्य में निखार के लिए भी कच्ची हल्दी का इस्तेमाल होता है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;क्ची हल्दी शुगर लेवल को कम करने में सहायक होता है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Development: इन चार महीनों में दोगुना तेजी से होता है बच्चों का विकास, काफी कम लोग जानते हैं ये बात</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/development-children-develop-twice-as-fast-in-these-four-months-very-few-people-know-this/</link><pubDate>August 3, 2024, 8:54 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/dth-300x169.webp</image><category>राज्य</category><excerpt>बच्चे धीरे-धीरे खेलते-कूदते बढ़ते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि साल के चार महीने ऐसे भी होते है जिसमें बच्चे दोगुना तेजी से बढ़ते हैं. बढ़ना निरंतर प्रक्रिया है बच्चों का बढ़ना प्रकृति के अनुसार एक निरंतर होने वाली प्रक्रिया है, जो आनुवंशिकी, प...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बच्चे धीरे-धीरे खेलते-कूदते बढ़ते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि साल के चार महीने ऐसे भी होते है जिसमें बच्चे दोगुना तेजी से बढ़ते हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बढ़ना निरंतर प्रक्रिया है&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बच्चों का बढ़ना प्रकृति के अनुसार एक निरंतर होने वाली प्रक्रिया है, जो आनुवंशिकी, पोषण, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होती है.ऐसे में क्या आप जानते है कि साल के चार महीने ऐसे भी होते है जब बच्चों का विकास दोगुनी तेजी से होता है.ऐसा कहा जाता है वसंत और गर्मियों में बच्चों का विकास तेजी से होता है. ये महीने बच्चों के लिए बहुत अच्छे माने जाते हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रोशनी विकास के लिए जरूरी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;साथ ही इस मौसम में शरीर को सूरज की पर्याप्त रोशनी मिलती है. जिससे शरीर में विटामिन डी भरपूर मात्रा में मिलती हैं. जो बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य के विकास में जरूरी भूमिका निभाता है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>शरीर का कौन सा हिस्सा नहीं सह सकता 50 पार तापमान, जानें सबकुछ</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/which-part-of-the-body-cannot-bear-temperature-above-50-know-everything/</link><pubDate>May 31, 2024, 5:07 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/05/download-7-13-300x225.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर: इन दिनों पूरा भारत भीषण गर्मी व लू की चपेट में है। खास कर कुछ राज्यों के तापमान हाफ सेंचुरी क्रॉस कर चुका है। ऐसे में लोग काफी बीमार पड़ रहे हैं। भीषण हीटवेव की चपेट में आने से कई तरह की बीमारियां हो रही है। ऐसे में क्या आपको पता है कि शर...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;जयपुर: &lt;/strong&gt;इन दिनों पूरा भारत भीषण गर्मी व लू की चपेट में है। खास कर कुछ राज्यों के तापमान हाफ सेंचुरी क्रॉस कर चुका है। ऐसे में लोग काफी बीमार पड़ रहे हैं। भीषण हीटवेव की चपेट में आने से कई तरह की बीमारियां हो रही है। ऐसे में क्या आपको पता है कि शरीर के किस हिस्से में सबसे अधिक गर्मी लगती है। तो ऐसे में चलिए जानते है कि अधिक गर्मी होने पर हमारे शरीर का कौन सा हिस्सा जल्दी प्रभावित होता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अधिकांश राज्यों के तापमान में वृद्धि जारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;आय दिन देश के अधिकांश राज्यों के तापमान में वृद्धि जारी है, जिस वजह से कई लोगों की जान भी जा रही है। पिछले दो दिन के भीतर दिल्ली और राजस्थान के कई शहरों में तापमान 50 डिग्री से ऊपर दर्ज हुआ है. ऐसे हालात में हर कोई गर्मी से बचने का हर संभव कोशिश में लगा है. लेकिन क्या आपको पता हैं कि जब तापमान 48 डिग्री से 50 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचता है, तब यह तापमान मानव शरीर के लिए कितना खतरनाक बन जाता है. जानें तापमान में वृद्धि होने से शरीर में कौन-कौन सी परेशानी होती है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;42.3 डिग्री सेल्सियस से अधिक इंसान के लिए खतरा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बता दें कि सामान्य मानव शरीर का तापमान 98.6 डिग्री फारेनहाइट होता है. यह तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के बराबर होता है. माना जाता है कि अधिकतम तापमान जिस पर मनुष्य जिंदा रह सकता है, वह 108.14 डिग्री फारेनहाइट या 42.3 डिग्री सेल्सियस ही होता है। मानव शरीर के लिए 48-50 डिग्री सेल्सियस तापमान झेलना मुश्किल होता है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सबसे अधिक खतरा इंसानी मस्तिष्क और तंत्रिका पर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;डॉक्टर्स बताते है कि मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र जब 50 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान के संपर्क में लंबे समय तक रहता है तो कई तरह की परेशानियों से घिर जाता है। साथ ही बताते है कि 46-60 डिग्री सेल्सियस के आसपास के तापमान पर मस्तिष्क की कोशिकाएं मरने लगती हैं, क्योंकि मस्तिष्क कोशिकाओं के भीतर प्रोटीन जमना शुरू हो जाता है. 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान अलग-अलग प्रकार की मस्तिष्क कोशिकाओं पर विनाशकारी प्रभाव छोड़ता है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Heat Wave: लू से बचने के लिए आजमाएं ये कारगर उपाय, रहेंगे बेफिक्र</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/heat-wave-try-these-effective-measures-to-avoid-heat-wave-you-will-remain-worry-free/</link><pubDate>May 21, 2024, 8:54 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/05/download-14-5-300x225.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर: इन दिनों देश के अधिकतर हिस्सों में भीषण गर्मी और लू की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में राजस्थान की बात करें तो यहां गर्मी का प्रचंड रूप देखने को मिल रहा है। हालांकि मौसम विभाग लगातार हीट वेव से बचने के लिए लोगों से अपील कर रही है। इस साल मार्...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;जयपुर:&lt;/strong&gt; इन दिनों देश के अधिकतर हिस्सों में भीषण गर्मी और लू की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में राजस्थान की बात करें तो यहां गर्मी का प्रचंड रूप देखने को मिल रहा है। हालांकि मौसम विभाग लगातार हीट वेव से बचने के लिए लोगों से अपील कर रही है। इस साल मार्च की शुरुआत गर्मी से हुई, जो मई के माह में और बढ़ी हुई है। मई माह की समाप्ति होने को है। ऐसे में गर्मी अपने तेवर दिखा रहे हैं. हालांकि भारतीय मौसम विभाग (IMD) इसको लेकर पहले ही आगाह कर चुका था। तो ऐसे में चलिए जानते हैं भीषण गर्मी और लू से कैसे खुद को बचाएं।&lt;/p&gt;



&lt;ol class=&quot;wp-block-list&quot;&gt;
&lt;li&gt;&lt;strong&gt;खुद को रखें हाइड्रेटेड&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इन दिनों लू चलने से डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक बढ़ा हुआ है. ऐसे में एक्सपर्ट्स बताते हैं कि समय-समय पर शीतल जल पीते रहें, ताकि शरीर हाइड्रेटेड बना रहे. इस दौरान कम से कम 8-10 ग्लास पानी हर दिन पिएं। साथ ही फल और सब्जियां अपनी डाइट में लें।&lt;/p&gt;



&lt;ol class=&quot;wp-block-list&quot; start=&quot;2&quot;&gt;
&lt;li&gt;&lt;strong&gt;बाहर कम निकलें&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;अगर आपको हीट वेव से बचना है तो घर से बाहर जाना अवॉयड करें. जरुरत पड़े तभी घर से बाहर जाएं, नहीं तो घर के अंदर फैन, कूलर, एसी में रहें. अगर ये चीजें आपके पास नहीं हैं तो पर्दे या शेड्स लगाकर रखें। इससे आप लू के गंभीर खतरों से बच सकते हैं.&lt;/p&gt;



&lt;ol class=&quot;wp-block-list&quot; start=&quot;3&quot;&gt;
&lt;li&gt;&lt;strong&gt;सूरज की किरणों से बचें&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इन दिनों लू की स्थिति बनी हुई है, ऐसे में सीधे तौर पर सूर्य की रोशनी में न जाएं. अगर किसी कारण से आप बाहर निकलते भी है तो टोपी, गमछा, चश्मा का यूज़ करें. लाइट कलर के ढीले कपड़े को प्रेफर करें। जिससे आपका स्किन प्रोटेक्ट हो सके और आप हीट वेव से बच सकते हैं।&lt;/p&gt;



&lt;ol class=&quot;wp-block-list&quot; start=&quot;4&quot;&gt;
&lt;li&gt;&lt;strong&gt;खाली पेट बाहर न निकले&lt;/strong&gt;&lt;/li&gt;
&lt;/ol&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;इन दिनों लू तेज चल रही है, ऐसे में कभी भी गलती से भी खाली पेट घर से बाहर न निकलें. अगर आप भी ऐसा करते है तो आपको लू लग सकता है, साथ में गर्मी और धूप से चक्कर आ सकता है. इसलिए जब भी घर से बाहर निकले तो कुछ खाने के बाद ही निकले. ताकि इन परेशानियों से बचा जा सकें।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Health Tips: क्या आपके बच्चे अधिक चॉकलेट खाते हैं? तो हो जाएं सतर्क</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/health-tips-do-your-children-eat-too-much-chocolate-so-be-alert/</link><pubDate>November 11, 2023, 8:09 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/download-8-4-300x225.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर। चॉकलेट और कैंडी को देखते ही बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं होता है क्योंकि बच्चों को चॉकलेट अधिक पसंद होता है। अक्सर बच्चे चॉकलेट से बनी चीजों को बड़े चाव के साथ खाते हैं लेकिन आपके बच्चे भी अगर ज्यादा चॉकलेट का सेवन कर रहे हैं तो आपको सा...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;जयपुर। &lt;/strong&gt;चॉकलेट और कैंडी को देखते ही बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं होता है क्योंकि बच्चों को चॉकलेट अधिक पसंद होता है। अक्सर बच्चे चॉकलेट से बनी चीजों को बड़े चाव के साथ खाते हैं लेकिन आपके बच्चे भी अगर ज्यादा चॉकलेट का सेवन कर रहे हैं तो आपको सावधान होने की आवश्यकता है। डॉक्टर बताते हैं कि चॉकलेट में लेड और कैडमियम जैसा डेंजरस केमिकल होता है। इसलिए अपने बच्चों को अधिक चॉकलेट खाने से परहेज करें। वहीं डॉक्टर यह भी बताते हैं की चॉकलेट में कैफीन और शर्करा पाया जाता है जो बच्चों को नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि अधिक चॉकलेट खाने से हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, किडनी फेलियर, मोटापा जैसी तमाम समस्याएं पैदा हो सकती है। इन समस्याओं को देखते हुए अपने बच्चों को अधिक चॉकलेट देने से परहेज बरतना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैंसर का भी खतरा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;चॉकलेट में मौजूद लेड और कैडमियम जैसे केमिकल की मात्रा ज्यादा होने से कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। ऐसे में अगर आपका बच्चा ज्यादा चॉकलेट खाता है तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए। अगर आप इस विषय पर चिंतन नहीं करते हैं तो लंबे समय तक चॉकलेट अधिक नुकसानदायक साबित होगा। वहीं चॉकलेट में मौजूद कैडमियम का लंबे समय तक सेवन करने से शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और साथ ही यह फेफड़ों सहित लीवर को भी प्रभावित करेगा। यही नहीं इसके कारण कई कैंसर सहित कई जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कोलेस्ट्रोल बढ़ने का खतरा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;तमाम डॉक्टर के मुताबिक बताया जाता है कि चॉकलेट में कैफीन और शुगर मौजूद होता है। ऐसे में यह ब्लड प्रेशर को अधिक बढ़ा सकता है। वहीं अधिक मात्रा में चॉकलेट का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा हो सकता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नींद पर प्रभाव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;चॉकलेट में अधिक मात्रा में कैफीन मौजूद होता है। ऐसे में आप इसका सेवन करते हैं तो आपको नींद आने में दिक्कत होती है। खास कर बच्चों की बात करें तो बच्चे चॉकलेट के दीवाने होते हैं ऐसे में उनके लिए अधिक मात्रा में चॉकलेट का सेवन करना उनके मानसिक विकास को प्रभावित करता है। बता दें कि पर्याप्त नींद नहीं लेने के कारण बच्चे चिड़चिड़े और उदासीन दिखते हैं। इस कारण बच्चों की स्मरण शक्ति, सीखने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों को रात में चॉकलेट खाने से रोकना चाहिए। जिससे बच्चों के मानसिक विकास में सहायता मिल सके।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Health Tips: पॉल्यूशन से फेफड़ा, किडनी ही नहीं दिमाग पर भी हो रहा असर, जानें इससे जुड़ी शुरुआती लक्षण</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/health-tips-pollution-is-not-only-affecting-the-lungs-and-kidneys-but-also-the-brain-know-the-initial-symptoms-related-to-it/</link><pubDate>November 7, 2023, 12:18 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/download-11-5-300x225.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। देशभर में फेस्टिव सीजन का सिलसिला जारी है। ऐसे में दीपावली के आतिशबाजी से पहले ही वातावरण पूर्ण रूप से दूषित हो गया है। इन दोनों देश के कुछ राज्यों की हवा इतनी ज्यादा जहरीले हो गई है कि वहां रह रहे लोगों का दम घुट रहा है। अगर बात करें दे...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; देशभर में फेस्टिव सीजन का सिलसिला जारी है। ऐसे में दीपावली के आतिशबाजी से पहले ही वातावरण पूर्ण रूप से दूषित हो गया है। इन दोनों देश के कुछ राज्यों की हवा इतनी ज्यादा जहरीले हो गई है कि वहां रह रहे लोगों का दम घुट रहा है। अगर बात करें देश की राजधानी दिल्ली की तो यहां की वायु गुणवत्ता पूर्ण रूप से अधिक खराब श्रेणी में पहुंच चुका है, जिस वजह से राजधानी में रहने वाले लोग या दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोगों को सांस संबंधित दिक्कते बढ़ रही है। वहीं हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि एयर पॉल्यूशन इंसान के सभी बॉडी पार्ट के लिए नुकसानदेह है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्रदूषण से दिमागी स्थिती भी हो रही खराब&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि हवा में जहरीली गैस घुल जाने से वायु की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है। इस वजह से फेफड़ों की बीमारी ही नहीं बल्कि दिमाग, शरीर के अन्य अंग और दिल की बीमारी का भी खतरा बढ़ रहा है। तमाम सूत्रों के मुताबिक बता दें कि पल्मोनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट के डॉक्टर नीरज गुप्ता ने बताया कि बुजुर्गों, स्कूल जाने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इस वायु प्रदूषण की वजह से कई तरह की दिक्कतें बढ़ सकती है। बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण इन वर्गों के लोगों को कई तरह की शारीरिक मुश्किलें हो सकती है जैसे- चिड़चिड़ापन, कमजोरी, भ्रम, सर दर्द&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राजधानी दिल्ली को माना जाता है गैस चैंबर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;वायु प्रदूषण के दौरान वायु में जहरीली गैसों की मात्रा अधिक बढ़ने लगती है। खासकर हवा में न्यूरोकॉग्निटिव ज्यादा बढ़ जाता है। इस कारण इंसान का नर्वस सिस्टम बुरी तरह से प्रभावित होता है। इसलिए ऐसा मानना बिल्कुल सही है कि दिल्ली और दिल्ली एनसीआर की हालत एक गैस चैंबर जैसी ही बन जाती है। हालंकि यह शब्द बिल्कुल सही है क्योंकि वायु में कई सारे ऐसे हानिकारक गैस घुल चुकी है जो सेहत के लिए अधिक नुकसानदायक साबित हो रहा है। एक स्टडी के मुताबिक यह बताया गया की स्कूल जाने वाले बच्चों के ऊपर एयर पॉल्यूशन का अधिक असर पड़ रहा है। इस स्टडी में पाया गया कि हवा की गुणवत्ता खराब होने से सीधा असर बच्चों के दिमाग पर पड़ता है। इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट बताते है कि फिलहाल इस हालात से बचने के लिए एक ही उपाय है कि आप हवा के संपर्क में अधिक न जाए, अत्यंत जरूरी आने पर ही अपने घर से बाहर निकले।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बीमार व्यक्तियों की स्थिति बिगड़ सकती है&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण जो लोग पहले से बीमार हैं जैसे किसी को अस्थमा तो किसी को क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, तो कोई इस्केमिक दिल की बीमारी से ग्रसित है तो ऐसे लोगों को इस भयावह स्थिति में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे बीमार मरीजों को अधिक से अधिक घर में रहना चाहिए। बात करें अगर राजधानी दिल्ली की तो रविवार को लगातार छठे दिन भी यहां की हवा और दूषित होती हुई प्रतीत हुई। बता दें कि यहां हवा का लेवल दिन पर दिन और अधिक खराब होता जा रहा है। खासकर रात के समय शांत हवाओं के वजह से प्रदूषण का लेवल एक बार फिर गंभीर लेवल पर जा पहुंचा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ठंड में हवा जहरीली&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;हर साल सर्दियों के मौसम में हवा की गुणवत्ता अधिक खराब स्तर पर पहुंच जाती है। इस विषय पर बहुत चर्चा होती है लेकिन कोई ठोस स्थाई इंतजाम नहीं की जाती है। इसके साथ तमाम डेटा के आंकड़ों से पता चलता है कि पूरे वर्ष में 50% से ज्यादा दिनों में वायु की गुणवत्ता खराब ही रहती है। जिस कारण लोगों को वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सर्दियों के मौसम में यह स्थिति और अधिक बढ़ जाता है और लोगों को लंबे समय तक खांसी, सांस लेने में दिक्कत, गले में इन्फेक्शन और सीने में जकड़न के साथ-साथ चिंता, भ्रम और चिड़चिड़ापन की स्थिति सामने आती है। वहीं बता दें कि वायु प्रदूषण हमारे देश के लिए एक बहुत बड़ा संकट है, इसे तत्कालित तौर पर हमें कम करने की अत्यंत जरूरत है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बढ़ते प्रदूषण में कुछ पौधे का नाम हम आपको बताएंगे जो पॉल्यूशन के घुटन से बचा सकता है &amp;#8211;&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;आपको बता दें कि आईआईटी कानपुर के रिसर्च के अनुसार बताया गया है कि कुछ पौधे ऐसे हैं जो आसानी से हमारे बीच उपलब्ध है और उन पौधों के वजह से हम एयर पॉल्यूशन को कम कर सकते हैं। तो आईए जानते हैं ऐसे कुछ पौधों के बारे में&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;एरिका पाम&lt;/strong&gt;&amp;#8211; एरिका पाम एक ऐसा प्लांट है जो ऑक्सीजन देता है साथ में हवा में घुली जहरीले गैस को कम करने में अहम भूमिका निभाती है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;स्नेक प्लांट &lt;/strong&gt;&amp;#8211; यह एक ऐसा प्लांट है जो दिन में ऑक्सीजन देता है और रात के समय कार्बन डाइऑक्साइड ऑब्जर्व करता है। इसे हम अपने बेडरूम में भी लगते हैं, अक्सर लोग इस प्लांट को बेडरूम प्लांट भी कहते हैं ।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;मनी प्लांट&lt;/strong&gt;&amp;#8211; यह एक ऐसा पौधा है जो पॉल्यूशन को कम करता है, फ्रेश एयर को रिलीज करता है। इसके साथ ही यह पौधा टॉक्सिक पदार्थ को खत्म करता है। इस तरह से अगर हम अपने घरों में ऐसे पौधों का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ हद तक हम वायु प्रदूषण के प्रकोप से बच सकते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>