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       <title>Today isro mission News | Latest isro mission News | Breaking isro mission News in English | Latest isro mission News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का isro mission समाचार:Today isro mission News ,Latest isro mission News,Aaj Ka Samachar ,isro mission समाचार ,Breaking isro mission News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/isro-mission</link>
        <lastBuildDate>April 25, 2026, 6:44 am</lastBuildDate>
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        </image><item><title>चंद्रयान-3 द्वारा Hop Test ने इसरो में जगाया होप, जानिए क्या है यह परीक्षण</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/hop-test-by-chandrayaan-3-raised-hope-in-isro-know-what-is-this-test/</link><pubDate>September 9, 2023, 8:30 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-72.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर। विक्रम लैंडर ने किसी हैलीकॉप्टर की तरह चांद पर उड़ते हुए एक बार फिर सॉफ्ट लैंडिंग की है.14 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इसरो ने हॉप टेस्ट के जरिए विक्रम को 40 सेमी तक उछाल गया और जमीन पर लैंड करने में सफल हो गया. इसरो के हॉप टेस्ट ने किया क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर। &lt;/strong&gt;विक्रम लैंडर ने किसी हैलीकॉप्टर की तरह चांद पर उड़ते हुए एक बार फिर सॉफ्ट लैंडिंग की है.14 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इसरो ने हॉप टेस्ट के जरिए विक्रम को 40 सेमी तक उछाल गया और जमीन पर लैंड करने में सफल हो गया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो के हॉप टेस्ट ने किया कमाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने दो हफ्ते की मेहनत करने के बाद एक प्रयोग करने का निर्णय लिया। इसरो ने विक्रम लैंडर को कमांड दिया और इसके परिणामस्वरूप विक्रम ने चांद की सतह पर खुद को 40 सेमी तक ऊंचा उठाया और फिर 30-40 सेमी दूर जाकर लैंड किया। इसरो ने इस प्रक्रिया को &amp;#8216;हॉप टेस्ट&amp;#8217; बताया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है इसरो का हॉप टेस्ट ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हॉप टेस्ट के माध्यम से इसरो ने चंद्रयान-3 के विक्रम पर हेलीकॉप्टर जैसा कंट्रोल बनाया फिर उसे वर्टिकली टेक-ऑफ करवाया गया और फिर उसकी वर्टिकल लैंडिंग करवाई गई। हॉप को आसान भाषा में अगर समझा जाए तो यह किसी व्यक्ति के प्री-वर्कआउट वार्मअप की तरह है. जिसमे व्यक्ति उछलता है और कुछ दूर जाकर लैंड करता है. इसरो द्वारा यह टेस्ट भी कुछ इस प्रकार ही थी जो सफल रहा. हालांकि यह आसान प्रक्रिया नहीं है और ऐसा इसलिए क्योंकि चांद पर पृथ्वी का 1/6 वां गुरुत्वाकर्षण है, जिसके कारण चांद की सतह पर ये प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहला हॉप टेस्ट किसने किया था ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जानकारी के लिए बता दें कि नासा के सर्वेयर-6 ने चांद पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी, जिसके बाद सन 1969 में 17 नवंबर को सर्वेयर-6 के इंजन को पहली बार 2.5 सेकेंड के लिए फायर किया गया था, जिसकी वजह से सर्वेयर ने चांद की सतह पर 3 से 4 मीटर तक छलांग लगाई थी और फिर अपने ऑरिजिनल पॉजिशन से 2.4 मीटर पश्चिम में लैंड किया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो ने किया ट्वीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं इसरो ने ट्वीट करते हुए कहा कि कमांड दिए जाने पर विक्रम लैंडर का इंजन फिर से शुरू हो गया और यह 40 सेमी तक ऊपर उठा। इसके बाद इसने फिर 30-40 सेमी दूर जाकर सॉफ्ट लैंड किया। इसरो ने बताया कि हमारा उद्देश्य भविष्य में लैंडर की वापसी और मानवीय मिशन के लिए ट्रायल करना था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>इसरो ने दी जानकारी, आदित्य एल-1 ने पृथ्वी की दूसरी कक्षा में किया प्रवेश</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/isro-gave-information-aditya-l-1-entered-the-second-orbit-of-the-earth/</link><pubDate>September 5, 2023, 4:13 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-42-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन ने जानकारी देते हुए बताया कि आदित्य एल1 की नई कक्षा 282 किमी x 40225 किमी है। कक्षा बदलने का अगला अभ्यास (ईबीएन#3) 10 सितंबर 2023 को लगभग 02:30 बजे किया जाएगा। आदित्य एल-1 सफलतापूर्वक बदली दूसरी कक्षा आपक...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन ने जानकारी देते हुए बताया कि आदित्य एल1 की नई कक्षा 282 किमी x 40225 किमी है। कक्षा बदलने का अगला अभ्यास (ईबीएन#3) 10 सितंबर 2023 को लगभग 02:30 बजे किया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आदित्य एल-1 सफलतापूर्वक बदली दूसरी कक्षा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल-1 उपग्रह ने पृथ्वी की कक्षा बदलने का दूसरा चरण पूरा कर लिया है. इसरो ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बताया कि बेंगलुरु स्थित इस्ट्रैक (ISTRAC) सेंटर से आदित्य एल1 के पृथ्वी की कक्षा बदलने का दूसरा चरण सफलतापूर्वक किया गया। इस ऑपरेशन के दौरान मॉरीशस, बेंगलुरु और पोर्ट ब्लेयर में ISTRAC/ISRO के ग्राउंड स्टेशनों ने उपग्रह को ट्रैक किया वहीं इसरो ने आगे बताया कि अब आदित्य एल1 की नई कक्षा 282 किमी x 40225 किमी है। तीसरी कक्षा बदलने का अगला अभ्यास (ईबीएन#3) 10 सितंबर 2023 को लगभग 02:30 बजे किया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इससे पहले 3 सितंबर को आदित्य एल-1 ने बदला कक्ष&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसे पूर्व 3 सितंबर को आदित्य एल-1 ने सफलतापूर्वक कक्षा बदली थी और उसे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया था. इसरो ने रविवार को सुबह करीब 11.45 बजे आदित्य एल-1 की पहली अर्थ बाउंड फायरिंग की थी, जिसकी मदद से आदित्य एल1 ने कक्षा बदली।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शनिवार को PSLV-C 57 से किया लांच&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने शनिवार को पीएसएलवी सी57 लॉन्च व्हीकल से आदित्य एल1 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह लॉन्चिंग आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से हुई थी. यह मिशन भी चंद्रयान-3 की तरह पहले पृत्वी की परिक्रमा लगाएगा और फिर यह तेजी से सूरज की दिशा में उड़ान भरेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पृथ्वी के कक्षा में बिताएगा 16 दिन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने जानकारी देते हुए बताया कि आदित्य एल-1 ने अपनी कक्षा बदलकर अगली कक्षा में प्रवेश किया।आदित्य एल-1 पृथ्वी की कक्षा में 16 दिन बिताएगा। इस दौरान पांच बार इसकी कक्षा बदलने के लिए अर्थ बाउंड फायरिंग की जाएगी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Aditya L1 मिशन आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से हुआ लांच, जानिए क्यों जरूरी है सूर्य का अध्यन</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/national/aditya-l1-mission-launched-from-sriharikota-in-andhra-pradesh-know-why-it-is-important-to-study-the-sun/</link><pubDate>September 2, 2023, 7:04 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-21-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर। आदित्य मिशन आज 11:50 बजे आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से लांच हो गया है. आदित्य सूरज के कोरोना से निकलने वाली गर्म हवाओं की स्टडी करेगा। यह भारत का पहला सौर्य मिशन है. पृथ्वी से 15 किमी की दूरी तय करेगा आदित्य आंध्रप्रदेश के सतीश धवन स्पेस...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; आदित्य मिशन आज 11:50 बजे आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से लांच हो गया है. आदित्य सूरज के कोरोना से निकलने वाली गर्म हवाओं की स्टडी करेगा। यह भारत का पहला सौर्य मिशन है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पृथ्वी से 15 किमी की दूरी तय करेगा आदित्य&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आंध्रप्रदेश के सतीश धवन स्पेस सेंटर से प्रक्षेपण किया गया. चंद्रयान-3 मिशन की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब दुनिया की नजर आदित्य एल-1 मिशन पर है. आदित्य एल-1 सूर्य का अध्यन करने वाला मिशन है. इसके साथ ही इसरो ने इसे पहला अंतरिक्ष आधारित वेधशाला श्रेणी का सौर्य मिशन कहा है. अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंजियन बिंदु 1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा में स्थापित करने की योजना है जो पृथ्वी से लगभग 15 लाख किमी दूर है।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-image size-full&quot;&gt;&lt;img loading=&quot;lazy&quot; decoding=&quot;async&quot; width=&quot;790&quot; height=&quot;444&quot; src=&quot;https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-18.png&quot; alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-5870&quot; srcset=&quot;https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-18.png 790w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-18-300x169.png 300w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-18-768x432.png 768w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-18-150x84.png 150w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-18-696x391.png 696w&quot; sizes=&quot;auto, (max-width: 790px) 100vw, 790px&quot; /&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है मिशन का उद्देश्य ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भारत का पहला सूर्य मिशन सूर्य के वायुमंडल का सबसे बाहरी परत जिसे कोरोना कहते है उसकी बनावट और इसके तपने की प्रतिक्रिया, इसके तापमान, सौर विस्फोट और सौर तूफान के कारण उतपत्ती, कोरोना के चुंबकीय क्षेत्र की माप, कोरोना और कोरोनल लूप प्लाज्मा की बनावट, वेग और घनत्व, सूरज में होने वाले सबसे शक्तिशाली विस्फोट जो सीधे पृथ्वी की तरफ आते हैं उसका अध्यन करेगा।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-image size-full&quot;&gt;&lt;img loading=&quot;lazy&quot; decoding=&quot;async&quot; width=&quot;790&quot; height=&quot;444&quot; src=&quot;https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-19.png&quot; alt=&quot;&quot; class=&quot;wp-image-5871&quot; srcset=&quot;https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-19.png 790w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-19-300x169.png 300w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-19-768x432.png 768w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-19-150x84.png 150w, https://rajasthan.inkhabar.com/wp-content/uploads/2023/09/download-19-696x391.png 696w&quot; sizes=&quot;auto, (max-width: 790px) 100vw, 790px&quot; /&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सूर्य का अध्यन क्यों जरूरी ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सूर्य नितकतम तारा है और यही कारण है कि अन्य तारों के तुलना में विस्तार से अध्ययन किया जा सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य का अध्ययन करके हम अपनी आकाशगंगा (गैलेक्सी) के तारों के बारे में बहुत कुछ जान सकते हैं. जितना हम सोचते हैं उससे कई ज्यादा सूर्य का आकर है. इसमें कई विस्फोटकारी घटनाएं होती हैं इसके साथ ही सौर मंडल में भारी मात्रा में ऊर्जा भी छोड़ता है। यदि ऐसी विस्फोटक सौर घटना पृथ्वी की तरफ भेजी जाती तो यह पृथ्वी के नजदीकी अंतरिक्ष वातावरण में कई प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकती है। अभी तक कई अंतरिक्ष यान और संचार प्रणालियां ऐसी समस्याओं का शिकार बन चुकी हैं. इसी लिए इसका उपाय और ऐसी घटनाओं की प्रांरभिक चेतावनी जरूरी है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>आदित्य एल-1 के लॉन्चिंग की उल्टी गिनती आज से होगी शुरू, रिहर्सल हुआ पूरा</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/national/countdown-for-the-launch-of-aditya-l-1-will-start-from-today-rehearsal-completed/</link><pubDate>September 1, 2023, 10:14 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-11-300x169.png</image><category>देश</category><excerpt>जयपुर. चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत सूर्य मिशन आदित्य-एल 1 लॉन्च करने के लिए तैयार है. इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने बताया कि आदित्य-एल 1 के लॉन्चिंग की उल्टी गिनती आज से शुरू होगी. उन्होंने कहा कि 2 सितंबर को सुबह 11:50 बजे आंध्रप्रदेश के श्...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर. &lt;/strong&gt;चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत सूर्य मिशन आदित्य-एल 1 लॉन्च करने के लिए तैयार है. इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने बताया कि आदित्य-एल 1 के लॉन्चिंग की उल्टी गिनती आज से शुरू होगी. उन्होंने कहा कि 2 सितंबर को सुबह 11:50 बजे आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;15 लाख किलोमीटर की दूरी करेगा तय&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जानकारी के अनुसार आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को सौर कोरोना ( सूर्य की सबसे बाहरी परत) के दूरस्थ अवलोकन और एल-1 (सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु) पर सौर हवा के यथास्थिति अवलोकन के लिए बनाया गया है. एल-1 पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;लॉन्चिंग की रिहर्सल हुई पूरी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो अध्यक्ष सोमनाथ ने गुरूवार को प्रेस कॉन्फेंस का आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि हम अभी प्रक्षेपण के लिए तैयार हो रहे हैं, रॉकेट- उपग्रह भी तैयार है. और लॉन्चिंग की रिहरसल पूरी हो चुकी है. उन्होंने कहा कि आदित्य-एल 1 स्वादेशी तकनीक से बनाया गया है. इसके आलावा रोवर के सवाल पर सोमनाथ ने कहा कि सबकुछ ठीक चल रहा है. अच्छी तरह से डाटा मिल रहा है. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि 14 दिन में हमारा मिशन सफलता के साथ पूर्ण हो जाएगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कब लॉन्च होगा भारत का पहना सूर्य मिशन&lt;/strong&gt; ?&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आदित्य-एल 1 शुक्रवार को लॉन्च किया जाएगा. इसको आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कहां देख सकेंगे रॉकेट लॉन्च&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने अपनी वेबसाइट पर आदित्य एल-1 के लॉन्च को श्रीहरिकोटा स्थित केंद्र से सीधा दर्शकों के दिखाने के लिए व्यू गैलरी की सीटें बुक करने का विकल्त दिया गया है. हालांकि इसके लिए सीमित सीटें ही थी जो कि रजिस्ट्रेशन होने पर ही भर गई. इतना ही नहीं इसरो की वेबसाइट isro.gov.in पर जाकर आदित्य एल-1 की ल़ंन्चिंग का सीधा प्रसारण देख सकते हैं और लाइव अपडेटस हासिल कर सकते हैं&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>चंद्रयान-3 लैंडिंग में हुई सफल, जयपुर में उत्साह का माहौल</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/chandrayaan-3-landing-successful-atmosphere-of-enthusiasm-in-jaipur/</link><pubDate>August 24, 2023, 12:10 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-19-2-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। बुधवार की शाम लोग आंख गड़ाकर चंद्रयान-3 का चंद्रमा पर लैंड होने का इंतज़ार कर रहे थे. चंद्रयान-3 ने जैसे ही चन्द्रमा की सतह को छुआ, जयपुर समेत पूरे देश में लोग खुशियां मानाने लगे. चंद्रयान-3 की सफलता पर लोगों में दिखा उत्साह आपको बता दें क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; बुधवार की शाम लोग आंख गड़ाकर चंद्रयान-3 का चंद्रमा पर लैंड होने का इंतज़ार कर रहे थे. चंद्रयान-3 ने जैसे ही चन्द्रमा की सतह को छुआ, जयपुर समेत पूरे देश में लोग खुशियां मानाने लगे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चंद्रयान-3 की सफलता पर लोगों में दिखा उत्साह&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि गुलाबी नगरी में चंद्रयान-3 की लैंडिंग को लेकर उत्सव का माहौल था. घर से लेकर मोहाली, बाजार, चौराहे, स्कूल, स्मारक और सरकारी कार्यालयों में भी लोग लैंडिंग का लाइव टेलीकास्ट देख रहे थे. वहीं सोशल मीडिया तिरंगे, इसरो, चंद्रयान-3 की तस्वीरों से भर गया था. लोग इसरो और चंद्रयान-3 की तस्वीरें, रील्स अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर कर रहे थे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत माता की जय से गूंजा मीडिया सेंटर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बेंगलुरु के सतीश धवन स्पेस सेंटर के कमांड सेंटर में बने मीडिया सेंटर में लाइव टेलीकास्ट देख रहे शहर के साइंस कम्युनिकेटर तरुण जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि चंद्रयान-3 मिशन के सफल होने के बाद मीडिया सेंटर और कमांड सेंटर भारत माता की जय से गूंज उठा. मिशन के सफल होने से पूर्व माहौल काफी तनावपूर्ण था. सभी की धड़कने लैंडिंग से समय तेज हो गई थी. जानकारी के अनुसार चांद की सतह से 30 किलोमीटर की ऊंचाई पर चंद्रयान में हल्का सा ग्लिच आया था जिसके बाद वह 31 किलोमीटर की ऊंचाई पर आ गया. इसे देखने के बाद सभी की सांसे थान- सी गई थी. उस समय कमांड सेंटर में भी वैज्ञानिकों के चेहरों पर चिंता साफ़ नजर आ रही थी. हालांकि यह सिर्फ कुछ सेकंड के लिए ही था इसके बाद चंद्रयान-3 वापस अपनी समान्य रफ़्तार से सतह की तरफ उतरने लगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;काउंटडाउन शुरू होते ही छा गया सन्नाटा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जैसे ही लैंडिंग का काउंटडाउन शुरू हुआ पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया और लैंड होते ही 300 से ज्यादा मीडियाकर्मी और कमांड सेंटर में भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा।&lt;/p&gt;
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