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       <title>Today ISRO News | Latest ISRO News | Breaking ISRO News in English | Latest ISRO News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का ISRO समाचार:Today ISRO News ,Latest ISRO News,Aaj Ka Samachar ,ISRO समाचार ,Breaking ISRO News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>चंद्रयान-3 द्वारा Hop Test ने इसरो में जगाया होप, जानिए क्या है यह परीक्षण</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/hop-test-by-chandrayaan-3-raised-hope-in-isro-know-what-is-this-test/</link><pubDate>September 9, 2023, 8:30 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-72.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर। विक्रम लैंडर ने किसी हैलीकॉप्टर की तरह चांद पर उड़ते हुए एक बार फिर सॉफ्ट लैंडिंग की है.14 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इसरो ने हॉप टेस्ट के जरिए विक्रम को 40 सेमी तक उछाल गया और जमीन पर लैंड करने में सफल हो गया. इसरो के हॉप टेस्ट ने किया क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर। &lt;/strong&gt;विक्रम लैंडर ने किसी हैलीकॉप्टर की तरह चांद पर उड़ते हुए एक बार फिर सॉफ्ट लैंडिंग की है.14 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इसरो ने हॉप टेस्ट के जरिए विक्रम को 40 सेमी तक उछाल गया और जमीन पर लैंड करने में सफल हो गया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो के हॉप टेस्ट ने किया कमाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने दो हफ्ते की मेहनत करने के बाद एक प्रयोग करने का निर्णय लिया। इसरो ने विक्रम लैंडर को कमांड दिया और इसके परिणामस्वरूप विक्रम ने चांद की सतह पर खुद को 40 सेमी तक ऊंचा उठाया और फिर 30-40 सेमी दूर जाकर लैंड किया। इसरो ने इस प्रक्रिया को &amp;#8216;हॉप टेस्ट&amp;#8217; बताया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है इसरो का हॉप टेस्ट ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हॉप टेस्ट के माध्यम से इसरो ने चंद्रयान-3 के विक्रम पर हेलीकॉप्टर जैसा कंट्रोल बनाया फिर उसे वर्टिकली टेक-ऑफ करवाया गया और फिर उसकी वर्टिकल लैंडिंग करवाई गई। हॉप को आसान भाषा में अगर समझा जाए तो यह किसी व्यक्ति के प्री-वर्कआउट वार्मअप की तरह है. जिसमे व्यक्ति उछलता है और कुछ दूर जाकर लैंड करता है. इसरो द्वारा यह टेस्ट भी कुछ इस प्रकार ही थी जो सफल रहा. हालांकि यह आसान प्रक्रिया नहीं है और ऐसा इसलिए क्योंकि चांद पर पृथ्वी का 1/6 वां गुरुत्वाकर्षण है, जिसके कारण चांद की सतह पर ये प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहला हॉप टेस्ट किसने किया था ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जानकारी के लिए बता दें कि नासा के सर्वेयर-6 ने चांद पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी, जिसके बाद सन 1969 में 17 नवंबर को सर्वेयर-6 के इंजन को पहली बार 2.5 सेकेंड के लिए फायर किया गया था, जिसकी वजह से सर्वेयर ने चांद की सतह पर 3 से 4 मीटर तक छलांग लगाई थी और फिर अपने ऑरिजिनल पॉजिशन से 2.4 मीटर पश्चिम में लैंड किया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो ने किया ट्वीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं इसरो ने ट्वीट करते हुए कहा कि कमांड दिए जाने पर विक्रम लैंडर का इंजन फिर से शुरू हो गया और यह 40 सेमी तक ऊपर उठा। इसके बाद इसने फिर 30-40 सेमी दूर जाकर सॉफ्ट लैंड किया। इसरो ने बताया कि हमारा उद्देश्य भविष्य में लैंडर की वापसी और मानवीय मिशन के लिए ट्रायल करना था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>इसरो ने दी जानकारी, आदित्य एल-1 ने पृथ्वी की दूसरी कक्षा में किया प्रवेश</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/isro-gave-information-aditya-l-1-entered-the-second-orbit-of-the-earth/</link><pubDate>September 5, 2023, 4:13 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-42-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन ने जानकारी देते हुए बताया कि आदित्य एल1 की नई कक्षा 282 किमी x 40225 किमी है। कक्षा बदलने का अगला अभ्यास (ईबीएन#3) 10 सितंबर 2023 को लगभग 02:30 बजे किया जाएगा। आदित्य एल-1 सफलतापूर्वक बदली दूसरी कक्षा आपक...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन ने जानकारी देते हुए बताया कि आदित्य एल1 की नई कक्षा 282 किमी x 40225 किमी है। कक्षा बदलने का अगला अभ्यास (ईबीएन#3) 10 सितंबर 2023 को लगभग 02:30 बजे किया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आदित्य एल-1 सफलतापूर्वक बदली दूसरी कक्षा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य एल-1 उपग्रह ने पृथ्वी की कक्षा बदलने का दूसरा चरण पूरा कर लिया है. इसरो ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए बताया कि बेंगलुरु स्थित इस्ट्रैक (ISTRAC) सेंटर से आदित्य एल1 के पृथ्वी की कक्षा बदलने का दूसरा चरण सफलतापूर्वक किया गया। इस ऑपरेशन के दौरान मॉरीशस, बेंगलुरु और पोर्ट ब्लेयर में ISTRAC/ISRO के ग्राउंड स्टेशनों ने उपग्रह को ट्रैक किया वहीं इसरो ने आगे बताया कि अब आदित्य एल1 की नई कक्षा 282 किमी x 40225 किमी है। तीसरी कक्षा बदलने का अगला अभ्यास (ईबीएन#3) 10 सितंबर 2023 को लगभग 02:30 बजे किया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इससे पहले 3 सितंबर को आदित्य एल-1 ने बदला कक्ष&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसे पूर्व 3 सितंबर को आदित्य एल-1 ने सफलतापूर्वक कक्षा बदली थी और उसे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया था. इसरो ने रविवार को सुबह करीब 11.45 बजे आदित्य एल-1 की पहली अर्थ बाउंड फायरिंग की थी, जिसकी मदद से आदित्य एल1 ने कक्षा बदली।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शनिवार को PSLV-C 57 से किया लांच&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने शनिवार को पीएसएलवी सी57 लॉन्च व्हीकल से आदित्य एल1 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह लॉन्चिंग आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से हुई थी. यह मिशन भी चंद्रयान-3 की तरह पहले पृत्वी की परिक्रमा लगाएगा और फिर यह तेजी से सूरज की दिशा में उड़ान भरेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पृथ्वी के कक्षा में बिताएगा 16 दिन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने जानकारी देते हुए बताया कि आदित्य एल-1 ने अपनी कक्षा बदलकर अगली कक्षा में प्रवेश किया।आदित्य एल-1 पृथ्वी की कक्षा में 16 दिन बिताएगा। इस दौरान पांच बार इसकी कक्षा बदलने के लिए अर्थ बाउंड फायरिंग की जाएगी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>इसरो की वैज्ञानिक एन वलारमथी का निधन, चंद्रयान-3 मिशन में निभाया महत्वपूर्व भागीदारी</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/isro-scientist-n-valarmathi-passes-away-played-important-role-in-chandrayaan-3-mission/</link><pubDate>September 4, 2023, 5:01 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-34-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। भारत के चंद्रयान-3 मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की वैज्ञानिक एन वलारमथी का शनिवार शाम को निधन हो गया. इसरो वैज्ञानिक एन वलारमथी का निधन एन वलारमथी को शनिवार शाम को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ा जिसके...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; भारत के चंद्रयान-3 मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की वैज्ञानिक एन वलारमथी का शनिवार शाम को निधन हो गया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो वैज्ञानिक एन वलारमथी का निधन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;एन वलारमथी को शनिवार शाम को चेन्नई में दिल का दौरा पड़ा जिसके कारण उनकी मौत हो गई. 14 जुलाई को लॉन्च किया गया बेहद सफल चंद्रयान-3 उनके लिए अंतिम उल्टी गिनती साबित हुआ. इस मिशन लॉन्चिंग के लिए काउंटडाउन की पीछे की वे आवाज थीं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने किया ट्वीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा कि कई लोगों के पीछे की आवाज एन वलारमथी जी के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ. उनके परिवार और दोस्तों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ओम शांति।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो के पूर्व निदेशक वेंकटकृष्णन ने जताया दुःख&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;उनके निधन पर शोक व्यक्त लरते हुए इसरो के पूर्व निदेशक पीवी वेंकटकृष्णन ने एक्स पर ट्वीट करते हुए कहा कि वलारमथी मैडम की आवाज श्रीहरिकोटा से इसरो के भविष्य के मिशनों की उलटी गिनती के लिए अब नहीं होगी. चंद्रयान-3 उनकी अंतिम उलटी गिनती की घोषणा थी. एक अप्रत्याशित निधन. बहुत दुख महसूस हो रहा है, प्रणाम! वहीं उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सभी लॉन्चों के लिए उल्टी गिनती की घोषणाएं करती थीं वलारमथी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जानकारी के अनुसार वलारमथी ने इसरो की प्री-लांच उलटी गिनती घोषणाएं की थी. उन्होंने आखिरी घोषणा 30 जुलाई को की थी जब PSLV-56 रॉकेट एक समर्पित वाणिज्यिक मिशन के हिस्से के रूप में 7 सिंगापुरी उपग्रहों को लेकर रवाना हुआ था. बता दें, वह पिछले 6 सालों से सभी लॉन्चों के लिए उलटी गिनती की घोषणाएं कर रही थीं. बताया गया कि वह कुछ समय से अस्वस्थ थीं. 50 साल की उम्र में, शनिवार शाम को हृदय गति रुकने से चेन्नई के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>इस धातु से बना है आदित्य L-1 सैटेलाइट, सूर्य की तपिश का इसपर नहीं होगा कोई असर</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/national/aditya-l-1-satellite-is-made-of-this-metal-suns-heat-will-not-affect-it/</link><pubDate>September 2, 2023, 8:35 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-22-300x169.png</image><category>देश</category><excerpt>जयपुर। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने के बाद इसरो ने अब सूर्य पर रिसर्च करने के लिए आदित्य मिशन को भेज दिया है. आज आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से आदित्य L-1 को लांच किया गया. इसरो ने सूर्य पर भेजा आदित्य आदित्य L-1 सूर्य पर लैंड नहीं करेगा। आद...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने के बाद इसरो ने अब सूर्य पर रिसर्च करने के लिए आदित्य मिशन को भेज दिया है. आज आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से आदित्य L-1 को लांच किया गया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो ने सूर्य पर भेजा आदित्य&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आदित्य L-1 सूर्य पर लैंड नहीं करेगा। आदित्य कई लाख किलोमीटर की दूरी से ही सूर्य का अध्यन करेगा। अगर चेतावनी की बात यह है कि जिस जगह पर आदित्य मिशन सूर्य का अध्यन करेगा उस जगह पर भी असहनीय गर्मी होगी। जहां कोई भी आम धातु आसानी से पिघल जाएगा. लेकिन आदित्य L-1 को उम्दा मटेरियल से बनाया गया है. जिस वजह से वह अधिकतम गर्मी को भी झेल लेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो का पहला सूर्य मिशन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आदित्य मिशन सूर्य पर जाने वाला इसरो का पहला मिशन है. इससे पूर्व नासा समेत कई अन्य स्पेस एजेंसियो ने अपना अंतरिक्ष यान मिशन के लिए सूर्य पर भेजा है. मगर इनमें से से कई मिशन सफल भी हुए हैं.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत में ही किया गया डिजाइन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आदित्य एल-1 को भारत में ही डिजाइन किया गया है. इसमें मौजूद 7 पेलोड में से 6 भारत में ही बने हैं. यह सूरज के नजदीक नहीं जाएगा, मगर लैग्रेंजियन पॉइंट पर रहकर सूरज पर रिसर्च करेगा। यह किस धातु का बना है इसरो ने इसकी जानकारी नहीं दी है. बता दें कि स्पेस एजेंसी ने मिशन से जुड़ी कई जानकारियां सीक्रेट रखी है. इसरो के इस मिशन पर हर देशवासी ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजर इस मिशन पर है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>श्रीहरिकोटा से आज Aditya L1 Mission को किया जाएगा लांच , सूर्य के रहस्यों का करेंगे खुलासा</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/aditya-l1-mission-will-be-launched-from-sriharikota-today-will-reveal-the-secrets-of-the-sun/</link><pubDate>September 2, 2023, 6:20 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-17-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। आदित्य एल -1 को सूर्य के रहस्यों का पता लगाने के लिए भेजा जा रहा है. इस मिशन को आज सुबह 11:50 बजे आंध्रप्रदेश के श्री हरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। आदित्य एल -1 को आज किया जाएगा लॉन्च आपको बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के बाद भारत स...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर। &lt;/strong&gt;आदित्य एल -1 को सूर्य के रहस्यों का पता लगाने के लिए भेजा जा रहा है. इस मिशन को आज सुबह 11:50 बजे आंध्रप्रदेश के श्री हरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आदित्य एल -1 को आज किया जाएगा लॉन्च&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के बाद भारत सूर्य के रहस्यों को जानने के लिए आदित्य एल-1 धरती से 15 लाख किमी दूर सूर्य की ओर भेज रहा है. आंध्र प्रदेश के श्री हरीकोटा से लांच करने के बाद इसे अंतरिक्ष में L1 प्वाइंट पर पहुंचना है. वहां से यह सूर्य के आसपास होने वाली घटनाओं के बारे में बताएगा. L1 प्वाइंट से सूर्य की दूरी 14 करोड़ 85 लाख किमी है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैसे पहुंचेगा L1 प्वाइंट तक ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पहले फेज में आदित्य अल-1 को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV-C57) से लॉन्च किया जाएगा. इसरो इसे धरती की निचली कक्षा में स्थापित करेगा. जिसके बाद कुछ मैन्यूवर के माध्यम से आदित्य एल 1 के ऑर्बिट को बढ़ाया जाएगा. जिसके बाद एल-1 की तरफ बढ़ते हुए यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकल जाएगा. गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलने के बाद इसका क्रूज स्टेप शुरू होगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आदित्य एल-1 पर लगे 7 पेलोड&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;एल-1 के तरफ एक बड़ी हैलो ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा. इसरो के मुताबिक सूर्य के सबसे बाहरी परतों की जानकारी जुटाने के लिए आदित्य एल-1 पर 7 पेलोड लगे हुए हैं. जिसमें से 4 पेलोड सूर्य के आसपास की जानकारी जुटाएंगाे तो वहीं बाकी के तीन पेलोड एल-1 प्वाइंट के आसपास रिसर्च कर जानकारी जुटाएंगे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कितना समय लगेगा ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सूर्य धरती से लगभग 15 किलोमीटर दूर है. दोनों के बीच लैग्रेंज प्वाइंट ही वो स्थान है जहां से बिना किसी रुकावट के सीधे सूर्य को देखा जा सकता है. इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने बताया था कि इसे एल-1 प्वाइंट तक पहुंचने में 120 दिन यानी 4 महीने के वक्त लगेगा. इसरो के अनुसार इस मिशन में कुल 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>आदित्य एल-1 के लॉन्चिंग की उल्टी गिनती आज से होगी शुरू, रिहर्सल हुआ पूरा</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/national/countdown-for-the-launch-of-aditya-l-1-will-start-from-today-rehearsal-completed/</link><pubDate>September 1, 2023, 10:14 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-11-300x169.png</image><category>देश</category><excerpt>जयपुर. चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत सूर्य मिशन आदित्य-एल 1 लॉन्च करने के लिए तैयार है. इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने बताया कि आदित्य-एल 1 के लॉन्चिंग की उल्टी गिनती आज से शुरू होगी. उन्होंने कहा कि 2 सितंबर को सुबह 11:50 बजे आंध्रप्रदेश के श्...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर. &lt;/strong&gt;चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत सूर्य मिशन आदित्य-एल 1 लॉन्च करने के लिए तैयार है. इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने बताया कि आदित्य-एल 1 के लॉन्चिंग की उल्टी गिनती आज से शुरू होगी. उन्होंने कहा कि 2 सितंबर को सुबह 11:50 बजे आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;15 लाख किलोमीटर की दूरी करेगा तय&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जानकारी के अनुसार आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान को सौर कोरोना ( सूर्य की सबसे बाहरी परत) के दूरस्थ अवलोकन और एल-1 (सूर्य-पृथ्वी लैग्रेंजियन बिंदु) पर सौर हवा के यथास्थिति अवलोकन के लिए बनाया गया है. एल-1 पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर दूर है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;लॉन्चिंग की रिहर्सल हुई पूरी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो अध्यक्ष सोमनाथ ने गुरूवार को प्रेस कॉन्फेंस का आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि हम अभी प्रक्षेपण के लिए तैयार हो रहे हैं, रॉकेट- उपग्रह भी तैयार है. और लॉन्चिंग की रिहरसल पूरी हो चुकी है. उन्होंने कहा कि आदित्य-एल 1 स्वादेशी तकनीक से बनाया गया है. इसके आलावा रोवर के सवाल पर सोमनाथ ने कहा कि सबकुछ ठीक चल रहा है. अच्छी तरह से डाटा मिल रहा है. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि 14 दिन में हमारा मिशन सफलता के साथ पूर्ण हो जाएगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कब लॉन्च होगा भारत का पहना सूर्य मिशन&lt;/strong&gt; ?&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आदित्य-एल 1 शुक्रवार को लॉन्च किया जाएगा. इसको आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कहां देख सकेंगे रॉकेट लॉन्च&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने अपनी वेबसाइट पर आदित्य एल-1 के लॉन्च को श्रीहरिकोटा स्थित केंद्र से सीधा दर्शकों के दिखाने के लिए व्यू गैलरी की सीटें बुक करने का विकल्त दिया गया है. हालांकि इसके लिए सीमित सीटें ही थी जो कि रजिस्ट्रेशन होने पर ही भर गई. इतना ही नहीं इसरो की वेबसाइट isro.gov.in पर जाकर आदित्य एल-1 की ल़ंन्चिंग का सीधा प्रसारण देख सकते हैं और लाइव अपडेटस हासिल कर सकते हैं&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>चांद के बाद सूर्य पर तिरंगा लहराने की तैयारी, इस दिन लांच होगा सूर्यायान</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/world/preparation-to-hoist-tricolor-on-sun-after-moon-suryaan-will-be-launched-on-this-day/</link><pubDate>August 26, 2023, 11:11 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-41-1-300x169.png</image><category>दुनिया</category><excerpt>जयपुर: भारत अंतरिक्ष में दिन-प्रतिदिन नया इतिहास स्थापित कर रहा है। बीते 23 अगस्त को भारत ने चंद्रयान 3 मिशन में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैंडिंग करवाई थी। अब अंतरिक्ष में एक और इतिहास रचने जा र...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: भारत अंतरिक्ष में दिन-प्रतिदिन नया इतिहास स्थापित कर रहा है। बीते 23 अगस्त को भारत ने चंद्रयान 3 मिशन में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैंडिंग करवाई थी। अब अंतरिक्ष में एक और इतिहास रचने जा रहा है भारत, 2 सितम्बर को इसरो आदित्य-एल 1 मिशन को लांच कर सकता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो के वैज्ञानिक ने दी जानकारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) अहमदाबाद के निदेशक नीलेश एम. देसाई ने मिडिया से बातचीत करते हुए बताया कि सूर्य का अध्ययन करने के लिए, हमने आदित्य-एल1 मिशन की योजना बनाई है और यह तैयार है। संभावना है कि इसे 2 सितंबर को लॉन्च किया जाएगा&amp;#8221; ।&lt;/p&gt;



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&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;en&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;#WATCH&lt;/a&gt; |  &amp;quot;To study Sun, we have planned Aditya-L1 mission and it is ready&amp;#8230;there is a possibility that it will be launched on 2nd September&amp;quot;, says Nilesh M. Desai, the Director of Space Applications Centre (SAC), Ahmedabad &lt;a href=&quot;https://t.co/Hkirjn0AZn&quot;&gt;pic.twitter.com/Hkirjn0AZn&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/ANI/status/1695299227658989789?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;August 26, 2023&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
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</content></item><item><title>Chandrayaan 3 Successful Landing: भारत ने रचा इतिहास, चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला बना पहला देश</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/world/chandrayaan-3-successful-landing-india-created-history-became-the-first-country-to-reach-the-south-pole-of-the-moon/</link><pubDate>August 23, 2023, 12:33 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-14-3-300x169.png</image><category>दुनिया</category><excerpt>जयपुर: भारतीय अनुसंधान अंतरिक्ष संगठन ने अंतरिक्ष में इतिहास रच दिया है। भारत का सबसे महत्वपूर्ण मिशन चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर सफलता पूर्वक लैंडिंग करने में कामयाब रहा। इसी के साथ चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत विश्व में पहला...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: भारतीय अनुसंधान अंतरिक्ष संगठन ने अंतरिक्ष में इतिहास रच दिया है। भारत का सबसे महत्वपूर्ण मिशन चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की सतह पर सफलता पूर्वक लैंडिंग करने में कामयाब रहा। इसी के साथ चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला भारत विश्व में पहला देश बन गया है। साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है जिसने चांद तक का सफर किया। इसके पहले रूस, अमेरिका, और चीन चांद पर पहुंचने में सफलता हासिल की थी। अब भारत भी इन देशों के साथ खड़ा हो गया है और विश्व का चौथा देश बन गया जिसने चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की।&lt;/p&gt;



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&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;en&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;&lt;a href=&quot;https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;#WATCH&lt;/a&gt; | Indian Space Research Organisation’s (ISRO) third lunar mission Chandrayaan-3 makes soft-landing on the moon &lt;a href=&quot;https://t.co/vf4CUPYrsE&quot;&gt;pic.twitter.com/vf4CUPYrsE&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ANI (@ANI) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/ANI/status/1694327784414519458?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;August 23, 2023&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
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&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;14 दिन तक चांद की सतह पर रहेगा लैंडर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद अब लैंडर विक्रम से रोवर प्रज्ञान बाहर आएगा। उसके बाद दोनों मिलकर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर परीक्षण करेंगे और पता करेंगे कि चांद के इस ध्रुव में पानी है या नहीं साथ ही खनिज की मौजूदगी का भी पता लगाएंगे। लैंडर विक्रम और रोवर चांद की सतह पर 14 दिनों तक काम करेंगे।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan 3 Landing: 23 अगस्त इतिहास के उन पन्नों में है दर्ज, आज के दिन चांद से पृथ्वी की पहली तस्वीर सामने आई थी</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/world/chandrayaan-3-landing-august-23-is-recorded-in-those-pages-of-history-on-this-day-the-first-picture-of-earth-from-the-moon-was-revealed/</link><pubDate>August 23, 2023, 11:15 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-12-2-300x169.png</image><category>दुनिया</category><excerpt>Chandrayaan 3 Landing: चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर आज शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच देगा। इसके साथ ही एक बार फिर 23 अगस्त की तारीख इतिहास के उन स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो जाएगी, जो आने वाले भविष्य को उस स्वर्णिम काल ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chandrayaan 3 Landing&lt;/strong&gt;: चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर आज शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच देगा। इसके साथ ही एक बार फिर 23 अगस्त की तारीख इतिहास के उन स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो जाएगी, जो आने वाले भविष्य को उस स्वर्णिम काल की याद दिलाएगी जब चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार किसी देश ने कदम रखा है।&lt;br&gt;क्या आपको पता है चन्द्रमा से जुड़ा खास इतिहास, जब लोगो ने चंदा मामा से आई पृथ्वी की तस्वीर को पहली बार देखा था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;57 साल पहले लोगों ने देखी चांद की पहली तस्वीर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल मून मिशन के क्षेत्र में देखा जाए तो 23 अगस्त का अपना विशेष महत्व है, आपको जानकर हैरानी होगी कि 23 अगस्त ही वो तारीख है जब 57 साल पहले 1966 में नासा के अपने मून मिशन से लुनार ऑर्बिटर वन ने चांद से पहली बार धरती की तस्वीर ली थी। हालांकि ये तस्वीर आंशिक तौर पर धुंधली और ब्लैक एंड व्हाइट थी, लेकिन मून मिशन के इतिहास में वह ऐसी सफलता थी। जिसने भविष्य के मून मिशनों की राह आसान कर दी।&lt;/p&gt;



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&lt;iframe loading=&quot;lazy&quot; title=&quot;Chandrayaan 3 Landing: 23 अगस्त इतिहास के उन पन्नों में है दर्ज । Chandrayaan 3।ISRO। NASA।&quot; width=&quot;500&quot; height=&quot;281&quot; src=&quot;https://www.youtube.com/embed/owaPjfu3b9g?feature=oembed&quot; frameborder=&quot;0&quot; allow=&quot;accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share&quot; referrerpolicy=&quot;strict-origin-when-cross-origin&quot; allowfullscreen&gt;&lt;/iframe&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या था नासा का लुनार ऑर्बिटर-1 मिशन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;लुनार ऑर्बिटर-1 नासा का वो पहला मून मिशन था जो सफलता पूर्वक चंद्रमा की ऑर्बिट तक पहुंचने में सफल रहा। नासा का यह मिशन 10 अगस्त 1966 को लांच हुआ था। जो एक सर्वेयर मिशन था। इसका उद्देश्य नासा के भविष्य में होने वाले अपोलों मिशनों के लिए सुरक्षित लैंडिंग स्थल तलाशना था। लुनार ऑर्बिटर-1 को इस तरह डिजाइन किया गया था, जिससे ये चांद की ज्यादा से ज्यादा तस्वीर ले सके।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;लुनार ऑर्बिटर-1 ने ली थी 187 तस्वीरें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;लुनार ऑर्बिटर -1 चंद्रमा की सतह से 58 किमी दूर तक गया था। इसमें अपना फोटोग्राफिक मिशन 18 से 29 अगस्त 1966 तक किया था और चांद के 50 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को कवर करते हुए हाई रिजॉल्यूशन की 42 और मध्य रिजॉल्यूशन की 187 तस्वीरें ली थीं। इन्हीं में दो तस्वीरें धरती की भी थीं जो चांद की ऑर्बिट से पहली बार ली गईं थीं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नासा से जारी की थी तस्वीर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चांद की ऑर्बिट से लुनार ऑर्बिटर-1 ने जो तस्वीर ली थी जिसे नासा न 25 अगस्त को जारी की थी। यह तस्वीर ऑर्बिटर-1 ने 23 अगस्त को ली थी, 24 अगस्त को यह नासा के स्पेन स्थित ग्राउंड स्टेशन पहुंची थी। 25 अगस्त को नासा ने मिशन की सफलता का ऐलान करते हुए सबसे पहले इसी तस्वीर को जारी किया था जो 26 अगस्त 1966 को पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan 3 Landing: चंद्रयान-3 को लेकर पूरी दुनिया हुई भारत की मुरीद, पाकिस्तानियों ने कहा- अल्लाह करे वो….</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/world/chandrayaan-3-landing-the-whole-world-became-a-follower-of-india-regarding-chandrayaan-3-pakistanis-said-may-allah-do-that/</link><pubDate>August 23, 2023, 6:06 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-10-4-300x169.png</image><category>दुनिया</category><excerpt>Chandyaan-3: रूस के लूना-25 मून मिशन फेल हो जाने के बाद अब सारी दुनिया की निगाहें भारत के चंद्रयान-3 की लैंडिंग पर टिकी हुई है। आज चंद्रयान-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव सतह पर लैंड करेगा। फिलहाल चंद्रयान-3 का लैंडर चांद की सतह से 25 किमी की दूरी पर ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chandyaan-3: &lt;/strong&gt;रूस के लूना-25 मून मिशन फेल हो जाने के बाद अब सारी दुनिया की निगाहें भारत के चंद्रयान-3 की लैंडिंग पर टिकी हुई है। आज चंद्रयान-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव सतह पर लैंड करेगा। फिलहाल चंद्रयान-3 का लैंडर चांद की सतह से 25 किमी की दूरी पर है, और आज शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। वहीं भारत के इस खास मिशन की पूरी दुनिया मुरीद हुई है। इसी बीच पाकिस्तानी यूट्यूबर शोएब चौधरी ने वहां की आवाम के बीच जाकर उनसे चंद्रयान-3 की लैंडिंग को लेकर प्रतिक्रिया जाननी चाही।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पाकिस्तानी आवाम ने मांगी दुआएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पाकिस्तानी आवाम ने भारत के चंद्रयान-3 की लैंडिंग को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अल्लाह करे भारत का चंद्रयान-3 सही सलामत लैंड कर जाए। उन्हें इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट में सफलता हासिल हो। वहीं एक दूसरे पाकिस्तानी शख्स ने कहा कि इस वक्त सारी दुनिया टेक्नोलॉजी के फील्ड में आगे बढ़ रही है। वहीं हम सिर्फ देख सकते है, हम कुछ नहीं कर सकते है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पाकिस्तानी नेताओं के पास विजन नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पाकिस्तानी शख्स अपने ही देश की आलोचना करते नजर आया, कहा- हम सिर्फ दूसरे देशों की असफलता पर खुशियां मनाते हैं और खुद कुछ भी नहीं करते हैं। दूसरे देश के लोग हम पर हंसते है। उन्हें पता है कि हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं। रूस के मून मिशन के फेल हो जाने पर पाकिस्तानी शख्स ने दुख जाहिर किया। वहीं भारत के चंद्रयान-3 पर कामयाबी की इच्छा जाहिर की। एक दूसरे शख्स ने कहा- हमारे देश के नेता का किसी भी तरह की विजन नहीं है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>चंद्रयान-3 पर नहीं होगा लूना-25 के क्रैश होने का असर- पूर्व ISRO चीफ माधवन नायर</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/national/chandrayaan-3-will-not-be-affected-by-the-crash-of-luna-25-former-isro-chief-madhavan-nair/</link><pubDate>August 22, 2023, 2:17 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-1-8-300x169.png</image><category>देश</category><excerpt>जयपुर। इसरो के पूर्व अध्यक्ष माधवन नायर ने जानकारी देते हुए इस बात को खारिज किया कि रूस चद्रंमा पर पहुंचने की दौड़ में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि लूना-25 का दुघर्टनाग्रस्त होना दुर्भाग्यपूर्ण है. लूना के क्रैश का चंद्रयान-3 पर प्रभाव नहीं रूस क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; इसरो के पूर्व अध्यक्ष माधवन नायर ने जानकारी देते हुए इस बात को खारिज किया कि रूस चद्रंमा पर पहुंचने की दौड़ में शामिल हैं. उन्होंने कहा कि लूना-25 का दुघर्टनाग्रस्त होना दुर्भाग्यपूर्ण है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;लूना के क्रैश का चंद्रयान-3 पर प्रभाव नहीं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोसमोस ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि अनियंत्रित कक्षा में प्रवेश करने के बाद लूना-25 यान चंद्रमा पर दुघर्टनाग्रस्त हो गया. रूस के चंद्र मिशन की नाकामी के बाद भारत के शीर्ष वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 पर लूना-25 के क्रैश होने का कोई असर नहीं होने की बात कही.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पूर्व ISRO चीफ माधवन नायर ने दी जानकारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पूर्व ISRO चीफ माधवन नायर ने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन पूरी तरह से आत्मनिर्भर है और हम रूस पर निर्भर नहीं हैं. अभी रूस के साथ भारत का अंतरिक्ष सहयोग मानव को अंतरिक्ष में भेजने के गगनयान अंतरिक्ष अभियान के लिए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियोम को प्रशिक्षण देने तक सीमित है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सिवन चंद्रयान-2 मिशन के रहें प्रमुख&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सिवन ने 2019 में चंद्रयान-2 मिशन को भेजे जाने के समय इसरो के प्रमुख रहे हैं. जब उनसे एक सवाल में पूछा गया कि रूसी मिशन की नाकामी के बाद क्या इसरो साफ्ट लैंडिग से पहले अतिरिक्त दबाव में हैं, तो इस पर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि चंद्रयान-3 मिशन योजना के मुताबिक आगे बढ़ रहा है. यह (साफ्ट लैंडिग) योजना के अनुसार होगा। उन्होंने कहा कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार चंद्रयान-2 के उलट यह सतह पर उतरने में सफल रहेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;रूस चंद्रमा पर पहुंचने की दौड़ में शामिल नहीं- नायर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पूर्व इसरो चीफ माधवन नायर ने इस चर्चा को खारिज कर दिया कि भारत और रूस चंद्रमा पर पहुंचने की दौड़ में शामिल हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan-3: चांद के और नजदीक पहुंचा चंद्रयान, शुरू हुई डीबूस्टिंग की अहम प्रकिया, विक्रम लैंडर ने भेजी खूबसूरत तस्वीर</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/chandrayaan-3-chandrayaan-came-out-from-the-moon-and-opened-important-link-of-debossing-started-vikram-lander-took-beautiful-pictures/</link><pubDate>August 18, 2023, 12:21 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-9-4-300x169.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर: भारत का चंद्रयान मिशन अभी तक तय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रहा है। गुरुवार 17 अगस्त को चंद्रयान-3 मिशन से प्रोपल्शन मॉड्यूल अलग हुआ था। अब प्रोपल्शन मॉड्यूल के अलग होने के बाद आज चंद्रयान-3 मिशन के विक्रम लैंडर ने चांद की निचली कक्षा मे...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: भारत का चंद्रयान मिशन अभी तक तय प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रहा है। गुरुवार 17 अगस्त को चंद्रयान-3 मिशन से प्रोपल्शन मॉड्यूल अलग हुआ था। अब प्रोपल्शन मॉड्यूल के अलग होने के बाद आज चंद्रयान-3 मिशन के विक्रम लैंडर ने चांद की निचली कक्षा में प्रवेश किया, जहां से चांद की सतह की दूरी कुछ ही किलोमीटर दूर रह जाएगी। इस बीच, इसरो ने बताया कि लैंडर मॉड्यूल (एलएम) सामान्य तरीके से काम कर रहा है। लैंडर मॉड्यूल ने सफलता पूर्वक डीबूस्टिंग ऑपरेशन किया। इसके बाद अब इसकी कक्षा 113 किमी x 157 किमी तक कम हो गई है। दूसरा डिबॉस्टिंग ऑपरेशन 20 अगस्त 2023 को लगभग दो बजे के लिए किया जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;en&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;Chandrayaan-3 Mission:&lt;br&gt;The Lander Module (LM) health is normal.&lt;br&gt;&lt;br&gt;LM successfully underwent a deboosting operation that reduced its orbit to 113 km x 157 km.&lt;br&gt;&lt;br&gt;The second deboosting operation is scheduled for August 20, 2023, around 0200 Hrs. IST &lt;a href=&quot;https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan_3?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;#Chandrayaan_3&lt;/a&gt;&lt;a href=&quot;https://twitter.com/hashtag/Ch3?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;#Ch3&lt;/a&gt; &lt;a href=&quot;https://t.co/0PVxV8Gw5z&quot;&gt;pic.twitter.com/0PVxV8Gw5z&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ISRO (@isro) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/isro/status/1692484515963588645?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;August 18, 2023&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;डिबूस्टिंग की प्रक्रिया हुई शुरू&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि लैंडर मॉड्यूल मनूवर आज शाम करीब चार बजे किया गया। इस प्रक्रिया के तहत लैंडर विक्रम की गति को धीमा करके उसे चांद की कक्षा में नीचे की तरफ उतारा गया। ये प्रक्रिया 20 अगस्त को भी होगी, जिसके बाद विक्रम लैंडर की चांद की सतह से दूरी महज 30 किलोमीटर रह जाएगी। इसके बाद 23 अगस्त को शाम करीब 5.47 बजे विक्रम लैंडर की चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग कराई जाएगी। विक्रम लैंडर की चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कराते ही इसरो इतिहास रच देगा और चांद की सतह पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग कराने वाले चुनिंदा देशों में भारत भी शामिल हो जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;लैंडर विक्रम ने भेजी तस्वीर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने चांद की सतह का नया फोटो जारी किया है। इसरो की तरफ से बताया गया कि लैंडर विक्रम ने चांद के नजदीकी सतह की तस्वीरें भेजी है।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;en&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;Chandrayaan-3 Mission:&lt;br&gt;&lt;br&gt;🌖 as captured by the &lt;br&gt;Lander Position Detection Camera (LPDC)&lt;br&gt;on August 15, 2023&lt;a href=&quot;https://twitter.com/hashtag/Chandrayaan_3?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;#Chandrayaan_3&lt;/a&gt;&lt;a href=&quot;https://twitter.com/hashtag/Ch3?src=hash&amp;amp;ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;#Ch3&lt;/a&gt; &lt;a href=&quot;https://t.co/nGgayU1QUS&quot;&gt;pic.twitter.com/nGgayU1QUS&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ISRO (@isro) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/isro/status/1692474762369626329?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;August 18, 2023&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आखिर 23 अगस्त को ही क्यों होगी लैंडिग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि लैंडर और रोवर दोनों ही लैंडिंग के लिए जरूरी ऊर्जा, सौर ऊर्जा से हासिल करेंगे। चूंकि अभी चांद पर रात है और 23 तारीख को सूर्योदय होगा। यही वजह है कि चांद की सतह पर लैंडिंग की तारीख 23 अगस्त रखी गई है। चंद्रयान-3 मिशन के तहत इसका प्रोपल्शन महीनों तक चांद की कक्षा में रहकर चांद के रेडिएशन्स का अध्ययन करेगा। वहीं लैंडर और रोवर चांद की सतह पर उतरकर 14 दिनों तक पानी की खोज सहित अन्य प्रयोग करेंगे। 14 जुलाई 2023 को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से चंद्रयान-3 मिशन को लॉन्च किया गया था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan-3: इतिहास रचने के करीब भारत, चांद के चौथी कक्षा में हुआ दाखिल, चंद्रयान-3 के लिए ये दिन बेहद अहम</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/chandrayaan-3-india-close-to-creating-history-entered-the-fourth-orbit-of-the-moon-this-day-is-very-important-for-chandrayaan-3/</link><pubDate>August 14, 2023, 11:48 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-6-4-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर: अंतरिक्ष में भारत एक और इतिहास रचने में सिर्फ चंद कदम दूर है। इसरो का चंद्रयान-3 मिशन मंजिल के और करीब पहुंच गया है। इसरो ने जानकरी दी कि चंद्रयान-3 ने सफलतापूर्वक चांद की कक्षा के एक और वृत्ताकार चरण को पूरा कर लिया है और अब वह चांद के ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: अंतरिक्ष में भारत एक और इतिहास रचने में सिर्फ चंद कदम दूर है। इसरो का चंद्रयान-3 मिशन मंजिल के और करीब पहुंच गया है। इसरो ने जानकरी दी कि चंद्रयान-3 ने सफलतापूर्वक चांद की कक्षा के एक और वृत्ताकार चरण को पूरा कर लिया है और अब वह चांद के और करीब वाली कक्षा में पहुंच गया है। मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चंद्रयान-3 अब चांद के चौथे ऑर्बिट में प्रवेश कर गया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चांद के और करीब पहुंचा चंद्रयान-3&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि 14 अगस्त की सुबह करीब पौने बारह बजे चंद्रयान-3 के थ्रस्टर्स को चालू किया गया था। जिसकी मदद से चंद्रयान-3 ने सफलता पूर्वक कक्षा बदली। बीते 5 अगस्त को चंद्रयान-3 ने पहली बार चांद की कक्षा में प्रवेश किया था और उसके बाद तीन बार कक्षा में बदलाव कर चांद के करीब आ चूका है। चंद्रयान-3 1900 किमी प्रति सेकेंड की रफ्तार से चांद से 150 किमी दूर कक्षा में यात्रा का कर रहा है। चंद्रयान का ऑर्बिट सर्कुलाइजेशन चरण चल रहा है और चंद्रयान-3 अब अंडाकार कक्षा से गोलाकार कक्षा में आना शुरू हो गया है।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;en&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;Chandrayaan-3 Mission: &lt;br&gt;Orbit circularisation phase commences&lt;br&gt;&lt;br&gt;Precise maneuvre performed today has achieved a near-circular orbit of 150 km x  177 km &lt;br&gt;&lt;br&gt;The next operation is planned for August 16, 2023, around 0830 Hrs. IST &lt;a href=&quot;https://t.co/LlU6oCcOOb&quot;&gt;pic.twitter.com/LlU6oCcOOb&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; ISRO (@isro) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/isro/status/1690978432321269760?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;August 14, 2023&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;17 अगस्त की तारीख अहम&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;16 अगस्त को चंद्रयान-3 एक और कक्षा कम करके चांद के बेहद करीब आएगा। वहीं 17 अगस्त का दिन इस मिशन के लिए अहम होगा क्योंकि इस दिन चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल को लैंडर से अलग किया जाएगा। इसके बाद 23 या 24 अगस्त को चंद्रयान-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह पर लैंड करेगा। जिस पर पूरी दुनिया की निगाह होगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;14 दिन तक प्रयोग करेगा चांद चंद्रयान-3&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चंद्रयान-3 मिशन में लैंडर, रोवर और प्रोपल्शन मॉड्यूल शामिल हैं। लैंडर और रोवर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेंगे और 14 दिनों तक प्रयोग करेंगे। वहीं प्रोपल्शन मॉड्यूल चांद की कक्षा में ही रहकर चांद की सतह से आने वाले रेडिएशन का अध्ययन करेगा। इसके साथ ही इस मिशन के जरिए इसरो चांद की सतह पर पानी का पता लगाएगा और यह भी जानेगा कि चांद की सतह पर भूकंप कैसे आते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के पितामह की जयंती आज, सीएम गहलोत ने किया नमन</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/today-the-birth-anniversary-of-the-grandfather-of-indian-space-research-cm-gehlot-paid-tribute/</link><pubDate>August 12, 2023, 10:11 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-7-3-300x169.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर: विश्व के महान वैज्ञानिकों में शुमार एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के जनक डॉ. विक्रम साराभाई की आज जयंती है। अंतरिक्ष में इनके अभूतपूर्व योगदान के लिए याद किया जाता है। इनकी दूरदर्शी सोच और कठिन परिश्रम की वजह से ही आज भारतीय अंतरिक्ष अनुस...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: विश्व के महान वैज्ञानिकों में शुमार एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के जनक डॉ. विक्रम साराभाई की आज जयंती है। अंतरिक्ष में इनके अभूतपूर्व योगदान के लिए याद किया जाता है। इनकी दूरदर्शी सोच और कठिन परिश्रम की वजह से ही आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) दिन-प्रतिदिन इतिहास रच रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सीएम गहलोत ने किया नमन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो के जनक डॉ. विक्रम साराभाई की जयंती पर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने याद करते हुए लिखा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के पितामह महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई को जयंती पर कोटिशः नमन। अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आपके अमूल्य योगदान का देश ऋणी है।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;hi&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के पितामह महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई को जयंती पर कोटिशः नमन। &lt;br&gt;&lt;br&gt;अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आपके अमूल्य योगदान का देश ऋणी है। &lt;a href=&quot;https://t.co/eOTkJkGEpa&quot;&gt;pic.twitter.com/eOTkJkGEpa&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/ashokgehlot51/status/1690209749416243200?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;August 12, 2023&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कौन है डॉ. विक्रम साराभाई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;डॉ. विक्रम साराभाई का जन्म गुजरात के अहमदाबाद में 12 अगस्त 1919 को हुआ था। इनका पूरा नाम डॉ. विक्रम अंबालाल साराभाई है। विक्रम अंबालाल साराभाई भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे। इन्होंने 86 वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं 40 संस्थान खोले। इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन 1966 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। डॉ. विक्रम साराभाई के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता। यह जगप्रसिद्ध है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया। लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अन्य क्षेत्रों जैसे वस्त्र, भेषज, आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो के स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना उनकी महान उपलब्धियों में एक थी। रूसी स्पुतनिक के प्रमोचन के बाद उन्होंने भारत जैसे विकासशील देश के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व के बारे में सरकार को राज़ी किया। डॉ. साराभाई ने अपने उद्धरण में अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व पर ज़ोर दिया. &amp;#8220;ऐसे कुछ लोग हैं जो विकासशील राष्ट्रों में अंतरिक्ष गतिविधियों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हैं। हमारे सामने उद्देश्य की कोई अस्पष्टता नहीं है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>चंद्रयान-3 मिशन में राजस्थान की इस बेटी का अहम योगदान</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/important-contribution-of-this-daughter-of-rajasthan-in-chandrayaan-3-mission/</link><pubDate>July 21, 2023, 4:18 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/download-59-300x169.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। चंद्रयान-3 मिशन के सफल होने के बाद देश का हर नागरिक गर्व महसूस कर रहा है. इसी मिशन में राजस्थान की बेटी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. राजस्थान की इस बेटी का नाम सुनीता खोकर है. चंद्रयान-3 में राजस्थान की बेटी का योगदान चंद्रयान-3 मिशन ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर। &lt;/strong&gt;चंद्रयान-3 मिशन के सफल होने के बाद देश का हर नागरिक गर्व महसूस कर रहा है. इसी मिशन में राजस्थान की बेटी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है. राजस्थान की इस बेटी का नाम सुनीता खोकर है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;चंद्रयान-3 में राजस्थान की बेटी का योगदान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चंद्रयान-3 मिशन की सफलता में राजस्थान की सुनीता खोकर का अहम योगदान रहा. सुनीता नागैर के डीडवाना तहसील के डाकीपूरा गांव की बेटी है. सुनीता का ससुराल नागौर जिले के डीडवाना तहसील के मिडीयावट गांव में है. सुनीता ने किसान के परिवार में जन्म लिया, वहीं सुनीता की प्रारंभिक शिक्षा प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सुनीता खोकर ने दी जानकारी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनीता खोकर ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी कामयाबी का श्रेय परिजनों और ससुराल को जाता है. सुनीता ने बेटे और बेटियों में मतभेद करने वालों को एक सन्देश देते हुए कहा कि प्रतिभा बेटे और बेटी में भेद करने से दब सकती है, लेकिन प्रतिभा को पहचान कर उसे आगे बढ़ाना चाहिए.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ग्रामीण छात्र-छात्राओं को भी दिया सन्देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;सुनीता ने ग्रामीण छात्र-छात्राओं को सन्देश देते हुए कहा कि वे अभाव में भी संघर्ष करके आगे बढ़ सकती हैं. अच्छी स्कूल और अच्छे संस्थान में शिक्षा लेने पर बच्चों को कम संघर्ष करना पड़ता है. लेकिन ग्रामीण परिवेश के बच्चों को उस लेवल पर जाने के लिए 4 गुना मेहनत करनी होती है. उसके बाद कामयाबी की सीढ़ी प्राप्त कर सकते हैं. सुनीता ने आगे कहा, मैं बिल्कुल ही साधारण परिवार से थी. उनके जुनून और परिजनों के सहयोग की वजह से वे आज इस मुकाम पर पहुंची हैं . उन्होंने कहा कि वे आगे भी देश के लिए काम करती रहेगी और देश का नाम रोशन करती रहेंगी.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan 3: अरबों सालों से अंधेरे में डूबे दक्षिणी ध्रुव का खुलेगा राज, भारत बनेगा विश्व का पहला देश</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/chandrayaan-3-the-secret-of-south-pole-immersed-in-darkness-for-billions-of-years-will-be-revealed-india-will-become-the-first-country-in-the-world/</link><pubDate>July 14, 2023, 11:10 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/download-11-300x169.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) ने अंतरिक्ष में लंभी छलांग लगाने के लिए अपने तीसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान-3 की लांच कर दिया है। एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए शुक्रवार दोपहर 02:35 बजे इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा बैंगलोर से चंद्रमा के ल...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) ने अंतरिक्ष में लंभी छलांग लगाने के लिए अपने तीसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान-3 की लांच कर दिया है। एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए शुक्रवार दोपहर 02:35 बजे इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा बैंगलोर से चंद्रमा के लिए प्रक्षेपित किया गया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत बनेगा पहला देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चंद्रयान-3 पृथ्वी से 384,400 किलोमीटर सफर तय करके 41 से 42 दिनों बाद करीब 23-24 अगस्त को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चंद्रयान-3 अगर सफलता पूर्वक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करता है तो भारत विश्व का पहला देश बन जाएगा, जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;अब तक तीन देश ही चंद्रमा पर उतरने में सफल रहे हैं। अगर चंद्रयान-3, चंद्रमा की दक्षिणी ध्रुव पर सफलता पूर्वक लैंड करता है, तो इन तीन देशों की लिस्ट में भारत का नाम भी शामिल जाएगा और भारत विश्व का पहला देश बन जाएगा जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;खुलेगा दक्षिणी ध्रुव का राज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो के इस चंद्रयान-3 मिशन अगर सफल रहता है तो आने वालों दिनों में अरबों सालों से अंधेरे में डूबी चांद की दक्षिणी ध्रुव का राज खुलेगा। जैसा पृथ्वी का दक्षिणी ध्रुव है, वैसा ही चांद का भी है। पृथ्वी का दक्षिणी ध्रुव अंटार्कटिका में है। पृथ्वी का सबसे ठंडा इलाका। ऐसा ही चांद का दक्षिणी ध्रुव है सबसे ठंडा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;पहले चंद्रयान-2 और अब चंद्रयान-3 के जरिए चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने की कोशिश है। ऐसा अंदाजा है कि हमेशा छाया में रहने और तापमान कम होने की वजह से यहां पानी और खनिज हो सकते हैं। इसकी पुष्टि पहले हुए मून मिशन में भी हो चुकी है। ऐसे में चंद्रयान-3 में मौजूद लैंडर और रोवर के पेलोड चांद की सतह का अध्ययन करेंगे। ये चांद की सतह पर मौजूद पानी और खनिजों का पता लगाएंगे। सिर्फ यही नहीं, इनका काम ये भी पता करना है कि चांद पर भूकंप आते हैं या नहीं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan 3: चांद के सफर पर निकला भारत, अगस्त में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/chandrayaan-3-india-set-out-on-a-journey-to-the-moon-will-land-on-this-south-pole-of-the-moon-in-august/</link><pubDate>July 14, 2023, 9:59 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/download-10-300x169.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग हो गई है। एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए शुक्रवार दोपहर 02:35 बजे इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा बैंगलूर से चंद्रमा के लिए प्रक्षेपित किया गया। इसरो की ओर से कहा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग हो गई है। एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए शुक्रवार दोपहर 02:35 बजे इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा बैंगलूर से चंद्रमा के लिए प्रक्षेपित किया गया। इसरो की ओर से कहा गया कि चंद्रयान-3 मिशन के जरिए अपने चंद्रमा मॉड्यूल द्वारा सतह पर सॉफ्ट-लैंडिंग करके और घूमकर अंतरिक्ष एजेंसी नई सीमाओं को पार करेगी। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने 23 या 24 अगस्त तक चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग होने की संभावना है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अगस्त में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर करेगा लैंड&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चंद्रयान-3 शुक्रवार 14 जुलाई को दोपहर 02:35 बजे लॉन्च किया गया। पृथ्वी से चंद्रमा की दुरी 384,400 किलोमीटर है। यानि चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर पहुंचने की संभावित तिथि 23-24 अगस्त है। यानि चंद्रयान-3 को चांद की यात्रा पूरी करने में लगभग 40-41 दिनों का समय लगेगा। इस मिशन का पहला टारगेट चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग है। ये मिशन का सबसे जटिल हिस्सा भी है। दूसरा टारगेट रोवर का चंद्रमा की सतह पर चहलकदमी करना और तीसरा लक्ष्य रोवर से जुटाई जानकारी के आधार पर चंद्रमा के रहस्यों से परदा उठाना है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पृथ्वी से चांद की कक्षा का सफर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;क्रॉयोजनिक इंजन चंद्रयान-3 को पृथ्वी के बाहरी ऑर्बिट में स्थापित करेगा। इसके बाद इसके सौर पैनर खुलेंगे और चंद्रयान पृथ्वी के चक्कर लगाना शुरू कर देगा। धीरे-धीरे चांद अपनी कक्षा को बढ़ाएगा और चांद की कक्षा में प्रवेश करेगा। चंद्रमा के 100 किमी की कक्षा में आने के बाद लैंडर को प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग किया जाएगा और इसके बाद लैंडर की चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग होगी।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;लैंडर के सफलतापूर्वक लैंड होने के बाद रोवर जिसमें 6 पहिए लगे हैं, इसमें से बाहर आएगा और चंद्रमा की सतह पर चलेगा। यहां ये जानना जरूरी है कि इसके पूर्व में भेजे गए मून मिशन चंद्रयान-2 के लैंडर ने चंद्रमा की सतह से 2 किमी पहले ही अपना संपर्क खो दिया था।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>