<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
    xmlns:ag="http://purl.org/rss/1.0/modules/aggregation/"  
    xmlns:annotate="http://purl.org/rss/1.0/modules/annotate/" 
    xmlns:app="http://www.w3.org/2007/app"
    xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
    xmlns:company="http://purl.org/rss/1.0/modules/company"
    xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
    xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
    xmlns:dcterms="http://purl.org/dc/terms/"
    xmlns:email="http://purl.org/rss/1.0/modules/email/"
    xmlns:ev="http://purl.org/rss/1.0/modules/event/"
    xmlns:rdf="http://www.w3.org/1999/02/22-rdf-syntax-ns#"
    xmlns:rdfs="http://www.w3.org/2000/01/rdf-schema#"
    xmlns:ref="http://purl.org/rss/1.0/modules/reference/"
    xmlns:taxo="http://purl.org/rss/1.0/modules/taxonomy/"
    xmlns:atom10="http://www.w3.org/2005/Atom">
    <channel>
       <title>Today LIfestyle News | Latest LIfestyle News | Breaking LIfestyle News in English | Latest LIfestyle News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का LIfestyle समाचार:Today LIfestyle News ,Latest LIfestyle News,Aaj Ka Samachar ,LIfestyle समाचार ,Breaking LIfestyle News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
        <link>https://www.inkhabar.com/tag/lifestyle</link>
        <lastBuildDate>May 31, 2026, 3:11 pm</lastBuildDate>
        <copyright>Inkhabar</copyright>
        <generator>Inkhabar</generator>
        <language>hi</language>
        <image>
            <url>https://www.inkhabar.com/wp-content/themes/inkhabar/images/inkhbar-logo.png</url>
            <title>Inkhabar</title>
            <link>https://www.inkhabar.com/</link>
            <description>Feed provided by Inkhabar.</description>
        </image><item><title>खेलने-कूदने के उम्र में कविता से प्यार, इंग्लैंड से हायर एजुकेशन कुछ इस तरह रहा सरोजिनी नायडू का जीवन</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/lifestyle/love-of-poetry-at-the-age-of-playing-higher-education-from-england-this-is-how-sarojini-naidus-life-was/</link><pubDate>February 13, 2025, 7:25 am</pubDate><image></image><category>लाइफस्टाइल</category><excerpt>जयपुर: आज भारत कोकिला यानी &amp;#8216;भारत कोकिला&amp;#8217; सरोजिनी नायडू की जयंती है, जिन्होंने जीवन भर देश की महिलाओं के अधिकारों के लिए कड़ा संघर्ष किया। आज राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. वह देश की पहली महिला राज्यपाल और कांग्रेस की कमान संभाल...</excerpt><content>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर:&lt;/strong&gt; आज भारत कोकिला यानी &amp;#8216;भारत कोकिला&amp;#8217; सरोजिनी नायडू की जयंती है, जिन्होंने जीवन भर देश की महिलाओं के अधिकारों के लिए कड़ा संघर्ष किया। आज राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. वह देश की पहली महिला राज्यपाल और कांग्रेस की कमान संभालने वाली पहली महिला थीं। भारत की आजादी में भी उनका अहम योगदान रहा है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;
&lt;strong&gt;पिता वैज्ञानिक तो माता लेखिका&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;आज देश भर में &amp;#8216;नाइटिंगेल ऑफ इंडिया&amp;#8217; सरोजिनी नायडू की जयंती मनाई जा रही है। बता दें कि नायडू का जन्म 13 फरवरी, 1879 को हैदराबाद में एक बंगाली परिवार को हुआ था। उनके पिता जी अघोरनाथ चट्टोपाध्याय पेशे से वैज्ञानिक थे और उनकी माता जी सुंदरी देवी बांग्ला कविताएं लिखती थीं। सरोजिनी के भाई हरिन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय भी कवि थे। वह 8 भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं। घर में पढ़ने-लिखने के माहौल का उन पर बहुत प्रभाव पड़ा और उन्होंने 12 साल की उम्र में कविताएं लिखना शुरू कर दिया।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;19 साल की उम्र में शादी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;बता दें कि सरोजनी नायडू की शादी महज 19 साल की उम्र में हो गई थी। गोविंद राजालू नायडू से मुलाकात हुई. 1914 में उनकी पहली बार महात्मा गांधी से मुलाकात हुई। यहीं से वह देश के स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गईं और भारत आने से पहले उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी के साथ भी काम किया। उन्हें 1925 में कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया। वो पहली भारतीय महिला थीं, जो कांग्रेस की पूरी कमान संभाल रही थीं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;भारत की पहली राज्यपाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;भारत जब 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ तब उन्हें उत्तर प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया। वह देश की पहली महिला राज्यपाल बनीं। इस पद पर निधन होने तक वो लगातार बनी रहीं। वहीं 2 मार्च 1949 को लखनऊ में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई। देश में राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत 13 फरवरी 2014 को सरोजिनी नायडू की 135वीं जयंती से हुई।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Health Tips: क्या आपके बच्चे अधिक चॉकलेट खाते हैं? तो हो जाएं सतर्क</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/health-tips-do-your-children-eat-too-much-chocolate-so-be-alert/</link><pubDate>November 11, 2023, 8:09 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/download-8-4-300x225.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर। चॉकलेट और कैंडी को देखते ही बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं होता है क्योंकि बच्चों को चॉकलेट अधिक पसंद होता है। अक्सर बच्चे चॉकलेट से बनी चीजों को बड़े चाव के साथ खाते हैं लेकिन आपके बच्चे भी अगर ज्यादा चॉकलेट का सेवन कर रहे हैं तो आपको सा...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;जयपुर। &lt;/strong&gt;चॉकलेट और कैंडी को देखते ही बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं होता है क्योंकि बच्चों को चॉकलेट अधिक पसंद होता है। अक्सर बच्चे चॉकलेट से बनी चीजों को बड़े चाव के साथ खाते हैं लेकिन आपके बच्चे भी अगर ज्यादा चॉकलेट का सेवन कर रहे हैं तो आपको सावधान होने की आवश्यकता है। डॉक्टर बताते हैं कि चॉकलेट में लेड और कैडमियम जैसा डेंजरस केमिकल होता है। इसलिए अपने बच्चों को अधिक चॉकलेट खाने से परहेज करें। वहीं डॉक्टर यह भी बताते हैं की चॉकलेट में कैफीन और शर्करा पाया जाता है जो बच्चों को नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि अधिक चॉकलेट खाने से हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, किडनी फेलियर, मोटापा जैसी तमाम समस्याएं पैदा हो सकती है। इन समस्याओं को देखते हुए अपने बच्चों को अधिक चॉकलेट देने से परहेज बरतना चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैंसर का भी खतरा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;चॉकलेट में मौजूद लेड और कैडमियम जैसे केमिकल की मात्रा ज्यादा होने से कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ता है। ऐसे में अगर आपका बच्चा ज्यादा चॉकलेट खाता है तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए। अगर आप इस विषय पर चिंतन नहीं करते हैं तो लंबे समय तक चॉकलेट अधिक नुकसानदायक साबित होगा। वहीं चॉकलेट में मौजूद कैडमियम का लंबे समय तक सेवन करने से शरीर की हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और साथ ही यह फेफड़ों सहित लीवर को भी प्रभावित करेगा। यही नहीं इसके कारण कई कैंसर सहित कई जानलेवा बीमारियां भी हो सकती हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कोलेस्ट्रोल बढ़ने का खतरा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;तमाम डॉक्टर के मुताबिक बताया जाता है कि चॉकलेट में कैफीन और शुगर मौजूद होता है। ऐसे में यह ब्लड प्रेशर को अधिक बढ़ा सकता है। वहीं अधिक मात्रा में चॉकलेट का सेवन करने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा हो सकता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नींद पर प्रभाव&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;चॉकलेट में अधिक मात्रा में कैफीन मौजूद होता है। ऐसे में आप इसका सेवन करते हैं तो आपको नींद आने में दिक्कत होती है। खास कर बच्चों की बात करें तो बच्चे चॉकलेट के दीवाने होते हैं ऐसे में उनके लिए अधिक मात्रा में चॉकलेट का सेवन करना उनके मानसिक विकास को प्रभावित करता है। बता दें कि पर्याप्त नींद नहीं लेने के कारण बच्चे चिड़चिड़े और उदासीन दिखते हैं। इस कारण बच्चों की स्मरण शक्ति, सीखने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों को रात में चॉकलेट खाने से रोकना चाहिए। जिससे बच्चों के मानसिक विकास में सहायता मिल सके।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Health Tips: पॉल्यूशन से फेफड़ा, किडनी ही नहीं दिमाग पर भी हो रहा असर, जानें इससे जुड़ी शुरुआती लक्षण</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/health-tips-pollution-is-not-only-affecting-the-lungs-and-kidneys-but-also-the-brain-know-the-initial-symptoms-related-to-it/</link><pubDate>November 7, 2023, 12:18 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/11/download-11-5-300x225.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। देशभर में फेस्टिव सीजन का सिलसिला जारी है। ऐसे में दीपावली के आतिशबाजी से पहले ही वातावरण पूर्ण रूप से दूषित हो गया है। इन दोनों देश के कुछ राज्यों की हवा इतनी ज्यादा जहरीले हो गई है कि वहां रह रहे लोगों का दम घुट रहा है। अगर बात करें दे...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; देशभर में फेस्टिव सीजन का सिलसिला जारी है। ऐसे में दीपावली के आतिशबाजी से पहले ही वातावरण पूर्ण रूप से दूषित हो गया है। इन दोनों देश के कुछ राज्यों की हवा इतनी ज्यादा जहरीले हो गई है कि वहां रह रहे लोगों का दम घुट रहा है। अगर बात करें देश की राजधानी दिल्ली की तो यहां की वायु गुणवत्ता पूर्ण रूप से अधिक खराब श्रेणी में पहुंच चुका है, जिस वजह से राजधानी में रहने वाले लोग या दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोगों को सांस संबंधित दिक्कते बढ़ रही है। वहीं हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि एयर पॉल्यूशन इंसान के सभी बॉडी पार्ट के लिए नुकसानदेह है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;प्रदूषण से दिमागी स्थिती भी हो रही खराब&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि हवा में जहरीली गैस घुल जाने से वायु की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है। इस वजह से फेफड़ों की बीमारी ही नहीं बल्कि दिमाग, शरीर के अन्य अंग और दिल की बीमारी का भी खतरा बढ़ रहा है। तमाम सूत्रों के मुताबिक बता दें कि पल्मोनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट के डॉक्टर नीरज गुप्ता ने बताया कि बुजुर्गों, स्कूल जाने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इस वायु प्रदूषण की वजह से कई तरह की दिक्कतें बढ़ सकती है। बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण इन वर्गों के लोगों को कई तरह की शारीरिक मुश्किलें हो सकती है जैसे- चिड़चिड़ापन, कमजोरी, भ्रम, सर दर्द&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राजधानी दिल्ली को माना जाता है गैस चैंबर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;वायु प्रदूषण के दौरान वायु में जहरीली गैसों की मात्रा अधिक बढ़ने लगती है। खासकर हवा में न्यूरोकॉग्निटिव ज्यादा बढ़ जाता है। इस कारण इंसान का नर्वस सिस्टम बुरी तरह से प्रभावित होता है। इसलिए ऐसा मानना बिल्कुल सही है कि दिल्ली और दिल्ली एनसीआर की हालत एक गैस चैंबर जैसी ही बन जाती है। हालंकि यह शब्द बिल्कुल सही है क्योंकि वायु में कई सारे ऐसे हानिकारक गैस घुल चुकी है जो सेहत के लिए अधिक नुकसानदायक साबित हो रहा है। एक स्टडी के मुताबिक यह बताया गया की स्कूल जाने वाले बच्चों के ऊपर एयर पॉल्यूशन का अधिक असर पड़ रहा है। इस स्टडी में पाया गया कि हवा की गुणवत्ता खराब होने से सीधा असर बच्चों के दिमाग पर पड़ता है। इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट बताते है कि फिलहाल इस हालात से बचने के लिए एक ही उपाय है कि आप हवा के संपर्क में अधिक न जाए, अत्यंत जरूरी आने पर ही अपने घर से बाहर निकले।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बीमार व्यक्तियों की स्थिति बिगड़ सकती है&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण जो लोग पहले से बीमार हैं जैसे किसी को अस्थमा तो किसी को क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, तो कोई इस्केमिक दिल की बीमारी से ग्रसित है तो ऐसे लोगों को इस भयावह स्थिति में अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। ऐसे बीमार मरीजों को अधिक से अधिक घर में रहना चाहिए। बात करें अगर राजधानी दिल्ली की तो रविवार को लगातार छठे दिन भी यहां की हवा और दूषित होती हुई प्रतीत हुई। बता दें कि यहां हवा का लेवल दिन पर दिन और अधिक खराब होता जा रहा है। खासकर रात के समय शांत हवाओं के वजह से प्रदूषण का लेवल एक बार फिर गंभीर लेवल पर जा पहुंचा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;ठंड में हवा जहरीली&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;हर साल सर्दियों के मौसम में हवा की गुणवत्ता अधिक खराब स्तर पर पहुंच जाती है। इस विषय पर बहुत चर्चा होती है लेकिन कोई ठोस स्थाई इंतजाम नहीं की जाती है। इसके साथ तमाम डेटा के आंकड़ों से पता चलता है कि पूरे वर्ष में 50% से ज्यादा दिनों में वायु की गुणवत्ता खराब ही रहती है। जिस कारण लोगों को वायु प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सर्दियों के मौसम में यह स्थिति और अधिक बढ़ जाता है और लोगों को लंबे समय तक खांसी, सांस लेने में दिक्कत, गले में इन्फेक्शन और सीने में जकड़न के साथ-साथ चिंता, भ्रम और चिड़चिड़ापन की स्थिति सामने आती है। वहीं बता दें कि वायु प्रदूषण हमारे देश के लिए एक बहुत बड़ा संकट है, इसे तत्कालित तौर पर हमें कम करने की अत्यंत जरूरत है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;बढ़ते प्रदूषण में कुछ पौधे का नाम हम आपको बताएंगे जो पॉल्यूशन के घुटन से बचा सकता है &amp;#8211;&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;आपको बता दें कि आईआईटी कानपुर के रिसर्च के अनुसार बताया गया है कि कुछ पौधे ऐसे हैं जो आसानी से हमारे बीच उपलब्ध है और उन पौधों के वजह से हम एयर पॉल्यूशन को कम कर सकते हैं। तो आईए जानते हैं ऐसे कुछ पौधों के बारे में&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;एरिका पाम&lt;/strong&gt;&amp;#8211; एरिका पाम एक ऐसा प्लांट है जो ऑक्सीजन देता है साथ में हवा में घुली जहरीले गैस को कम करने में अहम भूमिका निभाती है।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;स्नेक प्लांट &lt;/strong&gt;&amp;#8211; यह एक ऐसा प्लांट है जो दिन में ऑक्सीजन देता है और रात के समय कार्बन डाइऑक्साइड ऑब्जर्व करता है। इसे हम अपने बेडरूम में भी लगते हैं, अक्सर लोग इस प्लांट को बेडरूम प्लांट भी कहते हैं ।&lt;/p&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;मनी प्लांट&lt;/strong&gt;&amp;#8211; यह एक ऐसा पौधा है जो पॉल्यूशन को कम करता है, फ्रेश एयर को रिलीज करता है। इसके साथ ही यह पौधा टॉक्सिक पदार्थ को खत्म करता है। इस तरह से अगर हम अपने घरों में ऐसे पौधों का इस्तेमाल करते हैं तो कुछ हद तक हम वायु प्रदूषण के प्रकोप से बच सकते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>