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       <title>Today nasa News | Latest nasa News | Breaking nasa News in English | Latest nasa News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का nasa समाचार:Today nasa News ,Latest nasa News,Aaj Ka Samachar ,nasa समाचार ,Breaking nasa News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>Sunita Williams: अंतरिक्ष में फंसी भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स की 2025 में वापसी की संभावना</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/world/sunita-williams-indian-origin-sunita-williams-trapped-in-space-is-likely-to-return-in-2025/</link><pubDate>August 10, 2024, 6:14 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/08/कपपवि.webp</image><category>दुनिया</category><excerpt>जयपुर। नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर लंबे समय अंतरिक्ष में फंसी हुए हैं। दोनो अंतरिक्ष यात्री 5 जून को अंतरिक्ष में गए थे। दोनों को केवल 8 दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया था, लेकिन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों 2 महीने से वहा...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर लंबे समय अंतरिक्ष में फंसी हुए हैं। दोनो अंतरिक्ष यात्री 5 जून को अंतरिक्ष में गए थे। दोनों को केवल 8 दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजा गया था, लेकिन दोनों अंतरिक्ष यात्रियों 2 महीने से वहां फंसे हुए है। दोनों की वापसी में अभी काफी लंबा समय लग सकता है। सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर फिलहाल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में मौजूद हैं। बोइंग स्टारलाइनर में खराबी के कारण दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की अभी तक वापसी नहीं हो पाई हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;2 महीने से फंसे अंतरिक्ष यात्री&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;अब इस बीच अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक बयान दिया है। बयान में नासा ने कहा कि बोइंग स्टारलाइनर के साथ गए अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाने के कई विकल्पों पर विचार किया गया है। अंतरिक्षयान बोइंग स्टारलाइनर सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर लेकर गया था। यह मिशन केवल आठ दिन का ही था, लेकिन हीलियम लीक और थ्रस्टर में खराबी के कारण अंतरिक्ष यात्रियों की वापसी को टाल दिया गया। बोइंग स्टारलाइनर ने यह पहली उड़ान भरी थी। सुनीता विलियम्स और बैरी विल्मोर दो महीने से अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;अगले साल हो सकती है वापसी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;नासा के अधिकारी का कहना है कि बोइंग स्टारलाइनर के अंतरिक्ष यात्रियों की पृथ्वी पर वापसी की योजना को तैयार करते समय सभी विकल्पों पर विचार किया गया है। उनमें एक विकल्प यह भी है कि दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की 2025 में वापसी हो सकती है। साल 2025 में वह पृथ्वी पर वापस आ सकते हैं। इस योजना में स्पेसएक्स भी शामिल है। कमर्शियल क्रू प्रोग्राम के हेड स्टीव स्टिच की ओर से कहा गया कि नासा का मुख्य विकल्प विल्मोर और सुनीता को स्टारलाइनर अंतरिक्षयान के जरिए वापस लाया जाए, लेकिन हमने यह सुनिश्चित करने के लिए योजना बनाई है कि हमारे पास दूसरे कई और विकल्प हों।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>भारतवंशी सुनीता विलियम्स 12 दिन से स्पेस में फंसी, कब लौटेगी अपने वतन</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/world/indian-sunita-williams-stuck-in-space-for-12-days-when-will-she-return-to-her-country/</link><pubDate>June 25, 2024, 12:26 pm</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/06/download-12-4-300x200.png</image><category>दुनिया</category><excerpt>जयपुर : इस समय भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में हैं। बता दें कि सुनीता नासा की तरफ से अपने तीसरे स्पेस मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्रा पर गई हुई हैं। वो बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से गई हैं। इस स्पेस मिशन में उनके...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर &lt;/strong&gt;: इस समय भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में हैं। बता दें कि सुनीता नासा की तरफ से अपने तीसरे स्पेस मिशन के लिए अंतरिक्ष यात्रा पर गई हुई हैं। वो बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से गई हैं। इस स्पेस मिशन में उनके साथ बुच विलमोर भी गए हुए है। लेकिन अब दोनों ऐसे हालात में फंस गए हैं जिसके बारे में कहना थोड़ा मुश्किल हो रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;12 दिन से फंसी है स्पेस में&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुनीता और बुच पिछले 12 दिन से अंतरिक्ष में फंसे हुए हैं। दोनों 5 जून को स्पेस मिशन पर निकले थे और उन्हें 13 जून को पृथ्वी पर वापस लौटना था। आज मंगलवार, 25 जून है, उन्हें गए हुए 10 दिन से ऊपर हो गए और दोनों अभी भी धरती पर वापस नहीं आएं हैं , जो की चिंता का विषय बनता जा रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;स्पेसक्राफ्ट में आ रही खराबी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल ख़बर है कि सुनीता जिस स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष में गई हैं, उस स्पेसक्राफ्ट से हीलियम लीक हो रही है। इस कारण से नासा को अब तक 4 बार दोनों की वापसी डेट में बदलाव करना पड़ा है। अब 2 जुलाई को दोनों की वापसी निर्धारित की गई है। कुछ लोगों का कहना है कि नासा को पहले से ही इस समस्या के बारे में पता था पर उन्होंने फिर भी इस बारे में कुछ समाधान नहीं किया। खबर है कि बोइंग के इस स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट में लॉन्चिंग से पहले भी तकनीकी खराबी देखी गई थी, जिस कारण एक से अधिक बार इसकी लॉन्चिंग डेट को भी बदलना पड़ा था। नासा के मुताबिक सुनीता और बुच दोनों ही सेफ हैं।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
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&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;
</content></item><item><title>चंद्रयान-3 द्वारा Hop Test ने इसरो में जगाया होप, जानिए क्या है यह परीक्षण</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/hop-test-by-chandrayaan-3-raised-hope-in-isro-know-what-is-this-test/</link><pubDate>September 9, 2023, 8:30 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/09/download-72-300x169.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर। विक्रम लैंडर ने किसी हैलीकॉप्टर की तरह चांद पर उड़ते हुए एक बार फिर सॉफ्ट लैंडिंग की है.14 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इसरो ने हॉप टेस्ट के जरिए विक्रम को 40 सेमी तक उछाल गया और जमीन पर लैंड करने में सफल हो गया. इसरो के हॉप टेस्ट ने किया क...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर। &lt;/strong&gt;विक्रम लैंडर ने किसी हैलीकॉप्टर की तरह चांद पर उड़ते हुए एक बार फिर सॉफ्ट लैंडिंग की है.14 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इसरो ने हॉप टेस्ट के जरिए विक्रम को 40 सेमी तक उछाल गया और जमीन पर लैंड करने में सफल हो गया.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो के हॉप टेस्ट ने किया कमाल&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो ने दो हफ्ते की मेहनत करने के बाद एक प्रयोग करने का निर्णय लिया। इसरो ने विक्रम लैंडर को कमांड दिया और इसके परिणामस्वरूप विक्रम ने चांद की सतह पर खुद को 40 सेमी तक ऊंचा उठाया और फिर 30-40 सेमी दूर जाकर लैंड किया। इसरो ने इस प्रक्रिया को &amp;#8216;हॉप टेस्ट&amp;#8217; बताया है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है इसरो का हॉप टेस्ट ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;हॉप टेस्ट के माध्यम से इसरो ने चंद्रयान-3 के विक्रम पर हेलीकॉप्टर जैसा कंट्रोल बनाया फिर उसे वर्टिकली टेक-ऑफ करवाया गया और फिर उसकी वर्टिकल लैंडिंग करवाई गई। हॉप को आसान भाषा में अगर समझा जाए तो यह किसी व्यक्ति के प्री-वर्कआउट वार्मअप की तरह है. जिसमे व्यक्ति उछलता है और कुछ दूर जाकर लैंड करता है. इसरो द्वारा यह टेस्ट भी कुछ इस प्रकार ही थी जो सफल रहा. हालांकि यह आसान प्रक्रिया नहीं है और ऐसा इसलिए क्योंकि चांद पर पृथ्वी का 1/6 वां गुरुत्वाकर्षण है, जिसके कारण चांद की सतह पर ये प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहला हॉप टेस्ट किसने किया था ?&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;जानकारी के लिए बता दें कि नासा के सर्वेयर-6 ने चांद पर सफलतापूर्वक लैंडिंग की थी, जिसके बाद सन 1969 में 17 नवंबर को सर्वेयर-6 के इंजन को पहली बार 2.5 सेकेंड के लिए फायर किया गया था, जिसकी वजह से सर्वेयर ने चांद की सतह पर 3 से 4 मीटर तक छलांग लगाई थी और फिर अपने ऑरिजिनल पॉजिशन से 2.4 मीटर पश्चिम में लैंड किया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो ने किया ट्वीट&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;वहीं इसरो ने ट्वीट करते हुए कहा कि कमांड दिए जाने पर विक्रम लैंडर का इंजन फिर से शुरू हो गया और यह 40 सेमी तक ऊपर उठा। इसके बाद इसने फिर 30-40 सेमी दूर जाकर सॉफ्ट लैंड किया। इसरो ने बताया कि हमारा उद्देश्य भविष्य में लैंडर की वापसी और मानवीय मिशन के लिए ट्रायल करना था।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan 3 Landing: 23 अगस्त इतिहास के उन पन्नों में है दर्ज, आज के दिन चांद से पृथ्वी की पहली तस्वीर सामने आई थी</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/world/chandrayaan-3-landing-august-23-is-recorded-in-those-pages-of-history-on-this-day-the-first-picture-of-earth-from-the-moon-was-revealed/</link><pubDate>August 23, 2023, 11:15 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-12-2-300x169.png</image><category>दुनिया</category><excerpt>Chandrayaan 3 Landing: चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर आज शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच देगा। इसके साथ ही एक बार फिर 23 अगस्त की तारीख इतिहास के उन स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो जाएगी, जो आने वाले भविष्य को उस स्वर्णिम काल ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Chandrayaan 3 Landing&lt;/strong&gt;: चंद्रयान-3 का विक्रम लैंडर आज शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच देगा। इसके साथ ही एक बार फिर 23 अगस्त की तारीख इतिहास के उन स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो जाएगी, जो आने वाले भविष्य को उस स्वर्णिम काल की याद दिलाएगी जब चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार किसी देश ने कदम रखा है।&lt;br&gt;क्या आपको पता है चन्द्रमा से जुड़ा खास इतिहास, जब लोगो ने चंदा मामा से आई पृथ्वी की तस्वीर को पहली बार देखा था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;57 साल पहले लोगों ने देखी चांद की पहली तस्वीर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;दरअसल मून मिशन के क्षेत्र में देखा जाए तो 23 अगस्त का अपना विशेष महत्व है, आपको जानकर हैरानी होगी कि 23 अगस्त ही वो तारीख है जब 57 साल पहले 1966 में नासा के अपने मून मिशन से लुनार ऑर्बिटर वन ने चांद से पहली बार धरती की तस्वीर ली थी। हालांकि ये तस्वीर आंशिक तौर पर धुंधली और ब्लैक एंड व्हाइट थी, लेकिन मून मिशन के इतिहास में वह ऐसी सफलता थी। जिसने भविष्य के मून मिशनों की राह आसान कर दी।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-video is-provider-youtube wp-block-embed-youtube wp-embed-aspect-16-9 wp-has-aspect-ratio&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;iframe loading=&quot;lazy&quot; title=&quot;Chandrayaan 3 Landing: 23 अगस्त इतिहास के उन पन्नों में है दर्ज । Chandrayaan 3।ISRO। NASA।&quot; width=&quot;500&quot; height=&quot;281&quot; src=&quot;https://www.youtube.com/embed/owaPjfu3b9g?feature=oembed&quot; frameborder=&quot;0&quot; allow=&quot;accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share&quot; referrerpolicy=&quot;strict-origin-when-cross-origin&quot; allowfullscreen&gt;&lt;/iframe&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या था नासा का लुनार ऑर्बिटर-1 मिशन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;लुनार ऑर्बिटर-1 नासा का वो पहला मून मिशन था जो सफलता पूर्वक चंद्रमा की ऑर्बिट तक पहुंचने में सफल रहा। नासा का यह मिशन 10 अगस्त 1966 को लांच हुआ था। जो एक सर्वेयर मिशन था। इसका उद्देश्य नासा के भविष्य में होने वाले अपोलों मिशनों के लिए सुरक्षित लैंडिंग स्थल तलाशना था। लुनार ऑर्बिटर-1 को इस तरह डिजाइन किया गया था, जिससे ये चांद की ज्यादा से ज्यादा तस्वीर ले सके।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;लुनार ऑर्बिटर-1 ने ली थी 187 तस्वीरें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;लुनार ऑर्बिटर -1 चंद्रमा की सतह से 58 किमी दूर तक गया था। इसमें अपना फोटोग्राफिक मिशन 18 से 29 अगस्त 1966 तक किया था और चांद के 50 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को कवर करते हुए हाई रिजॉल्यूशन की 42 और मध्य रिजॉल्यूशन की 187 तस्वीरें ली थीं। इन्हीं में दो तस्वीरें धरती की भी थीं जो चांद की ऑर्बिट से पहली बार ली गईं थीं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;नासा से जारी की थी तस्वीर&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चांद की ऑर्बिट से लुनार ऑर्बिटर-1 ने जो तस्वीर ली थी जिसे नासा न 25 अगस्त को जारी की थी। यह तस्वीर ऑर्बिटर-1 ने 23 अगस्त को ली थी, 24 अगस्त को यह नासा के स्पेन स्थित ग्राउंड स्टेशन पहुंची थी। 25 अगस्त को नासा ने मिशन की सफलता का ऐलान करते हुए सबसे पहले इसी तस्वीर को जारी किया था जो 26 अगस्त 1966 को पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई थी।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के पितामह की जयंती आज, सीएम गहलोत ने किया नमन</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/today-the-birth-anniversary-of-the-grandfather-of-indian-space-research-cm-gehlot-paid-tribute/</link><pubDate>August 12, 2023, 10:11 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/08/download-7-3-300x169.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर: विश्व के महान वैज्ञानिकों में शुमार एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के जनक डॉ. विक्रम साराभाई की आज जयंती है। अंतरिक्ष में इनके अभूतपूर्व योगदान के लिए याद किया जाता है। इनकी दूरदर्शी सोच और कठिन परिश्रम की वजह से ही आज भारतीय अंतरिक्ष अनुस...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: विश्व के महान वैज्ञानिकों में शुमार एवं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के जनक डॉ. विक्रम साराभाई की आज जयंती है। अंतरिक्ष में इनके अभूतपूर्व योगदान के लिए याद किया जाता है। इनकी दूरदर्शी सोच और कठिन परिश्रम की वजह से ही आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) दिन-प्रतिदिन इतिहास रच रहा है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सीएम गहलोत ने किया नमन&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो के जनक डॉ. विक्रम साराभाई की जयंती पर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने याद करते हुए लिखा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के पितामह महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई को जयंती पर कोटिशः नमन। अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आपके अमूल्य योगदान का देश ऋणी है।&lt;/p&gt;



&lt;figure class=&quot;wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter wp-block-embed-twitter&quot;&gt;&lt;div class=&quot;wp-block-embed__wrapper&quot;&gt;
&lt;blockquote class=&quot;twitter-tweet&quot; data-width=&quot;500&quot; data-dnt=&quot;true&quot;&gt;&lt;p lang=&quot;hi&quot; dir=&quot;ltr&quot;&gt;भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के पितामह महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई को जयंती पर कोटिशः नमन। &lt;br&gt;&lt;br&gt;अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आपके अमूल्य योगदान का देश ऋणी है। &lt;a href=&quot;https://t.co/eOTkJkGEpa&quot;&gt;pic.twitter.com/eOTkJkGEpa&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;&amp;mdash; Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) &lt;a href=&quot;https://twitter.com/ashokgehlot51/status/1690209749416243200?ref_src=twsrc%5Etfw&quot;&gt;August 12, 2023&lt;/a&gt;&lt;/blockquote&gt;&lt;script async src=&quot;https://platform.twitter.com/widgets.js&quot; charset=&quot;utf-8&quot;&gt;&lt;/script&gt;
&lt;/div&gt;&lt;/figure&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;कौन है डॉ. विक्रम साराभाई&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;डॉ. विक्रम साराभाई का जन्म गुजरात के अहमदाबाद में 12 अगस्त 1919 को हुआ था। इनका पूरा नाम डॉ. विक्रम अंबालाल साराभाई है। विक्रम अंबालाल साराभाई भारत के प्रमुख वैज्ञानिक थे। इन्होंने 86 वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं 40 संस्थान खोले। इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन 1966 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। डॉ. विक्रम साराभाई के नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता। यह जगप्रसिद्ध है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया। लेकिन इसके साथ-साथ उन्होंने अन्य क्षेत्रों जैसे वस्त्र, भेषज, आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इसरो के स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना उनकी महान उपलब्धियों में एक थी। रूसी स्पुतनिक के प्रमोचन के बाद उन्होंने भारत जैसे विकासशील देश के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व के बारे में सरकार को राज़ी किया। डॉ. साराभाई ने अपने उद्धरण में अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व पर ज़ोर दिया. &amp;#8220;ऐसे कुछ लोग हैं जो विकासशील राष्ट्रों में अंतरिक्ष गतिविधियों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हैं। हमारे सामने उद्देश्य की कोई अस्पष्टता नहीं है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Chandrayaan 3: अरबों सालों से अंधेरे में डूबे दक्षिणी ध्रुव का खुलेगा राज, भारत बनेगा विश्व का पहला देश</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/desh-pradesh/chandrayaan-3-the-secret-of-south-pole-immersed-in-darkness-for-billions-of-years-will-be-revealed-india-will-become-the-first-country-in-the-world/</link><pubDate>July 14, 2023, 11:10 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/07/download-11-300x169.png</image><category>देश-प्रदेश</category><excerpt>जयपुर: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) ने अंतरिक्ष में लंभी छलांग लगाने के लिए अपने तीसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान-3 की लांच कर दिया है। एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए शुक्रवार दोपहर 02:35 बजे इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा बैंगलोर से चंद्रमा के ल...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर&lt;/strong&gt;: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (ISRO) ने अंतरिक्ष में लंभी छलांग लगाने के लिए अपने तीसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान-3 की लांच कर दिया है। एलवीएम3-एम4 रॉकेट के जरिए शुक्रवार दोपहर 02:35 बजे इसे सतीश धवन स्पेस सेंटर श्रीहरिकोटा बैंगलोर से चंद्रमा के लिए प्रक्षेपित किया गया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत बनेगा पहला देश&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;चंद्रयान-3 पृथ्वी से 384,400 किलोमीटर सफर तय करके 41 से 42 दिनों बाद करीब 23-24 अगस्त को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चंद्रयान-3 अगर सफलता पूर्वक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करता है तो भारत विश्व का पहला देश बन जाएगा, जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;अब तक तीन देश ही चंद्रमा पर उतरने में सफल रहे हैं। अगर चंद्रयान-3, चंद्रमा की दक्षिणी ध्रुव पर सफलता पूर्वक लैंड करता है, तो इन तीन देशों की लिस्ट में भारत का नाम भी शामिल जाएगा और भारत विश्व का पहला देश बन जाएगा जो चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;खुलेगा दक्षिणी ध्रुव का राज&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;इसरो के इस चंद्रयान-3 मिशन अगर सफल रहता है तो आने वालों दिनों में अरबों सालों से अंधेरे में डूबी चांद की दक्षिणी ध्रुव का राज खुलेगा। जैसा पृथ्वी का दक्षिणी ध्रुव है, वैसा ही चांद का भी है। पृथ्वी का दक्षिणी ध्रुव अंटार्कटिका में है। पृथ्वी का सबसे ठंडा इलाका। ऐसा ही चांद का दक्षिणी ध्रुव है सबसे ठंडा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;पहले चंद्रयान-2 और अब चंद्रयान-3 के जरिए चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने की कोशिश है। ऐसा अंदाजा है कि हमेशा छाया में रहने और तापमान कम होने की वजह से यहां पानी और खनिज हो सकते हैं। इसकी पुष्टि पहले हुए मून मिशन में भी हो चुकी है। ऐसे में चंद्रयान-3 में मौजूद लैंडर और रोवर के पेलोड चांद की सतह का अध्ययन करेंगे। ये चांद की सतह पर मौजूद पानी और खनिजों का पता लगाएंगे। सिर्फ यही नहीं, इनका काम ये भी पता करना है कि चांद पर भूकंप आते हैं या नहीं।&lt;/p&gt;
</content></item></channel></rss>