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       <title>Today navratri News | Latest navratri News | Breaking navratri News in English | Latest navratri News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का navratri समाचार:Today navratri News ,Latest navratri News,Aaj Ka Samachar ,navratri समाचार ,Breaking navratri News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>नवरात्र में 9 दिनों इन चीजों का लगाया जाता है भोग, मां दुर्गा होती है बहुत प्रसन्न</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/religious/these-things-are-offered-for-9-days-during-navratri-maa-durga-is-very-happy/</link><pubDate>March 28, 2025, 4:00 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2025/03/Clipboard-2025-03-28T092954.584.jpg</image><category>अध्यात्म</category><excerpt>जयपुर। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी। नवरात्र पर देवी दुर्गा का नौ स्वरूपों की विधि- विधान से पूजा की जाती है। इस बार नवरात्र की शुरुआत 30 मार्च, रविवार से होगी। नवरात्र में देवियों को पूजा जाता है। नव...</excerpt><content>&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी। नवरात्र पर देवी दुर्गा का नौ स्वरूपों की विधि- विधान से पूजा की जाती है। इस बार नवरात्र की शुरुआत 30 मार्च, रविवार से होगी। नवरात्र में देवियों को पूजा जाता है। नवरात्र के आखिरी दिन यानी नौवे दिन कन्या पूजन किया जाता है। आइए जानते हैं कि इन 9 दिनों में देवी के 9 स्वरूपों को किस चीज का भोग लगाना चाहिए।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;गाय के घी का भोग लगाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;नवरात्र के पहला दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री को समर्पित होता है। इस दिन मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग लगाना चाहिए। इससे आरोग्य लाभ मिलता है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;शक्कर का चढ़ाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;नवरात्र का दूसरा दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी का दिन होता है। इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से चिरायु का वरदान मिलता है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;दूध का भोग लगाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;नवरात्र का तीसरा दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा को दूध का भोग लगाना चाहिए। साथ ही किसी गरीब या जरूरतमंद को दान कर देना चाहिए। ऐसा करने से धन-वैभव और ऐश्वर्य हासिल होता है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;मालपुआ अर्पण करें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;नवरात्र के चौथा दिन कुष्मांडा को समर्पित होता है। यह मां दुर्गा का चौथा स्वरूप होती हैं। इस दिन मां कुष्मांडा को मालपुआ का नैवेध अर्पण करना चाहिए। मां को भोग लगाने के बाद उसे जरूरतमंद को दान कर देना चाहिए। ऐसा करने से मनोबल बढ़ता है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;केले का भोग लगाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;नवरात्र के पांचवा दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। इस दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से बुद्धि का विकास होता है और भविष्य में ग्रोथ मिलती है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;शहद अर्पण करें&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;नवरात्र का छठवां दिन मां दुर्गा के षष्टम स्वरूप मां कात्यानी का होता है। इस दिन मां कात्यानी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इस दिन मां कात्यानी को शहद का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से सौंदर्य की प्राप्ति होती है। साथ ही घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;गुड़ को चढ़ाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि को पूजा जाता है। इस दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से निर्मित भोग को नैवेध अर्पण करना चाहिए। ऐसा करने से रोग-शोक से मुक्ति मिलती है और परिवार भी स्वस्थ्य रहता है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;नारियल का भोग लगाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी का होता है। इस दिन देवी महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां महागौरी को नारियल का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से मनुष्य की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और माता का आशीर्वाद बना रहता है।&lt;/p&gt;
&lt;h2&gt;&lt;strong&gt;हलवा पूरी चढ़ाएं&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;
&lt;p&gt;नवरात्र के नौवा दिन सिद्धिदात्री मां को समर्पित होता है। इस दिन सिद्धिदात्री मां को पूजा जाता है। यह नवरात्र का आखिरी दिन होता है इसलिए कन्या पूजन किया जाता है। कन्या में बनने वाली सभी चीजों का भोग पहले सिद्धिदात्री मां को लगाया जाता है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Navratri 2023: बंगाली समाज 68 वर्ष से झीलों के शहर में कर रहा दुर्गा पूजा, सैकड़ों लोग जुड़े</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/culture/navratri-2023-bengali-society-has-been-performing-durga-puja-in-the-city-of-lakes-for-68-years-hundreds-of-people-participated/</link><pubDate>October 21, 2023, 7:38 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/download-7-6-300x182.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>जयपुर। नवरात्रि का दौर शुरू है। ऐसे में कोलकाता की गलियों में जाएंगे तो वहां भव्य दुर्गा पंडालों के अनोखा नजारा देखने को मिलेगा। बता दें कि पूरी दुनिया में कोलकाता का दुर्गा पूजा मशहूर है। लेकिन बंगाल से पलायन हुए बंगाली समाज के लोगों ने करीब 6...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; नवरात्रि का दौर शुरू है। ऐसे में कोलकाता की गलियों में जाएंगे तो वहां भव्य दुर्गा पंडालों के अनोखा नजारा देखने को मिलेगा। बता दें कि पूरी दुनिया में कोलकाता का दुर्गा पूजा मशहूर है। लेकिन बंगाल से पलायन हुए बंगाली समाज के लोगों ने करीब 68 साल पहले उदयपुर में दुर्गा पूजा के आयोजन की शुरुआत की थी। आपको बता दें कि वर्त्तमान में उदयपुर समाज के सैकड़ों लोग इस पूजा से जुड़ चुके हैं। शुक्रवार को यहां षष्ठी पूजा के साथ ही मां दुर्गा पूजा का शुभारंभ किया गया। उदयपुर शहर के भूपालपुरा स्थित बंग भवन, अशोकनगर के केंद्र भवन और सेक्टर 4 काली बाड़ी सोसाइटी में बंगाल की दुर्गा पूजा के हु-बहू नजारे देखने को मिलता है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;केंद्र भवन में हो रही पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;प्राचीनतम दुर्गा पूजा उत्सव की शुरुआत अनिल भट्टाचार्य ने उदयपुर में की थी। बता दें कि भट्टाचार्य सुप्रीम कोर्ट के वकील के साथ उदयपुर विधि महाविद्यालय के प्रिंसिपल भी रह चुके हैं। सन 1956 में उन्होंने दुर्गा पूजा मनाने की शुरुआत पहली बार उदयपुर में की थी। आपको बता दें कि भट्टाचार्य परिवार के अंजलि एवं इंदिरा भट्टाचार्य ने बताया है कि भट्टाचार्य परिवार पिछले 68 सालों से यह दुर्गा पूजा पारंपरिक विधि-विधान से आयोजन करते आ रहा है। दुर्गा पूजा के दौरान मां की प्रतिमा की स्थापना कर दी गई हैं। वहीं कल (शुक्रवार) षष्ठी पूजा से दुर्गा पूजा की शुरुआत हुई है।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शास्त्री सर्कल स्थित चटर्जी बंगले में दुर्गा पूजा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;पूजा सचिव तपन रॉय ने बताया है कि करीब 62 वर्ष पहले शास्त्री सर्कल स्थित चटर्जी बंगले में दुर्गा पूजा का आयोजन होता था। बाद में महाराष्ट्र भवन को किराए पर लेकर पूजा की जाती थी। साथ ही उन्होंने बताया कि साल 1982 में यूआईटी ने भूपालपुरा में बंग भवन निर्माण के लिए जमीन दी, इसके बाद से ही यहां दुर्गा पूजा का आयोजन हो रहा हैं। खास बात यह है कि यहां के दुर्गा पूजा को बंगाली रीति रिवाज से की जाती है। वहीं अष्टमी वाले दिन मां दुर्गा को 108 कमल के फूल चढ़ाए जाते हैं और नवमी पर सुबह पूजा और हवन होता है। दसवीं पर मां का विसर्जन की रस्म निभाई जाती है। इस दौरान सिंदूर खेला की परंपरा सभी सुहागिन महिलाएं हमेशा की तरह निभाती है।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Navratri 2023: कोटा का देवी मंदिर 700 साल से ज्यादा पुराना, बूंदी के राजकुमार ने किया था मंदिर का निर्माण</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/devi-temple-of-kota-is-more-than-700-years-old-the-prince-of-bundi-had-built-the-temple/</link><pubDate>October 15, 2023, 9:13 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/download-8-3-300x225.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>जयपुर। देशभर में त्योहारी सीजन की शुरुआत नवरात्र के पहले दिन से हो गई है। पहले दिन माँ दुर्गा के पहली रूप की पूजा की जाती हैं जिसे शैलपुत्री के नाम से जाना जाता हैं। नवरात्र के शुभ अवसर पर हम आपको कोटा के 700 साल पुराना माँ काली के मंदिर के बार...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; देशभर में त्योहारी सीजन की शुरुआत नवरात्र के पहले दिन से हो गई है। पहले दिन माँ दुर्गा के पहली रूप की पूजा की जाती हैं जिसे शैलपुत्री के नाम से जाना जाता हैं। नवरात्र के शुभ अवसर पर हम आपको कोटा के 700 साल पुराना माँ काली के मंदिर के बारे में कुछ रोचक जानकारी देने जा रहे है। बता दें कि इस मंदिर का निर्माण सन 1264 में बूंदी के राजकुमार जेतसिंह ने करवाया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;इतिहास को अपने में संजोए हुए&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;माँ दुर्गा का नौ दिवसीय त्यौहार नवरात्र की शुभारंभ आज (रविवार) से हो गई है। बता दें कि शारदीय नवरात्री में भक्त पूरे नौ दिन तक माता की पूजा के साथ पूरे श्रद्धा भक्ति के साथ आराधना करते है। इस नौ दिनों तक रात्री में माँ का जागरण भी किया जाता हैं। बता दें कि कोटा में ऐसे कई मंदिर हैं जो इतिहास के दृष्टिकोण से भी प्रचलित है. जिसमे कोटा का माँ आशापुरा का मंदिर हैं जो अपने अंदर इतिहास को संजोए हुए हैं. यह मंदिर कोटा के दशहरा ग्राउंड के पास ही स्थित है साथ में इस मंदिर की अपनी खास महिमा भी हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मंदिर पुजारी के अनुसार&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;माँ आशापुरा मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह मंदिर करीब 700 साल पुराना है और मंदिर की महिमा भी अपरम्पार है. पुजारी ने बताया कि बूंदी के महराजा को उस दौरान प्रजा ने कहा था कि महराज आपके महल में तो दो-दो मंदिर है लेकिन हमप्रजा पूजा के लिए कहां जाए. साथ में पुजारी बताते हैं कि इस कथन को सुनकर बूंदी के महराज ने बूंदी दरबार में माँ आशापुरा का मंदिर बनवाया था।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मातारानी ने सपने में दर्शन दिए&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि इस मंदिर का निर्माण आज से 700 साल पहले यानी सन 1264 में बूंदी के राजा जेतसिंह द्वारा हुआ था। मंदिर निर्माण होने के पीछे बहुत रोचक किस्सा है। माना जाता है कि लखनऊ दरबार के राजा लाखन सिंह को माँ काली ने सपने में दर्शन दिए थे, जिसके बाद उन्होंने गुजरत में माँ आशापुरा मंदिर की निर्माण करवाई और उसी मंदिर के रूप का प्रतिबिम्ब कोटा के माँ आशापुरा मंदिर में भी लाया गया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;मेले की शुरुआत माँ की पूजा से&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;बता दें कि कोटा में मेले की शुभारंभ माँ आशापुरा मंदिर में पूजा अर्चना के साथ होती है। ऐसे में बताया जाता है कि मंदिर में पूजा-पाठ के बाद ही अगला कार्यक्रम शुरू होता है। हर वर्ष पूर्व शाही परिवार यहां मंदिर में आकर पूरे विधि-विधान के साथ माँ आशापुरा की आराधना करते हैं। वहीं दूसरी तरफ मान्यता है कि आशापुरा मां अशोक वृक्ष से प्रकट हुई थी, जिस वजह से मंदिर का नाम आशापुरा पड़ा। माना जाता हैं कि अगर अष्टमी वाले दिन मां की दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं कि हर आशा पूरी हो जाती हैं.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Shardiya Navratri 2023: नवरात्री को लेकर श्रद्धालुओं के लिए ट्रैफिक की रहेगी विशेष व्यवस्था</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/shardiya-navratri-2023-there-will-be-special-arrangements-for-traffic-for-devotees-during-navratri/</link><pubDate>October 15, 2023, 5:00 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/download-1-3-300x169.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>जयपुर। देशभर में त्योहारी सीजन की शुरुआत आज से हो गई है। शारदीय नवरात्र का आज पहला दिन है। इस दिन माँ दुर्गा के 9 रूपों में से पहले रूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती हैं। माँ के पहले रूप की पूजा से शारदीय नवरात्री की शुरुआत हो जाती है जो नौ दिन...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; देशभर में त्योहारी सीजन की शुरुआत आज से हो गई है। शारदीय नवरात्र का आज पहला दिन है। इस दिन माँ दुर्गा के 9 रूपों में से पहले रूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती हैं। माँ के पहले रूप की पूजा से शारदीय नवरात्री की शुरुआत हो जाती है जो नौ दिनों तक चलती हैं इस नौ दिनों में माँ दुर्गा के 9 रूपों की पूजा-अर्चना होती हैं. इस पूजा को देखते हुए देश के सभी शहरों से लेकर चौराहा तक ट्रैफिक की विशेष व्यवस्था की जाती है। जिससे किसी भी श्रद्धालुओं को माँ के मंदिर से लेकर पूजा पंडाल में जाने में परेशानी नहीं हो. शारदीय नवरात्र को देखते हुए राजस्थान के चप्पे-चप्पे में ट्रैफिक की विशेष व्यवस्था की गई है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;दर्शनार्थियों का तांता लगा(शिला मंदिर)&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आज से शारदीय नवरात्र की शुभारंभ हो गई है, ऐसे में आज से आमेर जिले में स्थित माँ शिला मंदिर में नौ दिनों तक दर्शनार्थियों का भीड़ देखने को मिलेगा। इस दौरान कई यातायात को अपने समान्य रूटों से डायवर्ट किया जाएगा। भीड़ को देखते हुए जिला अधिकारी ने एक सूचना जारी करते हुए प्रशासन को आदेश दिया है कि मंदिर में दर्शनार्थियों के बीच भगदड़ की स्थिति नहीं हो। साथ में उन्होंने कहा कि मंदिर परिषर में शांति बनाए रखने के लिए विशेष रूप से तैयारी होनी चाहिए।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;डायवर्ट की सूचना&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;ul class=&quot;wp-block-list&quot;&gt;
&lt;li&gt;बता दें कि शहर से आमेर होकर दिल्ली रोड की तरफ से आने वाले सभी यातायात को रामगढ़ मोड़ से डायवर्ट किया गया है जिसे धोबीघाट, बंध की घाटी, सडवा मोड़ होकर निकाला जाएगा।&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;



&lt;p&gt;-वहीं दिल्ली रोड की तरफ से आमेर होकर शहर के तरफ से आने वाले ज्यादातर यातायात को आमेर तिराहा दिल्ली रोड से डायवर्ट किया गया है जिसे सड़वा मोड़, बंध की घाटी, धोबीघाट होकर निकाला जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;-हालांकि रामगढ़ मोड़ से आमेर की तरफ निकाले जाने वाली बसें जरुरत अनुसार डायवर्ट किया जाएगा जिसे रामगढ़ मोड़ से धोबीघाट होकर दिल्ली बाइपास से आमेर की तरफ निकाला जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;-वहीं आमेर से रामगढ़ मोड़ की ओर आने वाली सभी बसों को जरुरत पड़ने पर रूटों को डायवर्ट किया जाएगा जिसे आमेर तिराहा से धोबीघाट होकर रामगढ़ मोड की तरफ से निकाला जाएगा।&lt;/p&gt;



&lt;p&gt;इस तरह मंदिर में जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए ट्रैफिक की विशेष व्यवस्था की गई है। वहीं शिला मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपने निजी वाहनों को मंदिर से दूर बनाई गई पार्किंग में ही गाड़ी को पार्क कर सकते हैं।&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Rajasthan : फेस्टिव सीजन को लेकर दुल्हन की तरह सजी पिंक सिटी</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/festival/rajasthan-pink-city-decorated-like-a-bride-for-the-festive-season/</link><pubDate>October 11, 2023, 8:16 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/10/download-12-300x200.png</image><category>त्योहार</category><excerpt>जयपुर। फेस्टिव सीजन को लेकर पूरे देश भर में जोरों-शोरों से तैयारी शुरू हो गई है। ऐसे में राजस्थान का गुलाबी नगर भी किसी से कम तैयार नहीं हैं। राजधानी जयपुर में त्यौहार शुरू होने से पहले बाजार दुल्हन की तरह सज चुकी है। त्यौहारी सीजन की बात करें ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; फेस्टिव सीजन को लेकर पूरे देश भर में जोरों-शोरों से तैयारी शुरू हो गई है। ऐसे में राजस्थान का गुलाबी नगर भी किसी से कम तैयार नहीं हैं। राजधानी जयपुर में त्यौहार शुरू होने से पहले बाजार दुल्हन की तरह सज चुकी है। त्यौहारी सीजन की बात करें तो लोगों को पहले दशहरा से ही फेस्टिव सीजन में आंनद लेने का मौका मिलने वाला हैं। ऐसे में इस खास सीजन को लेकर जयपुर की सभी रिटेल बाजार और होलसेल बाजार को बड़ी खूबशूरती के साथ सजाया गया हैं। हालांकि फेस्टिव सीजन में लोग खरीदारी के लिए सही संयोग का इन्तजार करते है.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;खरीदारी के विशेष संयोग&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि इस शारदीय नवरात्री में खरीदारी के लिए विशेष संयोग दिख रहे हैं. नवरात्रि की शुरुआत इस साल 15 अक्टूबर को होने जा रही हैं और दशहरा 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। बताया जा रहा है कि नवरात्रि में विशेष संयोग को देखते हुए जयपुर की सभी रिटेल और होलसेल बाजार सज चुकी है। इस नवरात्र में खरीदारी की विशेष संयोग को देखते हुए अनुमान हैं कि बाजारों में जमकर ग्राहकों की भीड़ उमड़ेगी। जिसको लेकर दुकानदार पूरी तरह से तैयारी में जुट गई है. अनुमान है कि इस फेस्टिव सीजन में व्यापारियों की व्यापार पहले के अपेक्षा 30 फीसदी बढ़ सकती हैं।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;खरीदारी की शुभ मुहूर्त&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;नवरात्री के तीसरे दिन (17 अक्टूबर) रात 8:31 से मध्यरात्रि 1:27 तक आप खरीदारी कर सकते हैं। वहीं 18 अक्टूबर को सुबह 6 :30 से रात 9 बजे तक, 19 को रात 9 बजे, 20 को रात 8 बजे तक, 21 को शाम 7:54 बजे से रात 09:54 बजे तक, 22 अक्टूबर को शाम 6:44 बजे तक, 23 अक्टूबर को सुबह 6:35 से शाम 5:14 बजे तक और 24 अक्टूबर (दशहरा) को दोपहर 3:28 बजे तक खरीदारी&lt;br&gt;करने के लिए विशेष संयोग बन रहे हैं. हिन्दू धर्म में माना जाता है कि विशेष संयोग बनने पर अगर खरीदारी की जाती है तो ऐसे में जीवन सुख-समृद्धि से भरपूर बन जाता है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>राजस्थान: धीरेंद्र शास्त्री आज राजस्थान का करेंगें दौरा, कलश यात्रा में शामिल होकर हिंदुत्व को जगाने…</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/national/rajasthan-dhirendra-shastri-will-visit-rajasthan-today-join-the-kalash-yatra-to-awaken-hindutva/</link><pubDate>March 23, 2023, 9:21 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2023/03/download-11-300x169.png</image><category>देश</category><excerpt>जयपुर। राजस्थान के उदयपुर में नववर्ष के मौके पर आज यानि गुरुवार को शहर में एक विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी जहां बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्णा शास्त्री भी इसमें शामिल रहेंगे। राजस्थान का दौरा करेंगे धीरेन्द्र शास्त्री आपको बता दें कि देश में ...</excerpt><content>
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; राजस्थान के उदयपुर में नववर्ष के मौके पर आज यानि गुरुवार को शहर में एक विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी जहां बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्णा शास्त्री भी इसमें शामिल रहेंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राजस्थान का दौरा करेंगे धीरेन्द्र शास्त्री&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि देश में नवरात्री का पर्व शुरू हो गया है, आज नवरात्री का दूसरा दिन- मां ब्रह्मचारिणी का दिन है. इस अवसर पर धीरेन्द्र शास्त्री आज राजस्थान का दौरा करेंगे। उदयपुर शहर में नववर्ष के उपलक्ष पर विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी, धीरेन्द्र कृष्णा शास्त्री इस शोभायत्रा में शामिल होंगे। जानकारी के मुताबिक धीरेन्द्र कृष्णा शास्त्री उदयपर के टॉउन हाल में दोपहर 3 बजे एक भव्य सभा को सम्बोधित करेंगे। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम को पंडित देवकीनंदन ठाकुर भी सम्बोधित करेंगे। वहीं इस बार शोभायात्रा उदयपुर में तीन स्थानों से निकली जाएगी। जिसमें नव वर्ष के स्वागत के लिए शहर 30000 महिलाएं कलश लेकर निकलेंगी। बता दें कि शोभायात्रा में संतो के साथ ही विभिन्न समाजों की आकर्षक धार्मिक एवं राष्ट्रीय झाकियां शामिल होंगी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;तीन जगहों से निकाली जाएगी कलश यात्रा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि शोभायात्रा आयोजन समिति ने बताया कि इस वर्ष भव्य शोभा यात्रा, फतह स्कूल, जगदीश भूपालपुरा ग्राउंड से शुरू होगी। इसके अलावा एक मुख्य शोभायात्रा नगर निगम से शुरू होगी जिसमें झाकियां, डीजे, बुलेट वाहन शामिल होंगे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;शोभायात्रा में लाखों की होगी भीड़&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p&gt;आपको बता दें कि समाजोत्सव समिति उदयपुर महानगर के संयोजक ने कहा कि इस यात्रा में दो लाख से ज्यादा महिलाएं- पुरुष समेत बच्चे शामिल होंगे. वहीं शोभायात्रा में शामिल होने के लिए उदयपुर संभाग के विभिन्न संतो से निवेदन किया गया.&lt;/p&gt;
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