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       <title>Today republic day 2024 News | Latest republic day 2024 News | Breaking republic day 2024 News in English | Latest republic day 2024 News Headlines - Inkhabar</title>
        <description>आज का republic day 2024 समाचार:Today republic day 2024 News ,Latest republic day 2024 News,Aaj Ka Samachar ,republic day 2024 समाचार ,Breaking republic day 2024 News in Hindi, Latest News Headlines - Inkhabar</description>
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        </image><item><title>Republic Day 2024: कर्तव्य पथ पर दिखी राजस्थान की संस्कृति, जानें क्या रहा खास ?</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/republic-day-2024-rajasthans-culture-seen-on-the-path-of-duty-know-what-was-special/</link><pubDate>January 26, 2024, 8:16 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/01/download-14-1.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर। आज पूरे देश भर में गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. इस साल अपना 76 वां गणतंत्र दिवस देश मना रहा है. मुख्य अतिथि के तौर पर इस बार के गणतंत्र दिवस के समारोह में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों मौजूद रहे. राष्ट्रपति भवन पर राष्ट्रपति द्रौ...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; आज पूरे देश भर में गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है. इस साल अपना 76 वां गणतंत्र दिवस देश मना रहा है. मुख्य अतिथि के तौर पर इस बार के गणतंत्र दिवस के समारोह में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों मौजूद रहे. राष्ट्रपति भवन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झंडारोहण किया. वहीं परेड के बाद कर्तव्यपथ पर देश के सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व करने वाली झांकियां निकली. बता दें कि ये झांकियां देश की विविधता, सांस्कृतिक पहचान और विरासत की किस्सा बंया कर रही थी.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;सबका मन मोहा राजस्थान की झांकी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;देश के अन्य अन्य राज्यों के झांकियों के बीच राजस्थान की झांकी ने सबका मन मोह लिया. राज्य की भक्ति, शक्ति और संस्कृति के रंगों को बेहद शानदार ढंग से राजस्थान की झांकी दिखा रही थी. साथ ही राज्य के महिला हस्तशिल्प उद्योगों को प्रदेश की झांकी प्रदर्शित कर रही थी. हर किसी ने झांकी में नृत्य करती नृतिकाओं की जमकर तारीफ की. बता दें कि मीरा बाई की वीणा पकड़े खूबसूरत मूर्ति ने भी सबका मन मोह लिया। इसके साथ ही हर किसी के लिए झांकी में घूमर नृत्य की मूर्ति भी आकर्षण का केंद्र बना।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;राजस्थान का घूमर है सुप्रसिद्ध नृत्य&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;आपको बता दें कि, महिलाओं द्वारा किया जाने वाला राजस्थान का सुप्रसिद्ध नृत्य घूमर है. वहीं राजस्थानी महिला प्रदेश की पारंपरिक लिबास में ऊंट पर बैठी दर्शायी गई. राजस्थान को खूबसूरत हस्तशिल्प का हब भी कहा गया है. हस्तशिल्प कला में राजस्थान की महिलाओं की भागीदारी अहम मानी गई है. महिलाओं द्वारा बनाये गए झांकी में उत्पादों की सुंदर तस्वीर दिखाई गई. विकसित भारत में राजस्थान की झांकी ने &amp;#8220;पधारो म्हारे देश&amp;#8221; का संदेश दिया.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Republic Day 2024: स्वतंत्रता सेनानी का निधन, राजकीय सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/top-news/republic-day-2024-freedom-fighter-passes-away-cremated-with-state-honors/</link><pubDate>January 25, 2024, 9:00 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/01/download-8-2-300x264.png</image><category>टॉप न्यूज़</category><excerpt>जयपुर। पूरे देश में गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी चल रही है और ऐसे में उदयपुर से एक दुखद ख़बर सामने आई है। बता दें कि उदयपुर में गणतंत्र दिवस से ठीक दो दिन पहले 24 जनवरी को स्वतंत्रता सेनानी मनोहर लाल का निधन हो गया है. उनकी उम्र 99 साल थी। औदिच्...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; पूरे देश में गणतंत्र दिवस मनाने की तैयारी चल रही है और ऐसे में उदयपुर से एक दुखद ख़बर सामने आई है। बता दें कि उदयपुर में गणतंत्र दिवस से ठीक दो दिन पहले 24 जनवरी को स्वतंत्रता सेनानी मनोहर लाल का निधन हो गया है. उनकी उम्र 99 साल थी। औदिच्य का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. उन्हें जिला कलक्टर अरविंद पोसवाल, पुलिस अधीक्षक डॉ भुवन भूषण यादव समेत अन्य ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी, बता दें कि आजादी की लड़ाई में मनोहरलाल औदिच्य नेतृत्वकर्ता थे।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आइए जानते है स्वतंत्रता सेनानी की जीवनी&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;स्वतंत्रता सेनानी औदिच्य के पिता का नाम गणपत लाल और माता का नाम जशोदा देवी था। इनके तीन पुत्र हैं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा उदयपुर में हुई, उसके बाद वे वर्ष 1946 में आगरा विश्वविद्यालय से कला स्नातक (बी.ए.) और राजपूताना विश्वविद्यालय से 1948 में एल.एल.बी. की. भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन से औदिच्य अपने छात्र जीवन से ही जुड़ गए थे. उन्होंने आजादी के बाद राजस्थान सरकार के सार्वजनिक निर्माण विभाग में कई सालों तक अपनी सेवाएं भी दी. विभाग के कार्यालय अधीक्षक के पद से 1980 में सेवानिवृत्त हुए. सेवानिवृत्ति के बाद भी हर तरह से वे विभाग एवं समाज को सेवा देते रहे.&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;भारत छोड़ो आंदोलन में रहा योगदान&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;मनोहर लाल ने अंग्रेजों के विरुद्ध वर्ष 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में विद्यार्थियों का नेतृत्व किया. उस दौरान 22 अगस्त 1942 को डिफेन्स ऑफ इंडिया रूल धारा 26 के तौर पर उन्हें अनिश्चित काल के लिए कारागर में बन्दी बना लिया गया था. इस घटना के बाद पूरे मेवाड़ में आंदोलन ने हलचल मचा दिया था. बता दें कि उस दौर में भी विद्यार्थियों को बंदी बनाए जाने से हर तरफ आक्रोश का माहौल था। इस कारण जगह-जगह पर लोगों का प्रदर्शन बढ़ने लगा। बढ़ते विरोध को देखते हुए 2 सितम्बर 1942 को सरकार को बिना शर्त के उन्हें जेल से रिहा करना पड़ा. उसके बाद भी स्वाधीनता आन्दोलन में औदिच्य सक्रिय रहे. राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150 वीं जयन्ती समारोह व अनेक अन्य मौके पर औदिच्य को स्मृति चिह्न, ताम्रपत्र, शॉल आदि भेंट कर सम्मानित भी किया गया है.&lt;/p&gt;
</content></item><item><title>Republic Day 2024: देश के लिए हुए शहीद, घरवाले नहीं देख पाए चेहरा</title><link>https://rajasthan.inkhabar.com/states/republic-day-2024-martyred-for-the-country-family-members-could-not-see-his-face/</link><pubDate>January 25, 2024, 6:11 am</pubDate><image>wp-content/uploads/2024/01/download-4-2-300x162.png</image><category>राज्य</category><excerpt>जयपुर। देश का रक्षा करते हुए हर वर्ष भारतीय सैनिक सैकड़ो की संख्या में अपना बलिदान देते आ रहे है। ऐसे में बता दें कि राजस्थान की माटी में जन्मे जयपुर से अमित भारद्वाज भी अपना जीवन देश के नाम कर गए। सबसे दुखद बात यह हुई कि अमित के मरणोपरांत भी उन...</excerpt><content>
&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;&lt;strong&gt;जयपुर।&lt;/strong&gt; देश का रक्षा करते हुए हर वर्ष भारतीय सैनिक सैकड़ो की संख्या में अपना बलिदान देते आ रहे है। ऐसे में बता दें कि राजस्थान की माटी में जन्मे जयपुर से अमित भारद्वाज भी अपना जीवन देश के नाम कर गए। सबसे दुखद बात यह हुई कि अमित के मरणोपरांत भी उनका चेहरा उनकी फैमिली नहीं देख सकी।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आइए जानते हैं पूरा मामला &amp;#8211;&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;कारगिल के युद्ध में लेफ्टिनेंट ‘अमित भारद्वाज‘ को गोलियां लगी। गोली लगने के बाद भी वे पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीठ दिखाने के बजाए उनसे जमकर बदला लिया। बता दें कि लेफ्टिनेंट ‘अमित भारद्वाज‘ अपनी युवा उम्र महज 27 वर्ष की आयु में शहीद हो गए। बलिदान होने का कारण बताया गया है कि उन्हें कारगिल की युद्ध के दौरान गोली लग गई। ऐसे में ये जांबाज भारत माता का सपूत दुश्मनों से लौहा लेते हुए शहीद हो गया और पूरे देश को गौरवान्वित कर गया।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;साठ दिनों तक शव पहाड़ों पर पड़ा रहा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;कारगिल सेक्टर में बजरंग चौकी के निकट लेफ्टिनेंट अमित शहीद हुए थे और वह क्षेत्र उस दौरान पाकिस्तानी घुसपेटियों के कब्ज में था और ऐसे में साठ दिनों तक लेफ्टिनेंट अमित का शव पहाड़ों पर पड़ा रहा। ऐसे में यह ख़बर पूरे देश भर के लिए बेहद ही दर्दनाक रहा।&lt;/p&gt;



&lt;h2 class=&quot;wp-block-heading&quot;&gt;&lt;strong&gt;आखिरी बार भी घरवाले नहीं देख पाए चेहरा&lt;/strong&gt;&lt;/h2&gt;



&lt;p class=&quot;wp-block-paragraph&quot;&gt;शहीद अमित के मां-बाप और परिवार के अन्य सदस्य को अपने लाड़ले ‘अन्नू‘ का आखिरी बार चेहरा तक नसीब नहीं हो पाया। बता दें कि 60 दिनों तक पहाड़ पर पड़े शव का चमड़ी तक गल चुका था। ऐसे में जब उनके शवों को उनके घर लाया गया तो ताबूत खोले बिना ही सभी धार्मिक क्रियाएं निपटाई गई थी। बता दें कि उनकी चिता पर भी भारत माता का इस सपूत का शव ताबूत के साथ ही रखा गया और नम्र आँखों से इस वीर सपूत की अंतिम विदाई दी गई। यहीं नहीं अमित को फोटोग्राफी का भी बहुत शौक था। अपने खींचे फोटो के 15 एलबम उनके पास मौजूद थे।&lt;/p&gt;
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