जयपुर। अगर अमावस्या शनिवार को पड़ जाती है तो यह और भी फलदाई हो जाता है। शनिवार को पड़ने की वजह से इसे शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। शनि अमावस्या पर कई उपायों को अपनाकर शनि की कृपा आसानी से पाई जा सकती है। खासतौर से रोजगार और नौकरी की समस्याएं आसानी […]
जयपुर। अगर अमावस्या शनिवार को पड़ जाती है तो यह और भी फलदाई हो जाता है। शनिवार को पड़ने की वजह से इसे शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। शनि अमावस्या पर कई उपायों को अपनाकर शनि की कृपा आसानी से पाई जा सकती है। खासतौर से रोजगार और नौकरी की समस्याएं आसानी से दूर हो सकती हैं।
शनि देव की पूजा प्रदोष काल या रात्रि में की जाती है। इस दिन सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। इसके लिए आप व्रत भी रख सकते है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद शनि चालीसा या शनि मंत्र का जाप करें। शनिदेव से कृपा पाने की प्रार्थना करें। इस दिन किसी गरीब को खाने पीने की चीजों का दान करने से पुण्य मिलता है।
एक काला धागा ले और उसे पीपल वृक्ष की डाल में बांध दें। इस धागे में तीन गांठ लगाएं। एक कटोरी में सरसों का तेल डाल लें। उसमें बाएं हाथ की मध्यमा उंगली डालकर शनि मंत्र का जाप करें। मंत्र होगा – “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”. सरसों के तेल को पीपल के वृक्ष के नीचे रख दें। ऐसा करने से भविष्य में तरक्की मिल्गी।
शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती के असर को कम करने के लिए शनि अमावस्या का दिन सबसे बढ़िया है। शनि अमावस्या के दिन शनिदेव और महादेव की पूजा अर्चना और दान करने से घर मे साढ़ेसाती खत्म हो जाती है। इस दिन पूजा करने से राशि के दोष भी दूर हो जाते हैं।
इस दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने से पितर प्रसन्न होते हैं। साथ ही पितृदोष से भी मुक्ति भी मिलती है। एक लोहे का छल्ला लेकर आएं। उसे शनिवार की सुबह सरसों के तेल में डुबाकर रख दें। शाम को शनिदेव के मंत्रों का जाप करें। उनकी विधिपूर्वक आरती करें। इसके बाद लोहे के छल्ले को बाएं हाथ की मध्यमा उंगुली में धारण कर लें।