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नवरात्र के चौथे दिन होती है मां कुष्मांडा की पूजा, जानें इनका स्वरूप और पौराणिक कथा

जयपुर। नवरात्रि के चौथा दिन मां कुष्मांडा का दिन होता है। इस दिन मां कुष्मांडा विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त उन्हें भोग में मिठाई, फल का भोग लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। जिंदगी में आने […]

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Form of Mother Kushmanda
  • April 2, 2025 5:49 am IST, Updated 1 day ago

जयपुर। नवरात्रि के चौथा दिन मां कुष्मांडा का दिन होता है। इस दिन मां कुष्मांडा विधि-विधान से पूजा की जाती है। भक्त उन्हें भोग में मिठाई, फल का भोग लगाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है। जिंदगी में आने वाली सभी तरह की रुकावटें दूर होती हैं।

मां कुष्मांडा की पूजा का महत्व

देवी पुराण के मुताबिक विद्यार्थियों को नवरात्रि में मां कुष्मांडा की पूजा जरूर करनी चाहिए। मां की पूजा करने से बुद्धि का विकास होता है। मां कुष्मांडा आठ भुजाओं वाली दिव्य शक्ति हैं, उन्हें परमेश्वरी का रूप माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मां कुष्मांडा की पूजा करने से बिगड़ते काम बन जाते हैं। मां कुष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। देवी पुराण में बताया गया है कि मां कुष्मांडा सभी पापों का हर लेती है।

मां कुष्मांडा की पौराणिक कथा

देवी कुष्मांडा, दुर्गा मां का चौथा रूप हैं। देवी भागवत पुराण में उनकी महिमा का वर्णन है। माना जाता है कि उन्होंने अपनी हल्की मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया था। इसलिए उन्हें कुष्मांडा देवी कहा जाता है। सृष्टि के निर्माण के आरंभ में अंधकार था, जिसे मां ने अपनी हंसी से दूर किया। उनमें सूर्य की गर्मी सहने की शक्ति है। इसलिए, उनकी पूजा करने से भक्तों को शक्ति और ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

मां कुष्मांडा का स्वरुप

मां कुष्मांडा का स्वरूप बहुत ही दिव्य है। उनकी सवारी शेर है। वह शेर पर सवार करती हैं। उनकी आठ भुजाएं हैं जिनमें कई अस्त्र होते हैं। इन भुजाओं में उन्होंने कलश, कमंडल, कमल और सुदर्शन चक्र पकड़ा होता है। मां कुष्मांडा हमें जीवन जीने की शक्ति देती हैं। मां का यह रूप हमें सकारात्मक शक्ति देता है। मां कुष्मांडा का रूप बहुत ही दिव्य है। यह शक्ति और प्रेरणा का प्रतीक है।


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