जयपुर। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी। नवरात्र पर देवी दुर्गा का नौ स्वरूपों की विधि- विधान से पूजा की जाती है। इस बार नवरात्र की शुरुआत 30 मार्च, रविवार से होगी। नवरात्र में देवियों को पूजा जाता है। नवरात्र के आखिरी दिन यानी नौवे दिन कन्या […]
जयपुर। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होगी। नवरात्र पर देवी दुर्गा का नौ स्वरूपों की विधि- विधान से पूजा की जाती है। इस बार नवरात्र की शुरुआत 30 मार्च, रविवार से होगी। नवरात्र में देवियों को पूजा जाता है। नवरात्र के आखिरी दिन यानी नौवे दिन कन्या पूजन किया जाता है। आइए जानते हैं कि इन 9 दिनों में देवी के 9 स्वरूपों को किस चीज का भोग लगाना चाहिए।
नवरात्र के पहला दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री को समर्पित होता है। इस दिन मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग लगाना चाहिए। इससे आरोग्य लाभ मिलता है।
नवरात्र का दूसरा दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी का दिन होता है। इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से चिरायु का वरदान मिलता है।
नवरात्र का तीसरा दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है। इस दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। मां चंद्रघंटा को दूध का भोग लगाना चाहिए। साथ ही किसी गरीब या जरूरतमंद को दान कर देना चाहिए। ऐसा करने से धन-वैभव और ऐश्वर्य हासिल होता है।
नवरात्र के चौथा दिन कुष्मांडा को समर्पित होता है। यह मां दुर्गा का चौथा स्वरूप होती हैं। इस दिन मां कुष्मांडा को मालपुआ का नैवेध अर्पण करना चाहिए। मां को भोग लगाने के बाद उसे जरूरतमंद को दान कर देना चाहिए। ऐसा करने से मनोबल बढ़ता है।
नवरात्र के पांचवा दिन मां दुर्गा के पंचम स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। इस दिन मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से बुद्धि का विकास होता है और भविष्य में ग्रोथ मिलती है।
नवरात्र का छठवां दिन मां दुर्गा के षष्टम स्वरूप मां कात्यानी का होता है। इस दिन मां कात्यानी की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। इस दिन मां कात्यानी को शहद का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से सौंदर्य की प्राप्ति होती है। साथ ही घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि को पूजा जाता है। इस दिन मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से निर्मित भोग को नैवेध अर्पण करना चाहिए। ऐसा करने से रोग-शोक से मुक्ति मिलती है और परिवार भी स्वस्थ्य रहता है।
नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी का होता है। इस दिन देवी महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। मां महागौरी को नारियल का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से मनुष्य की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और माता का आशीर्वाद बना रहता है।
नवरात्र के नौवा दिन सिद्धिदात्री मां को समर्पित होता है। इस दिन सिद्धिदात्री मां को पूजा जाता है। यह नवरात्र का आखिरी दिन होता है इसलिए कन्या पूजन किया जाता है। कन्या में बनने वाली सभी चीजों का भोग पहले सिद्धिदात्री मां को लगाया जाता है।