जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजधानी जयपुर में कोचिंग संचालको के साथ बैठक की. उन्होने कहा कि कुछ ऐसे कदम उठाए जाएं जिससे सुसाइड करने की नौबत ही न आए. आईआईटी कर चुके लोग आजकल पॉलिटिकल पार्टियों के लिए करते हैं चुनावी सर्वे करते हैं CM गहलोत ने ली बैठक आपको बता दें कि छात्र-छात्राओं […]
जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजधानी जयपुर में कोचिंग संचालको के साथ बैठक की. उन्होने कहा कि कुछ ऐसे कदम उठाए जाएं जिससे सुसाइड करने की नौबत ही न आए. आईआईटी कर चुके लोग आजकल पॉलिटिकल पार्टियों के लिए करते हैं चुनावी सर्वे करते हैं
आपको बता दें कि छात्र-छात्राओं द्वारा बढ़ते आत्महत्या को लेकर शुक्रवार शाम को अपने आवास पर कोचिंग संचालको के साथ बैठक की. यह बैठक 2 घंटे से भी अधिक चली. इस बैठक में कोंचिंग संचालको के साथ यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल, शिक्षा राज्यमंत्री नसीम अख्तर इंसाफ, शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला और मुख्य सचिव उषा शर्मा शामिल रहीं।
बैठक मे मुख्यमंत्री ने कहा कि कि बच्चों के सुसाइड का मामला अकेले राजस्थान का ही विषय नहीं है बल्कि कई राज्य है, जहां पर यह लगातार बढ़ रहे हैं और यह सभी की चिंता का विषय है। एनसीआरबी के डेटा के मुताबिक देश भर में 13000 से ज्यादा छात्र छात्राओं ने आत्महत्या की है जिनमें महाराष्ट्र में 1034, कर्नाटक में 855 और उड़ीसा में 834 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की है अगर एक भी बच्चा चला जाए तो यह सभी के लिए दुख की बात है।
मुख्यमंत्री गहलोत ने छात्र-छात्राओं द्वारा सुसाइड को रोकने के लिए एक कमेटी गठन करने का निर्देश दिया। उन्होनें कहा कि इस कमेटी में कोचिंग संचालकों, अभिभावकों और बच्चों के मां-बाप सुझाव लिया जाएं साथ ही दुनिया भर में कहीं भी सुसाइड मामले रोकने के लिए नवाचार चल रहे हो तो उन्हें अपनाया जाए और 15 दिन के भीतर यह रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाए।
मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि आईआईटी कर चुके लोगों का भी ट्रेंड बदल चुका है यह लोग अब मूल काम करने के बजाए राजनीतिक दलों के लिए सर्वे करते है, पॉलिटिकल पार्टियों के लिए अलग-अलग तरीके से कैंपेन करते हैं।
कोचिंग संचालको को सीएम गहलोत ने कहा कि 15 वर्ष की उम्र में माता-पिता बच्चों को कोचिंग के लिए भेज देते हैं वह मां-बाप से दूर रहते हैं इसलिए कोचिंग संचालकों का फर्ज है कि उन्हें घर जैसा माहौल उपलब्ध करवाया जाए उन्हें लगना चाहिए कि उनके घर के लोग उनके साथ हैं और पढ़ाई के साथ -साथ खेलकूद और अन्य एक्टीविटीज में रखना चाहिए जिससे कि उनका शारीरिक विकास भी हो। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि एक भी बच्चा सुसाइड नहीं करें ऐसी नौबत नहीं आनी चाहिए, पर हम सभी को एक साथ मिलकर बच्चों साथ खड़ा होना होगा।