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Rajasthan News: ओम आकृति मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा आज, CM भजनलाल होंगे शामिल

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज पाली जिले के दौरे पर रहेंगे। आज यानी 19 फरवरी को पाली में ॐ आकार के शिव मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम है। आज विश्व के पहले ओम आकृति मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा होने जा रही है। ऐसे में राजस्थान के मुखिया बनने के बाद भजनलाल शर्मा पहली बार […]

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Consecration of Om Aakriti Temple today
  • February 19, 2024 4:01 am IST, Updated 1 year ago

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज पाली जिले के दौरे पर रहेंगे। आज यानी 19 फरवरी को पाली में ॐ आकार के शिव मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम है। आज विश्व के पहले ओम आकृति मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा होने जा रही है। ऐसे में राजस्थान के मुखिया बनने के बाद भजनलाल शर्मा पहली बार आज पाली के दौरे पर रहेंगे। तो आइए जानते है CM भजनलाल शर्मा का पूरा शेड्यूल।

11.15 बजे जयपुर से करेंगे प्रस्थान

सोमवार को प्रातः 11.15 बजे CM भजनलाल शर्मा हेलीकॉप्टर से निकलेंगे। वे जाडन स्थित ओम आश्रम 12.30 बजे पहुचेंगे। यहां पर विश्व के पहले ॐ आकार शिव मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम होने जा रहा है। CM शर्मा इस भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मौजूद होंगे। इसके बाद वे दोपहर 1.45 बजे जिला स्तरीय अधिकारियों की मीटिंग लेंगे। स्थानीय कार्यक्रम में वे दोपहर 2.45 बजे शामिल होंगे। वे जयपुर के लिए शाम 4.15 बजे रवाना हो जाएंगे।

जानिए मंदिर से जुड़ी हुई ख़बर

दुनिया का पहला ओम की आकृति वाला शिव मंदिर राजस्थान के पाली जिले में बनकर तैयार है। साल 1995 से पाली के जाडन में पहले ॐ आकार के योग मंदिर बनाने की शुरुआत हुई थी। 10 फरवरी 2024 में यानी पूरे 28 साल बाद यह मंदिर बनकर तैयार हुआ। आज यानी 19 फरवरी को इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम, पूजा-अर्चना एवं विशेष आकर्षण शामिल होने जा रहा है। हालांकि मंदिर के उद्घाटन को लेकर मंदिर प्रशासन ने अपनी तैयारियां कर ली है।

250 एकड़ में बनाया गया मंदिर

बता दें कि ॐ आकार का 4 मंजिला शिव मंदिर करीब 250 एकड़ में निर्माण किया गया है। इस मंदिर में कुल पिलर्स की संख्या 108 है। वहीं शिव नाम की प्रतिमाएं 1008 बनाए गए है। इसके साथ मंदिर में 108 कक्ष बनाए गए है। इसके साथ ही यहां 7 ऋषियों की भी समाधि स्थापित है। मंदिर का शिखर 135 फीट ऊंचा है, सबसे ऊपर वाले हिस्से में शिवलिंग स्थापित किया गया है और सबसे ऊपर वाले हिस्से में ब्रह्मांड की आकृति उकेरी गई है। श्री अलखपुरी सिद्धपीठ परंपरा के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महेश्वरानंद महाराज ने इस मंदिर के निर्माण का सपना देखा था। धौलपुर के बंसी पहाड़पुर के लाल पत्थर मंदिर को बनाने में इस्तेमाल किया गया है।


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