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ट्रंप के टैरिफ फैसले से पूरी दुनिया में आया भूचाल, कंपनियों के शेयर में सबसे बड़ी गिरावट

जयपुर। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ वाली नीति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में भूचाल ला दिया है। इस नीति के तहत विदेशी आयात पर भारी-भरकम टैक्स लगाया गया है, जिसकी वजह से अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। गुरुवार को वॉल स्ट्रीट पर एक ही दिन में एसएंडपी 500 कंपनियों के शेयरों से भारी […]

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Trump's tariff decision
  • April 4, 2025 6:20 am IST, Updated 20 hours ago

जयपुर। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ वाली नीति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में भूचाल ला दिया है। इस नीति के तहत विदेशी आयात पर भारी-भरकम टैक्स लगाया गया है, जिसकी वजह से अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट आई। गुरुवार को वॉल स्ट्रीट पर एक ही दिन में एसएंडपी 500 कंपनियों के शेयरों से भारी गिरावट दर्ज की गई।

शेयरों में आई भारी गिरावट

कंपनियों के शेयरों में 2.4 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति साफ हो गई। मार्च 2020 के बाद यह सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट रही। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बल्कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था में भारी मंदी ला सकती है। ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में एक समारोह में नई टैरिफ नीति का ऐलान किया। इस नीति के तहत सभी आयात पर 10% का आधारभूत टैरिफ लगाया गया है, वहीं कुछ देशों पर इससे कहीं अधिक टैक्स थोपा गया।

इन देशों पर लगा इतना टैक्स

उदाहरण के लिए, चीन से आयात पर 34%, वियतनाम पर 46%, यूरोपीय संघ पर 20%, भारत से आयात पर 27% और जापान पर 24% टैरिफ लगाया गया है। ट्रंप का कहना है कि यह कदम अमेरिका में विनिर्माण को बढ़ावा देगा। साथ ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उद्योगों को मजबूत करेगा। हालांकि, निवेशकों और अर्थशास्त्रियों ने इसे एक जोखिम भरा फैसला बताया है। घोषणा के बाद गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार में हलचल मच गई। नैस्डैक कम्पोजिट इंडेक्स में 5.97% की गिरावट आई। इसी के साथ यह 2020 के बाद सबसे बड़ी दैनिक गिरावट दर्ज की गई।

कंपनियों को हो सकता है घाटा

डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज और एसएंडपी 500 भी जून 2020 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचा। इस गिरावट ने बाजार से लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की संपत्ति को मिटा दिया, जिससे निवेशकों में डर का माहौल है। रिटेल, बैंकिंग,एविएशन, वस्त्रऔर टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर टैरिफ की वजह से वस्तुओं और सेवाओं के दाम बढ़ते रहे तो उपभोक्ता खर्च में कटौती कर सकते हैं, जिससे कंपनियों को भारी घाटा हो सकता है।


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